स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना 2026: स्टेटस और विकल्प
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS) में नए आवेदन 31 मई 2026 को बंद हो गए। योजना में क्या मिलता था, पेंडिंग आवेदनों का क्या होगा और अब क्या विकल्प हैं।

इस लेख में
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS) नए आवेदनों के लिए बंद है। आधिकारिक पोर्टल seedfund.startupindia.gov.in के मुताबिक स्टार्टअप्स के आवेदन की आखिरी तारीख 31 मई 2026 थी और इनक्यूबेटर्स को 30 जून 2026 तक स्टार्टअप चयन पूरा करना था। अक्टूबर 2026 तक कोई नया दौर घोषित नहीं हुआ है, इसलिए अगर आप अभी आवेदन की सोच रहे हैं तो आपको दूसरा रास्ता चाहिए। यह गाइड बताती है कि SISFS में क्या मिलता था, पेंडिंग फाइलों का क्या होगा, और कौन सी चालू योजनाएं इसकी कमी पूरी करती हैं।
कई वेबसाइटें अब भी SISFS को "साल भर चलने वाली" योजना बताती हैं। विंडो खुली रहने तक यह सही था, लेकिन वे पेज अपडेट नहीं हुए हैं। आवेदन में समय लगाने या "मदद" के लिए किसी को पैसे देने से पहले हमेशा आधिकारिक पोर्टल देखें।
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना क्या थी
SISFS को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने ₹945 करोड़ के परिव्यय के साथ बनाया था। घोषणा के मुताबिक 2021-22 से चार साल में 300 इनक्यूबेटर्स के जरिए करीब 3,600 उद्यमियों की मदद होनी थी। सरकार स्टार्टअप्स को सीधे पैसा नहीं देती थी। वह चुने गए इनक्यूबेटर्स को पैसा देती थी, और इनक्यूबेटर स्टार्टअप चुनकर किस्तों में रकम जारी करते थे।
लोकसभा में दिए एक लिखित जवाब के अनुसार जनवरी 2026 तक 219 इनक्यूबेटर्स चुने गए थे, उन्हें ₹575 करोड़ जारी किए गए थे, और इनक्यूबेटर्स ने 3,311 स्टार्टअप्स का चयन किया था।
SISFS फंडिंग एक नजर में
| विवरण | ग्रांट | कन्वर्टिबल डिबेंचर / डेट |
|---|---|---|
| उद्देश्य | प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, प्रोडक्ट ट्रायल | मार्केट एंट्री, कमर्शियलाइजेशन, स्केलिंग |
| प्रति स्टार्टअप अधिकतम | ₹20 लाख तक | ₹50 लाख तक |
| भुगतान कैसे | इनक्यूबेटर के जरिए माइलस्टोन आधारित किस्तें | कन्वर्टिबल डिबेंचर, डेट या डेट-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट |
| कितनी बार | एक बार | एक बार |
| इनक्यूबेटर सहायता | हर चुने गए इनक्यूबेटर को ₹5 करोड़ तक ग्रांट, माइलस्टोन आधारित किस्तों में |
कौन पात्र था
- DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप, जिसका इनकॉरपोरेशन आवेदन के समय 2 साल से ज्यादा पुराना न हो।
- ऐसा बिजनेस आइडिया जिसमें मार्केट फिट, व्यावहारिक प्रोडक्ट और बढ़ने की गुंजाइश हो, और कोर प्रोडक्ट, सर्विस या बिजनेस मॉडल में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो।
- किसी दूसरी केंद्रीय या राज्य सरकार की योजना से ₹10 लाख से ज्यादा की आर्थिक मदद पहले न मिली हो (प्राइज मनी, सब्सिडी वाली वर्कस्पेस, फाउंडर अलाउंस और लैब एक्सेस इसमें नहीं गिने जाते थे)।
- आवेदन के समय भारतीय प्रमोटर्स की हिस्सेदारी कम से कम 51% हो।
- आवेदक अपनी पसंद के क्रम में अधिकतम तीन इनक्यूबेटर्स में आवेदन कर सकता था।
अक्टूबर 2026 में स्टेटस
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| क्या नया स्टार्टअप आवेदन कर सकता है? | नहीं। आवेदन 31 मई 2026, रात 11:59 बजे IST पर बंद |
| इनक्यूबेटर चयन की डेडलाइन | 30 जून 2026 |
| पेंडिंग आवेदन | योजना की समय-सीमा के अनुसार इनक्यूबेटर कार्रवाई करेगा |
| नया दौर घोषित? | अक्टूबर 2026 तक नहीं |
| आधिकारिक स्रोत | seedfund.startupindia.gov.in |
अगर आपने डेडलाइन से पहले आवेदन किया था, तो स्टेटस देखने के लिए अपने SISFS डैशबोर्ड में लॉग इन करें और इनक्यूबेटर से बात करें। चुने गए स्टार्टअप को भी पैसा तभी मिलता है जब वह तय माइलस्टोन पूरे करे, इसलिए अपनी माइलस्टोन रिपोर्ट, बिल और बैंक स्टेटमेंट व्यवस्थित रखें।
अगर DPIIT कोई नया दौर या उत्तराधिकारी योजना घोषित करता है, तो वह SISFS और स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर और PIB प्रेस रिलीज में आएगी। तब तक "SISFS आवेदन शुरू" बताने वाली किसी वेबसाइट या WhatsApp मैसेज पर शक करें।
2026 में इसकी जगह क्या इस्तेमाल करें
कोई एक योजना SISFS की हूबहू जगह नहीं लेती, क्योंकि ₹20 लाख की बिना इक्विटी वाली ग्रांट बहुत कम मिलती है। सही विकल्प आपके स्टेज पर निर्भर करता है।
| जरूरत | चालू विकल्प (अक्टूबर 2026) | क्या मिलता है |
|---|---|---|
| बिना गारंटी कर्ज | स्टार्टअप क्रेडिट गारंटी योजना | NCGTC गारंटी के साथ बैंक, NBFC या वेंचर डेट लोन, ₹20 करोड़ तक |
| मुनाफे पर कम टैक्स | धारा 140 (पुरानी 80-IAC) के तहत स्टार्टअप टैक्स हॉलिडे | पहले 10 में से लगातार 3 साल योग्य मुनाफे पर 100% कटौती |
| इक्विटी फंडिंग | SIDBI द्वारा चलाए जाने वाले फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स (FFS) से समर्थित वेंचर फंड | SIDBI सेबी-रजिस्टर्ड AIF में निवेश करता है, जो स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं |
| साधारण बिजनेस के लिए छोटा लोन | ₹20 लाख तक मुद्रा लोन | बिना गारंटी बैंक लोन |
| सेक्टर ग्रांट | BIRAC (बायोटेक), DST के NIDHI कार्यक्रम, MeitY के स्टार्टअप कार्यक्रम | अपनी अलग कॉल और इनक्यूबेटर्स के जरिए ग्रांट |
| राज्य सहायता | राज्यों की स्टार्टअप पॉलिसी | सीड ग्रांट, सस्टेनेंस अलाउंस, ब्याज सब्सिडी (राज्य के हिसाब से अलग) |
केंद्रीय कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ दूसरे फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स को मंजूरी दी है, जिसका फोकस डीप-टेक और टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप्स पर है। यह पैसा वेंचर फंड्स को जाता है, सीधे फाउंडर्स को नहीं, इसलिए आपको SIDBI के बजाय वेंचर फंड्स से संपर्क करना होगा।
शुरुआत DPIIT मान्यता से करें
क्रेडिट गारंटी और टैक्स हॉलिडे समेत लगभग हर केंद्रीय स्टार्टअप लाभ के लिए DPIIT मान्यता चाहिए। यह स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर मुफ्त है। लॉ फर्मों द्वारा बताए गए फरवरी 2026 के नोटिफिकेशन के तहत कोई कंपनी या LLP इनकॉरपोरेशन से 10 साल तक स्टार्टअप मानी जाती है, अगर किसी भी साल टर्नओवर ₹200 करोड़ से ज्यादा न हुआ हो (मान्यता प्राप्त डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए 20 साल और ₹300 करोड़)।
राज्यों की सीड ग्रांट
कई राज्य अपनी स्टार्टअप पॉलिसी के तहत, आमतौर पर राज्य-मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर्स के जरिए, अपनी सीड या आइडिया-स्टेज ग्रांट चलाते हैं। रकम, पात्रता और अभी दौर खुला है या नहीं, यह राज्य के हिसाब से काफी अलग होता है, इसलिए किसी राष्ट्रीय ब्लॉग पर भरोसा करने के बजाय अपने राज्य का स्टार्टअप पोर्टल या उद्योग विभाग देखें।
उदाहरण: सीड ग्रांट की जगह गारंटी वाला लोन
मान लीजिए दो साल पुराना एक हार्डवेयर स्टार्टअप प्रोटोटाइप के लिए ₹20 लाख की SISFS ग्रांट और पहले प्रोडक्शन रन के लिए ₹50 लाख के कन्वर्टिबल डिबेंचर इस्तेमाल करने वाला था। SISFS बंद होने पर वह प्रोटोटाइप का खर्च फाउंडर्स के पैसे और एंजेल राउंड से उठाने, और प्रोडक्शन के लिए क्रेडिट गारंटी योजना के तहत ₹50 लाख उधार लेने का फैसला करता है।
उदाहरण के लिए 12% ब्याज और 3 साल में चुकाने की शर्त मानें:
- EMI = P × r × (1 + r)^n / [(1 + r)^n − 1], जहां r = 12 / 12 / 100 = 0.01 और n = 36
- ₹50,00,000 के लोन पर EMI लगभग ₹1,66,072 महीना
- 3 साल में कुल ब्याज: ₹1,66,072 × 36 − ₹50,00,000 = लगभग ₹9,78,576
SISFS डिबेंचर की शर्तें आमतौर पर नरम होतीं, और ग्रांट पर तो कोई ब्याज ही नहीं था। योजना बंद होने की असली कीमत यही है: अब स्टार्टअप को हर महीने करीब ₹1.66 लाख चुकाने के लिए कमाई चाहिए। कोई फैसला लेने से पहले EMI कैलकुलेटर में अपने आंकड़े डालें और देखें कि अनुमानित कैश फ्लो EMI को आराम से कवर करता है या नहीं।
सीड और स्टार्टअप आवेदन खारिज होने की आम वजहें
दौर खुला हो तब भी ज्यादातर आवेदन इन्हीं वजहों से खारिज होते हैं:
- DPIIT मान्यता नहीं, या मान्यता आवेदन के बाद ली गई।
- उम्र सीमा पार (SISFS में इनकॉरपोरेशन से 2 साल)।
- पहले मिली सरकारी मदद सीमा से ज्यादा, जैसे किसी दूसरी योजना से ₹10 लाख से ऊपर।
- आवेदन के समय भारतीय प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 51% से कम।
- टेक्नोलॉजी का साफ इस्तेमाल नहीं, या आइडिया साधारण ट्रेडिंग या सर्विस बिजनेस है।
- कमजोर माइलस्टोन: ऐसी अस्पष्ट योजना जिसमें प्रोटोटाइप या मार्केट के मापने लायक लक्ष्य न हों।
जो साधारण ट्रेडिंग या सर्विस बिजनेस स्टार्टअप की परिभाषा में नहीं आता, उसके लिए मुद्रा लोन या PMEGP बेहतर है; देखें हमारी सरकारी बिजनेस लोन योजनाओं की तुलना।
शिकायत या मदद कैसे पाएं
- पेंडिंग SISFS आवेदन या अटकी किस्त: पहले इनक्यूबेटर से संपर्क करें, फिर स्टार्टअप इंडिया पोर्टल के संपर्क और शिकायत विकल्पों के जरिए DPIIT के पास मामला उठाएं।
- लोक शिकायत: सरकार के CPGRAMS पोर्टल (pgportal.gov.in) पर उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के खिलाफ शिकायत दर्ज करें।
- धोखाधड़ी: अगर किसी ने सीड फंडिंग दिलाने के नाम पर पैसे लिए हैं, तो cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें, और पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
सीड ग्रांट मंजूर कराने का वादा करने वाले किसी "एजेंट" या "कंसल्टेंट" को कभी पैसे न दें। सरकारी योजनाएं कोई आवेदन फीस नहीं लेतीं, और SISFS फिलहाल किसी के लिए खुली नहीं है।
मुख्य बातें
- स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना ने 31 मई 2026 से नए स्टार्टअप आवेदन लेना बंद कर दिया; इनक्यूबेटर चयन 30 जून 2026 को खत्म हुआ।
- इसमें 2 साल तक पुराने DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को इनक्यूबेटर्स के जरिए ₹20 लाख तक ग्रांट और ₹50 लाख तक कन्वर्टिबल डिबेंचर या डेट मिलता था।
- पेंडिंग आवेदनों पर इनक्यूबेटर अब भी काम कर रहे हैं; नए फाउंडर्स को दूसरे रास्ते देखने होंगे।
- चालू विकल्प: स्टार्टअप क्रेडिट गारंटी योजना, धारा 140 (पुरानी 80-IAC) टैक्स हॉलिडे, FFS-समर्थित वेंचर फंड, सेक्टर ग्रांट और राज्य स्टार्टअप पॉलिसी।
- अक्टूबर 2026 तक SISFS का कोई नया दौर घोषित नहीं हुआ है; "सीड फंड अप्रूवल" बेचने वालों को नजरअंदाज करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना 2026 में अभी भी खुली है?
नहीं। SISFS के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक नए स्टार्टअप आवेदनों की विंडो 31 मई 2026 को रात 11:59 बजे (IST) बंद हो गई, और इनक्यूबेटर्स को 30 जून 2026 तक स्टार्टअप्स का चयन पूरा करना था। अक्टूबर 2026 तक आवेदन का कोई नया दौर घोषित नहीं हुआ है।
स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना में कितना पैसा मिलता था?
एक स्टार्टअप को प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोटोटाइप या प्रोडक्ट ट्रायल के लिए माइलस्टोन के आधार पर ₹20 लाख तक की ग्रांट, और मार्केट एंट्री व स्केलिंग के लिए कन्वर्टिबल डिबेंचर या डेट के जरिए ₹50 लाख तक मिल सकते थे। पैसा सरकार सीधे नहीं, बल्कि चुने गए इनक्यूबेटर्स के जरिए देती थी।
31 मई 2026 से पहले जमा किए गए SISFS आवेदन का क्या होगा?
पोर्टल के अनुसार डेडलाइन तक जमा हुए आवेदनों पर संबंधित इनक्यूबेटर योजना की समय-सीमा के मुताबिक कार्रवाई करता रहेगा। अपने SISFS डैशबोर्ड में स्टेटस देखें और इनक्यूबेटर से सीधे बात करें; पैसा अब भी माइलस्टोन पूरे होने पर ही मिलता है।
अब सीड फंड योजना की जगह स्टार्टअप क्या इस्तेमाल करे?
मुख्य चालू केंद्रीय विकल्प हैं: बिना गारंटी डेट के लिए स्टार्टअप क्रेडिट गारंटी योजना, इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 140 (पुरानी धारा 80-IAC) के तहत टैक्स हॉलिडे, फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स से समर्थित वेंचर फंड, BIRAC और विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग जैसी संस्थाओं की सेक्टर ग्रांट, और राज्यों की स्टार्टअप पॉलिसी ग्रांट।
क्या स्टार्टअप इंडिया सीड फंडिंग दिलाने के लिए कोई फीस लेता है?
नहीं। DPIIT मान्यता और SISFS आवेदन मुफ्त थे। जो कोई सीड ग्रांट पक्की कराने के नाम पर पैसे मांगे, खासकर अब जब योजना बंद है, वह धोखाधड़ी कर रहा है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।