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स्टार्टअप क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS) 2026: पूरी गाइड

CGSS: स्टार्टअप्स को ₹20 करोड़ तक बिना गारंटी लोन, 85% या 75% कवर, 1-2% गारंटी फीस, पात्रता, दस्तावेज और आवेदन का तरीका।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
स्टार्टअप क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS) 2026: पूरी गाइड
इस लेख में
  1. CGSS क्या है और इसे कौन चलाता है
  2. मुख्य शर्तें एक नजर में (अक्टूबर 2026)
  3. पात्रता
  4. आमतौर पर लगने वाले दस्तावेज
  5. आवेदन कैसे करें: स्टेप बाय स्टेप
  6. उदाहरण: ₹4 करोड़ के लोन पर खर्च और सुरक्षा
  7. CGSS लोन खारिज होने की आम वजहें
  8. शिकायत कैसे करें
  9. मुख्य बातें
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स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS) DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को बैंकों, NBFC और वेंचर डेट फंड्स से बिना कोलैटरल लोन लेने देती है, क्योंकि लोन डूबने पर लेंडर के ज्यादातर नुकसान की गारंटी सरकार की ट्रस्ट कंपनी देती है। अक्टूबर 2026 में योजना चालू है: प्रति उधारकर्ता ₹20 करोड़ तक कवर मिलता है, ₹10 करोड़ तक के लोन पर डिफॉल्ट रकम का 85% और उससे ऊपर 75%। यह सब्सिडी नहीं है और बिना ब्याज का लोन भी नहीं, लेकिन सीड फंड योजना बंद होने के बाद कर्ज से फंडिंग का यही मुख्य केंद्रीय रास्ता है।

CGSS क्या है और इसे कौन चलाता है

CGSS को 6 अक्टूबर 2022 को उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने नोटिफाई किया था। नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC), जो वित्त मंत्रालय की कंपनी है, ट्रस्टी के रूप में गारंटी जारी करती है।

मई 2025 में सरकार ने इसका विस्तार नोटिफाई किया:

  • प्रति उधारकर्ता अधिकतम कवर ₹10 करोड़ से बढ़ाकर ₹20 करोड़;
  • 27 चैंपियन सेक्टर के स्टार्टअप्स के लोन पर सालाना गारंटी फीस घटाकर 1% (पहले 2%)।

गारंटी लेंडर (सदस्य संस्था) को मिलती है, आपको नहीं। आप सामान्य तरीके से लोन के लिए आवेदन करते हैं; लेंडर तय करता है कि उसे CGSS के तहत कवर करना है या नहीं।

मुख्य शर्तें एक नजर में (अक्टूबर 2026)

फीचर विवरण
उधारकर्ता DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप, डिफॉल्ट में नहीं, NPA नहीं
लेंडर शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक, वित्तीय संस्थान, BBB या उससे ऊपर रेटिंग और ₹100 करोड़ नेट वर्थ वाले RBI-रजिस्टर्ड NBFC, सेबी-रजिस्टर्ड AIF (वेंचर डेट फंड)
अधिकतम कवर प्रति उधारकर्ता ₹20 करोड़
कवर (ट्रांजैक्शन आधारित) ₹10 करोड़ तक के लोन पर डिफॉल्ट का 85%; ₹10 करोड़ से ऊपर 75%
कवर (अम्ब्रेला आधारित, वेंचर डेट फंड्स के लिए) असली नुकसान या पूल्ड निवेश का 5%, जो कम हो; प्रति उधारकर्ता ₹20 करोड़ की सीमा
सालाना गारंटी फीस 1% (27 चैंपियन सेक्टर), 1.5% (पूर्वोत्तर यूनिट्स, महिला उद्यमी), 2% (बाकी), जैसा लेंडर्स बताते हैं
कवर होने वाली सुविधाएं टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल, वेंचर डेट, सबऑर्डिनेटेड/मेजेनाइन डेट, डिबेंचर, ऑप्शनली कन्वर्टिबल डेट, नॉन-फंड-बेस्ड लिमिट
ब्याज दर लेंडर तय करता है
आवेदन कहां जनसमर्थ पोर्टल या सदस्य संस्था की शाखा

अगर लेंडर फिर भी कुछ कोलैटरल लेता है, तो गारंटी की रकम उस कोलैटरल की वैल्यू जितनी घट जाती है, इसलिए CGSS के तहत लोन देने वाले ज्यादातर लेंडर इस पर जोर नहीं देते।

पात्रता

स्टार्टअप की शर्तें

  • DPIIT मान्यता। स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर मान्यता मुफ्त है। फरवरी 2026 के नोटिफिकेशन के तहत कोई कंपनी या LLP इनकॉरपोरेशन से 10 साल तक स्टार्टअप मानी जाती है, अगर टर्नओवर कभी ₹200 करोड़ से ऊपर न गया हो (मान्यता प्राप्त डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए 20 साल और ₹300 करोड़)।
  • किसी लेंडर या निवेशक के प्रति कोई डिफॉल्ट नहीं, और RBI नियमों के अनुसार खाता NPA न हो।
  • पात्रता का प्रमाणन लेंडर करता है, जो अपना क्रेडिट मूल्यांकन भी करता है।

लेंडर ऊपर से क्या जोड़ते हैं

बैंक योजना के ऊपर अपने नियम लगाते हैं। उदाहरण के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा का CGSS पेज 12 महीने के स्टेटमेंट से आंकी गई स्थिर कमाई और एक न्यूनतम आंतरिक रेटिंग मांगता है, और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट व HUF को बाहर रखता है। उम्मीद रखें कि लेंडर ये चीजें देखेगा:

  • ऑडिटेड फाइनेंशियल्स और GST रिटर्न, कमाई के ट्रेंड के साथ;
  • फाउंडर्स और कंपनी की क्रेडिट रिपोर्ट (देखें सिबिल MSME रैंक (CMR));
  • EMI और मौजूदा कर्ज के लिए कैश फ्लो कवर;
  • कैप टेबल, शेयरहोल्डर एग्रीमेंट और पैसे का इस्तेमाल।

बिना कमाई वाले स्टार्टअप को गारंटी के बावजूद बैंक टर्म लोन शायद ही मिलता है; उस स्टेज पर AIF के रूप में रजिस्टर्ड वेंचर डेट फंड्स ज्यादा व्यावहारिक CGSS लेंडर हैं, आमतौर पर इक्विटी राउंड के साथ।

आमतौर पर लगने वाले दस्तावेज

  • DPIIT मान्यता सर्टिफिकेट
  • इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट, MoA/AoA या LLP एग्रीमेंट, उधार लेने का बोर्ड प्रस्ताव
  • कंपनी का PAN और डायरेक्टर्स या पार्टनर्स का KYC (PAN, आधार)
  • लागू हो तो उद्यम रजिस्ट्रेशन और GST रजिस्ट्रेशन
  • ऑडिटेड वित्तीय विवरण, चालू साल के प्रोविजनल आंकड़े, GST रिटर्न और 12 महीने के बैंक स्टेटमेंट
  • अनुमानित कैश फ्लो के साथ बिजनेस प्लान या प्रोजेक्ट रिपोर्ट
  • कैप टेबल और मौजूदा लोन का ब्योरा
  • 1% चैंपियन-सेक्टर फीस का दावा करना हो तो सेक्टर का प्रमाण

आवेदन कैसे करें: स्टेप बाय स्टेप

  1. अगर अभी तक नहीं ली है तो स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर DPIIT मान्यता लें।
  2. लेंडर्स की सूची बनाएं। सदस्य संस्थाओं की सूची जनसमर्थ पोर्टल और NCGTC वेबसाइट पर है। स्टार्टअप इंडिया के CGSS पेज पर इनमें एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और HDFC बैंक जैसे बैंकों के नाम हैं।
  3. जनसमर्थ (jansamarth.in) पर CGSS विकल्प के तहत ऑनलाइन आवेदन करें, या किसी सदस्य बैंक की शाखा के स्टार्टअप/MSME डेस्क पर जाएं।
  4. लेंडर का मूल्यांकन। लेंडर बिजनेस की व्यवहार्यता, क्रेडिट हिस्ट्री और कैश फ्लो देखकर लिमिट, दर और अवधि तय करता है।
  5. मंजूरी और गारंटी। मंजूरी के बाद लेंडर अपने पोर्टल से NCGTC के पास कवर के लिए आवेदन करता है। पात्र लोन पर शर्तें पूरी होते ही गारंटी अपने आप मिल जाती है।
  6. डिस्बर्समेंट और फीस। लेंडर सालाना गारंटी फीस NCGTC को देता है और आमतौर पर आपसे वसूलता है; यह बात सैंक्शन लेटर में लिखित में मांगें।

आवेदन मुफ्त है। कोई एजेंट फीस लेकर "CGSS मंजूर" नहीं करा सकता।

उदाहरण: ₹4 करोड़ के लोन पर खर्च और सुरक्षा

चैंपियन सेक्टर का एक DPIIT-मान्यता प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक्स स्टार्टअप उदाहरण के लिए 12% ब्याज पर 5 साल का ₹4 करोड़ का टर्म लोन लेता है।

EMI और ब्याज

  • EMI = P × r × (1 + r)^n / [(1 + r)^n − 1], r = 0.01, n = 60
  • ₹4,00,00,000 पर EMI लगभग ₹8,89,778 महीना
  • कुल ब्याज: ₹8,89,778 × 60 − ₹4,00,00,000 = लगभग ₹1,33,86,674

पहले साल की गारंटी फीस (₹4 करोड़ पर)

कैटेगरी फीस दर पहले साल की फीस
चैंपियन सेक्टर 1% ₹4,00,000
महिला उद्यमी / पूर्वोत्तर 1.5% ₹6,00,000
बाकी 2% ₹8,00,000

फीस आमतौर पर बकाया टर्म लोन (या मंजूर वर्किंग कैपिटल लिमिट) पर लगती है, इसलिए जैसे-जैसे आप चुकाते हैं, यह घटती जाती है।

गारंटी क्या कवर करती है

अगर स्टार्टअप ₹2.5 करोड़ बकाया रहते डिफॉल्ट करता है, तो योजना की शर्तों के तहत NCGTC बैंक को डिफॉल्ट रकम का 85% तक, यानी लगभग ₹2.125 करोड़, देता है। स्टार्टअप पर पूरे ₹2.5 करोड़ बकाया रहते हैं: बैंक वसूली जारी रखता है, और डिफॉल्ट कंपनी की क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज होता है। गारंटी लेंडर की सुरक्षा करती है, उधारकर्ता की नहीं।

लिमिट पर हामी भरने से पहले EMI कैलकुलेटर में देखें कि आपका कैश फ्लो कितनी EMI उठा सकता है।

CGSS लोन खारिज होने की आम वजहें

  • कमाई नहीं या अस्थिर। बैंक सिर्फ अनुमानों पर शायद ही लोन देते हैं।
  • कंपनी या प्रमोटर्स के इतिहास में डिफॉल्ट, सेटलमेंट या NPA।
  • DPIIT मान्यता खत्म (उम्र या टर्नओवर सीमा पार)।
  • लेंडर सदस्य संस्था नहीं, या लेंडर की आंतरिक रेटिंग की शर्त पूरी नहीं।
  • ज्यादा कर्ज: मौजूदा लोन या ECLGS बकाया पहले से कैश फ्लो पर बोझ; कुछ बैंक पहले के गारंटी वाले लोन बंद करने को कहते हैं।
  • लेंडर की पॉलिसी में बाहर रखी गई गतिविधि, जैसे रियल एस्टेट।

शिकायत कैसे करें

  1. पहले लेंडर। आवेदन रेफरेंस के साथ शाखा को और फिर बैंक के ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर को लिखें। खारिज होने की वजह लिखित में मांगें।
  2. RBI इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन। अगर बैंक या NBFC सर्विस, चार्ज या देरी की शिकायत 30 दिन में हल नहीं करता, तो cms.rbi.org.in पर शिकायत करें।
  3. योजना से जुड़े मुद्दे। योजना स्तर की समस्याएं (जैसे लेंडर का गलत तरीके से कहना कि CGSS है ही नहीं) स्टार्टअप इंडिया पोर्टल के जरिए DPIIT के पास या CPGRAMS (pgportal.gov.in) पर उठाएं।
  4. धोखाधड़ी। एडवांस फीस मांगने वाली फर्जी "CGSS लोन" कॉल या वेबसाइट की रिपोर्ट cybercrime.gov.in या 1930 पर करें।

छोटी जरूरतों के लिए मुद्रा और CGTMSE के रास्ते तेज हो सकते हैं; देखें हमारी सरकारी बिजनेस लोन योजनाओं की तुलना और बिजनेस लोन और मुद्रा लोन की मुख्य गाइड।

मुख्य बातें

  • CGSS अक्टूबर 2026 में चालू है और DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के लोन पर प्रति उधारकर्ता ₹20 करोड़ तक गारंटी देती है।
  • ₹10 करोड़ तक के लोन पर डिफॉल्ट रकम का 85% और उससे ऊपर 75% कवर होता है; यह लेंडर की सुरक्षा है, आपकी नहीं।
  • सालाना गारंटी फीस 27 चैंपियन सेक्टर के लिए 1%, महिला उद्यमियों और पूर्वोत्तर यूनिट्स के लिए 1.5% और बाकी के लिए 2% है, जो आमतौर पर उधारकर्ता से वसूली जाती है।
  • ब्याज लेंडर की दर पर लगता है; कोई सब्सिडी नहीं है।
  • जनसमर्थ पर या सदस्य बैंक में आवेदन करें; NCGTC सिर्फ लेंडर से डील करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना क्या है?

CGSS केंद्र सरकार की योजना है, जिसे DPIIT चलाता है और नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) संभालती है। यह बैंकों, NBFC और वेंचर डेट फंड्स द्वारा DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को दिए गए लोन की गारंटी देती है, ताकि लेंडर बिना कोलैटरल मांगे लोन दे सकें।

CGSS में अधिकतम लोन कितना है?

मई 2025 के नोटिफिकेशन के बाद प्रति उधारकर्ता ₹20 करोड़ तक गारंटी कवर मिलता है, जो पहले ₹10 करोड़ था। ₹10 करोड़ तक के लोन पर डिफॉल्ट रकम का 85% और ₹10 करोड़ से ऊपर के लोन पर 75% कवर होता है।

CGSS में गारंटी फीस कितनी है?

लेंडर्स के पेज पर 27 चैंपियन सेक्टर के स्टार्टअप्स के लोन पर 1%, पूर्वोत्तर की यूनिट्स और महिला उद्यमियों पर 1.5% और बाकी पर 2% सालाना गारंटी फीस बताई गई है। फीस लेंडर NCGTC को देता है, लेकिन आमतौर पर उधारकर्ता से वसूल लेता है।

क्या बिना कमाई वाले नए स्टार्टअप को CGSS लोन मिल सकता है?

योजना में DPIIT मान्यता और साफ रीपेमेंट रिकॉर्ड जरूरी है, लेकिन हर लेंडर अपना क्रेडिट मूल्यांकन करता है। बैंक आमतौर पर स्थिर कमाई देखते हैं; उदाहरण के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा 12 महीने के स्टेटमेंट देखता है, इसलिए प्री-रेवेन्यू स्टार्टअप्स को लोन मिलना मुश्किल होता है।

CGSS लोन के लिए आवेदन कैसे करें?

जनसमर्थ पोर्टल पर ऑनलाइन या किसी सदस्य संस्था, जैसे शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक की शाखा में आवेदन करें। लेंडर लोन का मूल्यांकन करता है और मंजूरी देने पर NCGTC से गारंटी कवर के लिए आवेदन करता है; स्टार्टअप सीधे NCGTC में आवेदन नहीं करता।

क्या CGSS लोन सब्सिडी या बिना ब्याज का है?

नहीं। यह लेंडर की ब्याज दर पर सामान्य लोन है। गारंटी सिर्फ डिफॉल्ट होने पर लेंडर के नुकसान के एक हिस्से की भरपाई करती है; पूरी रकम आपको ही चुकानी होती है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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