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पेमेंट गेटवे फीस और जीएसटी: सेटलमेंट का हिसाब कैसे मिलाएं

गेटवे ने बिक्री से कम पैसा भेजा? गेटवे फीस, 18% जीएसटी, रिफंड, चार्जबैक, टीसीएस और टीडीएस कटौती का मिलान कैसे करें, उदाहरण के साथ, अक्टूबर 2026 तक।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
पेमेंट गेटवे फीस और जीएसटी: सेटलमेंट का हिसाब कैसे मिलाएं
इस लेख में
  1. पैसा मिलने से पहले क्या कटता है
  2. उदाहरण: एक महीने का गेटवे सेटलमेंट
  3. स्टेप-बाय-स्टेप मिलान
  4. जब फीस गलत लगे
  5. क्या न करें
  6. मुख्य बातें
  7. संबंधित गाइड
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जब पेमेंट गेटवे आपकी बिक्री से कम पैसा सेटल करता है, तो अंतर आमतौर पर इनसे बनता है: गेटवे फीस, उस फीस पर 18% जीएसटी, रिफंड, चार्जबैक, और मार्केटप्लेस विक्रेताओं के लिए जीएसटी टीसीएस और इनकम टैक्स टीडीएस। मिलान के लिए गेटवे की सेटलमेंट रिपोर्ट में कुल बिक्री से शुरू करें, हर कटौती लाइन घटाएं, और नतीजे को बैंक क्रेडिट से मिलाएं। अपनी किताबों में कुल बिक्री दर्ज करें और फीस व जीएसटी अलग दिखाएं।

यह गाइड ऑनलाइन विक्रेताओं, फ्रीलांसरों और उन दुकानों के लिए है जो पेमेंट गेटवे या एग्रीगेटर से पैसा लेते हैं। नियम अक्टूबर 2026 तक के हैं; फीस की दर आपके एग्रीमेंट पर निर्भर है, इसलिए नीचे की दरें सिर्फ उदाहरण हैं।

पैसा मिलने से पहले क्या कटता है

कटौती क्या है कहां मिलेगी
गेटवे फीस या एमडीआर हर ट्रांजैक्शन पर प्रतिशत या फ्लैट फीस, पेमेंट तरीके के हिसाब से सेटलमेंट रिपोर्ट, एग्रीमेंट में प्राइसिंग
फीस पर जीएसटी फीस का 18%, आपकी बिक्री का नहीं सेटलमेंट रिपोर्ट और मासिक टैक्स इनवॉइस
रिफंड ग्राहकों को लौटाया पैसा रिफंड रिपोर्ट
चार्जबैक विवादित पेमेंट जो ग्राहक के बैंक को लौटे डिस्प्यूट या चार्जबैक डैशबोर्ड
रिजर्व या होल्ड जोखिम के लिए रोका गया सेटलमेंट का हिस्सा, अगर एग्रीमेंट में हो एग्रीमेंट और सेटलमेंट रिपोर्ट
जीएसटी टीसीएस (मार्केटप्लेस) नेट टैक्सेबल सप्लाई का 0.5%, ई-कॉमर्स ऑपरेटर लेता है मार्केटप्लेस स्टेटमेंट और आपका जीएसटी पोर्टल
इनकम टैक्स टीडीएस (मार्केटप्लेस) पुरानी धारा 194-O के तहत 0.1%, अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 393 में मार्केटप्लेस स्टेटमेंट, फॉर्म 26AS/AIS

इन कटौतियों के पीछे के नियम

  • खुलासा: आरबीआई (रेगुलेशन ऑफ पेमेंट एग्रीगेटर्स) डायरेक्शंस, 2025 के तहत मर्चेंट एग्रीमेंट निष्पक्ष होना चाहिए और उसमें सेटलमेंट की समय-सीमा पारदर्शी रूप से लिखी हो, और एग्रीगेटर को मर्चेंट फीस पर आरबीआई के निर्देश मानने होते हैं। सेटलमेंट टाइमिंग आपके एग्रीमेंट के अनुसार है, सबके लिए एक तय T+1 नहीं।
  • रिफंड मूल तरीके में: डायरेक्शंस कहते हैं कि रिफंड भुगतानकर्ता के मूल पेमेंट तरीके में ही जाना चाहिए, जब तक भुगतानकर्ता अपने किसी दूसरे माध्यम में न मांगे।
  • विवाद: एग्रीगेटर को चार्जबैक सहित विवाद निपटान व्यवस्था चलानी होती है, रिफंड टाइमलाइन और वेबसाइट पर एस्केलेशन मैट्रिक्स के साथ।
  • फीस पर जीएसटी: पेमेंट प्रोसेसिंग एक वित्तीय सेवा है जिस पर 18% टैक्स लगता है। अगर आप जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं, तो फीस पर लगा जीएसटी आमतौर पर सामान्य शर्तों के साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में मिलता है।
  • यूपीआई फीस: अक्टूबर 2026 तक, सितंबर 2026 की सरकारी अधिसूचना के तहत ₹2,000 तक के यूपीआई पेमेंट मर्चेंट फीस से मुक्त हैं। एनपीसीआई ने 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ऊपर के कुछ मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.4% (अधिकतम ₹300) की घोषणा की, फिर 13 अक्टूबर को इसे दिवाली के बाद तक टाल दिया; नई तारीख बाद में बताई जाएगी। अगर यह लागू हुई, तो उस फीस पर भी 18% जीएसटी लगेगा।
  • मार्केटप्लेस टीसीएस और टीडीएस: ई-कॉमर्स ऑपरेटर 0.5% जीएसटी टीसीएस लेते हैं (10 जुलाई 2024 को 1% से घटा) और 0.1% इनकम टैक्स टीडीएस काटते हैं (अक्टूबर 2024 से 1% से घटा)।

उदाहरण: एक महीने का गेटवे सेटलमेंट

एक ऑनलाइन विक्रेता की अक्टूबर की गेटवे रिपोर्ट में कुल कलेक्शन ₹5,00,000 है। दरें उदाहरण के लिए हैं; अपना एग्रीमेंट देखें।

लाइन गणना रकम
कार्ड पेमेंट ₹2,00,000 × 2% फीस ₹4,000 फीस
नेट बैंकिंग ₹50,000 × 2% फीस ₹1,000 फीस
यूपीआई पेमेंट (सभी ₹2,000 से कम) ₹2,50,000 × 0% ₹0 फीस
कुल फीस ₹5,000
फीस पर जीएसटी ₹5,000 × 18% ₹900
दिए गए रिफंड ₹6,000
हारा हुआ चार्जबैक ₹2,500
नेट सेटलमेंट ₹5,00,000 − ₹5,000 − ₹900 − ₹6,000 − ₹2,500 ₹4,85,600

अगर बैंक में अक्टूबर के सेटलमेंट क्रेडिट मिलाकर ₹4,85,600 दिखते हैं (महीने के आखिर की बिक्री जो नवंबर की शुरुआत में सेटल हो उसे जोड़कर, और सितंबर के आखिर की बिक्री जो अक्टूबर में सेटल हुई उसे हटाकर), तो महीना मिल गया। नहीं तो दिन-दर-दिन तुलना करें।

इसे कैसे दर्ज करें:

  • सेल्स: ₹5,00,000 में से ₹6,000 रिफंड और ₹2,500 चार्जबैक घटाकर = ₹4,91,500 नेट सेल्स (अपनी जीएसटी प्रैक्टिस के अनुसार रिफंड और चार्जबैक को रिटर्न या क्रेडिट नोट के रूप में दर्ज करें)।
  • गेटवे चार्ज (खर्च): ₹5,000।
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट: ₹900, अगर रजिस्टर्ड हैं और इनवॉइस पर आपका जीएसटीआईएन है; नहीं तो ₹900 खर्च का हिस्सा बनेगा।
  • बैंक: ₹4,85,600।

जांच: ₹4,91,500 − ₹5,000 − ₹900 = ₹4,85,600। फीस लाइनों पर जीएसटी जांचने में हमारा जीएसटी कैलकुलेटर मदद करता है।

अगर नई यूपीआई फीस शुरू हुई

मान लीजिए ग्राहक यूपीआई से ₹10,000 देता है और 0.4% फीस लागू है: फीस = ₹40, जीएसटी = ₹7.20, यानी ₹9,952.80 सेटल होंगे। ₹1,00,000 पर कैप की वजह से फीस ₹300 होगी, साथ में ₹54 जीएसटी। जब तक एनपीसीआई असली तारीख और दायरा नहीं बताता, ये आंकड़े सिर्फ उदाहरण हैं।

मार्केटप्लेस का उदाहरण

किसी मार्केटप्लेस के जरिए एक महीने में ₹1,00,000 की नेट टैक्सेबल बिक्री पर 0.5% टीसीएस = ₹500 और 0.1% टीडीएस = ₹100 (टीडीएस कानून में तय कुल रकम पर गिना जाता है)। दोनों आपके लिए टैक्स क्रेडिट हैं, लागत नहीं, बशर्ते आप इन्हें मिलाएं: टीसीएस जीएसटी पोर्टल पर स्वीकार करने के लिए दिखता है, और टीडीएस फॉर्म 26AS/AIS में। टीडीएस क्रेडिट कैसे क्लेम होता है, इसके लिए हमारी फ्रीलांसर टैक्स गाइड देखें।

स्टेप-बाय-स्टेप मिलान

  1. तीन चीजें डाउनलोड करें: महीने की गेटवे सेटलमेंट रिपोर्ट, फीस का मासिक टैक्स इनवॉइस, और बैंक स्टेटमेंट।
  2. कुल कलेक्शन को अपने सेल्स रजिस्टर से मिलाएं। यहां अंतर का मतलब है छूटे ऑर्डर या फेल पेमेंट जिन्हें बिक्री मान लिया गया।
  3. कुछ ट्रांजैक्शन पर फीस दोबारा गिनें, अपने एग्रीमेंट की दरों से। देखें कि हर पेमेंट तरीके पर सही दर लगी या नहीं।
  4. जीएसटी जांचें: सेटलमेंट रिपोर्ट का कुल जीएसटी टैक्स इनवॉइस के जीएसटी के बराबर और फीस का 18% होना चाहिए।
  5. रिफंड और चार्जबैक को ऑर्डर से मिलाएं, और जहां जरूरी हो क्रेडिट नोट दर्ज करें।
  6. सेटलमेंट बैच को बैंक क्रेडिट से मिलाएं, तारीख और सेटलमेंट आईडी से।
  7. अंतर की लिस्ट बनाकर ट्रांजैक्शन आईडी के साथ गेटवे के मर्चेंट सपोर्ट में भेजें।

जब फीस गलत लगे

  • गेटवे डैशबोर्ड से टिकट डालें, ट्रांजैक्शन आईडी, लगाई गई दर और एग्रीमेंट की दर बताकर।
  • हल न हो तो एग्रीगेटर का प्रकाशित एस्केलेशन मैट्रिक्स और ग्रीवेंस ऑफिसर इस्तेमाल करें।
  • 30 दिन बाद भी हल न हो, तो cms.rbi.org.in (हेल्पलाइन 14448) पर आरबीआई ओम्बड्समैन रेगुलेटेड संस्थाओं, जिनमें पेमेंट सिस्टम पार्टिसिपेंट्स भी शामिल हैं, के खिलाफ शिकायत सुनता है।
  • अपने बैंक खाते में ही बिना वजह के चार्ज के लिए देखें छिपे बैंक चार्ज का रिफंड।

"कम एमडीआर" या "तेज सेटलमेंट" का ऑफर देने वाले ऐसे कॉल से सावधान रहें जो डैशबोर्ड लॉगिन, ओटीपी या किसी निजी खाते में पेमेंट मांगें। गेटवे प्राइसिंग आपके डैशबोर्ड और लिखित एग्रीमेंट से बदलते हैं, किसी अनजान कॉल से नहीं।

क्या न करें

  • नेट सेटलमेंट को बिक्री के रूप में दर्ज न करें। इससे फीस छिपती है और टर्नओवर कम दिखता है।
  • मासिक टैक्स इनवॉइस को नजरअंदाज न करें। इसके बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट छूट सकता है।
  • नियम जांचे बिना गेटवे फीस कार्ड ग्राहकों पर न डालें; देखें कार्ड पेमेंट पर मर्चेंट सरचार्ज।
  • मार्केटप्लेस से बेचते हैं तो टीसीएस और टीडीएस क्रेडिट न भूलें; ये क्लेम करने पर ही आपका टैक्स घटाते हैं।

मुख्य बातें

  • सेटलमेंट = कुल कलेक्शन − फीस − फीस पर 18% जीएसटी − रिफंड − चार्जबैक (मार्केटप्लेस पर − टीसीएस और टीडीएस)।
  • जीएसटी फीस पर लगता है, आपकी बिक्री पर नहीं, और रजिस्टर्ड होने पर आमतौर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में मिलता है।
  • अक्टूबर 2026 तक ₹2,000 तक का यूपीआई फीस-मुक्त है; ₹2,000 से ऊपर की प्रस्तावित 0.4% फीस दिवाली के बाद तक टली है।
  • कुल बिक्री, फीस को खर्च और जीएसटी को आईटीसी में दर्ज करें, और नतीजे को बैंक क्रेडिट से मिलाएं।
  • गलत फीस की शिकायत गेटवे, उसके ग्रीवेंस ऑफिसर और 30 दिन बाद आरबीआई ओम्बड्समैन तक ले जाएं।

संबंधित गाइड

प्रॉफिट बनाम कैश फ्लो: मुनाफे वाली कंपनियों के पास भी नकदी क्यों खत्म होती है, क्रेडिट कार्ड चार्जबैक बनाम रिफंड: समय-सीमा और स्टेप।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पेमेंट गेटवे फीस पर जीएसटी लगता है?

हां। पेमेंट गेटवे और कार्ड प्रोसेसिंग फीस वित्तीय सेवाएं हैं जिन पर 18% जीएसटी लगता है। जीएसटी फीस पर लगता है, आपकी बिक्री की रकम पर नहीं, और गेटवे इसके लिए टैक्स इनवॉइस देता है।

क्या पेमेंट गेटवे के जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है?

जीएसटी में रजिस्टर्ड बिजनेस आमतौर पर गेटवे फीस पर लगे जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकता है, अगर गेटवे के टैक्स इनवॉइस पर आपका जीएसटीआईएन हो और आईटीसी की सामान्य शर्तें पूरी हों। गेटवे को अपना जीएसटीआईएन दें ताकि वह इनवॉइस पर आए।

क्या बिक्री को गेटवे फीस घटाकर दर्ज करना चाहिए?

नहीं। पूरी बिक्री की रकम को सेल्स में, फीस को खर्च में, और फीस पर लगे जीएसटी को इनपुट टैक्स क्रेडिट (या रजिस्टर्ड न हों तो खर्च) में दर्ज करें। सिर्फ नेट रकम दर्ज करने से टर्नओवर और फीस दोनों कम दिखते हैं।

क्या गेटवे से आए यूपीआई पेमेंट पर फीस लगती है?

सितंबर 2026 की अधिसूचना के तहत ₹2,000 तक के यूपीआई पेमेंट मर्चेंट फीस से मुक्त रहने चाहिए। ₹2,000 से ऊपर के कुछ मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर एनपीसीआई की प्रस्तावित 0.4% फीस (अधिकतम ₹300) अक्टूबर 2026 में दिवाली के बाद तक टाल दी गई। आपका गेटवे फिर भी दूसरी तय फीस ले सकता है, इसलिए उसका प्राइसिंग पेज और इनवॉइस देखें।

मार्केटप्लेस मेरे पेआउट से क्या-क्या काट सकता है?

कमीशन और फीस के अलावा, मार्केटप्लेस नेट टैक्सेबल सप्लाई पर 0.5% जीएसटी टीसीएस लेते हैं और 0.1% इनकम टैक्स टीडीएस (पुरानी धारा 194-O) काटते हैं। दोनों आपके खाते में क्रेडिट होते हैं और मिलान के बाद जीएसटी व इनकम टैक्स रिटर्न में क्लेम किए जा सकते हैं।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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