दूसरे राज्य से लोन पर गाड़ी: आरटीओ और आरसी चेकलिस्ट
लोन वाली गाड़ी दूसरे राज्य से खरीद रहे हैं या ले जा रहे हैं? लोन पेपर को आरसी, हाइपोथिकेशन, एनओसी और रोड टैक्स से मिलाएं, ताकि VAHAN पर रजिस्ट्रेशन आसान हो।

इस लेख में
जब लोन पर ली गई गाड़ी राज्य की सीमा पार करती है, चाहे आप दूसरे राज्य के डीलर से खरीदें, दूसरी जगह रजिस्टर्ड पुरानी गाड़ी खरीदें, या घर बदलकर साथ ले जाएं, तो लोन पेपर और आरटीओ रिकॉर्ड में एक जैसी जानकारी होनी चाहिए। रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) पर आपके लेंडर का हाइपोथिकेशन दर्ज हो, आपका नाम और पता लोन फाइल से मेल खाए, और दूसरे राज्य में जाने के लिए पुराने आरटीओ और फाइनेंसर दोनों की एनओसी हो। ये सही रहें तो ट्रांसफर सामान्य काम है; गलत हों तो आपको इंश्योरेंस, बिक्री या लोन बंद करने में दिक्कत हो सकती है।
यह गाइड राज्य बदलने की तीन आम स्थितियों, मिलाए जाने वाले डॉक्यूमेंट, और लेंडर या आरटीओ की देरी पर क्या करें, यह बताती है। आधार मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988, सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स और अक्टूबर 2026 के आरबीआई नियम हैं। राज्यों की फीस, फॉर्म और ऑनलाइन सेवाएं अलग होती हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर पुष्टि करें।
आप किस स्थिति में हैं?
| स्थिति | मुख्य कानून | मुख्य डॉक्यूमेंट |
|---|---|---|
| दूसरे राज्य के डीलर से नई गाड़ी, इस्तेमाल अपने शहर में | धारा 40 (जहां रहते या कारोबार करते हैं वहां रजिस्ट्रेशन), धारा 43 (टेम्पररी रजिस्ट्रेशन) | इनवॉइस, फॉर्म 20 रजिस्ट्रेशन आवेदन, फॉर्म 34 हाइपोथिकेशन एंट्री, इंश्योरेंस, टेम्पररी रजिस्ट्रेशन |
| दूसरे राज्य में रजिस्टर्ड पुरानी गाड़ी, लोन पर खरीदी | धारा 47, 48, 50, 51 | विक्रेता की आरसी, मूल आरटीओ से फॉर्म 28 एनओसी, विक्रेता के लेंडर की एनओसी और फॉर्म 35 (अगर पुराना लोन हो), फॉर्म 29/30 ट्रांसफर, आपके लेंडर के लिए फॉर्म 34 |
| लोन चालू रहते गाड़ी लेकर दूसरे राज्य में शिफ्ट | धारा 47, 49, 51 | फाइनेंसर की एनओसी, पुराने आरटीओ से फॉर्म 28, नए रजिस्ट्रेशन मार्क के लिए फॉर्म 27, रोड टैक्स भुगतान |
मिलान की चेकलिस्ट
डिस्बर्समेंट से पहले, और रजिस्ट्रेशन के बाद फिर से, लोन एग्रीमेंट, KFS, इनवॉइस, इंश्योरेंस और आरसी में ये चीजें मिलाएं:
- मालिक का नाम, हर जगह बिल्कुल एक ही स्पेलिंग में, इनिशियल समेत
- पता: आरसी का पता तय करता है कि कौन-सा आरटीओ; लेंडर का KYC पता मेल खाना चाहिए या लेंडर को बदलाव दर्ज करना चाहिए
- चेसिस और इंजन नंबर इनवॉइस, इंश्योरेंस पॉलिसी, आरसी और लोन फाइल में
- फाइनेंसर का नाम आरसी पर (हाइपोथिकेशन एंट्री), जो पैसा देने वाले लेंडर से मेल खाए
- गाड़ी का मॉडल और वेरिएंट, क्योंकि लेंडर एक खास इनवॉइस पर फाइनेंस करते हैं
- इंश्योरेंस पॉलिसी में लेंडर हाइपोथिकेशन होल्डर या लॉस पेई के रूप में, जैसा आपका एग्रीमेंट कहता है
इनमें से किसी में भी फर्क आरटीओ में देरी की सबसे आम वजह है, और बाद में इंश्योरेंस क्लेम और लोन बंद करने में दिक्कत की भी।
स्थिति 1: दूसरे राज्य से नई गाड़ी खरीदना
बेहतर कीमत या जल्दी डिलीवरी के लिए लोग अक्सर पड़ोसी राज्य जाते हैं। एक्ट की धारा 40 के तहत रजिस्ट्रेशन उस रजिस्टरिंग अथॉरिटी के पास होता है जहां आपका निवास या कारोबार है, इसलिए गाड़ी आमतौर पर आपके गृह राज्य में रजिस्टर होती है।
- लेंडर को पहले बताएं कि गाड़ी कहां रजिस्टर होगी। डीलर से जुड़ा फाइनेंस अक्सर लोकल रजिस्ट्रेशन के हिसाब से होता है; लेंडर को आपके गृह आरटीओ में हाइपोथिकेशन दर्ज कराने लायक होना चाहिए।
- घर तक चलाने के लिए डीलर के राज्य से टेम्पररी रजिस्ट्रेशन लें। धारा 43 टेम्पररी रजिस्ट्रेशन को छोटी अवधि (एक महीना, कुछ सीमित अपवादों के साथ) तक सीमित करती है, इसलिए स्थायी रजिस्ट्रेशन जल्दी कराएं।
- अपने गृह आरटीओ में रजिस्टर कराएं, फॉर्म 20, इनवॉइस, इंश्योरेंस, पते का प्रमाण, टेम्पररी रजिस्ट्रेशन और हाइपोथिकेशन एंट्री के लिए आपके और लेंडर के साइन वाले फॉर्म 34 के साथ। अपने राज्य का रोड टैक्स भरें।
- आरसी जारी होने के बाद VAHAN पर जांचें कि फाइनेंसर का नाम दिख रहा है।
अगर गलती से डीलर के राज्य में रोड टैक्स भर दिया, तो आपको अपने राज्य में फिर से भरना पड़ सकता है और फिर रिफंड के लिए आवेदन करना होगा, जो हर राज्य में अलग और धीमा होता है।
स्थिति 2: दूसरे राज्य में रजिस्टर्ड पुरानी गाड़ी खरीदना
- विक्रेता की आरसी VAHAN पर जांचें — मालिक का नाम, कोई मौजूदा हाइपोथिकेशन, ब्लैकलिस्ट स्टेटस और टैक्स वैलिडिटी।
- अगर विक्रेता पर लोन है, तो उसे लोन बंद कर लेंडर की एनओसी और फॉर्म 35 लेनी होगी और ट्रांसफर से पहले या साथ में हाइपोथिकेशन हटवाना होगा। हमारी यूज्ड कार लोन बनाम न्यू कार लोन गाइड इन जांचों को बताती है।
- मूल आरटीओ से फॉर्म 28 (एनओसी) लें, क्योंकि गाड़ी दूसरी रजिस्टरिंग अथॉरिटी के पास जा रही है (धारा 48)।
- फॉर्म 29 और 30 से ओनरशिप ट्रांसफर करें और फॉर्म 34 से अपने लेंडर का हाइपोथिकेशन दर्ज कराएं।
- गाड़ी आपके राज्य में रहने लगे तो वहां नए रजिस्ट्रेशन मार्क के लिए आवेदन करें और उस राज्य का रोड टैक्स भरें।
आपका लेंडर आमतौर पर पैसा तभी जारी करेगा जब आरसी आपके नाम हो और उस पर उसका हाइपोथिकेशन दर्ज हो, या विक्रेता के साथ त्रिपक्षीय व्यवस्था हो, इसलिए समय-सारिणी में इसका ध्यान रखें।
स्थिति 3: लोन वाली गाड़ी लेकर दूसरे राज्य में शिफ्ट होना
- अपना पता अपडेट करें। धारा 49 के तहत पता बदलने की सूचना 30 दिन के भीतर रजिस्टरिंग अथॉरिटी को देनी होती है; छह महीने तक की अस्थायी गैरमौजूदगी इसमें शामिल नहीं है।
- फाइनेंसर से एनओसी के लिए आवेदन करें। धारा 51(6) के तहत नया रजिस्ट्रेशन मार्क मांगने से पहले यह जरूरी है। धारा 51(7) के तहत फाइनेंसर को आपके आवेदन के सात दिन के भीतर एनओसी देनी होती है या लिखित कारण के साथ मना करना होता है। अगर वह दोनों में से कुछ न करे, तो एनओसी जारी मानी जाती है और आप आरटीओ में इस आशय का डिक्लेरेशन दे सकते हैं।
- अपने मूल आरटीओ से फॉर्म 28 लें, फिर नए राज्य में नए रजिस्ट्रेशन मार्क के लिए फॉर्म 27 के साथ आवेदन करें। धारा 47 के तहत दूसरे राज्य में 12 महीने से ज्यादा रहने वाली गाड़ी को नया मार्क चाहिए, जिसका आवेदन उसी अवधि में करना है।
- नए राज्य का रोड टैक्स भरें, और मूल आरटीओ से पूछें कि बची अवधि का रिफंड मिल सकता है या नहीं।
- लेंडर को नई आरसी और पता भेजें। आरटीओ को नई एंट्री की सूचना फाइनेंसर को देनी होती है, फिर भी आप खुद भी भेजें।
सरकारी नौकरी या चार या उससे ज्यादा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ऑफिस वाली योग्य प्राइवेट कंपनियों में ट्रांसफर वाली नौकरी करने वाले लोग खरीद के समय भारत (BH) सीरीज रजिस्ट्रेशन चुन सकते हैं, जिसका मकसद ट्रांसफर पर दोबारा रजिस्ट्रेशन से बचाना है। योग्यता और मौजूदा नियम Parivahan पोर्टल या अपने आरटीओ से जांचें।
उदाहरण: दूसरे राज्य से खरीद का बजट
अनिल पड़ोसी राज्य के डीलर से कार खरीदता है और अपने राज्य में रजिस्टर कराता है। आंकड़े उदाहरण के लिए हैं और रोड टैक्स की दर काल्पनिक है; असली दरें राज्य, कीमत और फ्यूल टाइप के हिसाब से अलग होती हैं।
| मद | रकम |
|---|---|
| एक्स-शोरूम कीमत | ₹8,00,000 |
| गृह राज्य का रोड टैक्स (काल्पनिक 10%) | ₹80,000 |
| इंश्योरेंस और रजिस्ट्रेशन फीस (उदाहरण) | ₹40,000 |
| ऑन-रोड लागत | ₹9,20,000 |
| डाउन पेमेंट | ₹2,20,000 |
| 9.5% पर 5 साल का लोन | ₹7,00,000 |
| ईएमआई | ₹14,701 |
अगर अनिल ने गलती से डीलर के राज्य में भी ₹80,000 का काल्पनिक रोड टैक्स भर दिया होता, तो कोई रिफंड आने तक उसे यह रकम अपनी जेब से लगानी पड़ती, जो लगभग साढ़े पांच ईएमआई (₹80,000 ÷ ₹14,701) के बराबर है। अपने आंकड़े ईएमआई कैलकुलेटर में निकालें, और दरों व चार्ज के लिए कार लोन गाइड देखें।
लेंडर के साथ आपके अधिकार
- मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 51(7) के तहत नए रजिस्ट्रेशन मार्क के लिए सात दिन में एनओसी, वरना वह जारी मानी जाएगी।
- लोन बंद होने के बाद डॉक्यूमेंट और हाइपोथिकेशन हटाना। चल और अचल संपत्ति के डॉक्यूमेंट लौटाने पर आरबीआई के निर्देश लेंडर से कहते हैं कि पूरा चुकाने या सेटलमेंट के 30 दिन के भीतर मूल डॉक्यूमेंट लौटाए और दर्ज चार्ज हटाए। देरी लेंडर की गलती से हो, तो उसे हर दिन की देरी के लिए ₹5,000 देने होंगे। देखें लोन क्लोजर चेकलिस्ट।
- साइन करने से पहले Key Facts Statement, जिसमें APR, फीस और एनओसी या डुप्लिकेट डॉक्यूमेंट जारी करने का कोई चार्ज हो। KFS में न बताई गई फीस आपकी साफ सहमति के बिना नहीं ली जा सकती।
- भुगतान सिर्फ लेंडर को। ईएमआई और चार्ज सिर्फ लेंडर के अपने खाते या रेगुलेटेड पेमेंट चैनल में जाने चाहिए, कभी किसी डीलर या एजेंट के निजी खाते में नहीं।
क्या न करें
- टेम्पररी रजिस्ट्रेशन पर या दूसरे राज्य की नंबर प्लेट पर तय अवधि से ज्यादा गाड़ी न चलाएं।
- किसी डीलर या एजेंट को ओटीपी, आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग डिटेल देकर आरटीओ का काम "मैनेज" न करवाएं। फ्रॉड की रिपोर्ट cybercrime.gov.in पर या 1930 पर करें।
- जिस गाड़ी पर अब भी हाइपोथिकेशन दिख रहा हो, उसे लेंडर की लिखित सहमति के बिना न बेचें न सौंपें; धारा 51 के तहत इसके बिना ओनरशिप ट्रांसफर नहीं हो सकता।
- आरसी पर गलत फाइनेंसर के नाम को नजरअंदाज न करें। बाद में यह लोन बंद करने, बिक्री और क्लेम में अड़चन बनेगा।
शिकायत कहां करें
- लेंडर: ग्रीवांस ऑफिसर, फिर प्रिंसिपल नोडल ऑफिसर, लिखित में।
- बैंक और एनबीएफसी के लिए cms.rbi.org.in पर आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन, अगर 30 दिन में जवाब न मिले या आप उससे असंतुष्ट हों।
- रजिस्ट्रेशन में देरी के लिए आरटीओ या राज्य परिवहन विभाग का ग्रीवांस सेल, और VAHAN रिकॉर्ड की गलतियों के लिए Parivahan हेल्पडेस्क।
मुख्य बातें
- जहां रहते या कारोबार करते हैं वहीं रजिस्ट्रेशन कराएं; उसी आरटीओ में फॉर्म 34 से लेंडर का हाइपोथिकेशन दर्ज कराएं।
- लोन फाइल, इंश्योरेंस और आरसी में नाम, पता, चेसिस नंबर और फाइनेंसर मिलाएं।
- राज्य बदलने पर 30 दिन में पता अपडेट करें और फॉर्म 28 व फाइनेंसर की एनओसी के साथ 12 महीने के भीतर नया मार्क लें।
- फाइनेंसर को सात दिन में एनओसी देनी या मना करनी होती है, वरना वह जारी मानी जाती है।
- लोन बंद होने के बाद लेंडर को 30 दिन में हाइपोथिकेशन हटाना होता है, वरना उसकी वजह से हुई देरी पर ₹5,000 प्रतिदिन देने होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैं एक राज्य में लोन पर कार खरीदकर दूसरे राज्य में रजिस्टर करा सकता हूं?
हां। मोटर व्हीकल्स एक्ट के तहत गाड़ी उस अथॉरिटी के पास रजिस्टर होती है जहां आप रहते हैं या आपका कारोबार है, इसलिए दूसरी जगह से खरीदने पर भी गाड़ी आमतौर पर आपके गृह राज्य में रजिस्टर होती है। ध्यान रखें कि उस आरटीओ में आरसी पर लेंडर का हाइपोथिकेशन दर्ज हो और आपके लोन और आरसी का पता एक हो।
क्या नए राज्य में गाड़ी दोबारा रजिस्टर कराने के लिए फाइनेंसर की एनओसी चाहिए?
हां। अगर गाड़ी हाइपोथिकेशन में है, तो मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 51 के तहत नया रजिस्ट्रेशन मार्क मांगने से पहले फाइनेंसर से एनओसी के लिए आवेदन करना होता है। अगर फाइनेंसर सात दिन में न एनओसी दे न मना करे, तो उसे जारी माना जाता है, और आप आरटीओ में डिक्लेरेशन दे सकते हैं।
दूसरे राज्य में शिफ्ट होने के बाद गाड़ी दोबारा कब रजिस्टर करानी होगी?
मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 47 के तहत, एक राज्य में रजिस्टर्ड गाड़ी अगर दूसरे राज्य में 12 महीने से ज्यादा रहती है, तो नए राज्य से नया रजिस्ट्रेशन मार्क लेना होता है, जिसका आवेदन उसी अवधि में करना है। इसके अलावा धारा 49 के तहत पता बदलने की सूचना 30 दिन में देनी होती है।
लोन वाली गाड़ी लेकर शिफ्ट होने पर क्या रोड टैक्स दो बार देना पड़ेगा?
आमतौर पर दोबारा रजिस्ट्रेशन पर नया राज्य अपना रोड टैक्स लेता है। कुछ राज्य आवेदन पर पुराने राज्य में दिए टैक्स का अनुपातिक रिफंड देते हैं, लेकिन नियम और समय-सीमा अलग-अलग हैं, इसलिए जाने से पहले पुराने आरटीओ से पूछ लें।
कैसे जांचूं कि हाइपोथिकेशन सही दर्ज है?
आरसी और Parivahan की VAHAN सिटीजन सर्विसेज या mParivahan ऐप पर गाड़ी का रिकॉर्ड देखें। फाइनेंसर का नाम आपके लोन एग्रीमेंट वाले लेंडर से मेल खाना चाहिए। अगर नाम गायब या गलत है, तो अगले किसी भी लेनदेन से पहले लेंडर और आरटीओ से इसे ठीक कराएं।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।