एमएसएमई पेटेंट और ट्रेडमार्क फीस सहायता: क्या गिना जाता है
एमएसएमई के लिए पेटेंट और ट्रेडमार्क फीस सहायता: कम सरकारी फीस, एमएसएमई आईपीआर भरपाई सीमा, कौन से खर्च पात्र हैं और क्लेम के लिए कौन से कागज रखें।

इस लेख में
एमएसएमई को पेटेंट और ट्रेडमार्क खर्च में मदद दो अलग तरीकों से मिलती है: पेटेंट और ट्रेडमार्क ऑफिस में कम सरकारी फीस, जो फाइलिंग के समय मिलती है, और केंद्र या राज्य सरकार की भरपाई योजनाएं, जो आईपी रजिस्टर होने के बाद आपके खर्च का कुछ हिस्सा लौटाती हैं। किसी का भी क्लेम करने से पहले तीन बातें जांचें: आवेदक का नाम उद्यम से मेल खाता है, आपने जो फीस दी वह योजना में पात्र मद है, और योजना क्लेम के लिए खुली है। यहां के आंकड़े अक्टूबर 2026 तक के हैं।
अगर अभी उद्यम पर रजिस्ट्रेशन नहीं किया है तो वहीं से शुरू करें; दोनों रास्ते यही सबूत मांगते हैं। देखें उद्यम रजिस्ट्रेशन के फायदे।
रास्ता 1: फाइलिंग पर कम सरकारी फीस
आईपी इंडिया की फीस सूचियां नेचुरल पर्सन, स्टार्टअप, स्मॉल एंटिटी और शिक्षण संस्थानों को कम फीस वाले कॉलम में रखती हैं।
| फाइलिंग | कम फीस कॉलम | अन्य | जमा करने का सबूत |
|---|---|---|---|
| पेटेंट आवेदन, फॉर्म 1, ई-फाइलिंग | ₹1,600 | ₹8,000 | स्मॉल एंटिटी या स्टार्टअप सबूत के साथ फॉर्म 28 |
| पेटेंट आवेदन, फॉर्म 1, फिजिकल | ₹1,750 | ₹8,800 | वही |
| ट्रेडमार्क आवेदन, ई-फाइलिंग, प्रति क्लास | ₹4,500 | ₹9,000 | उद्यम सर्टिफिकेट (स्मॉल एंटरप्राइज) या स्टार्टअप मान्यता |
ध्यान रखने वाली बातें:
- पेटेंट नियमों में स्मॉल एंटिटी एमएसएमई परिभाषा से जुड़ी है, इसलिए आम सबूत उद्यम है। मीडियम एंटरप्राइज कम कॉलम का दावा करने से पहले जांच लें कि वे पात्र हैं या नहीं।
- स्मॉल एंटिटी, स्टार्टअप या शिक्षण संस्थान के लिए फॉर्म 28 हर फीस वाले दस्तावेज के साथ जाता है, सिर्फ पहली फाइलिंग के साथ नहीं।
- अगर कोई सह-आवेदक कम फीस श्रेणी से बाहर है तो संयुक्त फाइलिंग में छूट नहीं मिलती।
- बाद के चरणों (जांच का अनुरोध, रिन्यूअल, विरोध) की अपनी फीस होती है। मान कर न चलें कि फाइलिंग की छूट सब पर लागू है; हर फीस मौजूदा आईपी इंडिया फीस सूची में देखें।
रास्ता 2: रजिस्ट्रेशन के बाद भरपाई
केंद्र: एमएसएमई इनोवेटिव योजना (आईपीआर घटक)
एमएसएमई मंत्रालय की इनोवेटिव योजना में एक आईपीआर घटक है जो आईपी फैसिलिटेशन सेंटर और पोर्टल innovative.msme.gov.in के जरिए रजिस्ट्रेशन खर्च लौटाता है। आम तौर पर बताई गई सीमाएं:
| आईपी का प्रकार | बताई गई अधिकतम भरपाई |
|---|---|
| भारतीय पेटेंट | ₹1 लाख |
| विदेशी पेटेंट | ₹5 लाख |
| ट्रेडमार्क | ₹10,000 (क्लास कितनी भी हों) |
| डिजाइन | ₹15,000 |
| भौगोलिक संकेत (जीआई) | ₹2 लाख (पात्र गैर-व्यावसायिक संस्थाओं के लिए) |
मंत्रालय की गाइडलाइंस यह भी कहती हैं कि क्लेम के लिए उद्यम सर्टिफिकेट, बैंक मैंडेट फॉर्म और ओरिजिनल बिल चाहिए। 2023 का एक उप-घटक (MSME-SCIP) विदेशी ट्रेडमार्क और डिजाइन पर खर्च का 70%, हर एक पर अधिकतम ₹1.5 लाख, लौटाता है, इस स्व-घोषणा के साथ कि उसी संपत्ति के लिए कोई और केंद्रीय या राज्य फंडिंग नहीं ली। योजना की फंडिंग अवधि समय-सीमित होती है, इसलिए पैसे पर भरोसा करने से पहले पोर्टल पर पक्का करें कि क्लेम लिए जा रहे हैं।
राज्य इंसेंटिव
कई राज्य औद्योगिक नीतियां पेटेंट या ट्रेडमार्क की भरपाई देती हैं, अक्सर खर्च के प्रतिशत के रूप में और प्रति पेटेंट सीमा के साथ। अधिसूचना में देखें: पात्र आवेदक, क्या सिर्फ ग्रांट हुए पेटेंट गिने जाते हैं, क्या अटॉर्नी फीस शामिल है, ग्रांट के बाद क्लेम की समय सीमा, और क्या केंद्र की भरपाई लेने पर राज्य की नहीं मिलती।
कौन से खर्च आम तौर पर गिने जाते हैं और कौन से शायद नहीं
| खर्च | आम तौर पर पात्र? | क्या जांचें |
|---|---|---|
| आईपी ऑफिस को दी गई सरकारी फीस | अक्सर हां | आवेदक के नाम में रसीद |
| पेटेंट अटॉर्नी या एजेंट की प्रोफेशनल फीस | अक्सर हां, सीमा के भीतर | जीएसटीआईएन और विवरण के साथ इनवॉइस |
| प्रायर-आर्ट सर्च, ड्राफ्टिंग, प्रॉसिक्यूशन | अलग-अलग | क्या यह पात्र खर्च में लिखा है? |
| रिन्यूअल फीस | अक्सर बाहर | बाहर रखी मदों की सूची पढ़ें |
| प्रोफेशनल फीस पर जीएसटी | अलग-अलग | इनपुट टैक्स क्रेडिट लेते हैं तो आम तौर पर बाहर |
| अनुवाद और विदेशी एसोसिएट फीस | सिर्फ विदेशी फाइलिंग | विदेशी फर्म के इनवॉइस |
उदाहरण: माइक्रो मैन्युफैक्चरर का पेटेंट क्लेम
केवल उदाहरण। एक माइक्रो यूनिट पेटेंट की ई-फाइलिंग करती है और बाद में ग्रांट मिलता है। तीन साल का खर्च:
- सभी चरणों की सरकारी फीस (रसीदों से): ₹12,000
- ड्राफ्टिंग और प्रॉसिक्यूशन के लिए अटॉर्नी फीस: ₹70,000 + 18% जीएसटी = ₹82,600
- कुल नकद खर्च: ₹94,600
अगर योजना ₹1 लाख तक पात्र खर्च लौटाती है और इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलने पर जीएसटी बाहर रखती है:
- पात्र खर्च = ₹12,000 + ₹70,000 = ₹82,000
- भरपाई = ₹82,000, ₹1 लाख की सीमा के भीतर
- ₹12,600 जीएसटी पात्र होने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट से वापस
अगर यूनिट ने "अन्य" कॉलम में फाइल किया होता, तो सिर्फ फॉर्म 1 की फीस ₹1,600 की जगह ₹8,000 होती। हर इनवॉइस को बेस और टैक्स में बांटने के लिए जीएसटी कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
उदाहरण: तीन क्लास में ट्रेडमार्क
केवल उदाहरण। एक स्मॉल एंटरप्राइज एक ब्रांड को तीन क्लास में ई-फाइल करता है:
- कम दर पर सरकारी फीस: 3 × ₹4,500 = ₹13,500 (दूसरों के लिए 3 × ₹9,000 = ₹27,000, यानी ₹13,500 की बचत)
- एजेंट फीस: ₹9,000 + 18% जीएसटी
- अगर भरपाई सीमा क्लास कितनी भी हों, प्रति ट्रेडमार्क ₹10,000 है, तो पात्र खर्च ₹22,500 होने पर भी अधिकतम क्लेम ₹10,000 है
यानी कई क्लास वाले ट्रेडमार्क में कम सरकारी फीस से अक्सर भरपाई से ज्यादा बचत होती है। दोनों की योजना बनाएं।
पहले दिन से रखने वाली सबूत फाइल
- आवेदक के उसी कानूनी नाम में उद्यम सर्टिफिकेट।
- फॉर्म 28 की कॉपियां और उनके साथ जमा सबूत।
- हर फीस की फाइलिंग रसीद और पावती, तारीखों के साथ।
- ग्रांट सर्टिफिकेट या ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट।
- अटॉर्नी या एजेंट का एग्रीमेंट और टैक्स इनवॉइस, चरणवार विवरण के साथ।
- बिजनेस खाते से हर भुगतान दिखाने वाली बैंक स्टेटमेंट की लाइनें।
- स्व-घोषणा कि उसी आईपी के लिए कोई और सरकारी भरपाई नहीं ली।
- पैसे पाने वाले खाते का कैंसल चेक या बैंक मैंडेट।
फाइलिंग से पहले क्या पूछें
- आईपी फैसिलिटेशन सेंटर: क्या एमएसएमई आईपीआर भरपाई खुली है, मौजूदा सीमा क्या है, और क्या भुगतान सिर्फ ग्रांट या रजिस्ट्रेशन के बाद होता है?
- आपका अटॉर्नी: क्या इनवॉइस में प्रोफेशनल फीस और सरकारी फीस चरणवार अलग दिखेंगी?
- डीआईसी या राज्य नोडल कार्यालय: क्या उसी पेटेंट पर केंद्र की भरपाई के बाद राज्य योजना में क्लेम हो सकता है?
आम गलतियां
- उद्यम फर्म के नाम में हो और फाइलिंग प्रमोटर के निजी नाम में, या इसका उल्टा।
- बाद के फीस वाले फॉर्म में फॉर्म 28 भूल जाना और ज्यादा फीस भरना।
- एजेंट को नकद भुगतान, जिससे बैंक रिकॉर्ड नहीं बचता।
- यह मान लेना कि SIPP जैसी फैसिलिटेटर सहायता चल रही है, बिना देखे कि मौजूदा चरण अधिसूचित है।
- फाइल अटॉर्नी के पास पड़ी रहने से ग्रांट के बाद क्लेम की समय सीमा निकल जाना।
क्लेम में देरी हो या खारिज हो जाए तो
लिखित में कारण मांगें। केंद्र की योजना में आईपी फैसिलिटेशन सेंटर और एमएसएमई डेवलपमेंट एंड फैसिलिटेशन ऑफिस से फॉलो-अप करें; MSME Champions पोर्टल या pgportal.gov.in पर शिकायत बढ़ाएं। राज्य योजनाओं में डीआईसी के जनरल मैनेजर और फिर उद्योग आयुक्तालय के पास जाएं। योजना बनाते समय भरपाई को अनिश्चित नकदी मानें; इस अंतर को कैसे पूरा करें, बिजनेस ग्रोथ की फंडिंग में देखें।
मुख्य बातें
- कम सरकारी फीस और रजिस्ट्रेशन के बाद भरपाई अलग-अलग हैं; अक्सर दोनों ली जा सकती हैं।
- पेटेंट फॉर्म 1 की ई-फाइलिंग स्मॉल एंटिटी के लिए ₹1,600 है, दूसरों के लिए ₹8,000; ट्रेडमार्क ई-फाइलिंग प्रति क्लास ₹4,500 है, दूसरों के लिए ₹9,000।
- एमएसएमई आईपीआर भरपाई सीमा भारतीय पेटेंट पर ₹1 लाख और ट्रेडमार्क पर ₹10,000 बताई गई है; मौजूदा स्थिति innovative.msme.gov.in पर पक्की करें।
- पहली फाइलिंग से रसीदें, इनवॉइस, बैंक सबूत और फॉर्म 28 की कॉपियां रखें।
- एक ही खर्च दो योजनाओं में क्लेम न करें, जब तक दोनों साफ तौर पर अनुमति न दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या भारत में एमएसएमई को पेटेंट फीस कम देनी पड़ती है?
हां। आईपी इंडिया की फीस सूची में नेचुरल पर्सन, स्टार्टअप, स्मॉल एंटिटी और शिक्षण संस्थानों के लिए कम फीस का कॉलम है। जैसे पेटेंट आवेदन (फॉर्म 1) की ई-फाइलिंग उस कॉलम में ₹1,600 है, जबकि दूसरों के लिए ₹8,000। स्मॉल एंटिटी को उद्यम सर्टिफिकेट जैसे सबूत के साथ फॉर्म 28 भरना होता है।
एमएसएमई के लिए ट्रेडमार्क फाइलिंग फीस कितनी है?
व्यक्तियों, स्टार्टअप और स्मॉल एंटरप्राइज के लिए ई-फाइलिंग फीस प्रति क्लास ₹4,500 है, जबकि दूसरों के लिए प्रति क्लास ₹9,000। अगर आप किसी अपात्र आवेदक के साथ संयुक्त रूप से फाइल करते हैं तो यह छूट नहीं मिलती।
एमएसएमई आईपीआर योजना पेटेंट या ट्रेडमार्क पर कितनी भरपाई देती है?
एमएसएमई मंत्रालय की इनोवेटिव योजना के आईपीआर घटक में भारतीय पेटेंट पर ₹1 लाख, विदेशी पेटेंट पर ₹5 लाख, ट्रेडमार्क पर ₹10,000, डिजाइन पर ₹15,000 और जीआई पर ₹2 लाख तक भरपाई बताई गई है। मौजूदा सीमा और योजना क्लेम ले रही है या नहीं, innovative.msme.gov.in पर पक्का करें।
भरपाई फाइलिंग पर मिलती है या रजिस्ट्रेशन के बाद?
आम तौर पर पेटेंट ग्रांट होने या ट्रेडमार्क रजिस्टर होने के बाद ही, क्योंकि ये योजनाएं रजिस्ट्रेशन पर हुए खर्च की भरपाई करती हैं। पहले दिन से हर इनवॉइस और रसीद रखें, क्योंकि क्लेम फाइलिंग के सालों बाद आ सकता है।
क्या डीपीआईआईटी मान्यता वाले स्टार्टअप को पेटेंट फीस में मदद मिलती है?
डीपीआईआईटी मान्यता वाले स्टार्टअप कम सरकारी फीस देते हैं। स्टार्टअप के फैसिलिटेटर फीस भरने वाली SIPP योजना समय-सीमित चरणों में चली है, इसलिए भरोसा करने से पहले आईपी इंडिया और स्टार्टअप इंडिया साइट पर देखें कि यह अभी अधिसूचित है या नहीं।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।