म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स 2026-27: इक्विटी बनाम डेट
FY 2026-27 में म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स: ₹1.25 लाख से ऊपर इक्विटी LTCG पर 12.5%, STCG पर 20% और अप्रैल 2023 के बाद खरीदे डेट फंड पर स्लैब रेट।

इस लेख में
म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि फंड किस तरह का है और आपने उसे कितने समय तक रखा। 12 महीने से ज्यादा रखे गए इक्विटी फंड पर साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के मुनाफे पर 12.5% टैक्स लगता है, और 12 महीने के अंदर बेचने पर 20%। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट फंड पर, होल्डिंग पीरियड चाहे जो हो, आपके इनकम स्लैब रेट से टैक्स लगता है। यहां FY 2026-27 का पूरा ब्योरा उदाहरणों के साथ दिया गया है।
आयकर अधिनियम, 2025 से क्या बदला
1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 ने 1961 के अधिनियम की जगह ले ली है। दरें नहीं बदलीं, लेकिन जानी-पहचानी धाराओं के नंबर बदल गए:
| मुनाफे का प्रकार | पुरानी धारा (1961 अधिनियम) | नई धारा (2025 अधिनियम) | दर |
|---|---|---|---|
| इक्विटी शेयर / इक्विटी फंड पर STCG (STT भरा हुआ) | 111A | 196 | 20% |
| इक्विटी शेयर / इक्विटी फंड पर LTCG | 112A | 198 | ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5% |
| दूसरी संपत्तियों पर LTCG (नॉन-इक्विटी फंड यूनिट्स समेत) | 112 | 197 | 12.5%, बिना इंडेक्सेशन |
| स्पेसिफाइड (डेट) म्यूचुअल फंड पर डीम्ड STCG | 50AA | 2025 अधिनियम में शामिल | स्लैब रेट |
FY 2025-26 में हुई बिक्री पुराने नंबरों के तहत रिपोर्ट होती है। 1 अप्रैल 2026 से होने वाली बिक्री नए अधिनियम के तहत आती है।
टैक्स के लिए म्यूचुअल फंड का वर्गीकरण कैसे होता है
टैक्स फंड के पोर्टफोलियो से तय होता है, उसके नाम से नहीं:
- इक्विटी-ओरिएंटेड फंड: 65% से ज्यादा हिस्सा घरेलू लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में। जैसे ज्यादातर लार्ज-कैप, मिड-कैप, फ्लेक्सी-कैप और इंडेक्स फंड, ELSS और आर्बिट्राज फंड।
- स्पेसिफाइड म्यूचुअल फंड (डेट): 65% से ज्यादा हिस्सा डेट और मनी-मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में, या ऐसा फंड ऑफ फंड्स जो 65% या उससे ज्यादा ऐसे फंड्स में लगाता है। जैसे लिक्विड, गिल्ट, कॉरपोरेट बॉन्ड और ज्यादातर डेट फंड। यह परिभाषा FY 2025-26 से लागू है।
- दूसरे फंड: इनके बीच वाले फंड, जैसे 35–65% इक्विटी वाले कुछ हाइब्रिड फंड, गोल्ड फंड और इंटरनेशनल फंड ऑफ फंड्स। इन पर कैपिटल गेन के सामान्य नियम लागू होते हैं।
आपके फंड हाउस की फैक्टशीट या AMFI कैटेगरी से पता चलता है कि स्कीम किस श्रेणी में आती है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड
| होल्डिंग पीरियड | प्रकार | टैक्स दर |
|---|---|---|
| 12 महीने तक | STCG | 20% |
| 12 महीने से ज्यादा | LTCG | साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के मुनाफे पर 12.5% |
खास बातें:
- ₹1.25 लाख की छूट साझा है। यह एक साल में लिस्टेड शेयर, इक्विटी फंड और बिजनेस ट्रस्ट यूनिट्स से हुए आपके सारे लॉन्ग-टर्म मुनाफे को कवर करती है।
- इक्विटी LTCG पर इंडेक्सेशन नहीं मिलता।
- ग्रैंडफादरिंग: 1 फरवरी 2018 से पहले खरीदी गई यूनिट्स के लिए लागत असली लागत और 31 जनवरी 2018 की NAV में से जो ज्यादा हो, वह ली जा सकती है (बिक्री मूल्य की सीमा तक)।
- इन मुनाफों पर सरचार्ज अधिकतम 15% है, और उसके ऊपर 4% सेस लगता है।
- रिबेट: नई रिजीम में धारा 156 (पुरानी 87A) की रिबेट इन खास दर वाले मुनाफों पर लगने वाले टैक्स को कवर नहीं करती।
डेट म्यूचुअल फंड: 1 अप्रैल 2023 की कट-ऑफ
वित्त अधिनियम, 2023 के बाद से यह ज्यादा मायने रखता है कि आपने यूनिट्स कब खरीदीं, न कि कितने समय तक रखीं।
| खरीद की तारीख | होल्डिंग पीरियड | टैक्स |
|---|---|---|
| 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद | कोई भी | डीम्ड STCG, आपके स्लैब रेट से टैक्स |
| 1 अप्रैल 2023 से पहले | 24 महीने से ज्यादा | 12.5% LTCG, बिना इंडेक्सेशन |
| 1 अप्रैल 2023 से पहले | 24 महीने या कम | स्लैब रेट पर STCG |
1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदी गई यूनिट्स के लिए लॉन्ग-टर्म कैटेगरी है ही नहीं। पांच दिन रखा गया लिक्विड फंड और पांच साल रखा गया गिल्ट फंड, दोनों पर एक जैसा टैक्स लगता है: मुनाफा आपकी आय में जुड़ जाता है। 30% स्लैब में इसका मतलब सेस मिलाकर 31.2% है।
पुरानी यूनिट्स पर 23 जुलाई 2024 या उसके बाद की बिक्री में इंडेक्सेशन खत्म हो गया। उससे पहले इन पर इंडेक्सेशन के साथ 20% टैक्स लगता था। अब 24 महीने के बाद सीधे 12.5% लगता है।
हाइब्रिड, गोल्ड और इंटरनेशनल फंड
जो फंड न इक्विटी-ओरिएंटेड हैं और न स्पेसिफाइड डेट फंड, उन पर सामान्य नियम लागू होते हैं। 24 महीने से ज्यादा रखी गई यूनिट्स पर बिना इंडेक्सेशन 12.5% LTCG लगता है। कम समय रखने पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है। ETF जैसी एक्सचेंज पर लिस्टेड यूनिट्स लिस्टेड सिक्योरिटी मानी जाती हैं, इसलिए उनकी लॉन्ग-टर्म सीमा 12 महीने है। FY 2025-26 से स्पेसिफाइड फंड की परिभाषा छोटी कर दी गई है, इसलिए स्लैब रेट मानने से पहले फंड का मौजूदा वर्गीकरण जरूर जांचें।
उदाहरण 1: इक्विटी फंड
राहुल ने एक फ्लेक्सी-कैप फंड में ₹5,00,000 लगाए और तीन साल बाद ₹7,50,000 में बेच दिए। उस साल उनका कोई और इक्विटी मुनाफा नहीं है।
- मुनाफा: ₹7,50,000 − ₹5,00,000 = ₹2,50,000 (लॉन्ग-टर्म, 12 महीने से ज्यादा रखा)
- छूट: ₹1,25,000
- टैक्स योग्य LTCG: ₹1,25,000 × 12.5% = ₹15,625
- साथ में 4% सेस (₹625) = ₹16,250
उनका CAGR (7.5 ÷ 5)^(1/3) − 1 ≈ 14.5% सालाना रहा। टैक्स के बाद ₹2,50,000 के मुनाफे में से उनके पास ₹2,33,750 बचते हैं। किसी भी फंड का सालाना रिटर्न आप CAGR कैलकुलेटर से माप सकते हैं।
अगर राहुल उतने ही ₹2,50,000 मुनाफे के साथ 12 महीने के अंदर बेचते, तो पूरी रकम पर 20% देना पड़ता: ₹50,000 + सेस = ₹52,000।
उदाहरण 2: अप्रैल 2023 से पहले और बाद का डेट फंड
मीरा 30% स्लैब में हैं। उनकी दो कॉरपोरेट बॉन्ड फंड होल्डिंग्स में से हर एक पर ₹1,00,000 का मुनाफा है, और दोनों तीन साल रखी गईं:
| होल्डिंग | खरीदी | टैक्स | 4% सेस समेत टैक्स |
|---|---|---|---|
| A | मार्च 2023 | 12.5% LTCG (24 महीने से ज्यादा रखी) | ₹13,000 |
| B | जून 2023 | 30% स्लैब पर डीम्ड STCG | ₹31,200 |
फंड का प्रकार वही, मुनाफा वही, होल्डिंग पीरियड वही। सिर्फ तीन महीने बाद खरीदने से ₹18,200 ज्यादा टैक्स लगता है। इसीलिए कई निवेशक स्कीम बदलने के बजाय अप्रैल 2023 से पहले की डेट यूनिट्स संभालकर रखते हैं।
काम की सलाह
- एसआईपी पर टैक्स हर किस्त के हिसाब से लगता है। बिक्री फर्स्ट-इन, फर्स्ट-आउट से होती है, यानी सबसे पुरानी यूनिट्स पहले बिकती हैं।
- हर साल इक्विटी मुनाफा हार्वेस्ट करें। ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग-टर्म इक्विटी मुनाफा बुक करके दोबारा निवेश करने से आपकी लागत रीसेट हो जाती है। इससे आगे की टैक्स दरें कम नहीं होतीं, लेकिन वह छूट इस्तेमाल हो जाती है जो वरना बेकार चली जाती।
- घाटे को सेट ऑफ करें। शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस को शॉर्ट- और लॉन्ग-टर्म दोनों मुनाफों से सेट ऑफ किया जा सकता है। लॉन्ग-टर्म लॉस सिर्फ लॉन्ग-टर्म मुनाफे से सेट ऑफ होता है। समय पर रिटर्न भरने पर बचा हुआ घाटा आठ साल तक आगे ले जाया जा सकता है।
- स्विच करना भी बिक्री है। एक स्कीम से दूसरी में जाना, या उसी स्कीम के रेगुलर से डायरेक्ट प्लान में जाना, रिडेम्प्शन माना जाता है और इस पर टैक्स लग सकता है। देखें डायरेक्ट बनाम रेगुलर म्यूचुअल फंड।
- डिविडेंड (IDCW) पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है, और फंड हाउस TDS काट सकता है। ज्यादातर निवेशकों के लिए ग्रोथ ऑप्शन टैक्स के लिहाज से बेहतर है।
कैपिटल गेन आपकी दूसरी आय के साथ कैसे जुड़ता है, यह जानने के लिए देखें FY 2026-27 के इनकम टैक्स स्लैब।
मुख्य बातें
- इक्विटी फंड: 12 महीने के अंदर 20% STCG, और 12 महीने के बाद साल में ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5% LTCG। ये अब आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 196 और 198 (पुरानी 111A और 112A) हैं।
- 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट फंड पर, होल्डिंग पीरियड चाहे जो हो, बिना इंडेक्सेशन आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है।
- 1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदी और 24 महीने से ज्यादा रखी डेट यूनिट्स पर बिना इंडेक्सेशन 12.5% लगता है।
- जो हाइब्रिड, गोल्ड और इंटरनेशनल फंड न इक्विटी हैं न स्पेसिफाइड डेट फंड, उन पर 24 महीने के बाद 12.5% LTCG लगता है।
- इन सब पर 4% सेस जोड़ें। नई रिजीम की ₹12 लाख की रिबेट खास दर वाले इक्विटी मुनाफे पर लगने वाले टैक्स को कवर नहीं करती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इक्विटी म्यूचुअल फंड के मुनाफे पर कितना टैक्स लगता है?
अगर आप यूनिट्स 12 महीने से ज्यादा रखते हैं, तो मुनाफा लॉन्ग-टर्म होता है और साल में ₹1.25 लाख से ऊपर की रकम पर 12.5% टैक्स लगता है। 12 महीने के अंदर बेचने पर मुनाफा शॉर्ट-टर्म होता है और उस पर 20% टैक्स लगता है। दोनों में 4% सेस अलग से जुड़ता है।
1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट म्यूचुअल फंड पर टैक्स कैसे लगता है?
1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट फंड का मुनाफा, होल्डिंग पीरियड चाहे जो हो, शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। यह आपकी आय में जुड़ता है और आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है। इसमें न इंडेक्सेशन मिलता है, न 12.5% की लॉन्ग-टर्म दर।
1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदी गई डेट फंड यूनिट्स का क्या?
1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदी गई और 24 महीने से ज्यादा रखी गई यूनिट्स लॉन्ग-टर्म होती हैं, और 23 जुलाई 2024 या उसके बाद की बिक्री पर बिना इंडेक्सेशन 12.5% टैक्स लगता है। 24 महीने या उससे कम रखने पर मुनाफे पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है।
क्या ₹1.25 लाख की LTCG छूट हर फंड पर अलग मिलती है?
नहीं। ₹1.25 लाख की छूट साल में एक बार मिलती है, और यह लिस्टेड इक्विटी शेयर, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड और बिजनेस ट्रस्ट यूनिट्स से हुए आपके कुल लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर लागू होती है, सभी ब्रोकर और फंड हाउस मिलाकर।
एसआईपी की यूनिट्स बेचने पर टैक्स कैसे लगता है?
एसआईपी की हर किस्त एक अलग खरीद है, जिसकी अपनी तारीख होती है। बिक्री फर्स्ट-इन, फर्स्ट-आउट से होती है, यानी सबसे पुरानी यूनिट्स पहले बिकती हैं, और हर किस्त का होल्डिंग पीरियड तय करता है कि उसका मुनाफा शॉर्ट-टर्म है या लॉन्ग-टर्म।
क्या ₹12 लाख की रिबेट म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेन पर भी मिलती है?
खास दर वाले मुनाफे पर नहीं। इक्विटी STCG और LTCG पर टैक्स भरना होगा, भले ही आपकी कुल आय नई रिजीम की ₹12 लाख की रिबेट सीमा के अंदर हो। स्लैब रेट पर टैक्स वाले डेट फंड का मुनाफा सामान्य आय का हिस्सा होता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।