आयातित बनाम देसी मशीनरी: सब्सिडी से पहले क्या जांचें
MSME सब्सिडी में आयातित और देसी मशीनरी: लैंडेड कॉस्ट, कस्टम ड्यूटी, EPCG, सेकंड-हैंड आयात और जरूरी दस्तावेज, ₹50 लाख के उदाहरण के साथ।

इस लेख में
आयातित मशीनरी आमतौर पर देसी मशीनरी की तरह ही MSME कैपिटल सब्सिडी में गिनी जा सकती है, लेकिन सवाल अलग होते हैं: लैंडेड कॉस्ट का कौन सा हिस्सा गिना जाएगा, कस्टम ड्यूटी शामिल है या नहीं, EPCG के तहत जीरो ड्यूटी आयात को कैसे देखा जाएगा, और क्या सेकंड-हैंड आयात की अनुमति है। देसी खरीद GST इनवॉइस और बैंक भुगतान से आसानी से साबित होती है, जबकि आयात में रेमिटेंस से बिल ऑफ एंट्री तक लंबा कागजी रिकॉर्ड चाहिए। नियम योजना और राज्य के हिसाब से अलग हैं; नीचे के उदाहरण सिर्फ समझाने के लिए हैं और नवंबर 2026 तक के हैं।
ऑर्डर देने से पहले सब्सिडी मंजूरी से पहले मशीनरी खरीदना भी पढ़ें, क्योंकि आयात में लंबे समय की वजह से खरीदार अक्सर जल्दी एडवांस दे देते हैं।
दोनों की लागत कैसे बनती है
| लागत का हिस्सा | देसी मशीन | आयातित मशीन |
|---|---|---|
| मूल कीमत | सप्लायर इनवॉइस (एक्स-वर्क्स या डिलीवर्ड) | विदेशी मुद्रा का इनवॉइस, कस्टम एक्सचेंज रेट पर बदला हुआ |
| भाड़ा और बीमा | लोकल भाड़ा, अक्सर इनवॉइस में | समुद्री या हवाई भाड़ा और बीमा, अक्सर अलग बिल |
| ड्यूटी | नहीं | टैरिफ हेडिंग के हिसाब से बेसिक कस्टम ड्यूटी और अन्य ड्यूटी |
| GST | इनवॉइस पर GST, आमतौर पर क्रेडिट मिलता है | आयात पर IGST, GST रजिस्टर्ड यूनिट को आमतौर पर क्रेडिट मिलता है |
| क्लियरिंग और पोर्ट चार्ज | नहीं | कस्टम ब्रोकर, पोर्ट और हैंडलिंग चार्ज |
| इंस्टॉलेशन | अक्सर सप्लायर करता है | कभी विदेशी टेक्नीशियन, अलग बिल |
सब्सिडी योजना इन सबको, कुछ को, या सिर्फ मशीन की कीमत को गिन सकती है। यही एक परिभाषा आपकी सब्सिडी कई लाख रुपये बदल सकती है।
उदाहरण: ₹50 लाख की मशीन, आयातित बनाम देसी
मान लें एक उदाहरण वाली योजना पात्र प्लांट और मशीनरी पर 10% कैपिटल सब्सिडी देती है। नीचे ड्यूटी और चार्ज सिर्फ उदाहरण हैं; असली कस्टम ड्यूटी टैरिफ हेडिंग पर निर्भर है।
| आयातित मशीन | देसी विकल्प | |
|---|---|---|
| मशीन की कीमत | ₹50,00,000 | ₹54,00,000 (डिलीवर्ड) |
| भाड़ा, बीमा, क्लियरिंग | ₹1,50,000 | शामिल |
| कस्टम ड्यूटी (उदाहरण) | ₹4,00,000 | शून्य |
| इंस्टॉलेशन | ₹1,00,000 | शामिल |
| लैंडेड या डिलीवर्ड लागत (GST/IGST से पहले) | ₹56,50,000 | ₹54,00,000 |
| अगर योजना लैंडेड कॉस्ट गिने तो सब्सिडी | ₹5,65,000 | ₹5,40,000 |
| अगर योजना सिर्फ मशीन की कीमत गिने तो सब्सिडी | ₹5,00,000 | ₹5,40,000 |
पहली परिभाषा में आयातित मशीन पर ₹25,000 ज्यादा सब्सिडी मिलती है; दूसरी में ₹40,000 कम, जबकि उसे लाने में ₹2.5 लाख ज्यादा लगते हैं। आयात पर IGST और देसी इनवॉइस पर GST यहां नहीं जोड़े गए, क्योंकि GST रजिस्टर्ड यूनिट आमतौर पर इन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में ले सकती है, और कई योजनाएं क्रेडिट मिलने वाले टैक्स को बाहर रखती हैं।
आयात में समय का जोखिम भी है: अगर ऑर्डर और भुगतान के बीच रुपया कमजोर हो जाए, तो रुपये में लागत बढ़ जाती है, और कुछ योजनाएं सिर्फ असल में चुकाई गई रकम गिनती हैं। अगर खरीद टर्म लोन से है, तो ईएमआई कैलकुलेटर में ईएमआई ज्यादा लैंडेड कॉस्ट पर निकालें, विदेशी कोटेशन की कीमत पर नहीं।
EPCG वाला सवाल
एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) योजना में कैपिटल गुड्स जीरो कस्टम ड्यूटी पर आयात कर सकते हैं, शर्त यह है कि बचाई गई ड्यूटी, टैक्स और सेस का छह गुना निर्यात ऑथराइजेशन से छह साल में करना होगा (जैसा सरकार के myScheme पोर्टल और DGFT नोटिफिकेशन में बताया गया है)। यह पूरा न हो तो बचाई गई ड्यूटी ब्याज समेत चुकानी होती है।
सब्सिडी क्लेम के लिए दो सवाल:
- क्या सब्सिडी योजना उन एसेट को मानती है जिन पर दूसरी रियायत मिली हो? कुछ योजनाएं एक ही एसेट पर "दोहरे फायदे" पर रोक लगाती हैं।
- क्या जो ड्यूटी आपने चुकाई ही नहीं, उस पर सब्सिडी गिनी जाएगी? आमतौर पर नहीं। EPCG में पात्र लागत ड्यूटी के बिना वाली कीमत होने की संभावना है।
अगर बाद में EPCG शर्त पूरी न हो और ड्यूटी चुकानी पड़े, तो पूछें कि क्या क्लेम संशोधित हो सकता है। दोनों जवाब लिखित में लें।
सेकंड-हैंड आयातित मशीनरी
योजनाएं पुराने उपकरणों पर सख्त होती हैं। कई राज्य और केंद्रीय योजनाएं सेकंड-हैंड मशीनरी, खासकर देसी सेकंड-हैंड मशीनरी, को बाहर रखती हैं। कुछ योजनाएं पुरानी आयातित मशीनरी को तब स्वीकार करती हैं जब चार्टर्ड इंजीनियर का सर्टिफिकेट उसकी बची हुई उम्र और कीमत दिखाए। सेकंड-हैंड कैपिटल गुड्स का आयात विदेश व्यापार नीति के अधीन भी है; अपने आइटम के लिए DGFT की आयात नीति देखें। बैंक पुरानी मशीनों का वैल्यूएशन कैसे करते हैं, यह पुरानी मशीनरी पर बिजनेस लोन में देखें।
दस्तावेजों की चेकलिस्ट
आयातित मशीन के लिए
- सप्लायर का कोटेशन या प्रोफॉर्मा इनवॉइस, और परचेज ऑर्डर
- कमर्शियल इनवॉइस और पैकिंग लिस्ट
- बिल ऑफ लैडिंग या एयरवे बिल
- बिल ऑफ एंट्री, कस्टम ड्यूटी भुगतान चालान के साथ
- सप्लायर को हर भुगतान की बैंक आउटवर्ड रेमिटेंस एडवाइस या SWIFT कॉपी
- कस्टम ब्रोकर और भाड़े के इनवॉइस
- मशीन सीरियल नंबर के साथ इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग रिपोर्ट
- अगर योजना मांगे तो चार्टर्ड इंजीनियर का सर्टिफिकेट (पुरानी मशीन पर हमेशा)
- अगर इस्तेमाल किया हो तो EPCG ऑथराइजेशन
देसी मशीन के लिए
- यूनिट के नाम पर कोटेशन, परचेज ऑर्डर और GST टैक्स इनवॉइस
- ई-वे बिल और डिलीवरी चालान
- हर किस्त का बैंक भुगतान सबूत
- सीरियल नंबर के साथ इंस्टॉलेशन रिपोर्ट
ध्यान रखें कि बिल ऑफ एंट्री पर इंपोर्टर का नाम आवेदक यूनिट का हो, किसी ट्रेडिंग एजेंट, रिश्तेदार की फर्म या मालिक के दूसरे बिजनेस का नहीं।
ऑर्डर देने से पहले क्या पूछें
- क्या पात्र निवेश में आयातित मशीनरी शामिल है? क्या कोई सीमा या अलग नियम है?
- वैल्यू इनवॉइस कीमत, CIF वैल्यू या लैंडेड कॉस्ट पर होगी? क्या कस्टम ड्यूटी, भाड़ा, क्लियरिंग और इंस्टॉलेशन शामिल हैं?
- एक्सचेंज रेट बिल ऑफ एंट्री से लिया जाएगा या भुगतान की तारीख से?
- अगर EPCG में आयात करूं, तो क्या सब्सिडी फिर भी मिलेगी, और किस वैल्यू पर?
- क्या पुरानी आयातित मशीन चलेगी, और कौन सा सर्टिफिकेट चाहिए?
- क्या बैंक टर्म लोन में कस्टम ड्यूटी और भाड़ा भी फाइनेंस करेगा?
आम गलतियां
- विदेशी मुद्रा वाले कोटेशन की तुलना डिलीवर्ड देसी कीमत से करना, ड्यूटी, भाड़ा और क्लियरिंग जोड़े बिना।
- एजेंट को अपने नाम पर आयात करने देना और फिर उससे बिल लेना; योजना इसे देसी रीसेल मान सकती है।
- विदेशी सप्लायर को बैंक की जगह अनौपचारिक रास्तों से भुगतान करना; हर भुगतान का रेमिटेंस रिकॉर्ड होना चाहिए।
- आयात पर IGST का इनपुट क्रेडिट ले चुकने के बाद उसे क्लेम में भी गिनना।
- योजना की बाहर वाली सूची देखे बिना पुरानी आयातित मशीन मंगवाना।
अगर क्लेम कटे या खारिज हो
- मंजूरी देने वाले कार्यालय से कारण और लागू धारा लिखित में मांगें।
- छूटे हुए आयात दस्तावेज तुरंत जमा करें; कई बार नाम या सीरियल नंबर न मिलने से क्लेम खारिज होते हैं।
- DIC जनरल मैनेजर, फिर राज्य उद्योग या MSME कमिश्नरेट तक जाएं; केंद्रीय योजनाओं के लिए pgportal.gov.in पर CPGRAMS इस्तेमाल करें।
- अगर बैंक रेमिटेंस एडवाइस या लोन सर्टिफिकेट देने में देर करे, तो बैंक के ग्रीवांस ऑफिसर से और 30 दिन बाद cms.rbi.org.in पर आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन से शिकायत करें।
मुख्य बातें
- आयातित मशीनरी अक्सर पात्र होती है, लेकिन योजना का वैल्यूएशन नियम (मशीन की कीमत बनाम लैंडेड कॉस्ट) सब्सिडी किसी भी दिशा में बदल सकता है।
- ₹50 लाख के उदाहरण में सिर्फ इसी नियम से आयातित मशीन पर ₹25,000 ज्यादा या ₹40,000 कम सब्सिडी बनी।
- EPCG में छह गुना, छह साल की निर्यात शर्त पर जीरो ड्यूटी आयात होता है; देखें कि आपकी सब्सिडी एक ही एसेट पर दूसरी रियायत की अनुमति देती है या नहीं।
- सेकंड-हैंड आयात अक्सर बाहर होते हैं या उन्हें रेसिड्यूअल-लाइफ सर्टिफिकेट चाहिए।
- पूरा आयात रिकॉर्ड रखें: बिल ऑफ एंट्री, रेमिटेंस एडवाइस, ड्यूटी चालान और इंस्टॉलेशन रिपोर्ट, सब यूनिट के नाम पर।
संबंधित गाइड
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या आयातित मशीनरी MSME कैपिटल सब्सिडी के लिए पात्र है?
अक्सर हां, अगर वह नई हो, यूनिट की अपनी हो और योजना अवधि में लगी हो, लेकिन कुछ योजनाएं इस पर सीमा लगाती हैं, अलग तरह से वैल्यू करती हैं या सेकंड-हैंड आयात को अलग देखती हैं। ऑर्डर देने से पहले योजना दिशानिर्देशों में पात्र निवेश की परिभाषा देखें।
क्या सब्सिडी के हिसाब में कस्टम ड्यूटी शामिल होती है?
यह योजना पर निर्भर है। कुछ योजनाएं ड्यूटी, भाड़ा और इंस्टॉलेशन समेत लैंडेड कॉस्ट गिनती हैं, जबकि कुछ सिर्फ मशीन की इनवॉइस वैल्यू। जो टैक्स GST इनपुट क्रेडिट में वापस मिल जाते हैं, जैसे आयात पर IGST, वे आमतौर पर बाहर रहते हैं। योजना कार्यालय से लिखित में पूछें।
क्या एक ही मशीन पर EPCG और राज्य की कैपिटल सब्सिडी दोनों ले सकते हैं?
दोनों के नियम जांचें। EPCG में कैपिटल गुड्स का जीरो ड्यूटी पर आयात होता है, बदले में बचाई गई ड्यूटी, टैक्स और सेस का छह गुना निर्यात छह साल में करना होता है। कुछ सब्सिडी योजनाएं उन एसेट पर फायदा सीमित करती हैं जिन पर पहले से कोई सरकारी रियायत मिली हो।
क्या सेकंड-हैंड आयातित मशीनरी पर सब्सिडी मिलती है?
कई योजनाएं सेकंड-हैंड मशीनरी, कम से कम देसी सेकंड-हैंड मशीनरी, को बाहर रखती हैं। कुछ योजनाएं चार्टर्ड इंजीनियर के रेसिड्यूअल-लाइफ सर्टिफिकेट के साथ पुरानी आयातित मशीनरी स्वीकार करती हैं। खरीदने से पहले बाहर वाली सूची पढ़ें और लिखित पुष्टि लें।
आयातित मशीनरी की लागत साबित करने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?
आमतौर पर बिल ऑफ एंट्री, सप्लायर का कमर्शियल इनवॉइस, बिल ऑफ लैडिंग या एयरवे बिल, पैकिंग लिस्ट, कस्टम ड्यूटी भुगतान चालान, बैंक की आउटवर्ड रेमिटेंस एडवाइस, और इंस्टॉलेशन व कमीशनिंग रिपोर्ट।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।