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इनकम टैक्स स्लैब FY 2026-27: नई और पुरानी रिजीम की दरें

FY 2026-27 (टैक्स ईयर 2026-27) के लिए नई और पुरानी टैक्स रिजीम के इनकम टैक्स स्लैब, रिबेट, मार्जिनल रिलीफ, सरचार्ज, सेस और उदाहरण।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
इनकम टैक्स स्लैब FY 2026-27: नई और पुरानी रिजीम की दरें
इस लेख में
  1. इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 और "टैक्स ईयर" 2026-27
  2. नई टैक्स रिजीम के स्लैब FY 2026-27 (डिफॉल्ट)
  3. पुरानी टैक्स रिजीम के स्लैब FY 2026-27
  4. सरचार्ज और सेस
  5. ₹12 लाख के पास मार्जिनल रिलीफ (नई रिजीम)
  6. पांच स्टेप में अपना टैक्स कैसे निकालें
  7. उदाहरण से समझें (नई रिजीम, नौकरीपेशा)
  8. मुख्य बातें
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FY 2026-27 के इनकम टैक्स स्लैब पिछले साल जैसे ही हैं। नई रिजीम में ₹4 लाख तक की आय पर टैक्स शून्य है, दरें 5% के कदमों में बढ़कर ₹24 लाख से ऊपर 30% तक जाती हैं, और रिबेट की वजह से ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम टैक्स-फ्री रहती है। पुरानी रिजीम में 5%, 20% और 30% वाले स्लैब बने हुए हैं। नया सिर्फ कानून है: 1 अप्रैल 2026 से ये दरें इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 में हैं।

इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 और "टैक्स ईयर" 2026-27

इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से 1961 के कानून की जगह ले ली है। स्लैब टेबल पढ़ते समय दो बदलाव ध्यान रखें:

  • "प्रीवियस ईयर" और "असेसमेंट ईयर" की जगह अब "टैक्स ईयर" है। 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच कमाई गई आय सीधे टैक्स ईयर 2026-27 कहलाती है। कई जगह आपको अब भी "FY 2026-27 / AY 2027-28" दिखेगा। दोनों का मतलब एक ही आय है।
  • सेक्शन के नंबर बदल गए हैं। नई रिजीम अब सेक्शन 202 (पुराना सेक्शन 115BAC) है। रिबेट अब सेक्शन 156 (पुराना सेक्शन 87A) है। पुराने 80C जैसे डिडक्शन चैप्टर VIII में चले गए हैं, जो सेक्शन 123 से शुरू होता है।

FY 2025-26 के रिटर्न, जो 2026 में भरे जा रहे हैं, अब भी 1961 के कानून और उसके पुराने सेक्शन नंबरों के हिसाब से ही भरे जाएंगे।

नई टैक्स रिजीम के स्लैब FY 2026-27 (डिफॉल्ट)

नई रिजीम डिफॉल्ट रूप से लागू होती है। इसमें हर व्यक्ति के लिए, उम्र चाहे जो हो, एक जैसे स्लैब हैं।

टैक्सेबल इनकम दर स्लैब के ऊपरी छोर पर टैक्स (कुल, सेस से पहले)
₹4,00,000 तक शून्य ₹0
₹4,00,001 – ₹8,00,000 5% ₹20,000
₹8,00,001 – ₹12,00,000 10% ₹60,000
₹12,00,001 – ₹16,00,000 15% ₹1,20,000
₹16,00,001 – ₹20,00,000 20% ₹2,00,000
₹20,00,001 – ₹24,00,000 25% ₹3,00,000
₹24,00,000 से ऊपर 30% —

नई रिजीम की दूसरी खास बातें:

  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: सैलरी और पेंशन की आय पर ₹75,000।
  • रिबेट (सेक्शन 156): ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम वाले रेजिडेंट व्यक्तियों को ₹60,000 तक। इसलिए ₹12 लाख तक की सामान्य आय टैक्स-फ्री है, या स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद ₹12.75 लाख तक की सैलरी।
  • स्पेशल रेट वाली आय पर रिबेट नहीं मिलती। इक्विटी STCG और LTCG जैसे स्पेशल रेट पर टैक्स होने वाले कैपिटल गेन पर टैक्स देना होगा, भले ही आपकी कुल आय ₹12 लाख से कम हो। देखें म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स।
  • डिडक्शन: लगभग कोई नहीं। एम्प्लॉयर का NPS योगदान उन गिने-चुने डिडक्शन में से एक है जो मिलते हैं।

पुरानी टैक्स रिजीम के स्लैब FY 2026-27

पुरानी रिजीम आपको खुद चुननी होती है। इसके स्लैब उम्र पर निर्भर करते हैं।

टैक्सेबल इनकम 60 साल से कम 60 से 79 साल (रेजिडेंट) 80 साल और ऊपर (रेजिडेंट)
₹2,50,000 तक शून्य शून्य शून्य
₹2,50,001 – ₹3,00,000 5% शून्य शून्य
₹3,00,001 – ₹5,00,000 5% 5% शून्य
₹5,00,001 – ₹10,00,000 20% 20% 20%
₹10,00,000 से ऊपर 30% 30% 30%
  • स्टैंडर्ड डिडक्शन: सैलरी और पेंशन पर ₹50,000।
  • रिबेट: ₹5 लाख तक की टैक्सेबल इनकम वाले रेजिडेंट को ₹12,500 तक, यानी ₹5 लाख तक की आय टैक्स-फ्री है।
  • डिडक्शन: सेक्शन 123 (पुराना 80C, ₹1.5 लाख तक), सेक्शन 126 (पुराना 80D), सेक्शन 124 के तहत NPS, होम लोन का ब्याज, HRA और भी बहुत कुछ।

सरचार्ज और सेस

दोनों रिजीम में इनकम टैक्स और सरचार्ज पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस लगता है।

ज्यादा आय पर सरचार्ज लगता है:

कुल आय सरचार्ज (नई रिजीम) सरचार्ज (पुरानी रिजीम)
₹50 लाख – ₹1 करोड़ 10% 10%
₹1 करोड़ – ₹2 करोड़ 15% 15%
₹2 करोड़ – ₹5 करोड़ 25% 25%
₹5 करोड़ से ऊपर 25% 37%

डिविडेंड और इक्विटी कैपिटल गेन पर सरचार्ज अधिकतम 15% है। हर सरचार्ज सीमा के ठीक ऊपर भी मार्जिनल रिलीफ मिलता है। इससे टैक्स अतिरिक्त आय से ज्यादा नहीं बढ़ता।

₹12 लाख के पास मार्जिनल रिलीफ (नई रिजीम)

₹60,000 की रिबेट या तो पूरी मिलती है या बिल्कुल नहीं: टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख पार करते ही यह खत्म हो जाती है। अगर कोई उपाय न हो, तो ₹10,000 ज्यादा कमाने पर ₹61,500 टैक्स देना पड़ सकता है। मार्जिनल रिलीफ इसी समस्या को सुलझाता है। यह टैक्स (सेस से पहले) को उस रकम तक सीमित कर देता है जितनी टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से ज्यादा है।

टैक्सेबल इनकम स्लैब टैक्स मार्जिनल रिलीफ के बाद टैक्स 4% सेस के साथ
₹12,00,000 ₹60,000 ₹0 (पूरी रिबेट) ₹0
₹12,10,000 ₹61,500 ₹10,000 ₹10,400
₹12,50,000 ₹67,500 ₹50,000 ₹52,000
₹12,70,000 ₹70,500 ₹70,000 ₹72,800
₹12,75,000 ₹71,250 ₹71,250 (कोई रिलीफ नहीं) ₹74,100

रिलीफ वहां खत्म होता है जहां स्लैब टैक्स अतिरिक्त आय के बराबर हो जाता है: ₹60,000 + 15% × अतिरिक्त आय = अतिरिक्त आय, यानी अतिरिक्त आय करीब ₹70,588 है। इसलिए मार्जिनल रिलीफ लगभग ₹12,70,588 की टैक्सेबल इनकम तक मिलता है, जो करीब ₹13.46 लाख सैलरी के बराबर है। कई जगह इसकी सीमा "₹12.75 लाख" बताई जाती है। असल में यह वह सैलरी है जिससे ठीक ₹12 लाख की टैक्सेबल इनकम बनती है, मार्जिनल रिलीफ की आखिरी सीमा नहीं।

पांच स्टेप में अपना टैक्स कैसे निकालें

  1. कुल ग्रॉस इनकम जोड़ें: सैलरी, सेविंग्स और FD का ब्याज, किराया, बिजनेस की आय और कैपिटल गेन।
  2. आपकी रिजीम में जो छूट मिलती है, उसे घटाएं। नई रिजीम में यह मुख्य रूप से ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन है। पुरानी रिजीम में ₹50,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन और चैप्टर VIII के डिडक्शन, जैसे सेक्शन 123 (पुराना 80C) और सेक्शन 126 (पुराना 80D), साथ में HRA जैसी छूट।
  3. सामान्य आय पर स्लैब दरें लगाएं, एक-एक स्लैब करके। हर स्लैब के अंदर आने वाले हिस्से पर ही उस स्लैब की दर लगती है, इसलिए ऊंचे स्लैब में जाने से नीचे वाली आय पर टैक्स कभी नहीं बढ़ता।
  4. अगर आप पात्र हैं तो रिबेट या मार्जिनल रिलीफ लगाएं, फिर इक्विटी कैपिटल गेन जैसी स्पेशल रेट वाली आय का टैक्स जोड़ें।
  5. सरचार्ज (अगर हो) और 4% सेस जोड़ें। पहले से कटा TDS और भरा हुआ एडवांस टैक्स घटाकर देखें कि कितना टैक्स बाकी है, या कितना रिफंड मिलेगा।

उदाहरण से समझें (नई रिजीम, नौकरीपेशा)

उदाहरण 1: ₹12.75 लाख सैलरी टैक्सेबल इनकम = ₹12,75,000 − ₹75,000 = ₹12,00,000। स्लैब टैक्स = ₹60,000। ₹60,000 की रिबेट के बाद टैक्स शून्य।

उदाहरण 2: ₹18 लाख सैलरी टैक्सेबल इनकम = ₹18,00,000 − ₹75,000 = ₹17,25,000।

  • ₹4–8 लाख पर 5% = ₹20,000
  • ₹8–12 लाख पर 10% = ₹40,000
  • ₹12–16 लाख पर 15% = ₹60,000
  • ₹16–17.25 लाख पर 20% = ₹25,000
  • टैक्स = ₹1,45,000; साथ में 4% सेस (₹5,800) = ₹1,50,800

उदाहरण 3: ₹30 लाख सैलरी टैक्सेबल इनकम = ₹29,25,000। ₹24 लाख तक टैक्स = ₹3,00,000। बाकी ₹5,25,000 पर 30% से ₹1,57,500 और जुड़ते हैं। टैक्स = ₹4,57,500; साथ में सेस (₹18,300) = ₹4,75,800।

यही ₹18 लाख सैलरी पुरानी रिजीम में सिर्फ ₹1.5 लाख के 80C डिडक्शन के साथ हो, तो टैक्सेबल इनकम ₹16 लाख बनती है। इस पर ₹2,92,500 + सेस = ₹3,04,200 टैक्स लगता है, यानी करीब दोगुना। हमारी नई बनाम पुरानी टैक्स रिजीम गाइड बताती है कि पुरानी रिजीम फायदेमंद होने के लिए आपको कितने डिडक्शन चाहिए। अपने आंकड़े आप इनकम टैक्स कैलकुलेटर में जांच सकते हैं।

मुख्य बातें

  • FY 2026-27 के स्लैब नहीं बदले: नई रिजीम में ₹4 लाख तक शून्य, फिर 5% के कदमों में ₹24 लाख से ऊपर 30% तक। पुरानी रिजीम में ₹2.5 लाख से ऊपर 5%/20%/30%।
  • ये दरें अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 में हैं। नई रिजीम सेक्शन 202 (पुराना 115BAC) और रिबेट सेक्शन 156 (पुराना 87A) है।
  • नई रिजीम में ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम टैक्स-फ्री है (₹12.75 लाख सैलरी)। मार्जिनल रिलीफ लगभग ₹12.71 लाख की टैक्सेबल इनकम तक टैक्स के झटके को कम करता है।
  • पूरे टैक्स और सरचार्ज पर 4% सेस लगता है। सरचार्ज ₹50 लाख से शुरू होता है और नई रिजीम में अधिकतम 25% है।
  • स्पेशल रेट वाले कैपिटल गेन के टैक्स पर रिबेट नहीं मिलती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

FY 2026-27 के लिए नई टैक्स रिजीम के इनकम टैक्स स्लैब क्या हैं?

₹4 लाख तक शून्य, ₹4 से 8 लाख पर 5%, ₹8 से 12 लाख पर 10%, ₹12 से 16 लाख पर 15%, ₹16 से 20 लाख पर 20%, ₹20 से 24 लाख पर 25% और ₹24 लाख से ऊपर 30%। ये स्लैब FY 2025-26 जैसे ही हैं, इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

क्या FY 2026-27 में ₹12 लाख तक की आय टैक्स-फ्री है?

नई रिजीम में जिस रेजिडेंट व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख तक है, उसे सेक्शन 156 (पुराना सेक्शन 87A) के तहत ₹60,000 तक की रिबेट की वजह से कोई टैक्स नहीं देना होता। नौकरीपेशा लोगों के लिए ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन से यह सीमा ₹12.75 लाख सैलरी तक पहुंच जाती है।

नई रिजीम में ₹13 लाख की आय पर कितना टैक्स लगेगा?

₹13 लाख की टैक्सेबल इनकम पर स्लैब टैक्स ₹75,000 है, और इस स्तर पर मार्जिनल रिलीफ लागू नहीं होता, इसलिए आपको ₹75,000 और 4% सेस, यानी ₹78,000 देने होंगे। ₹13 लाख की सैलरी पर टैक्सेबल इनकम ₹12.25 लाख होती है और मार्जिनल रिलीफ से टैक्स ₹25,000 और सेस तक सीमित रहता है।

FY 2026-27 और AY 2027-28 में क्या फर्क है?

1961 के कानून में FY 2026-27 में कमाई गई आय का असेसमेंट AY 2027-28 में होता था। इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 ने इन दोनों शब्दों की जगह एक ही 'टैक्स ईयर' रखा है, इसलिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच की आय टैक्स ईयर 2026-27 कहलाती है।

क्या नई रिजीम में सीनियर सिटीजन को ज्यादा छूट सीमा मिलती है?

नहीं। नई रिजीम में हर उम्र के लिए एक जैसे स्लैब हैं। पुरानी रिजीम में 60 से 79 साल के रेजिडेंट के लिए ₹3 लाख और 80 साल या उससे ज्यादा उम्र वालों के लिए ₹5 लाख की बेसिक छूट सीमा बनी हुई है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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