गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम 2026: स्टेटस, ब्याज दर और नियम
2026 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम: मीडियम और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट मार्च 2025 में बंद, बैंक का शॉर्ट टर्म डिपॉजिट कितना देता है, टैक्स नियम और जमा करने का तरीका।

इस लेख में
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) में आप घर में पड़ा बेकार सोना बैंक में जमा करके उस पर ब्याज कमा सकते हैं। अक्टूबर 2026 तक इसमें सिर्फ शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (1 से 3 साल) ही उपलब्ध है, और वह भी सिर्फ उन बैंकों में जो इसे देना चुनते हैं। सरकार ने 26 मार्च 2025 से मीडियम टर्म (5-7 साल) और लॉन्ग टर्म (12-15 साल) सरकारी डिपॉजिट बंद कर दिए, जिन पर 2.25% और 2.5% ब्याज मिलता था।
इसलिए अगर आपने पुराने लेखों में अपनी ज्वेलरी पर 2.5% ब्याज का वादा पढ़ा है, तो वह विकल्प नए डिपॉजिट के लिए बंद है। जो बचा है, वह ज्यादातर बैंकों में 1% से काफी कम देता है। यह गाइड बताती है कि क्या बदला, शॉर्ट टर्म डिपॉजिट आज क्या देता है, टैक्स की स्थिति, एक उदाहरण और दूसरे विकल्प।
मार्च 2025 में क्या हुआ
| हिस्सा | अवधि | अक्टूबर 2026 तक स्टेटस |
|---|---|---|
| शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट (STBD) | 1-3 साल | जारी, हर बैंक की मर्जी पर |
| मीडियम टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (MTGD) | 5-7 साल | 26 मार्च 2025 से नए डिपॉजिट बंद |
| लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट डिपॉजिट (LTGD) | 12-15 साल | 26 मार्च 2025 से नए डिपॉजिट बंद |
वित्त मंत्रालय ने योजना के प्रदर्शन और बाजार की स्थिति की समीक्षा के बाद 25 मार्च 2025 को यह बदलाव घोषित किया, और RBI ने उसी दिन सर्कुलर (RBI/2024-25/132) जारी किया। पहले से चल रहे मीडियम और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट पर इसका असर नहीं है: वे पुरानी शर्तों पर अपनी रिडेम्पशन तारीख तक चलेंगे।
2025 की शुरुआत तक योजना में सिर्फ करीब 38 टन सोना जुटा था, जो भारतीय परिवारों के पास रखे सोने का बेहद छोटा हिस्सा है। 2026 के मध्य तक खबरों में कहा गया कि सरकार एक नए रूप पर विचार कर रही है, जिसमें ज्वेलर्स सोना जमा करने वाले पार्टनर होंगे। अक्टूबर 2026 तक ऐसी कोई नई योजना अधिसूचित नहीं हुई है, इसलिए किसी भी "GMS 2.0" ऑफर से तब तक सावधान रहें जब तक वह RBI या वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर न दिखे।
शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट: आज के नियम
ये नियम SBI के प्रकाशित नियम हैं, जो अब भी GMS देने वाले प्रमुख बैंकों में से एक है। दूसरे बैंक अलग दरें रख सकते हैं और हो सकता है यह डिपॉजिट दें ही नहीं।
- कौन जमा कर सकता है: भारत के निवासी, जिनमें व्यक्ति (अकेले या जॉइंट), HUF, प्रोप्राइटरशिप, पार्टनरशिप फर्म, ट्रस्ट, कंपनियां और चैरिटेबल संस्थाएं शामिल हैं।
- न्यूनतम: 10 ग्राम कच्चा सोना (बार, सिक्के या ज्वेलरी, नग और दूसरी धातुओं को छोड़कर)। कोई ऊपरी सीमा नहीं।
- अवधि: 1 से 3 साल।
- ब्याज (SBI): 1 साल के लिए 0.50% सालाना, 1 से 2 साल के लिए 0.55%, 2 से 3 साल के लिए 0.60%।
- ब्याज कैसे मिलता है: रुपये में, जमा के समय सोने की कीमत के हिसाब से, या तो हर साल 31 मार्च को या मैच्योरिटी पर एक साथ।
- ब्याज कब से: रिफाइनिंग के बाद सोना ट्रेडेबल बार में बदलने की तारीख से, या सोना मिलने के 30 दिन बाद से, जो पहले हो।
- वापसी: जमा किए गए वजन जितना सोना, या मैच्योरिटी पर उसकी रुपये में कीमत। यह चुनाव जमा करते समय करना होता है और बाद में बदला नहीं जा सकता।
- समय से पहले निकासी: 1 साल के लॉक-इन के बाद, पेनल्टी के साथ।
डिपॉजिट स्टेप-बाय-स्टेप कैसे होता है
- अपनी बैंक शाखा से पूछें कि वह GMS शॉर्ट टर्म डिपॉजिट लेती है या नहीं, और किस कलेक्शन एंड प्योरिटी टेस्टिंग सेंटर (CPTC) के साथ काम करती है।
- KYC दस्तावेज (पहचान और पते का सबूत) के साथ सोना CPTC ले जाएं। सेंटर पहले आपके सामने शुरुआती XRF टेस्ट करता है।
- पिघलाने की सहमति दें। अगर आप राजी हैं, तो सोना पिघलाया जाता है और फायर एसे से उसकी सटीक शुद्धता तय होती है। अगर आपको फायर एसे का नतीजा मंजूर नहीं, तो योजना के नियमों के तहत आप पिघला हुआ सोना वापस ले सकते हैं, आम तौर पर सेंटर की फीस चुकाकर; गहने अपने पुराने रूप में वापस नहीं मिलेंगे।
- सर्टिफिकेट लें जिसमें जमा किए गए 995 शुद्धता वाले सोने का वजन लिखा हो।
- बैंक आपका गोल्ड डिपॉजिट खाता खोलता है और ग्राम में डिपॉजिट सर्टिफिकेट जारी करता है।
- मैच्योरिटी पर, अपनी पसंद के हिसाब से सोना या रुपये लें।
जाने से पहले बैंक से टेस्टिंग, पिघलाने या रिफाइनिंग के किसी भी चार्ज के बारे में लिखित में पूछ लें। सिर्फ बैंक शाखा या बैंक के बताए CPTC के जरिए ही जमा करें। खुद को "GMS एजेंट" बताकर ज्यादा ब्याज का वादा करने वालों को ज्वेलरी न दें; योजना इस तरह काम नहीं करती।
उदाहरण: 100 ग्राम 22 कैरेट ज्वेलरी जमा करना
मान लीजिए आप बिना नग वाली 100 ग्राम पुरानी 22 कैरेट ज्वेलरी (91.6% शुद्ध) जमा करते हैं। सिर्फ समझाने के लिए मान लें कि जमा की तारीख पर 995 शुद्धता वाले सोने की कीमत ₹10,000 प्रति ग्राम है।
| स्टेप | हिसाब | नतीजा |
|---|---|---|
| शुद्ध सोने की मात्रा | 100 ग्राम × 91.6% | 91.6 ग्राम शुद्ध सोना |
| 995 सोने के रूप में जमा | 91.6 ÷ 0.995 | 92.06 ग्राम |
| जमा के समय कीमत | 92.06 ग्राम × ₹10,000 | ₹9,20,600 |
| 0.60% पर सालाना ब्याज (3 साल का डिपॉजिट) | ₹9,20,600 × 0.60% | ₹5,524 सालाना |
| 3 साल में कुल (हर साल भुगतान) | ₹5,524 × 3 | ₹16,572 |
| मैच्योरिटी पर एक साथ (सालाना कंपाउंड) | ₹9,20,600 × (1.006³ − 1) | करीब ₹16,670 |
मैच्योरिटी पर आपको 995 शुद्धता का 92.06 ग्राम सोना (या उस समय उसकी रुपये में कीमत) वापस मिलता है, यानी सोने के दाम में कोई भी बदलाव आपका है, साथ में करीब ₹16,600 ब्याज। गहने और उनका मेकिंग चार्ज हमेशा के लिए चला जाता है। अगर ज्वेलरी आपके लिए गहने के रूप में ज्यादा कीमती थी, तो GMS घाटे का सौदा है।
इसकी तुलना ज्वेलरी को बैंक लॉकर में रखने से करें, जिसका सालाना किराया लगता है और कोई कमाई नहीं होती; हमारी बैंक लॉकर नियम और चार्ज गाइड देखें। अगर आपको आय की जगह नकद चाहिए, तो गोल्ड लोन से आप ज्वेलरी छोड़े बिना उस पर कर्ज ले सकते हैं।
GMS डिपॉजिट पर टैक्स
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में इस योजना के तहत जारी गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री था, और सर्टिफिकेट को कैपिटल एसेट की परिभाषा से बाहर रखा गया था, इसलिए ज्वेलरी को GMS डिपॉजिट में बदलने और उसे भुनाने पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता था। योजना की अपनी अधिसूचना कहती है कि टैक्स का नियम वही होगा जो सरकार समय-समय पर अधिसूचित करे।
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से 1961 के एक्ट की जगह ली है और कई सेक्शन के नंबर बदल दिए हैं। बड़ी मात्रा में सोना जमा करने से पहले अपने बैंक या टैक्स सलाहकार से पूछें कि नए एक्ट का कौन सा प्रावधान ये छूट आगे जारी रखता है, और डिपॉजिट सर्टिफिकेट और एसे रिपोर्ट अपने रिकॉर्ड में संभालकर रखें।
GMS शॉर्ट टर्म डिपॉजिट बनाम सोना रखने के दूसरे तरीके
| विकल्प | सोने के दाम के अलावा रिटर्न | जोखिम और खर्च |
|---|---|---|
| GMS शॉर्ट टर्म डिपॉजिट | करीब 0.5%-0.6% (SBI), रुपये में | ज्वेलरी पिघलाई जाती है; 1 साल लॉक-इन |
| गोल्ड ETF | कुछ नहीं; एक्सपेंस रेश्यो रिटर्न घटाता है | बाजार से जुड़ा; डीमैट या MF रूट |
| सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (मौजूदा होल्डर) | इश्यू प्राइस पर 2.5% सालाना | फरवरी 2024 के बाद कोई नई किस्त जारी नहीं |
| घर में रखी ज्वेलरी | कुछ नहीं | चोरी का खतरा, लॉकर किराया, मेकिंग चार्ज |
फरवरी 2024 के बाद सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कोई नई किस्त नहीं आई है, इसलिए नए पैसे के लिए असली विकल्प गोल्ड ETF, गोल्ड म्यूचुअल फंड या GMS शॉर्ट टर्म डिपॉजिट हैं। खर्च और टैक्स के लिए गोल्ड ETF vs SGB vs डिजिटल गोल्ड पढ़ें, और पोर्टफोलियो में कितना सोना ठीक है, यह जानने के लिए शेयर vs बॉन्ड vs सोना देखें।
दिक्कतें और शिकायत कहां करें
- शुद्धता या वजन पर विवाद: पिघलाने की सहमति देने से पहले ही CPTC पर मुद्दा उठाएं, और XRF और फायर एसे के नतीजे लिखित में लें।
- ब्याज जमा न हो या मैच्योरिटी रकम गलत हो: बैंक शाखा में शिकायत करें, फिर बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी को।
- 30 दिन में जवाब न मिले: cms.rbi.org.in पर RBI इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन के पास शिकायत दर्ज करें।
मुख्य बातें
- 2.25%-2.5% देने वाले मीडियम और लॉन्ग टर्म GMS डिपॉजिट 26 मार्च 2025 से नए डिपॉजिट के लिए बंद हैं; पुराने मैच्योरिटी तक चलेंगे।
- सिर्फ 1-3 साल का शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट बचा है, उन बैंकों में जो इसे देना चुनते हैं; SBI 0.50%-0.60% देता है।
- न्यूनतम 10 ग्राम है; ज्वेलरी पिघलाई जाती है, और वजन के हिसाब से सोना या उसकी रुपये में कीमत वापस मिलती है, आपके गहने नहीं।
- ज्वेलर्स वाले नए रूप पर चर्चा हुई है, लेकिन अक्टूबर 2026 तक यह अधिसूचित नहीं हुआ था।
- नए निवेश के लिए गोल्ड ETF से तुलना करें; नकद की जरूरत हो तो गोल्ड लोन से आपकी ज्वेलरी बची रहती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम बंद हो गई है?
आंशिक रूप से। सरकार ने 26 मार्च 2025 से मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म सरकारी डिपॉजिट बंद कर दिए। बैंक अपनी मर्जी से 1 से 3 साल का शॉर्ट टर्म बैंक डिपॉजिट अब भी दे सकते हैं, और पहले से चल रहे मीडियम और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट मैच्योरिटी तक चलेंगे।
2026 में गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम पर कितना ब्याज मिलता है?
शॉर्ट टर्म डिपॉजिट की दरें हर बैंक खुद तय करता है और ये कम हैं। SBI की प्रकाशित दरें 1 साल के लिए 0.50%, 1 से 2 साल के लिए 0.55% और 2 से 3 साल के लिए 0.60% हैं, जो रुपये में मिलती हैं। मौजूदा दर अपने बैंक से पता करें।
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में कम से कम कितना सोना जमा करना होता है?
कम से कम 10 ग्राम कच्चा सोना, जो बार, सिक्के या ज्वेलरी के रूप में हो सकता है, नग और दूसरी धातुओं को छोड़कर। कोई ऊपरी सीमा नहीं है।
क्या गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में मेरी ज्वेलरी वापस मिलेगी?
नहीं। ज्वेलरी को पिघलाकर रिफाइन किया जाता है, और आपका डिपॉजिट 995 शुद्धता वाले सोने के ग्राम में दर्ज होता है। मैच्योरिटी पर आपको उतने वजन का सोना या उसकी रुपये में कीमत मिलती है, जो आपने जमा करते समय चुना हो, अपने पुराने गहने नहीं।
क्या गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का ब्याज टैक्सेबल है?
पुराने इनकम टैक्स एक्ट में इस योजना के गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट पर मिलने वाला ब्याज टैक्स फ्री था और सर्टिफिकेट को कैपिटल एसेट नहीं माना जाता था। इस पर भरोसा करने से पहले इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में इससे जुड़ा प्रावधान अपने बैंक या टैक्स सलाहकार से पक्का कर लें।
क्या ज्वेलर्स के साथ कोई नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम आई है?
2026 में ऐसी खबरें आईं कि सरकार योजना में बदलाव पर विचार कर रही है जिसमें ज्वेलर्स योजना के लिए सोना जमा कर सकेंगे, लेकिन अक्टूबर 2026 तक कोई नई योजना अधिसूचित नहीं हुई थी।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।