ईएमआई बाउंस: सिबिल स्कोर पर असर, चार्ज और क्या करें
ईएमआई बाउंस हो गई? जानें लोन देने वाला और आपका बैंक कितना चार्ज लेते हैं, सिबिल स्कोर पर क्या असर पड़ता है, कब मामला कानूनी बनता है और इसे जल्दी कैसे ठीक करें।

इस लेख में
जब ईएमआई (EMI) बाउंस होती है, तो आमतौर पर आपको तीन तरह का खर्च उठाना पड़ता है: लोन देने वाले का बाउंस चार्ज, फेल हुए ऑटो-डेबिट के लिए आपके अपने बैंक का अलग चार्ज, और बकाया रकम पर पीनल चार्ज, और इन सब पर जीएसटी। इससे भी बुरा यह कि अगर ईएमआई जल्दी नहीं भरी गई, तो लेंडर इसे क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट कर देता है और आपका सिबिल स्कोर (CIBIL score) गिर जाता है। उपाय यही है कि तुरंत भुगतान करें, पता करें कि बाउंस क्यों हुआ, और पक्का करें कि ऐसा दोबारा न हो।
ईएमआई बाउंस क्यों होती है
ज्यादातर बाउंस की वजहें सीधी-सादी होती हैं:
- डेबिट की तारीख पर खाते में पर्याप्त बैलेंस न होना
- सैलरी ईएमआई की तारीख के बाद आना
- नैच (NACH) या ईसीएस (ECS) मैंडेट का एक्सपायर, कैंसिल हो जाना या गलत जानकारी के साथ रजिस्टर होना
- खाता फ्रीज या निष्क्रिय (डॉर्मेंट) होना, या लेंडर को बताए बिना खाता बदल देना
- बैंक या एनपीसीआई (NPCI) में तकनीकी गड़बड़ी (कम होता है, पर होता है)
वजह जानना जरूरी है, क्योंकि अगर तकनीकी गड़बड़ी में आपकी गलती नहीं थी, तो आपको इसका कोई खर्च नहीं उठाना चाहिए।
ईएमआई बाउंस होने पर कितना खर्च आता है
| चार्ज | कौन लेता है | आमतौर पर कितना | जीएसटी |
|---|---|---|---|
| बाउंस / डिसऑनर चार्ज | आपका लेंडर | हर बार करीब ₹300-₹1,500 | 18% |
| मैंडेट रिटर्न चार्ज | आपका अपना बैंक (जहां डेबिट फेल हुआ) | अक्सर हर रिटर्न पर कुछ सौ रुपये | 18% |
| पीनल चार्ज | आपका लेंडर | लोन एग्रीमेंट के मुताबिक, सिर्फ बकाया रकम पर | 18% जहां लागू हो |
| सामान्य ब्याज | आपका लेंडर | लोन की दर पर चलता रहता है | लागू नहीं |
सही रकम हर जगह काफी अलग होती है; असली आंकड़े आपके लोन एग्रीमेंट, की फैक्ट स्टेटमेंट और आपके बैंक के शेड्यूल ऑफ चार्जेस में लिखे होते हैं।
उदाहरण से समझें:
आपके होम लोन की ₹20,000 की ईएमआई बाउंस हो जाती है। आप इसे 20 दिन बाद भरते हैं। मान लीजिए:
- लेंडर का बाउंस चार्ज: ₹500 + 18% जीएसटी = ₹590
- आपके बैंक का मैंडेट रिटर्न चार्ज: ₹500 + 18% जीएसटी = ₹590
- पीनल चार्ज: बकाया ₹20,000 पर 20 दिन के लिए 2% महीना = ₹20,000 × 2% × 20/30 = ₹267
कुल अतिरिक्त खर्च: ₹590 + ₹590 + ₹267 = ₹1,447, सिर्फ एक लेट ईएमआई के लिए। साल में तीन बाउंस हुए तो खर्च ₹4,300 से ज्यादा हो जाएगा, ऊपर से क्रेडिट स्कोर का नुकसान अलग। हमारे ईएमआई कैलकुलेटर से देखें कि इससे बचने के लिए ईएमआई की तारीख पर कितना छोटा-सा बफर काफी है।
बाउंस और पीनल चार्ज पर आरबीआई के नियम
आरबीआई (RBI) के "फेयर लेंडिंग प्रैक्टिस – पीनल चार्जेस इन लोन अकाउंट्स" नियम, जो 1 जनवरी 2024 से लागू हैं, साफ सीमाएं तय करते हैं:
- लेंडर पीनल चार्ज ले सकते हैं, आपकी ब्याज दर में जोड़कर पीनल इंटरेस्ट नहीं।
- पीनल चार्ज कैपिटलाइज नहीं किए जा सकते, यानी इन पर कोई ब्याज नहीं लगता।
- ये उचित होने चाहिए, डिफॉल्ट के अनुपात में होने चाहिए, और कमाई बढ़ाने का जरिया नहीं बनाए जा सकते।
- चार्ज लोन एग्रीमेंट और की फैक्ट स्टेटमेंट में और लेंडर की वेबसाइट पर बताए जाने चाहिए।
- गैर-कारोबारी काम के लिए लोन लेने वाले व्यक्तियों पर चार्ज, उसी तरह के डिफॉल्ट के लिए गैर-व्यक्तियों (जैसे कंपनियों) से ज्यादा नहीं हो सकते।
- जब पीनल चार्ज लगाया जाए, तो लेंडर को रिमाइंडर में इसकी जानकारी देनी होगी।
अगर आपके स्टेटमेंट में बैलेंस पर "पीनल इंटरेस्ट" चक्रवृद्धि तरीके से जुड़ता दिखे, तो शिकायत करें।
ईएमआई बाउंस का सिबिल स्कोर पर असर
आरबीआई के क्रेडिट इन्फॉर्मेशन निर्देशों के तहत लेंडर महीने में कई बार क्रेडिट ब्यूरो को भुगतान का डेटा भेजते हैं, इसलिए बकाया ईएमआई जल्दी दिख सकती है। खाता इन चरणों से गुजरता है:
| कितने दिन से बकाया | ब्यूरो को क्या दिखता है | संभावित असर |
|---|---|---|
| 0 (ग्रेस में, रिपोर्टिंग से पहले भर दी) | कुछ भी नकारात्मक नहीं | बहुत कम |
| 1-30 | डेज पास्ट ड्यू (DPD) एंट्री | साफ दिखने लायक गिरावट |
| 31-90 | बार-बार DPD एंट्री | बड़ी गिरावट; लेंडर सतर्क हो जाते हैं |
| 90+ | एनपीए / सबस्टैंडर्ड | गंभीर; ज्यादातर लेंडर मना कर देंगे |
कुछ ही दिनों में भर दिया गया एक बाउंस, बार-बार के बाउंस की तुलना में बहुत कम नुकसान करता है। अगर बाउंस बैंक की गलती से हुआ फिर भी रिपोर्ट हो गया, तो विवाद (डिस्प्यूट) दर्ज करें। देखें सिबिल रिपोर्ट की गलती पर डिस्प्यूट कैसे करें।
बाउंस कब कानूनी मामला बन जाता है
ज्यादातर एक बार के बाउंस चार्ज भरने पर खत्म हो जाते हैं। कानूनी कार्रवाई तब हो सकती है जब भुगतान बार-बार फेल हों और लेंडर केस करने का फैसला करे:
- चेक बाउंस: नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138। बाउंस का पता चलने के 30 दिन के भीतर लेंडर को कानूनी नोटिस भेजना होता है; उसके बाद आपके पास भुगतान के लिए 15 दिन होते हैं। अगर आप इन 15 दिनों में भुगतान कर देते हैं, तो कोई अपराध नहीं बनता। अगर नहीं करते, तो लेंडर शिकायत दर्ज कर सकता है, और सजा दो साल तक की कैद, चेक की रकम के दोगुने तक जुर्माना, या दोनों हो सकती है।
- नैच/ईसीएस बाउंस: पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 25 में पर्याप्त पैसा न होने से फेल हुए इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर के लिए इसी तरह का अपराध और इतनी ही अधिकतम सजा का प्रावधान है। अदालतों ने इसे धारा 138 जैसी प्रक्रिया के साथ लागू किया है।
व्यवहार में, नोटिस की अवधि के भीतर भुगतान कर देने से मामला सुलझ जाता है। कानूनी नोटिस को कभी नजरअंदाज न करें। पूरी तस्वीर के लिए देखें लोन डिफॉल्ट के कानूनी नतीजे।
ईएमआई बाउंस के बाद क्या करें, एक-एक कदम
1. चूकी हुई ईएमआई तुरंत भरें
लेंडर का ऐप, वेबसाइट या ब्रांच इस्तेमाल करें। पूछ लें कि क्या लेंडर मैंडेट दोबारा लगाएगा, ताकि आपके खाते से दो बार पैसा न कटे।
2. भुगतान का सबूत रखें
ट्रांजैक्शन की रसीद और लेंडर की पावती (एक्नॉलेजमेंट) सेव करके रखें।
3. वजह पता करें
अपना अकाउंट स्टेटमेंट और बाउंस का रीजन कोड देखें। क्या बैलेंस कम था, मैंडेट में दिक्कत थी, या बैंक की गलती थी?
4. गलती आपकी नहीं थी तो चार्ज माफ करने को कहें
अगर बाउंस बैंक या एनपीसीआई की तकनीकी गड़बड़ी से हुआ, या पैसा आपके खाते में था, तो सबूत के साथ लेंडर और अपने बैंक को लिखें और चार्ज वापस करने की मांग करें।
5. तारीख ठीक करें
अगर सैलरी ईएमआई की तारीख के बाद आती है, तो लेंडर से ईएमआई की तारीख बदलने को कहें। कई लेंडर लोन के दौरान एक-दो बार ऐसा करने देते हैं।
6. एक ईएमआई का बफर रखें
डेबिट वाले खाते में कम से कम एक ईएमआई जितनी रकम हमेशा रखें। बाउंस चार्ज से बचने का यह सबसे सस्ता बीमा है।
7. मैंडेट समय पर अपडेट करें
अगर आप बैंक बदलते हैं या खाता बंद करते हैं, तो अगली ईएमआई की तारीख से पहले नया मैंडेट रजिस्टर करा लें।
आपके अधिकार
- आरबीआई के पीनल चार्ज नियमों के तहत सिर्फ बताए गए पीनल चार्ज, जो कभी कैपिटलाइज नहीं होंगे।
- आपके खाते पर लगाए गए सभी चार्ज का लिखित स्टेटमेंट।
- जहां गड़बड़ी आपकी वजह से नहीं हुई, वहां बैंक की शिकायत प्रक्रिया के जरिए चार्ज की वापसी।
- सही क्रेडिट रिपोर्टिंग, और विवाद 30 दिन में न सुलझे तो रोज ₹100 का मुआवजा।
- इज्जत के साथ वसूली: एजेंट आपसे सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच संपर्क कर सकते हैं।
शिकायत कहां करें
- लेंडर के ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर से, गलत या ज्यादा चार्ज के लिए।
- अपने बैंक से, मैंडेट रिटर्न चार्ज या ऐसे डेबिट फेल होने पर जिसमें बैंक की गलती हो।
- आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन से, cms.rbi.org.in पर (हेल्पलाइन 14448), अगर 30 दिन में मामला न सुलझे। 2026 की योजना के तहत, यह 30 दिन की अवधि खत्म होने या आखिरी जवाब मिलने के 90 दिन के भीतर शिकायत करें।
- cybercrime.gov.in या 1930 पर, अगर कोई "बाउंस हुई ईएमआई" के नाम पर आपसे संपर्क करे और ओटीपी या पेमेंट लिंक मांगे। यह एक आम ठगी है।
क्या न करें
- बाउंस रोकने के लिए अपना नैच मैंडेट कैंसिल न करें; इससे ईएमआई नहीं रुकती और परेशानियां और बढ़ती हैं।
- अगले महीने का इंतजार करके दो ईएमआई एक साथ न भरें; तब तक बकाया रिपोर्ट हो जाता है।
- अनजान नंबरों से भेजे गए लिंक से भुगतान न करें। सिर्फ आधिकारिक तरीकों से भुगतान करें।
- धारा 138 या धारा 25 के नोटिस को नजरअंदाज न करें; 15 दिन के भीतर भुगतान करने से आमतौर पर मामला खत्म हो जाता है।
- बाउंस को आदत न बनने दें। अगर ईएमआई भरना आपके बस में नहीं है, तो पढ़ें ईएमआई न भर पाएं तो क्या करें।
मुख्य बातें
- एक ईएमआई बाउंस पर आमतौर पर लेंडर का बाउंस चार्ज, बैंक का रिटर्न चार्ज और पीनल चार्ज लगता है, हर एक पर जीएसटी अलग से; ₹20,000 की ईएमआई 20 दिन देर से भरने पर यह करीब ₹1,450 हो सकता है।
- आरबीआई के नियम पीनल इंटरेस्ट और कैपिटलाइज किए गए पीनल चार्ज पर रोक लगाते हैं; सिर्फ उचित और पहले से बताए गए पीनल चार्ज ही लिए जा सकते हैं।
- सिबिल स्कोर को कम से कम नुकसान हो, इसके लिए तुरंत भुगतान करें।
- बार-बार चेक या नैच बाउंस होने पर एनआई एक्ट की धारा 138 या पीएसएस एक्ट की धारा 25 के तहत केस हो सकता है, लेकिन नोटिस की अवधि में भुगतान करने से मामला सुलझ जाता है।
- एक ईएमआई का बफर रखें और ईएमआई की तारीख को सैलरी की तारीख के हिसाब से तय करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत में ईएमआई बाउंस चार्ज कितना होता है?
लोन देने वाले आमतौर पर हर बाउंस पर करीब ₹300 से ₹1,500 तक और उस पर 18% जीएसटी लेते हैं, जो लेंडर और लोन के प्रकार पर निर्भर करता है। आपका अपना बैंक फेल हुए ऑटो-डेबिट के लिए अलग से चार्ज ले सकता है, और बकाया रकम पर पीनल चार्ज भी लग सकता है। सही रकम के लिए अपना लोन एग्रीमेंट और की फैक्ट स्टेटमेंट देखें।
क्या एक ईएमआई बाउंस होने से सिबिल स्कोर पर असर पड़ता है?
अगर आप कुछ ही दिनों में, लेंडर के ब्यूरो को रिपोर्ट करने से पहले ईएमआई भर देते हैं, तो असर बहुत कम हो सकता है। अगर इसे ओवरड्यू के रूप में रिपोर्ट कर दिया गया, तो एक चूकी हुई किस्त भी स्कोर घटा सकती है और यह आपकी पेमेंट हिस्ट्री में दर्ज रहती है।
क्या ईएमआई बाउंस होने पर जेल हो सकती है?
कम बैलेंस की वजह से एक बार बाउंस होने पर आमतौर पर चार्ज और वसूली की कार्रवाई होती है, मुकदमा नहीं। लेकिन चेक बाउंस होने पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत और इलेक्ट्रॉनिक मैंडेट फेल होने पर पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 25 के तहत केस चल सकता है, अगर लेंडर कानूनी नोटिस की प्रक्रिया पूरी करता है और आप फिर भी भुगतान नहीं करते।
ईएमआई बाउंस होने के तुरंत बाद क्या करना चाहिए?
लेंडर के ऐप या वेबसाइट से जितनी जल्दी हो सके ईएमआई भर दें, लेंडर से पूछें कि क्या वह मैंडेट दोबारा लगाएगा ताकि आपसे दो बार पैसा न कटे, और भुगतान का सबूत संभालकर रखें। फिर बाउंस की वजह ठीक करें, जैसे कम बैलेंस या एक्सपायर हो चुका मैंडेट।
क्या बाउंस हुई ईएमआई पर लेंडर पीनल इंटरेस्ट ले सकता है?
नहीं। 1 जनवरी 2024 से आरबीआई के नियमों के तहत बकाया रकम पर सिर्फ पीनल चार्ज लिया जा सकता है, लोन की ब्याज दर में जोड़कर पीनल इंटरेस्ट नहीं। पीनल चार्ज उचित होने चाहिए, पहले से बताए जाने चाहिए और इन्हें मूल रकम में जोड़ा (कैपिटलाइज) नहीं किया जा सकता।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।