नई या पुरानी टैक्स रिजीम FY 2026-27: किसमें ज्यादा बचत?
FY 2026-27 में नई बनाम पुरानी टैक्स रिजीम: ₹10 लाख से ₹50 लाख सैलरी पर ब्रेकईवन डिडक्शन, 4% सेस के साथ उदाहरण, और जल्दी फैसला लेने का आसान तरीका।

इस लेख में
FY 2026-27 में ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए नई टैक्स रिजीम में टैक्स कम या बराबर बनता है। पुरानी रिजीम तभी आगे निकलती है जब आपके डिडक्शन और छूट बड़े हों। ₹15 लाख सैलरी पर आपको इनकी करीब ₹5.4 लाख की रकम चाहिए, और ₹25 लाख सैलरी से ऊपर ₹8 लाख। नीचे पूरा हिसाब, ब्रेकईवन टेबल और फैसला लेने का आसान तरीका दिया गया है।
FY 2026-27 के लिए क्या बदला
इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 की जगह ले ली, इसलिए FY 2026-27 नए कानून का पहला "टैक्स ईयर" है। दरें नहीं बदलीं, लेकिन सेक्शन नंबर बदल गए:
- नई (डिफॉल्ट) रिजीम अब सेक्शन 202 (पुराना सेक्शन 115BAC) है।
- ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री बनाने वाली रिबेट अब सेक्शन 156 (पुराना सेक्शन 87A) है।
- जिन डिडक्शन को आप 80C, 80CCD और 80D के नाम से जानते हैं, वे अब चैप्टर VIII में सेक्शन 123 (पुराना 80C), सेक्शन 124 (पुराना 80CCD) और सेक्शन 126 (पुराना 80D) हैं।
FY 2025-26 के रिटर्न (जो 2026 में भरे गए) अब भी 1961 के कानून के पुराने नंबर ही इस्तेमाल करते हैं। सिर्फ 1 अप्रैल 2026 से कमाई गई आय नए नंबरों के तहत आती है।
दोनों के स्लैब एक साथ
| आय स्लैब (नई रिजीम) | दर | आय स्लैब (पुरानी रिजीम) | दर |
|---|---|---|---|
| ₹4 लाख तक | शून्य | ₹2.5 लाख तक | शून्य |
| ₹4–8 लाख | 5% | ₹2.5–5 लाख | 5% |
| ₹8–12 लाख | 10% | ₹5–10 लाख | 20% |
| ₹12–16 लाख | 15% | ₹10 लाख से ऊपर | 30% |
| ₹16–20 लाख | 20% | ||
| ₹20–24 लाख | 25% | ||
| ₹24 लाख से ऊपर | 30% |
दूसरे अहम फर्क:
- सैलरी/पेंशन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000 (नई) बनाम ₹50,000 (पुरानी)।
- रिबेट: नई रिजीम में ₹60,000 तक, इसलिए ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम (₹12.75 लाख सैलरी) पर टैक्स शून्य। पुरानी रिजीम में रिबेट ₹12,500 तक है, इसलिए ₹5 लाख तक की टैक्सेबल इनकम पर टैक्स शून्य।
- सेस: दोनों रिजीम में टैक्स (और सरचार्ज, अगर हो) पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस जुड़ता है।
- सरचार्ज: दोनों रिजीम में ₹50 लाख से ज्यादा आय पर लगता है। नई रिजीम में सबसे ऊंची दर 25% पर सीमित है, जबकि पुरानी रिजीम में ₹5 करोड़ से ऊपर यह 37% तक जाती है।
हर स्लैब का पूरा ब्योरा देखने के लिए पढ़ें FY 2026-27 के इनकम टैक्स स्लैब।
नई रिजीम में आप क्या छोड़ते हैं
नई रिजीम डिडक्शन के बदले कम दरें देती है। इसमें ये नहीं मिलते:
- सेक्शन 123 (पुराना 80C): EPF, PPF, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस, होम लोन का मूलधन, ट्यूशन फीस वगैरह, ₹1.5 लाख तक
- सेक्शन 124 के तहत NPS में खुद का योगदान (पुराना 80CCD(1B)): अतिरिक्त ₹50,000
- सेक्शन 126 (पुराना 80D): हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम
- खुद रहने वाले घर के होम लोन का ब्याज (पुराना सेक्शन 24(b)): ₹2 लाख तक
- HRA और LTA की छूट
- चैप्टर VIII के ज्यादातर दूसरे डिडक्शन (एजुकेशन लोन का ब्याज, दान वगैरह)
नई रिजीम में क्या अब भी मिलता है:
- ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन
- आपके NPS अकाउंट में एम्प्लॉयर का योगदान (पुराना 80CCD(2))
- किराए पर दिए घर के होम लोन का ब्याज, उसी घर के किराए के सामने
ब्रेकईवन डिडक्शन: फैसले की टेबल
सबसे सही तुलना यह है कि पुरानी रिजीम का टैक्स नई रिजीम के बराबर लाने के लिए आपको कितने डिडक्शन और छूट चाहिए। नीचे की टेबल 60 साल से कम उम्र के रेजिडेंट नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए है। "जरूरी डिडक्शन" का मतलब है ₹50,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा जो भी आप क्लेम करते हैं: 80C, 80D, NPS, होम लोन का ब्याज, HRA छूट वगैरह।
| ग्रॉस सैलरी | नई रिजीम में टैक्स (4% सेस सहित) | बिना डिडक्शन पुरानी रिजीम में टैक्स (सेस सहित) | पुरानी रिजीम के ब्रेकईवन के लिए जरूरी डिडक्शन |
|---|---|---|---|
| ₹8 लाख | ₹0 | ₹65,000 | ₹2.5 लाख |
| ₹10 लाख | ₹0 | ₹1,06,600 | ₹4.5 लाख |
| ₹12.75 लाख | ₹0 | ₹1,87,200 | ₹7.25 लाख |
| ₹15 लाख | ₹97,500 | ₹2,57,400 | ₹5.44 लाख |
| ₹18 लाख | ₹1,50,800 | ₹3,51,000 | ₹6.42 लाख |
| ₹20 लाख | ₹1,92,400 | ₹4,13,400 | ₹7.08 लाख |
| ₹25 लाख | ₹3,19,800 | ₹5,69,400 | ₹8 लाख |
| ₹30 लाख | ₹4,75,800 | ₹7,25,400 | ₹8 लाख |
| ₹50 लाख | ₹10,99,800 | ₹13,49,400 | ₹8 लाख |
तीन बातें साफ दिखती हैं:
- ₹12.75 लाख सैलरी तक नई रिजीम लगभग हमेशा जीतती है। इसमें टैक्स शून्य है, इसलिए पुरानी रिजीम ज्यादा से ज्यादा बराबरी कर सकती है। बराबरी के लिए इतने डिडक्शन चाहिए कि पुरानी रिजीम में टैक्सेबल इनकम ₹5 लाख तक आ जाए।
- ₹15 से ₹24 लाख के बीच ब्रेकईवन करीब ₹5.4 लाख से बढ़कर ₹8 लाख हो जाता है। नई रिजीम के बीच वाले स्लैब (10–25%) पुरानी रिजीम के 20% और 30% से काफी नरम हैं।
- करीब ₹24.75 लाख सैलरी से ऊपर ब्रेकईवन ₹8 लाख पर स्थिर रहता है। वहां दोनों रिजीम में मार्जिनल दर 30% है, इसलिए फर्क बदलना बंद हो जाता है। सेस दोनों आंकड़ों को बराबर 4% बढ़ाता है, इसलिए ब्रेकईवन पॉइंट नहीं बदलता।
₹50 लाख से ऊपर सरचार्ज आ जाता है और उसकी अधिकतम सीमा दोनों रिजीम में अलग है, इसलिए अपने आंकड़े इनकम टैक्स कैलकुलेटर में डालकर देखें।
उदाहरण: ₹20 लाख सैलरी
प्रिया सालाना ₹20 लाख कमाती है। वह पुराने 80C में ₹1.5 लाख, पुराने 80D में ₹25,000, पुराने 80CCD(1B) में NPS के ₹50,000, होम लोन के ब्याज के ₹2 लाख और ₹2.4 लाख की HRA छूट क्लेम करती है। कुल ₹6.65 लाख।
नई रिजीम
- टैक्सेबल इनकम: ₹20,00,000 − ₹75,000 = ₹19,25,000
- टैक्स: ₹20,000 (4–8 लाख) + ₹40,000 (8–12 लाख) + ₹60,000 (12–16 लाख) + ₹65,000 (₹3.25 लाख का 20%) = ₹1,85,000
- साथ में 4% सेस (₹7,400) = ₹1,92,400
पुरानी रिजीम
- टैक्सेबल इनकम: ₹20,00,000 − ₹50,000 − ₹6,65,000 = ₹12,85,000
- टैक्स: ₹12,500 (2.5–5 लाख) + ₹1,00,000 (5–10 लाख) + ₹85,500 (₹2.85 लाख का 30%) = ₹1,98,000
- साथ में 4% सेस (₹7,920) = ₹2,05,920
₹6.65 लाख के डिडक्शन के बावजूद प्रिया को पुरानी रिजीम में ₹13,520 ज्यादा टैक्स देना पड़ता है। सिर्फ बराबरी के लिए उसे करीब ₹43,000 के और डिडक्शन चाहिए (कुल लगभग ₹7.08 लाख)।
₹12 लाख से थोड़ा ऊपर मार्जिनल रिलीफ
नई रिजीम में जिसकी टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से थोड़ी ज्यादा है, उसकी ₹60,000 की पूरी रिबेट चली जाती है। रिलीफ न हो तो ₹10,000 की अतिरिक्त आय पर ₹61,500 टैक्स बन जाता। मार्जिनल रिलीफ टैक्स को उस रकम तक सीमित करता है जितनी आय ₹12 लाख से ज्यादा है। इसलिए ₹12.1 लाख की टैक्सेबल इनकम पर टैक्स ₹10,000 और 4% सेस, यानी ₹10,400 है।
यह रिलीफ करीब ₹12,70,588 की टैक्सेबल इनकम पर खत्म हो जाता है। उस बिंदु पर सामान्य स्लैब टैक्स (₹60,000 + अतिरिक्त आय का 15%) अतिरिक्त आय के बराबर हो जाता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह करीब ₹13.46 लाख की ग्रॉस सैलरी है। मार्जिनल रिलीफ सिर्फ रेजिडेंट व्यक्तियों को और सिर्फ नई रिजीम में मिलता है।
तीन स्टेप में फैसला कैसे करें
- अपने असली डिडक्शन और छूट जोड़ें। सिर्फ वही पैसा गिनें जो आप वैसे भी खर्च या निवेश करते: EPF, सच में चुकाया जाने वाला किराया, पहले से चल रहा होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस।
- इस रकम की तुलना ऊपर की टेबल में अपनी सैलरी के ब्रेकईवन से करें।
- अगर आंकड़े करीब हैं, तो नई रिजीम की तरफ झुकें। इससे आपका पैसा लिक्विड रहता है और टैक्स बचाने के लिए लॉक-इन में नहीं फंसना पड़ता। जब नई रिजीम में पहले से कम टैक्स लग रहा हो, तब सिर्फ डिडक्शन के लिए निवेश करना शायद ही समझदारी है।
बिना बिजनेस आय वाले नौकरीपेशा लोग हर साल रिटर्न भरते समय रिजीम चुन सकते हैं। TDS के लिए एम्प्लॉयर को बताया गया विकल्प आपको बांधता नहीं है। अगर आप पुरानी रिजीम चुनते हैं, तो ₹1.5 लाख की सीमा का सही इस्तेमाल करने के लिए हमारी 80C के तहत टैक्स बचाने के विकल्प गाइड पढ़ें।
मुख्य बातें
- FY 2026-27 से नई रिजीम इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 का सेक्शन 202 है, और पुराने 80C/80D डिडक्शन अब सेक्शन 123/126 हैं।
- नई रिजीम में ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम (₹12.75 लाख सैलरी) पर टैक्स शून्य है। मार्जिनल रिलीफ करीब ₹12.71 लाख की टैक्सेबल इनकम तक मिलता है।
- पुरानी रिजीम बड़े डिडक्शन पर ही बराबरी कर पाती है: ₹15 लाख सैलरी पर करीब ₹5.4 लाख, जो लगभग ₹25 लाख से ऊपर ₹8 लाख तक पहुंच जाता है।
- 4% सेस दोनों रिजीम में लगता है और ब्रेकईवन पॉइंट नहीं बदलता।
- हर साल दोबारा जांचें। आपकी सैलरी, किराया और लोन बदलते हैं, और नौकरीपेशा टैक्सपेयर रिटर्न भरते समय रिजीम बदल सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹12.75 लाख की सैलरी के लिए कौन सी टैक्स रिजीम बेहतर है?
नई रिजीम। ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख रहती है और रिबेट से टैक्स शून्य हो जाता है। पुरानी रिजीम में टैक्स शून्य करने के लिए आपको करीब ₹7.25 लाख के डिडक्शन चाहिए, जो ज्यादातर लोगों के लिए संभव नहीं है।
कितने डिडक्शन पर पुरानी रिजीम बेहतर हो जाती है?
यह आय पर निर्भर करता है। नौकरीपेशा लोगों के लिए ब्रेकईवन ₹15 लाख सैलरी पर लगभग ₹5.4 लाख के डिडक्शन, ₹20 लाख पर करीब ₹7.1 लाख, और ₹25 लाख और उससे ऊपर सीधे ₹8 लाख है। यहां डिडक्शन में ₹50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल नहीं है।
क्या नौकरीपेशा व्यक्ति हर साल नई और पुरानी रिजीम में बदलाव कर सकता है?
हां। जिस व्यक्ति की बिजनेस या प्रोफेशनल आय नहीं है, वह हर साल रिटर्न भरते समय रिजीम चुन सकता है। बिजनेस आय वालों के लिए बार-बार रिजीम बदलने के विकल्प काफी सीमित हैं।
क्या FY 2026-27 से नई टैक्स रिजीम डिफॉल्ट है?
हां। नई रिजीम, जो अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 का सेक्शन 202 (पुराना सेक्शन 115BAC) है, तब तक लागू होती है जब तक आप तय तरीके से पुरानी रिजीम नहीं चुनते।
क्या नई टैक्स रिजीम में 80C का फायदा मिलता है?
नहीं। सेक्शन 123 (पुराना सेक्शन 80C), सेक्शन 126 (पुराना 80D) और चैप्टर VIII के ज्यादातर दूसरे डिडक्शन सिर्फ पुरानी रिजीम में मिलते हैं। एम्प्लॉयर का NPS योगदान उन गिने-चुने डिडक्शन में से एक है जो नई रिजीम में अब भी मिलते हैं।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।