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होम लोन टैक्स बेनिफिट 2026-27: सालाना ₹3.5 लाख तक की छूट

FY 2026-27 में होम लोन पर अधिकतम टैक्स छूट: ₹2 लाख ब्याज + ₹1.5 लाख मूलधन = हर मालिक को सालाना ₹3.5 लाख (पुरानी व्यवस्था), जॉइंट मालिकों को ₹7 लाख।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 7 मिनट में पढ़ें
होम लोन टैक्स बेनिफिट 2026-27: सालाना ₹3.5 लाख तक की छूट
इस लेख में
  1. नए सेक्शन नंबर
  2. ब्याज पर छूट: पुराना Section 24(b), अब Section 22
  3. मूलधन पर छूट: पुराना Section 80C, अब Section 123
  4. उदाहरण: पुरानी व्यवस्था में कितना टैक्स बचा
  5. जॉइंट होम लोन: दोगुना फायदा
  6. होम लोन लेने वालों के लिए पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था
  7. क्लेम कैसे करें
  8. कुछ और जरूरी बातें
  9. संबंधित गाइड
  10. मुख्य बातें
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भारत में पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत होम लोन पर दो मुख्य टैक्स फायदे मिलते हैं: खुद रहने वाले घर के ब्याज पर सालाना ₹2 लाख तक की छूट (पुराना Section 24(b), अब Income-tax Act, 2025 का Section 22) और पुराने Section 80C की सीमा (अब Section 123) में मूलधन चुकाने पर ₹1.5 लाख तक की छूट। डिफॉल्ट नई व्यवस्था में खुद रहने वाले घर पर इनमें से कोई फायदा नहीं मिलता; सिर्फ किराये पर दी गई प्रॉपर्टी का ब्याज उसके किराये से घटाया जा सकता है।

नए सेक्शन नंबर

Income-tax Act, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से 1961 के एक्ट की जगह ली है, इसलिए FY 2026-27 नई नंबरिंग वाला पहला साल है। सीमाएं नहीं बदली हैं।

फायदा पुराना सेक्शन (1961 एक्ट) Income-tax Act, 2025 सीमा नई व्यवस्था में?
होम लोन का ब्याज 24(b) Section 22 ₹2 लाख (खुद रहने वाला घर); किराये वाले पर पूरा सिर्फ किराये वाला, नुकसान का सेट-ऑफ नहीं
मूलधन, स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन 80C Section 123 (Schedule XV के साथ) कुल ₹1.5 लाख नहीं
पहली बार घर खरीदने वालों के लिए अतिरिक्त ब्याज 80EE / 80EEA नए लोन पर उपलब्ध नहीं — नहीं

पुराने Section 80EE और 80EEA की अतिरिक्त छूट सिर्फ उन लोन पर थी जो तय समय-सीमा में मंजूर हुए थे, जो क्रमशः मार्च 2017 और मार्च 2022 में खत्म हो गईं, इसलिए नए कर्जदारों को यह नहीं मिलती।

ब्याज पर छूट: पुराना Section 24(b), अब Section 22

खुद रहने वाला घर (पुरानी व्यवस्था): सालाना ₹2 लाख तक ब्याज, बशर्ते घर लोन लेने वाले वित्त वर्ष के अंत से पांच साल के अंदर खरीदा या बनाया गया हो। अगर निर्माण में ज्यादा समय लगता है, या लोन सिर्फ मरम्मत या रेनोवेशन के लिए है, तो सीमा घटकर ₹30,000 रह जाती है। आप दो घरों तक को खुद रहने वाला मान सकते हैं, लेकिन ₹2 लाख की सीमा दोनों पर मिलाकर लागू होती है।

किराये पर दिया घर: सालाना वैल्यू पर 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद पूरा ब्याज किराये की आय से घटाया जा सकता है। अगर इससे नुकसान बनता है:

  • पुरानी व्यवस्था: नुकसान को सैलरी और दूसरी आय से सालाना ₹2 लाख तक सेट-ऑफ किया जा सकता है; बाकी नुकसान हाउस प्रॉपर्टी की आय के सामने आठ साल तक आगे ले जाया जा सकता है।
  • नई व्यवस्था: नुकसान न तो दूसरी आय से सेट-ऑफ हो सकता है, न आगे ले जाया जा सकता है।

निर्माण से पहले का ब्याज: घर पूरा होने वाले साल से पहले चुकाया गया ब्याज, निर्माण पूरा होने वाले साल से पांच बराबर किस्तों में घटाया जाता है। खुद रहने वाले घर के लिए ये किस्तें उसी ₹2 लाख की सीमा में गिनी जाती हैं।

मूलधन पर छूट: पुराना Section 80C, अब Section 123

साल भर में चुकाया गया मूलधन कुल ₹1.5 लाख की सीमा में आता है, जिसमें PPF, ELSS, EPF, जीवन बीमा और दूसरी चीजें भी शामिल हैं। शर्तें:

  • लोन रिहायशी घर खरीदने या बनाने के लिए होना चाहिए (मरम्मत या सिर्फ प्लॉट के लिए नहीं)।
  • क्लेम निर्माण पूरा होने और कब्जा मिलने के बाद ही शुरू होता है।
  • स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज भी उसी ₹1.5 लाख की सीमा में, जिस साल आप इन्हें चुकाते हैं उस साल घटाए जा सकते हैं।
  • अगर आप कब्जा मिलने वाले वित्त वर्ष के अंत से पांच साल के अंदर घर बेचते हैं, तो क्लेम किए गए सारे मूलधन डिडक्शन वापस हो जाते हैं और बिक्री वाले साल में उन पर टैक्स लगता है।

कई सैलरीड लोग EPF से ही ₹1.5 लाख की सीमा भर लेते हैं। इस फायदे पर भरोसा करने से पहले 80C के तहत टैक्स बचाने के विकल्प देख लें।

उदाहरण: पुरानी व्यवस्था में कितना टैक्स बचा

रवि एक सैलरीड कर्मचारी है जो पुरानी व्यवस्था में 30% स्लैब में आता है। FY 2026-27 में वह खुद रहने वाले फ्लैट की ईएमआई भरता है:

  • चुकाया गया ब्याज: ₹2,60,000
  • चुकाया गया मूलधन: ₹1,20,000
  • उसका EPF योगदान ₹30,000 है, इसलिए ₹1.5 लाख की 80C/Section 123 सीमा में से ₹1,20,000 खाली है।
मद क्लेम की गई रकम 31.2% पर बचा टैक्स (30% + 4% सेस)
ब्याज (सीमा तक) ₹2,00,000 ₹62,400
मूलधन ₹1,20,000 ₹37,440
कुल ₹3,20,000 ₹99,840

सीमा से ऊपर के ₹60,000 ब्याज का खुद रहने वाले घर पर कोई फायदा नहीं मिलता। अगर रवि की आय सरचार्ज वाले स्तर पर होती तो बचत थोड़ी ज्यादा होती; अगर वह निचले स्लैब में होता तो उसी अनुपात में कम। इससे आपका कुल टैक्स कैसे बदलता है, यह हमारे इनकम टैक्स कैलकुलेटर में देखें।

जॉइंट होम लोन: दोगुना फायदा

अगर घर के एक से ज्यादा मालिक हैं और लोन जॉइंट लिया गया है, तो हर वह को-ओनर जो को-बॉरोअर भी है और ईएमआई भरता है, क्लेम कर सकता है:

  • ₹2 लाख तक ब्याज (खुद रहने वाला घर), और
  • अपनी Section 123 सीमा में ₹1.5 लाख तक मूलधन।

क्लेम मालिकाना हिस्से और असल योगदान के हिसाब से होना चाहिए। जो को-बॉरोअर को-ओनर नहीं है, वह क्लेम नहीं कर सकता। ज्यादा ब्याज भरने वाले पति-पत्नी के लिए इससे घर का कुल डिडक्शन लगभग दोगुना हो सकता है। जॉइंट लोन के साथ आने वाली जिम्मेदारियां हमारी गाइड को-एप्लीकेंट और गारंटर की जिम्मेदारी में समझाई गई हैं।

होम लोन लेने वालों के लिए पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था

नई व्यवस्था (पुराना Section 115BAC, अब Section 202) में स्लैब कम हैं, ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन है और ऐसी रिबेट है जिससे ₹12 लाख तक की आय टैक्स-फ्री हो जाती है, लेकिन इसमें खुद रहने वाले घर पर होम लोन की छूट नहीं मिलती।

एक मोटा नियम: पुरानी व्यवस्था तब फायदेमंद होने लगती है जब आपके कुल डिडक्शन — ₹50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन, ₹2 लाख तक होम लोन ब्याज, ₹1.5 लाख तक Section 123, हेल्थ इंश्योरेंस और बाकी — इतने बड़े हों कि नई व्यवस्था के कम स्लैब की भरपाई कर सकें। FY 2026-27 के स्लैब के साथ, पूरे होम लोन क्लेम के बावजूद आम तौर पर नई व्यवस्था ही फायदेमंद रहती है। ₹18 लाख की सैलरी पर नई व्यवस्था में करीब ₹1.51 लाख टैक्स (सेस समेत) लगता है, जबकि ₹50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन, ₹2 लाख ब्याज और ₹1.5 लाख मूलधन के साथ पुरानी व्यवस्था में भी करीब ₹2.42 लाख लगता है। पुरानी व्यवस्था तभी फायदा देती है जब होम लोन क्लेम के ऊपर HRA, NPS और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे दूसरे बड़े डिडक्शन भी हों। अंदाजा लगाने की जगह दोनों को कैलकुलेटर में चलाकर देखें। पूरे ब्रेक-ईवन के लिए नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था पढ़ें।

क्लेम कैसे करें

  1. सैलरीड: साल की शुरुआत में ही लेंडर का प्रोविजनल इंटरेस्ट सर्टिफिकेट अपने एम्प्लॉयर को दें (और फाइनल सर्टिफिकेट जनवरी-फरवरी तक), ताकि TDS में डिडक्शन दिखे। अगर पुरानी व्यवस्था आपके लिए ठीक है, तो एम्प्लॉयर के पास वही चुनें।
  2. रिटर्न फाइल करते समय: ब्याज को हाउस प्रॉपर्टी से आय में और मूलधन को Section 123 में दिखाएं। सैलरीड लोग हर साल रिटर्न फाइल करते समय व्यवस्था बदल सकते हैं; बिजनेस आय वालों के लिए बदलने के नियम ज्यादा सख्त हैं।
  3. रिकॉर्ड संभालकर रखें: लोन सैंक्शन लेटर, इंटरेस्ट सर्टिफिकेट, कब्जा या कंप्लीशन सर्टिफिकेट, सेल डीड और स्टांप ड्यूटी की रसीदें।

कुछ और जरूरी बातें

  • बैलेंस ट्रांसफर: पुराना होम लोन चुकाने के लिए लिए गए नए लोन का ब्याज भी डिडक्शन के लायक रहता है। देखें होम लोन बैलेंस ट्रांसफर।
  • टॉप-अप लोन: सिर्फ तभी डिडक्शन मिलता है जब इसका इस्तेमाल खरीद, निर्माण, मरम्मत या रेनोवेशन में हुआ हो, और इसका सबूत हो।
  • रिश्तेदारों या दोस्तों से लिया लोन: सर्टिफिकेट के साथ ब्याज हाउस प्रॉपर्टी नियमों के तहत क्लेम हो सकता है, लेकिन मूलधन Section 123 में नहीं आता।
  • प्रोसेसिंग फीस और प्रीपेमेंट चार्ज: कई टैक्स जानकार इन्हें हाउस प्रॉपर्टी के लिए आम तौर पर ब्याज मानते हैं, लेकिन दस्तावेज संभालकर रखें और रकम बड़ी हो तो प्रोफेशनल सलाह लें।

संबंधित गाइड

मुख्य बातें

  • होम लोन का ब्याज (पुराना Section 24(b), अब Section 22) खुद रहने वाले घर पर सालाना ₹2 लाख तक घटाया जा सकता है, सिर्फ पुरानी व्यवस्था में।
  • मूलधन, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन (पुराना Section 80C, अब Section 123) ₹1.5 लाख की एक ही सीमा में आते हैं, यह भी सिर्फ पुरानी व्यवस्था में।
  • नई व्यवस्था में सिर्फ किराये वाली प्रॉपर्टी का ब्याज घटता है, और नुकसान न सेट-ऑफ हो सकता है न आगे ले जाया जा सकता है।
  • जो जॉइंट मालिक को-बॉरोअर भी हैं, उनमें से हर कोई पूरी सीमा क्लेम कर सकता है।
  • उदाहरण में 30% स्लैब वाला कर्जदार सालाना करीब ₹99,840 बचाता है; व्यवस्था चुनने से पहले दोनों की तुलना करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होम लोन पर टैक्स छूट किस सेक्शन में मिलती है?

Income-tax Act, 2025 (टैक्स ईयर 2026-27 से) के तहत होम लोन का ब्याज Section 22 (पुराना Section 24(b)) में और मूलधन Section 123 (पुराना Section 80C) में घटाया जाता है। दोनों पुरानी टैक्स व्यवस्था में लागू हैं; नई व्यवस्था में सिर्फ किराये पर दी गई प्रॉपर्टी के ब्याज की छूट मिलती है।

होम लोन के मूलधन पर कितनी टैक्स छूट मिलती है?

घर खरीदने या बनाने के लिए लिए गए होम लोन का चुकाया गया मूलधन पुराने Section 80C की सीमा, जो अब Income-tax Act, 2025 का Section 123 है, के तहत सालाना ₹1.5 लाख तक घटाया जा सकता है, सिर्फ पुरानी व्यवस्था में। इसी सीमा में EPF, PPF और जीवन बीमा भी आते हैं, और यह छूट घर का कब्जा मिलने के बाद ही शुरू होती है।

होम लोन पर अधिकतम टैक्स छूट कितनी है?

पुरानी टैक्स व्यवस्था में खुद रहने वाले घर पर हर मालिक के लिए अधिकतम ₹3.5 लाख सालाना: ₹2 लाख तक ब्याज (पुराना Section 24(b), अब Section 22) और पुराने Section 80C की सीमा (अब Section 123) में ₹1.5 लाख तक मूलधन। जो जॉइंट मालिक को-बॉरोअर भी हैं, उनमें से हर कोई यह क्लेम कर सकता है, इसलिए एक पति-पत्नी मिलकर ₹7 लाख तक घटा सकते हैं। अगर EPF, PPF या बीमा से ₹1.5 लाख की सीमा पहले ही भर चुकी है, तो मूलधन का फायदा कम होगा, और नई व्यवस्था में खुद रहने वाले घर पर इनमें से कुछ भी नहीं मिलता।

FY 2026-27 में होम लोन पर कितना टैक्स बचा सकते हैं?

पुरानी व्यवस्था में आप खुद रहने वाले घर पर ₹2 लाख तक ब्याज और पुराने Section 80C की सीमा, जो अब Income-tax Act, 2025 का Section 123 है, में ₹1.5 लाख तक मूलधन घटा सकते हैं। 30% स्लैब में सेस मिलाकर इससे करीब ₹1.1 लाख तक टैक्स घट सकता है, अगर 80C की सीमा पहले से इस्तेमाल न हुई हो।

क्या नई टैक्स व्यवस्था में होम लोन ब्याज की छूट मिलती है?

खुद रहने वाले घर पर नहीं। किराये पर दी गई प्रॉपर्टी पर ब्याज किराये की आय से घटाया जा सकता है, लेकिन इससे होने वाला कोई नुकसान नई व्यवस्था में सैलरी या दूसरी आय से सेट-ऑफ नहीं हो सकता, न ही आगे ले जाया जा सकता है।

क्या दोनों जॉइंट मालिक होम लोन टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं?

हां, अगर दोनों को-ओनर और को-बॉरोअर हैं और दोनों ईएमआई भरते हैं। पुरानी व्यवस्था में खुद रहने वाले घर पर हर कोई अपने हिस्से के अनुपात में ₹2 लाख तक ब्याज और ₹1.5 लाख तक मूलधन क्लेम कर सकता है।

क्या निर्माणाधीन प्रॉपर्टी पर होम लोन ब्याज क्लेम कर सकते हैं?

निर्माण के दौरान नहीं। निर्माण पूरा होने से पहले चुकाया गया ब्याज, निर्माण पूरा होने वाले साल से पांच बराबर किस्तों में घटाया जाता है, खुद रहने वाले घर के लिए ₹2 लाख की कुल सीमा के अंदर।

अगर मैं पांच साल के अंदर घर बेच दूं तो क्या होगा?

अगर घर कब्जा मिलने वाले वित्त वर्ष के अंत से पांच साल के अंदर बेचा जाता है, तो पुराने Section 80C में क्लेम किया गया मूलधन का डिडक्शन वापस हो जाता है और बिक्री वाले साल में आपकी आय में जोड़ दिया जाता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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