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80C (अब धारा 123) में टैक्स बचत के विकल्प 2026-27

80C, यानी इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 123 में टैक्स बचत के बेहतर विकल्प: पीपीएफ, ईएलएसएस, एनएससी, सुकन्या, ईपीएफ की रिटर्न, लॉक-इन और टैक्स पर तुलना।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
80C (अब धारा 123) में टैक्स बचत के विकल्प 2026-27
इस लेख में
  1. क्या बदला: 80C अब धारा 123 है
  2. क्या 80C अब भी फायदेमंद है?
  3. 80C के विकल्पों की तुलना
  4. इनमें से कैसे चुनें
  5. उदाहरण 1: ₹1.5 लाख से कितना टैक्स बचता है?
  6. उदाहरण 2: 15 साल में पीपीएफ
  7. ₹1.5 लाख की सीमा कैसे भरें: एक नमूना तरीका
  8. आम गलतियां
  9. मुख्य बातें
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80C में टैक्स बचत के मुख्य विकल्प हैं पीपीएफ, ईएलएसएस म्यूचुअल फंड, ईपीएफ, एनएससी, सुकन्या समृद्धि, टैक्स-सेवर एफडी, एससीएसएस, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन का मूलधन और बच्चों की ट्यूशन फीस। इन सबको मिलाकर साल में ₹1.5 लाख की सीमा है। टैक्स वर्ष 2026-27 से यह कटौती इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 123 है, और पहले की तरह सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है।

क्या बदला: 80C अब धारा 123 है

इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ। पुराने चैप्टर VI-A की कटौतियां अब चैप्टर VIII में हैं। जानी-पहचानी 80C अब धारा 123 में है, और योग्य मदों की सूची अनुसूची XV (Schedule XV) में है। सीमा अब भी ₹1.5 लाख है, और 80C, 80CCC (पेंशन प्लान) और 80CCD(1) (आपका अपना एनपीएस योगदान) की ₹1.5 लाख की संयुक्त सीमा भी जारी है।

इससे जुड़ी कटौतियों के नंबर भी बदले हैं:

  • धारा 124 (पुरानी 80CCD): एनपीएस। अपने एनपीएस योगदान पर अतिरिक्त ₹50,000 (पुरानी 80CCD(1B)) ₹1.5 लाख के अलावा है।
  • धारा 126 (पुरानी 80D): हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम। यह ₹1.5 लाख से अलग है।

वित्त वर्ष 2025-26 के रिटर्न में अब भी पुरानी धाराओं के नंबर इस्तेमाल होते हैं।

क्या 80C अब भी फायदेमंद है?

सिर्फ तब जब आप पुरानी व्यवस्था में हैं, और पुरानी व्यवस्था तभी फायदेमंद है जब कुल कटौतियां बड़ी हों। उदाहरण के लिए, ₹15 लाख की सैलरी पर पुरानी व्यवस्था को नई से बेहतर बनाने के लिए करीब ₹5.4 लाख की कटौतियां और छूट चाहिए। नई व्यवस्था वाले कई लोगों के लिए 80C का कोई मतलब नहीं है। पहले नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था देखें, और अगर पुरानी व्यवस्था आपके लिए सही है तो यहां लौटें।

80C के विकल्पों की तुलना

छोटी बचत योजनाओं की दरें अक्टूबर–दिसंबर 2026 की हैं और सरकार इन्हें हर तिमाही तय करती है।

विकल्प रिटर्न (अक्टूबर–दिसंबर 2026) लॉक-इन रिटर्न पर टैक्स जोखिम
पीपीएफ 7.1% 15 साल (7वें साल से आंशिक निकासी) टैक्स फ्री (EEE) सरकारी गारंटी
सुकन्या समृद्धि (SSY) 8.2% बेटी के 21 साल होने तक (15 साल जमा) टैक्स फ्री (EEE) सरकारी गारंटी
ईपीएफ / वीपीएफ ईपीएफओ हर साल दर घोषित करता है रिटायरमेंट तक / नौकरी बदलने के नियम ज्यादातर टैक्स फ्री* सरकार समर्थित
एनएससी 7.7% 5 साल ब्याज टैक्सेबल सरकारी गारंटी
एससीएसएस (60+ उम्र) 8.2% 5 साल ब्याज टैक्सेबल सरकारी गारंटी
टैक्स-सेवर बैंक एफडी बैंक के हिसाब से अलग 5 साल ब्याज टैक्सेबल ₹5 लाख तक DICGC कवर
ईएलएसएस म्यूचुअल फंड बाजार से जुड़ा 3 साल साल में ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5% LTCG इक्विटी जोखिम
एनपीएस (₹1.5 लाख के अंदर) बाजार से जुड़ा 60 साल तक, सीमित निकासी के साथ निकासी पर आंशिक टैक्स मध्यम
लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पॉलिसी पर निर्भर पॉलिसी की अवधि शर्तें लागू अलग-अलग

*कर्मचारी के अपने ईपीएफ योगदान पर साल में ₹2.5 लाख से ऊपर का ब्याज टैक्सेबल है।

ये भुगतान भी गिने जाते हैं

ये निवेश नहीं हैं, लेकिन इनसे भी वही ₹1.5 लाख की सीमा इस्तेमाल होती है:

  • होम लोन के मूलधन का भुगतान, और नए मकान पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन।
  • भारत में स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी में अधिकतम दो बच्चों की ट्यूशन फीस (कोचिंग या डेवलपमेंट फीस नहीं)।
  • अपने, पति या पत्नी या बच्चों के लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम। नई पॉलिसियों में कटौती योग्य प्रीमियम सम एश्योर्ड के 10% तक सीमित है।

अगर आपका ईपीएफ योगदान, होम लोन का मूलधन और बच्चों की फीस मिलकर पहले ही ₹1.5 लाख हो जाते हैं, तो आपके पास कोई गुंजाइश नहीं बचती। सिर्फ "टैक्स बचाने" के लिए और निवेश करने से कोई अतिरिक्त कटौती नहीं मिलती।

इनमें से कैसे चुनें

  • गारंटीड और टैक्स फ्री: पीपीएफ। यह लंबी अवधि के, कम जोखिम वाले पैसे के लिए अच्छा है। इसकी 15 साल की अवधि और EEE स्टेटस इसे डेट निवेश का मजबूत आधार बनाते हैं।
  • बेटी के लिए बचत: सुकन्या समृद्धि। इसमें अभी छोटी बचत योजनाओं की सबसे ऊंची दर, 8.2%, मिलती है और रिटर्न टैक्स फ्री है।
  • सबसे ज्यादा ग्रोथ की संभावना, सबसे कम लॉक-इन: ईएलएसएस। यह तब सही है जब आप इक्विटी का उतार-चढ़ाव झेल सकें। एसआईपी की हर किस्त अपनी तारीख से तीन साल के लिए लॉक रहती है।
  • तय 5 साल की अवधि: एनएससी या टैक्स-सेवर एफडी। याद रखें कि ब्याज पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है, जिससे 30% स्लैब में टैक्स के बाद रिटर्न काफी घट जाता है।
  • रिटायर्ड लोग: एससीएसएस। इसमें तिमाही भुगतान के साथ 8.2% मिलता है, हालांकि ब्याज टैक्सेबल है।

तीन सबसे लोकप्रिय विकल्पों को करीब से समझने के लिए पीपीएफ बनाम एफडी बनाम ईएलएसएस पढ़ें।

उदाहरण 1: ₹1.5 लाख से कितना टैक्स बचता है?

बचत पुरानी व्यवस्था में आपके मार्जिनल स्लैब और 4% सेस पर निर्भर करती है:

पुरानी व्यवस्था का मार्जिनल स्लैब ₹1.5 लाख पर टैक्स बचत 4% सेस के साथ
5% ₹7,500 ₹7,800
20% ₹30,000 ₹31,200
30% ₹45,000 ₹46,800

30% स्लैब वाला व्यक्ति पूरी सीमा इस्तेमाल करके साल में ₹46,800 बचाता है। 5% स्लैब में बचत सिर्फ ₹7,800 है, जो अपने-आप में लंबे लॉक-इन को सही ठहराने के लिए बहुत कम है।

उदाहरण 2: 15 साल में पीपीएफ

मान लें कि आप 15 साल तक हर साल 5 अप्रैल से पहले पीपीएफ में ₹1.5 लाख जमा करते हैं, और दर 7.1% पर बनी रहती है। पीपीएफ का ब्याज हर महीने की 5 तारीख से महीने के आखिर तक के सबसे कम बैलेंस पर कैलकुलेट होता है और साल में एक बार जमा होता है।

  • कुल निवेश: ₹1,50,000 × 15 = ₹22,50,000
  • मैच्योरिटी रकम: ₹1,50,000 × [(1.071^15 − 1) / 0.071] × 1.071 ≈ ₹40,68,000
  • कमाया गया ब्याज: करीब ₹18,18,000, पूरी तरह टैक्स फ्री

30% स्लैब में सिर्फ कटौती से ही साल में ₹46,800, यानी 15 साल में करीब ₹7 लाख बचते हैं, और टैक्स फ्री ब्याज इसके ऊपर है। पीपीएफ की दर हर तिमाही बदलती है, इसलिए इसे सिर्फ एक उदाहरण मानें। अपनी जमा का हिसाब पीपीएफ कैलकुलेटर में लगाएं।

₹1.5 लाख की सीमा कैसे भरें: एक नमूना तरीका

पुरानी व्यवस्था में एक सैलरी वाले व्यक्ति को लें, जिसकी ईपीएफ कटौती साल में ₹21,600 है (₹15,000 महीने के बेसिक का 12%) और जिसका कोई होम लोन या स्कूल फीस नहीं है। इससे ₹1,28,400 की गुंजाइश बचती है। इसे भरने का एक समझदारी भरा तरीका प्रोडक्ट के बजाय लक्ष्य के हिसाब से चलना है:

  • लंबी अवधि की सुरक्षा: पीपीएफ में साल में ₹60,000 (हर महीने ₹5,000, 5 तारीख से पहले जमा)।
  • लंबी अवधि की ग्रोथ: ईएलएसएस फंड में साल में ₹60,000 (एसआईपी से हर महीने ₹5,000)।
  • सुरक्षा कवर: बचे ₹8,400 टर्म इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए, जो भी गिना जाता है।

यह मिश्रण इक्विटी के साथ-साथ एक सरकारी गारंटी वाला, टैक्स फ्री आधार देता है, और लिक्विडिटी भी ठीक रखता है क्योंकि ईएलएसएस की हर किस्त तीन साल बाद खुल जाती है। यह सिर्फ एक उदाहरण है, सलाह नहीं। आपका बंटवारा आपके लक्ष्यों, मौजूदा संपत्तियों और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर होना चाहिए।

आम गलतियां

  • मार्च में जल्दबाजी। आखिरी समय में खरीदने वाले अक्सर गलत इंश्योरेंस पॉलिसी ले लेते हैं। निवेश पूरे साल में बांटें, जैसे हर महीने ईएलएसएस एसआईपी या पीपीएफ जमा।
  • एक ही रुपये को दो बार गिनना। ₹1.5 लाख की सीमा सभी मदों के लिए साझा है, हर मद के लिए अलग नहीं।
  • नई व्यवस्था को भूल जाना। अगर आप नई व्यवस्था में हैं, तो धारा 123 के निवेशों पर कोई कटौती नहीं मिलती। इन्हें सिर्फ इनके रिटर्न के आधार पर परखें।
  • पीपीएफ में 5 तारीख का नियम चूकना। 5 तारीख के बाद की गई जमा पर उस महीने का ब्याज नहीं मिलता।

मुख्य बातें

  • 80C अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 123 (अनुसूची XV के साथ) है। सीमा अब भी ₹1.5 लाख है, और सिर्फ पुरानी व्यवस्था में।
  • एनपीएस को धारा 124 (पुरानी 80CCD(1B)) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 मिलते हैं, और हेल्थ इंश्योरेंस की अपनी अलग सीमा धारा 126 (पुरानी 80D) में है।
  • पीपीएफ (7.1%) और सुकन्या (8.2%) टैक्स फ्री और सरकारी गारंटी वाले हैं। ईएलएसएस का लॉक-इन सबसे कम है। एनएससी, एससीएसएस और एफडी का ब्याज टैक्सेबल है।
  • 30% स्लैब में पूरे ₹1.5 लाख से साल में ₹46,800 बचते हैं। 5% स्लैब में सिर्फ ₹7,800।
  • पहले ईपीएफ, होम लोन का मूलधन और ट्यूशन फीस जांचें। हो सकता है ये पहले ही सीमा भर दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 में धारा 80C को क्या कहा जाता है?

टैक्स वर्ष 2026-27 से, पहले धारा 80C में मिलने वाली कटौती अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 123 में है, जिसे अनुसूची XV के साथ पढ़ा जाता है। ₹1.5 लाख की सीमा और योग्य निवेशों व भुगतानों की सूची मोटे तौर पर वही है।

क्या नई टैक्स व्यवस्था में 80C की कटौती क्लेम कर सकते हैं?

नहीं। धारा 123 (पुरानी 80C) की कटौती सिर्फ तभी मिलती है जब आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं। धारा 202 के तहत नई व्यवस्था में यह नहीं मिलती।

किस 80C विकल्प का लॉक-इन सबसे कम है?

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड का लॉक-इन सबसे कम है, हर निवेश की तारीख से तीन साल। टैक्स-सेवर एफडी और एनएससी पांच साल के लिए लॉक रहते हैं, और पीपीएफ 15 साल चलता है जिसमें सातवें वित्त वर्ष से आंशिक निकासी की इजाजत है।

क्या एनपीएस की ₹50,000 की कटौती 80C की ₹1.5 लाख की सीमा में आती है?

नहीं। अपने एनपीएस योगदान पर अतिरिक्त ₹50,000 (पुरानी धारा 80CCD(1B), अब धारा 124 में) ₹1.5 लाख की सीमा के ऊपर है, इसलिए पुरानी व्यवस्था वाला टैक्सपेयर कुल ₹2 लाख तक क्लेम कर सकता है।

क्या किसान विकास पत्र 80C में आता है?

नहीं। केवीपी पर अभी 7.5% ब्याज मिलता है और यह सरकार समर्थित छोटी बचत योजना है, लेकिन इसमें निवेश पर धारा 123 (पुरानी 80C) की कटौती नहीं मिलती।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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