प्रोटोटाइप ग्रांट माइलस्टोन: किस सबूत पर किस्त मिलती है
प्रोटोटाइप ग्रांट माइलस्टोन पेमेंट: इनक्यूबेटर कौन से सबूत देखते हैं, ₹20 लाख की किस्तों का उदाहरण, रिकॉर्ड चेकलिस्ट और देरी पर शिकायत कैसे करें।

इस लेख में
प्रोटोटाइप ग्रांट माइलस्टोन का भुगतान तभी होता है जब आप साबित करें कि पहले से तय कोई खास नतीजा हासिल हो गया है और पहले मिला पैसा मंजूर काम पर ही खर्च हुआ है। व्यवहार में हर किस्त के लिए तीन तरह के सबूत चाहिए: तकनीकी नतीजे का सबूत, बिलों के साथ यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट, और एग्रीमेंट में तय फॉर्मेट में छोटी प्रोग्रेस रिपोर्ट। नीचे के नियम नवंबर 2026 तक के आधिकारिक योजना दिशानिर्देशों से लिए गए हैं; हर प्रोग्राम और इनक्यूबेटर एग्रीमेंट अलग हो सकता है, इसलिए आपका साइन किया एग्रीमेंट ही अंतिम है।
माइलस्टोन आधारित ग्रांट का ढांचा
भारत में ज्यादातर शुरुआती, नॉन-डायल्यूटिव ग्रांट एकमुश्त नहीं, किस्तों में मिलती हैं। स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS), जो अब नए आवेदनों के लिए बंद है, अच्छा उदाहरण है क्योंकि इसके दिशानिर्देश पूरी प्रक्रिया साफ बताते हैं:
- प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट या प्रोडक्ट ट्रायल के लिए ₹20 लाख तक की ग्रांट, जो माइलस्टोन आधारित किस्तों में दी जाती थी।
- माइलस्टोन प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, प्रोडक्ट टेस्टिंग या मार्केट लॉन्च के लिए तैयार प्रोडक्ट से जुड़े हो सकते थे।
- पहली किस्त से पहले इनक्यूबेटर स्टार्टअप के साथ कानूनी एग्रीमेंट करता था, जिसमें माइलस्टोन साफ लिखे होते थे।
- हर अगली किस्त पहले तय माइलस्टोन पूरे होने से जुड़ी थी; इसके लिए स्टार्टअप अंतरिम प्रोग्रेस अपडेट और यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट देता था।
- अंत में स्टार्टअप फाइनल रिपोर्ट और ऑडिटेड यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा करता था।
सेक्टर प्रोग्राम भी ऐसे ही चलते हैं। उदाहरण के लिए BIRAC की बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट 18 महीने में ₹50 लाख तक की ग्रांट-इन-एड बताती है, जो माइलस्टोन पर किस्तों में मिलती है और आखिरी किस्त रीइंबर्समेंट की तरह होती है। DST, MeitY और राज्य स्टार्टअप प्रोग्राम हर कॉल के लिए अपने दिशानिर्देश जारी करते हैं।
सबूत की तीन परतें
| सबूत की परत | क्या साबित करती है | आम दस्तावेज |
|---|---|---|
| तकनीकी नतीजा | माइलस्टोन वाकई हासिल हुआ | टेस्ट रिपोर्ट, लैब या थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेट, डेमो वीडियो, प्रोटोटाइप फोटो, पायलट यूजर फीडबैक, कोड रिलीज नोट्स |
| पैसे का इस्तेमाल | पिछली किस्त मंजूर मदों पर खर्च हुई | यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट, इनवॉइस, कंपनी बैंक खाते से भुगतान का सबूत, प्रोजेक्ट स्टाफ के सैलरी रिकॉर्ड |
| प्रोग्रेस विवरण | क्या बदला, आगे क्या, कोई बदलाव | तय फॉर्मेट में माइलस्टोन रिपोर्ट, संशोधित टाइमलाइन, जोखिम नोट्स |
एजेंसियां सबसे ज्यादा तब क्लेम रोकती हैं जब तकनीकी सबूत अस्पष्ट हो ("प्रोटोटाइप लगभग तैयार") या बिल सैंक्शन के बजट मदों से मेल न खाएं।
ऐसे माइलस्टोन लिखें जो आसानी से साबित हों
माइलस्टोन लिखने में अक्सर आपकी भी राय ली जाती है। ऐसे माइलस्टोन रखें जिन्हें रिव्यूअर बिना अंदाजे के जांच सके:
- मापने लायक: "टेस्ट लॉग में प्रोटोटाइप 8 घंटे बैटरी चलाता है" बेहतर है, "बैटरी सुधरी" नहीं।
- जहां हो सके थर्ड पार्टी से प्रमाणित: टेस्ट लैब रिपोर्ट या पायलट ग्राहक का पत्र वजन रखता है।
- बजट से जुड़े: हर माइलस्टोन की अपनी लागत लाइन हो, ताकि यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट उससे मेल खाए।
- समय में व्यावहारिक: कुछ प्रोग्राम एक्सटेंशन नहीं देते, इसलिए गुंजाइश रखें।
उदाहरण: ₹20 लाख की प्रोटोटाइप ग्रांट चार किस्तों में
यह उदाहरण सिर्फ समझाने के लिए है। असली बंटवारा आपके एग्रीमेंट में होगा।
| किस्त | शर्त | रकम | कुल |
|---|---|---|---|
| 1 | एग्रीमेंट साइन करना | ₹6,00,000 (30%) | ₹6,00,000 |
| 2 | माइलस्टोन 1: काम करता लैब प्रोटोटाइप | ₹6,00,000 (30%) | ₹12,00,000 |
| 3 | माइलस्टोन 2: 3 पायलट यूजर्स के साथ फील्ड ट्रायल | ₹5,00,000 (25%) | ₹17,00,000 |
| 4 | फाइनल रिपोर्ट और ऑडिटेड यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट | ₹3,00,000 (15%) | ₹20,00,000 |
मान लीजिए माइलस्टोन 1 पूरा होने तक स्टार्टअप ने पहली किस्त में से ₹5,20,000 खर्च किए: ₹2,40,000 कंपोनेंट पर, ₹2,10,000 कॉन्ट्रैक्ट इंजीनियर पर और ₹70,000 टेस्टिंग पर। यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट में ₹5,20,000 खर्च और ₹80,000 बचा हुआ (₹6,00,000 − ₹5,20,000) दिखेगा।
कुछ प्रोग्राम बची रकम को अगली किस्त में एडजस्ट करते हैं; कुछ मंजूरी के साथ आगे ले जाने देते हैं। अगर अगली किस्त से बचे ₹80,000 घटाए जाएं, तो दूसरी किस्त ₹6,00,000 के बजाय ₹5,20,000 होगी, हालांकि कुल ग्रांट की सीमा ₹20 लाख ही रहेगी। पूरी किस्त के भरोसे कैश फ्लो प्लान करने से पहले इनक्यूबेटर से लिखित में पूछें कि आपका एग्रीमेंट कौन सा तरीका अपनाता है।
क्योंकि आखिरी किस्त अक्सर ऑडिटेड यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट के बाद ही आती है, आखिरी ₹3 लाख काम पूरा होने के महीनों बाद आ सकते हैं। इस अंतर का बजट रखें; मुनाफा बनाम कैश फ्लो बताता है कि बिजनेस ठीक चलते हुए भी नकदी की कमी क्यों हो सकती है।
हर माइलस्टोन के लिए रिकॉर्ड चेकलिस्ट
- साइन किया ग्रांट एग्रीमेंट, सैंक्शन लेटर और मंजूर बजट मद
- तय टेम्पलेट में माइलस्टोन रिपोर्ट, अधिकृत डायरेक्टर या पार्टनर के हस्ताक्षर के साथ
- तकनीकी सबूत: टेस्ट रिपोर्ट, सर्टिफिकेट, तारीख वाली फोटो, वीडियो, पायलट फीडबैक
- पिछली किस्त का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (इनक्यूबेटर या एजेंसी का फॉर्मेट)
- कंपनी के नाम के इनवॉइस, जहां लागू हो GSTIN के साथ
- हर भुगतान दिखाने वाला कंपनी खाते का बैंक स्टेटमेंट (नकद नहीं, फाउंडर्स के निजी खाते नहीं)
- प्रोजेक्ट पर डाले गए स्टाफ के पेरोल रिकॉर्ड या कॉन्ट्रैक्ट
- माइलस्टोन बदला हो तो इनक्यूबेटर की लिखित मंजूरी के साथ बदलाव नोट
ग्रांट का खर्च अलग खाते या कॉस्ट सेंटर में रखने से यह सब बहुत आसान हो जाता है; निजी और बिजनेस फाइनेंस अलग रखने की हमारी गाइड बुनियादी बातें बताती है।
इनक्यूबेटर या एजेंसी से पहले ही पूछें
- हर माइलस्टोन किस सबूत से पूरा माना जाएगा, और कौन मंजूरी देगा?
- यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट का फॉर्मेट क्या है, क्या CA सर्टिफिकेट या ऑडिट चाहिए?
- अगली किस्त पर बची रकम का क्या होगा?
- कौन से खर्च मना हैं (जैसे जमीन, सुविधाएं, फाउंडर्स की सैलरी, सैंक्शन से पहले खरीदी चीजें)?
- टेक्नोलॉजी बदलने पर माइलस्टोन कैसे संशोधित होंगे?
- जमा करने से भुगतान तक का लक्ष्य समय क्या है?
- क्या इनक्यूबेटर कोई फीस लेता है या इक्विटी लेता है? SISFS में इनक्यूबेटर को चयन, भुगतान, इनक्यूबेशन या मॉनिटरिंग के लिए नकद या किसी रूप में फीस लेने की मनाही थी; दूसरे प्रोग्राम अलग हो सकते हैं।
आम गलतियां जिनसे किस्त अटकती है
| गलती | समाधान |
|---|---|
| माइलस्टोन अस्पष्ट लिखा, रिव्यूअर और सबूत मांगते हैं | साइन करने से पहले मापने लायक शर्तें और सबूत का फॉर्मेट तय करें |
| बिल फाउंडर के नाम या निजी खाते से भुगतान | सिर्फ कंपनी खाते से भुगतान करें और कंपनी के नाम बिल लें |
| मंजूर बजट मदों से बाहर खर्च | किसी भी बदलाव से पहले लिखित मंजूरी लें |
| बिना बिलों के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा करना | सर्टिफिकेट के बराबर लेजर अंश और इनवॉइस सूची लगाएं |
| बिना एक्सटेंशन वाले प्रोजेक्ट की डेडलाइन चूकना | हर महीने माइलस्टोन तारीखें ट्रैक करें और देरी जल्दी बताएं |
| ग्रांट को निजी खर्च की आय समझना | ग्रांट सिर्फ प्रोजेक्ट के लिए है; गलत इस्तेमाल पर वसूली हो सकती है |
माइलस्टोन भुगतान में देरी हो तो कैसे आगे बढ़ाएं
- इनक्यूबेटर या प्रोग्राम ऑफिसर को लिखें, जिसमें जमा करने की तारीख, भेजे गए दस्तावेज और रुकी किस्त का जिक्र हो। ईमेल का रिकॉर्ड रखें।
- योजना का ग्रीवांस चैनल इस्तेमाल करें। SISFS दिशानिर्देशों में इनक्यूबेटर की ओर से भुगतान में देरी जैसे मामलों के लिए DPIIT में ग्रीवांस सेल बनाया गया था; दूसरी एजेंसियां अपने पोर्टल पर नोडल ऑफिसर बताती हैं।
- जवाब न मिले तो CPGRAMS पर pgportal.gov.in पर योजना चलाने वाले मंत्रालय या विभाग के खिलाफ शिकायत करें।
- धोखाधड़ी: अगर कोई किस्त जारी करने के लिए "प्रोसेसिंग फीस" मांगे, तो cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें।
मुख्य बातें
- माइलस्टोन आधारित ग्रांट में पैसा तभी मिलता है जब आप तय नतीजा साबित करें और पिछली किस्त का खर्च दिखाएं।
- हर किस्त के लिए तकनीकी सबूत, बिलों के साथ यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट और तय फॉर्मेट में प्रोग्रेस रिपोर्ट चाहिए।
- ₹20 लाख के उदाहरण में बचे ₹80,000 अगली किस्त में एडजस्ट हो सकते हैं, इसलिए पूछें कि आपका एग्रीमेंट बची रकम को कैसे देखता है।
- सिर्फ कंपनी खाते से भुगतान करें और मंजूर बजट मदों के भीतर रहें।
- देरी पर लिखित में आगे बढ़ें: इनक्यूबेटर, योजना ग्रीवांस सेल, फिर CPGRAMS।
संबंधित गाइड: सरकारी लोन बनाम सब्सिडी बनाम ग्रांट बनाम क्रेडिट गारंटी, स्टार्टअप रिकग्निशन बनाम उद्यम रजिस्ट्रेशन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
माइलस्टोन आधारित ग्रांट भुगतान क्या होता है?
यह किस्तों में दी जाने वाली ग्रांट है, जिसमें पहली के बाद हर किस्त तभी मिलती है जब आप दिखा दें कि तय माइलस्टोन, जैसे काम करता प्रोटोटाइप या पूरा हुआ प्रोडक्ट ट्रायल, हासिल हो गया है। ये माइलस्टोन पहली किस्त से पहले साइन किए गए एग्रीमेंट में लिखे होते हैं।
अगली किस्त से पहले इनक्यूबेटर आमतौर पर कौन से सबूत मांगते हैं?
आमतौर पर तय माइलस्टोन पर प्रोग्रेस रिपोर्ट, टेस्ट रिपोर्ट, डेमो वीडियो या पायलट फीडबैक जैसे सबूत, पहले खर्च हुए पैसे का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट, और बिल व बैंक स्टेटमेंट। सही सूची आपके ग्रांट एग्रीमेंट और प्रोग्राम दिशानिर्देशों में होती है।
क्या प्रोटोटाइप ग्रांट से उपकरण खरीदे या लैब बनाई जा सकती है?
अपना एग्रीमेंट देखें। उदाहरण के लिए स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम के दिशानिर्देशों में सीड फंड से कोई सुविधा (फैसिलिटी) नहीं बनाई जा सकती थी और पैसा सिर्फ उसी काम में लगाना था जिसके लिए दिया गया। दूसरे प्रोग्राम की अपनी अनुमत और गैर-अनुमत खर्चों की सूची होती है।
अगर प्रोटोटाइप फेल हो जाए तो क्या होगा?
फेल होना अपने आप नियम तोड़ना नहीं है। जैसे SISFS दिशानिर्देशों में फेल वेंचर्स से फाइनल रिपोर्ट में सीख और फेल होने के कारण यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट के साथ देने को कहा गया था। पैसे का गलत इस्तेमाल या झूठे दावे अलग बात हैं और उन पर वसूली हो सकती है।
माइलस्टोन भुगतान में देरी हो तो शिकायत कहां करें?
पहले इनक्यूबेटर या प्रोग्राम ऑफिसर को लिखित में, फिर योजना के अपने ग्रीवांस चैनल पर (SISFS के लिए DPIIT में ग्रीवांस सेल था), और फिर योजना चलाने वाले विभाग के खिलाफ pgportal.gov.in पर CPGRAMS में।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।