लीज बनाम खरीदी मशीन: सब्सिडी पात्रता में क्या फर्क है
MSME सब्सिडी में लीज और खरीदी मशीन का फर्क: मालिकाना हक क्यों अहम है, हायर परचेज और किराए के शेड का नियम, ₹40 लाख का उदाहरण और क्या पूछें।

इस लेख में
ज्यादातर MSME कैपिटल सब्सिडी उन्हीं प्लांट और मशीनरी पर गिनी जाती है जो आपकी यूनिट के मालिकाना हक में हो और जिसका भुगतान हो चुका हो, इसलिए सामान्य लीज या किराए पर ली गई मशीन आमतौर पर नहीं गिनी जाती, जबकि खरीदी गई मशीन (अपने पैसे से या टर्म लोन से) आमतौर पर गिनी जाती है। हायर परचेज, फाइनेंस लीज और किराए के शेड बीच में आते हैं, और हर योजना इन्हें अपने शब्दों में परिभाषित करती है। यह गाइड बताती है कि वे शब्द कैसे पढ़ें, ₹40 लाख का उदाहरण देती है और लीज साइन करने से पहले योजना कार्यालय से क्या पूछें। योजना संदर्भ नवंबर 2026 तक के हैं।
अगर आप सिर्फ लागत के आधार पर फैसला कर रहे हैं, तो पहले बिजनेस उपकरण खरीदें या लीज करें पढ़ें। यह लेख सिर्फ सब्सिडी वाले पहलू पर है।
मालिकाना हक ही आमतौर पर पात्रता तय करता है
कैपिटल सब्सिडी आपके पात्र फिक्स्ड कैपिटल निवेश का एक हिस्सा होती है। योजना दिशानिर्देश आमतौर पर इस निवेश को ऐसे एसेट बताते हैं जो यूनिट ने तय अवधि में "हासिल किए और जिनका भुगतान किया"। उदाहरण के लिए, गुजरात की 2022-27 MSME योजना के ड्राफ्ट दिशानिर्देश यही शब्द इस्तेमाल करते हैं। ऑपरेटिंग लीज में:
- मशीन लीजिंग कंपनी की होती है और उसकी किताबों में दिखती है।
- आप किराया देते हैं, जो चालू खर्च है, निवेश नहीं।
- अंत में मशीन आमतौर पर लौटानी पड़ती है, या अलग कीमत पर खरीदनी पड़ती है।
इसलिए आपकी यूनिट का कोई "निवेश" ही नहीं होता जिस पर सब्सिडी लगे। कुछ योजनाएं इसे बाहर रखे गए आइटम की सूची में साफ लिखती हैं; कुछ में यह परिभाषा से समझ आता है। जब तक दिशानिर्देश कुछ और न कहें, मानकर चलें कि लीज वाली मशीन कैपिटल सब्सिडी से बाहर है।
हर व्यवस्था को आमतौर पर कैसे देखा जाता है
| व्यवस्था | एसेट का मालिक | कैपिटल सब्सिडी की आम स्थिति | ब्याज सब्सिडी की आम स्थिति |
|---|---|---|---|
| अपने पैसे से खरीद | आपकी यूनिट | नई हो और अवधि में हो तो आमतौर पर पात्र | सब्सिडी के लिए कुछ नहीं (लोन नहीं) |
| टर्म लोन से खरीद | आपकी यूनिट (बैंक का चार्ज) | आमतौर पर पात्र | टर्म लोन पर अक्सर पात्र |
| हायर परचेज | आखिरी किस्त पर आपको मिलता है | शब्दों पर निर्भर; जांचें | योजना इसे टर्म लोन माने या नहीं, उस पर निर्भर |
| फाइनेंस लीज | लीज के दौरान लेसर | अक्सर बाहर; कुछ योजनाएं अलग हो सकती हैं | योजना के लिए आमतौर पर "टर्म लोन" नहीं |
| ऑपरेटिंग लीज या किराया | लेसर | आमतौर पर बाहर | लागू नहीं |
| किराए या लीज का वर्कशेड | मकान मालिक | इमारत की लागत बाहर; कुछ योजनाएं सीमित अवधि का किराया गिनती हैं | लागू नहीं |
यहां "आम" का मतलब योजनाओं के आम शब्द हैं, नियम नहीं। कोई राज्य नीति हायर परचेज को पात्र मान सकती है या पूरी तरह बाहर रख सकती है। पोर्टल का सारांश नहीं, योजना दिशानिर्देश या सरकारी संकल्प (GR) का परिभाषा वाला हिस्सा पढ़ें।
किराए के शेड वाला अपवाद
कुछ योजनाएं मशीनरी की तुलना में इमारत को ज्यादा लचीले तरीके से देखती हैं। PMEGP में जमीन की लागत बाहर रहती है, लेकिन तैयार बना, लंबी लीज या किराए का वर्कशेड प्रोजेक्ट लागत में शामिल हो सकता है, जिसमें किराया अधिकतम तीन साल तक गिना जाता है। जैसे ₹20,000 महीने का शेड प्रोजेक्ट लागत में ₹7.2 लाख (₹20,000 × 36) तक जोड़ेगा। कई राज्य योजनाएं क्लेम के समय परिसर का नोटराइज्ड या रजिस्टर्ड किराया एग्रीमेंट भी मांगती हैं, जैसा गुजरात के ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में है।
उदाहरण: ₹40 लाख की CNC मशीन
एक छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को ₹40 लाख की CNC मशीन चाहिए। मान लें एक उदाहरण के तौर पर राज्य योजना पात्र प्लांट और मशीनरी पर 10% कैपिटल सब्सिडी देती है, सिर्फ अपने मालिकाना हक वाले एसेट पर। सभी आंकड़े उदाहरण के लिए हैं।
| विकल्प A: टर्म लोन से खरीद | विकल्प B: ऑपरेटिंग लीज | |
|---|---|---|
| मशीन की लागत | ₹40,00,000 | लेसर की मालिकी |
| शुरुआत में आपकी मार्जिन मनी | ₹8,00,000 (20%) | सिक्योरिटी डिपॉजिट, मान लें ₹2,00,000 |
| टर्म लोन | ₹32,00,000 | कोई नहीं |
| हर महीने का खर्च | ₹32 लाख पर ईएमआई | किराया, मान लें ₹85,000 × 60 महीने = ₹51,00,000 |
| कैपिटल सब्सिडी (पात्र मशीनरी का 10%) | ₹4,00,000, आमतौर पर लॉक-इन के बाद | ₹0 |
| अंत में मशीन | आपकी | लौटानी या अलग से खरीदनी |
सब्सिडी खरीदने के पक्ष में ₹4 लाख जोड़ती है, लेकिन पूरी कहानी यही नहीं है। विकल्प A में पहले दिन ₹6 लाख ज्यादा नकद चाहिए और ऐसा लोन जो कमजोर साल में भी चुकाना होगा। अपनी दर और अवधि के लिए टर्म लोन की ईएमआई ईएमआई कैलकुलेटर में निकालें और महीने-दर-महीने लीज किराए से तुलना करें।
अगर योजना टर्म लोन पर ब्याज सब्सिडी भी देती है, तो विकल्प A को और फायदा होता है, लेकिन सिर्फ उन महीनों का जब लोन नियमित रहे। जैसे गुजरात के ड्राफ्ट दिशानिर्देश डिफॉल्ट की अवधि को ब्याज सब्सिडी से घटा देते हैं।
अगर बाद में लीज वाली मशीन खरीद लें तो?
मान लें दो साल बाद आप लीज वाली मशीन ₹22 लाख में खरीद लेते हैं। योजना कार्यालय पूछ सकता है:
- क्या खरीद की तारीख योजना की अवधि में है?
- दो साल चली मशीन क्या "नई" है? कई योजनाएं सेकंड-हैंड मशीनरी को बाहर रखती हैं, और इसे सेकंड-हैंड माना जा सकता है।
- क्या ₹22 लाख उचित कीमत है, जिसके पीछे चार्टर्ड इंजीनियर का वैल्यूएशन हो?
यह न मानें कि खरीद की कीमत गिनी जाएगी। पहले लिखित जवाब लें। पुरानी मशीनों का वैल्यूएशन बैंक कैसे करते हैं, यह पुरानी मशीनरी पर बिजनेस लोन में देखें।
अपनी योजना के शब्द कैसे पढ़ें
परिभाषा और बाहर रखे गए आइटम वाले हिस्से में ये शब्द देखें:
- "हासिल किए और भुगतान किया" या "उद्यम के स्वामित्व में": सिर्फ खरीदे गए एसेट की ओर इशारा।
- "हायर परचेज" या "फाइनेंशियल लीज": देखें ये पात्र सूची में हैं या बाहर वाली सूची में।
- "सेकंड-हैंड", "पुरानी" या "रिफर्बिश्ड": अगर लीज वाली मशीन खरीदने की योजना है तो जरूरी।
- "किराया" या "लीज रेंट": इमारत के लिए सीमित अवधि तक गिना जा सकता है, मशीनरी के लिए शायद ही।
- "टर्म लोन": ब्याज सब्सिडी आमतौर पर बैंक या वित्तीय संस्था के टर्म लोन से जुड़ी होती है, और लीज एग्रीमेंट टर्म लोन नहीं है।
दस्तावेजों की चेकलिस्ट
- योजना दिशानिर्देश या GR, परिभाषा वाले पेज पर निशान लगाकर
- यूनिट के अपने नाम पर कोटेशन और फाइनल टैक्स इनवॉइस (खरीद के लिए)
- हायर परचेज या लीज एग्रीमेंट, मालिकाना हक और बाय-आउट वाली शर्तें हाइलाइट करके
- बैंक सैंक्शन लेटर और लोन खाते का स्टेटमेंट (लोन से खरीद पर)
- सप्लायर या लेसर को हर भुगतान का बैंक सबूत
- जहां जरूरी हो, परिसर का नोटराइज्ड या रजिस्टर्ड किराया एग्रीमेंट
- जहां योजना मांगे, मशीनरी की बीमा पॉलिसी
- पुरानी मशीन खरीदने पर चार्टर्ड इंजीनियर का वैल्यूएशन
योजना कार्यालय और बैंक से क्या पूछें
- क्या पात्र निवेश में हायर परचेज या फाइनेंस लीज वाले एसेट शामिल हैं? किस तारीख से?
- अगर अभी लीज करूं और बाद में खरीदूं, तो क्या खरीद गिनी जाएगी या सेकंड-हैंड मानी जाएगी?
- क्या फैक्ट्री शेड का किराया शामिल हो सकता है, और कितने साल का?
- क्या बैंक ब्याज सब्सिडी के लिए हायर परचेज सुविधा को टर्म लोन मानेगा?
- कौन सा लॉक-इन लागू है, और उस दौरान मशीन लौटाने या बेचने पर क्या होगा?
लीजिंग कंपनी से भी पूछें: डेप्रिसिएशन कौन लेगा, किराए पर GST हर महीने बिल होगा या नहीं, और क्या एग्रीमेंट में बाय-आउट कीमत तय है।
आम गलतियां
- किराया सस्ता दिखने पर लीज साइन कर देना, फिर पता चलना कि प्रोजेक्ट जिस सब्सिडी पर टिका था उसमें अपने एसेट चाहिए।
- लीज वाली मशीन खरीदकर उसे नई बताकर क्लेम करना।
- मशीन लीज पर लेना लेकिन ऐसी "ब्याज सब्सिडी" का हिसाब मान लेना जो टर्म लोन मानकर बताया गया था।
- लीज का किराया निजी खाते से देना; सारे भुगतान बिजनेस खाते से रखें (निजी और बिजनेस फाइनेंस अलग रखें)।
- शेड का किराया एग्रीमेंट उस रूप में न रखना जो योजना मांगती है।
अगर क्लेम कटे या खारिज हो
- मंजूरी देने वाले कार्यालय से कारण और लागू धारा लिखित में मांगें।
- जिला उद्योग केंद्र (DIC) के जनरल मैनेजर, फिर राज्य उद्योग या MSME कमिश्नरेट तक शिकायत ले जाएं।
- केंद्रीय योजनाओं के लिए pgportal.gov.in पर CPGRAMS में संबंधित मंत्रालय के खिलाफ शिकायत करें।
- अगर बैंक क्लेम के लिए जरूरी सर्टिफिकेट या लोन खाते का ब्योरा देने में देर करे, तो बैंक के ग्रीवांस ऑफिसर से शिकायत करें; 30 दिन में हल न हो तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन के पास जाएं।
- "सब्सिडी पास करवाने" के लिए फीस मांगने वाले की शिकायत cybercrime.gov.in या 1930 पर करें।
मुख्य बातें
- ज्यादातर कैपिटल सब्सिडी सिर्फ उन्हीं प्लांट और मशीनरी पर गिनी जाती है जो यूनिट की अपनी हो और जिसका भुगतान हो चुका हो; ऑपरेटिंग लीज आमतौर पर बाहर रहती है।
- हायर परचेज और फाइनेंस लीज हर योजना के शब्दों पर निर्भर हैं, इसलिए सारांश नहीं, परिभाषा और बाहर वाली सूची पढ़ें।
- PMEGP जैसी कुछ योजनाएं वर्कशेड का किराया सीमित अवधि (तीन साल तक) गिन सकती हैं।
- ₹40 लाख के उदाहरण में खरीदने से उदाहरण के तौर पर ₹4 लाख सब्सिडी मिली, पर शुरुआत में ₹6 लाख ज्यादा नकद लगा।
- लीज वाली मशीन खरीदने पर उसे सेकंड-हैंड माना जा सकता है; पहले योजना कार्यालय की लिखित राय लें।
संबंधित गाइड
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या लीज पर ली गई मशीन पर कैपिटल सब्सिडी मिल सकती है?
ऑपरेटिंग लीज पर आमतौर पर नहीं, क्योंकि मशीन लीजिंग कंपनी की होती है और ज्यादातर कैपिटल सब्सिडी उन्हीं एसेट पर गिनी जाती है जो यूनिट के मालिकाना हक में हों और जिनका भुगतान हो चुका हो। कुछ योजनाएं हायर परचेज या फाइनेंस लीज को अलग तरह से देखती हैं, इसलिए योजना दिशानिर्देशों में पात्र निवेश की परिभाषा पढ़ें।
क्या हायर परचेज को मशीन का मालिक होना माना जाता है?
इनकम टैक्स में डेप्रिसिएशन के लिए हायरर को आमतौर पर मालिक माना जाता है। सब्सिडी में यह योजना के शब्दों पर निर्भर है। कुछ योजनाएं मालिकाना हक साफ होने पर हायर परचेज एसेट गिनती हैं, कुछ सिर्फ पूरे भुगतान वाले एसेट। योजना कार्यालय से लिखित में पूछें।
क्या PMEGP में किराए का वर्कशेड प्रोजेक्ट लागत में गिना जाता है?
PMEGP में जमीन की लागत बाहर रहती है, लेकिन तैयार बना, लंबी लीज या किराए का वर्कशेड प्रोजेक्ट लागत में शामिल हो सकता है, जिसमें किराया अधिकतम तीन साल तक गिना जाता है। योजना पर भरोसा करने से पहले KVIC या बैंक से मौजूदा PMEGP दिशानिर्देश पक्के करें।
क्या लीज वाली मशीन बाद में खरीदकर सब्सिडी क्लेम कर सकते हैं?
शायद, लेकिन खरीद की तारीख और कीमत योजना की अवधि से मिलाई जाएगी, और लीज पर पहले से चली मशीन को सेकंड-हैंड माना जा सकता है। कई योजनाएं सेकंड-हैंड मशीनरी को बाहर रखती हैं, इसलिए लीज खरीदने से पहले योजना कार्यालय की राय लें।
क्या सब्सिडी के लिए हमेशा लीज की बजाय खरीदना चाहिए?
हमेशा नहीं। खरीदने में मार्जिन मनी लगती है और लोन का जोखिम बढ़ता है, और सब्सिडी लॉक-इन के बाद ही मिल सकती है। फैसले से पहले कुल लागत, कैश फ्लो और सब्सिडी मिलने की असली संभावना की तुलना करें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।