₹5,000 या ₹10,000 महीने की एसआईपी से कितना पैसा बनेगा
₹5,000 या ₹10,000 महीने की एसआईपी 5 से 25 साल में 8%, 10% और 12% पर कितनी बढ़ सकती है: सटीक उदाहरण टेबल, स्टेप-अप एसआईपी और महंगाई का हिसाब।

इस लेख में
12% सालाना रिटर्न मानें तो 20 साल तक ₹5,000 महीने की एसआईपी (SIP) ₹12 लाख के निवेश पर उदाहरण के तौर पर ₹49.96 लाख बन जाती है; ₹10,000 महीने की एसआईपी करीब ₹99.91 लाख बनती है। 8% पर यही एसआईपी करीब ₹29.65 लाख और ₹59.29 लाख तक पहुंचती हैं। ये गणित पर आधारित अनुमान हैं, वादे नहीं: म्यूचुअल फंड का असली रिटर्न हर साल बदलता है और काफी कम भी हो सकता है, खासकर कम समय में।
नीचे के सभी आंकड़े सिर्फ उदाहरण हैं, दिए गए फॉर्मूले से सटीक निकाले गए हैं, और इनमें मानी गई रिटर्न दर में शामिल खर्च के अलावा कोई लागत, टैक्स या एग्जिट लोड नहीं जोड़ा गया है।
हर आंकड़े के पीछे का फॉर्मूला
एसआईपी की किस्त हर महीने की शुरुआत में निवेश होती है, इसलिए भविष्य की वैल्यू एन्युटी ड्यू फॉर्मूले से निकलती है:
FV = P × [((1 + i)^n − 1) ÷ i] × (1 + i)
- P = मासिक एसआईपी रकम
- i = मानी गई सालाना रिटर्न दर ÷ 12
- n = मासिक किस्तों की संख्या
उदाहरण: 12% पर 20 साल तक ₹10,000 महीना
- i = 12% ÷ 12 = 1% = 0.01
- n = 20 × 12 = 240
- (1.01)^240 = 10.8926
- (10.8926 − 1) ÷ 0.01 = 989.26
- 989.26 × 1.01 = 999.15
- 999.15 × ₹10,000 = ₹99,91,479
कुल निवेश ₹10,000 × 240 = ₹24,00,000 है, इसलिए उदाहरण में गेन ₹75,91,479 है। आखिरी वैल्यू का तीन-चौथाई से ज्यादा हिस्सा कंपाउंडिंग से आता है, और उसका ज्यादातर हिस्सा आखिरी कुछ सालों में आता है। कोई भी कॉम्बिनेशन आप एसआईपी कैलकुलेटर में जांच सकते हैं।
₹5,000 महीने की एसआईपी: उदाहरण वैल्यू
| अवधि | निवेश | 8% पर | 10% पर | 12% पर |
|---|---|---|---|---|
| 5 साल | ₹3,00,000 | ₹3,69,834 | ₹3,90,412 | ₹4,12,432 |
| 10 साल | ₹6,00,000 | ₹9,20,828 | ₹10,32,760 | ₹11,61,695 |
| 15 साल | ₹9,00,000 | ₹17,41,726 | ₹20,89,621 | ₹25,22,880 |
| 20 साल | ₹12,00,000 | ₹29,64,736 | ₹38,28,485 | ₹49,95,740 |
| 25 साल | ₹15,00,000 | ₹47,86,833 | ₹66,89,452 | ₹94,88,175 |
₹10,000 महीने की एसआईपी: उदाहरण वैल्यू
| अवधि | निवेश | 8% पर | 10% पर | 12% पर |
|---|---|---|---|---|
| 5 साल | ₹6,00,000 | ₹7,39,667 | ₹7,80,824 | ₹8,24,864 |
| 10 साल | ₹12,00,000 | ₹18,41,657 | ₹20,65,520 | ₹23,23,391 |
| 15 साल | ₹18,00,000 | ₹34,83,451 | ₹41,79,243 | ₹50,45,760 |
| 20 साल | ₹24,00,000 | ₹59,29,472 | ₹76,56,969 | ₹99,91,479 |
| 25 साल | ₹30,00,000 | ₹95,73,666 | ₹1,33,78,903 | ₹1,89,76,351 |
दो बातें साफ दिखती हैं:
- रिटर्न दर से ज्यादा समय मायने रखता है। 12% पर 20 से 25 साल करने पर ₹10,000 की एसआईपी की वैल्यू लगभग दोगुनी हो जाती है (₹99.91 लाख से ₹1.90 करोड़), जबकि निवेश सिर्फ ₹6 लाख ज्यादा होता है।
- समय के साथ रिटर्न दर का फर्क बढ़ता जाता है। 5 साल में ₹10,000 की एसआईपी पर 8% और 12% का फर्क करीब ₹85,000 है। 25 साल में यह फर्क करीब ₹94 लाख हो जाता है।
8%, 10% और 12% ही क्यों?
ये प्लानिंग के लिए गोल-मोल मान्यताएं हैं, अनुमानित रिटर्न नहीं। भारत में इक्विटी फंड का रिटर्न शुरुआत और आखिर की तारीखों के हिसाब से कुछ दौरों में 12% से काफी ऊपर रहा है और कुछ में शून्य के करीब या नेगेटिव। हाइब्रिड और डेट फंड आम तौर पर कम रिटर्न देते हैं, लेकिन उनमें उतार-चढ़ाव भी कम होता है। रेंज इस्तेमाल करने से पता चलता है कि आपका लक्ष्य रिटर्न पर कितना निर्भर है।
रेंज इसलिए भी जरूरी है क्योंकि एसआईपी रिटर्न क्रम पर निर्भर होता है। एक जैसे लंबी अवधि के औसत वाले दो निवेशकों का फंड बहुत अलग हो सकता है, अगर उनमें से एक को आखिरी सालों में बाजार गिरावट झेलनी पड़े, जब रकम सबसे बड़ी होती है। यही एक वजह है कि लक्ष्य पास आने पर धीरे-धीरे कम जोखिम वाले फंड में शिफ्ट करना चाहिए।
स्टेप-अप एसआईपी: हर साल रकम बढ़ाना
ज्यादातर लोगों की आय समय के साथ बढ़ती है। स्टेप-अप एसआईपी हर साल किस्त को एक तय प्रतिशत से बढ़ाती है।
उदाहरण: ₹5,000 महीने से शुरू करें और 20 साल तक हर साल इसे 10% बढ़ाएं (दूसरे साल ₹5,500, तीसरे साल ₹6,050, और इसी तरह), मानी गई दर 12%। हर किस्त अपनी शुरुआती तारीख से मासिक कंपाउंड होती है।
| 12% पर 20 साल का एसआईपी प्लान | कुल निवेश | उदाहरण वैल्यू |
|---|---|---|
| एक जैसी ₹5,000 महीना | ₹12,00,000 | ₹49,95,740 |
| ₹5,000, हर साल 10% स्टेप-अप | ₹34,36,500 | ₹99,44,358 |
| एक जैसी ₹10,000 महीना | ₹24,00,000 | ₹99,91,479 |
स्टेप-अप प्लान लगभग उतनी ही वैल्यू तक पहुंचता है जितनी एक जैसी ₹10,000 की एसआईपी, लेकिन शुरुआत आधी मासिक रकम से होती है। इसकी कीमत ज्यादा कुल निवेश है (₹34.37 लाख बनाम ₹24 लाख), क्योंकि बड़ी किस्तें बाद में आती हैं और उन्हें कंपाउंड होने का कम समय मिलता है।
महंगाई के बाद इन आंकड़ों की असली कीमत
20 साल बाद एक रुपये में आज के एक रुपये से कम सामान आएगा। 6% महंगाई मानें तो 20 साल में दाम (1.06)^20 = 3.2071 गुना हो जाते हैं।
| 12% पर 20 साल की एसआईपी | नॉमिनल वैल्यू | 6% महंगाई पर आज के रुपये में |
|---|---|---|
| ₹5,000 महीना | ₹49,95,740 | करीब ₹15,57,695 |
| ₹10,000 महीना | ₹99,91,479 | करीब ₹31,15,390 |
यानी 20 साल बाद का ₹1 करोड़ का फंड आज के करीब ₹31 लाख जैसा महसूस हो सकता है। रिटायरमेंट या बच्चे की पढ़ाई जैसे लक्ष्य की प्लानिंग करते समय पहले लक्ष्य को महंगाई के हिसाब से बढ़ाएं, फिर जरूरी एसआईपी निकालें।
₹1 करोड़ के लिए कितनी एसआईपी चाहिए?
फॉर्मूले को उलटकर, ₹1 करोड़ तक पहुंचने के लिए उदाहरण के तौर पर जरूरी मासिक एसआईपी:
| साल | 8% पर | 10% पर | 12% पर |
|---|---|---|---|
| 10 | ₹54,299 | ₹48,414 | ₹43,041 |
| 15 | ₹28,707 | ₹23,928 | ₹19,819 |
| 20 | ₹16,865 | ₹13,060 | ₹10,009 |
| 25 | ₹10,445 | ₹7,474 | ₹5,270 |
हर आंकड़ा ₹1,00,00,000 को ₹1 महीने के FV फैक्टर से भाग देकर निकला है; जैसे 12% पर 20 साल के लिए ₹1 करोड़ ÷ 999.15 = ₹10,009।
आपका असली नतीजा किन चीजों से घटता है
- एक्सपेंस रेशियो: फंड का TER रोज एनएवी से कटता है। डायरेक्ट प्लान रेगुलर प्लान से सस्ते होते हैं; देखें डायरेक्ट vs रेगुलर म्यूचुअल फंड।
- रिडेम्पशन पर टैक्स: अक्टूबर 2026 की स्थिति में इक्विटी फंड के सालाना ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन पर 12.5% (पुरानी धारा 112A, अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 198), और शॉर्ट-टर्म गेन पर 20% टैक्स लगता है। अप्रैल 2023 से खरीदी डेट फंड यूनिट्स के गेन पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है। पूरी जानकारी म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स में है।
- एसआईपी रोकना या बीच में ब्रेक लेना: बीच में दो-तीन साल की किस्तें छूटने से भी आखिरी वैल्यू काफी घट सकती है।
- एग्जिट लोड: कई इक्विटी फंड एक साल के अंदर यूनिट्स रिडीम करने पर करीब 1% लेते हैं।
- लक्ष्य के पास ग्लाइड पाथ न होना: अगर पैसा किसी तय साल में चाहिए, तो आखिरी दो-तीन सालों में बाजार गिरावट ठीक तब फंड घटा सकती है जब वह सबसे बड़ा होता है। लक्ष्य पास आने पर फंड का कुछ हिस्सा डेट या लिक्विड फंड में ले जाने से यह जोखिम घटता है, हालांकि इससे अनुमानित बढ़त भी कम होती है।
अगर आप एसआईपी में नए हैं, तो किस्त, एनएवी और यूनिट्स कैसे काम करते हैं यह समझने के लिए एसआईपी क्या है से शुरुआत करें।
मुख्य बातें
- 20 साल तक ₹5,000 महीना उदाहरण के तौर पर 8% पर ₹29.65 लाख और 12% पर ₹49.96 लाख देता है; ₹10,000 महीना ₹59.29 लाख और ₹99.91 लाख देता है।
- सभी अनुमान एन्युटी ड्यू फॉर्मूले से हैं और सिर्फ उदाहरण हैं; म्यूचुअल फंड के असली रिटर्न की गारंटी नहीं है।
- कुछ प्रतिशत ज्यादा रिटर्न से ज्यादा फायदा कुछ साल ज्यादा निवेश से होता है; जल्दी शुरू करना सबसे बड़ा हथियार है।
- उदाहरण में ₹5,000 की एसआईपी पर हर साल 10% का स्टेप-अप 20 साल में लगभग एक जैसी ₹10,000 की एसआईपी के बराबर पहुंच सकता है।
- महंगाई का ध्यान रखें: 6% पर 20 साल बाद के ₹1 करोड़ की कीमत आज के पैसे में करीब ₹31 लाख है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
₹5,000 महीने की एसआईपी 10 साल में कितना देगी?
12% सालाना रिटर्न मानें तो 10 साल तक ₹5,000 महीने की एसआईपी ₹6 लाख के निवेश पर उदाहरण के तौर पर ₹11,61,695 देती है। 8% पर यह रकम ₹9,20,828 होती है। असली रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है और यह कम भी हो सकता है।
₹10,000 की एसआईपी को ₹1 करोड़ तक पहुंचने में कितना समय लगता है?
उदाहरण के हिसाब में 12% सालाना मानें तो करीब 241 महीने, यानी 20 साल से थोड़ा ज्यादा लगता है। कम रिटर्न पर ज्यादा समय लगता है, और आखिर के सालों में कमजोर बाजार इसे और देर कर सकता है।
क्या एसआईपी पर 12% रिटर्न मानना सही है?
कोई भी रिटर्न पक्का नहीं है। भारत के बड़े इक्विटी इंडेक्स ने कुछ लंबे दौरों में दो अंकों का रिटर्न दिया है और कुछ में काफी कम। 8-12% जैसी रेंज के साथ प्लान बनाना और नियमित समीक्षा करना ज्यादा सुरक्षित है।
क्या हर साल एसआईपी बढ़ाना बेहतर है?
स्टेप-अप एसआईपी से आम तौर पर कहीं बड़ा फंड बनता है क्योंकि निवेश आय के साथ बढ़ता है। हमारे उदाहरण में 12% पर 20 साल तक हर साल 10% बढ़ाई गई ₹5,000 की एसआईपी, एक जैसी ₹5,000 की एसआईपी की आखिरी वैल्यू को लगभग दोगुना कर देती है।
क्या एसआईपी रिटर्न पर टैक्स लगता है?
सिर्फ रिडीम करने पर। अक्टूबर 2026 की स्थिति में 12 महीने से ज्यादा रखी इक्विटी फंड यूनिट्स के गेन पर सालाना ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5%, और 12 महीने या कम रखी यूनिट्स के गेन पर 20% टैक्स लगता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।