नो-कॉस्ट ईएमआई के छिपे चार्ज: क्या सच में फ्री है? (2026)
नो-कॉस्ट ईएमआई हमेशा फ्री नहीं होती। जानें ब्याज छूट के रूप में कैसे छिपता है, जीएसटी और प्रोसेसिंग फीस कितना जोड़ते हैं, और ₹60,000 का पूरा उदाहरण।

इस लेख में
- नो-कॉस्ट ईएमआई असल में कैसे काम करती है
- किन छिपे चार्ज पर नजर रखें
- उदाहरण: ₹60,000 का फोन 6 महीने की नो-कॉस्ट ईएमआई पर
- नो-कॉस्ट ईएमआई कब समझदारी है
- क्रेडिट कार्ड ईएमआई बनाम कार्डलेस ईएमआई बनाम पे लेटर
- ईएमआई का आपके कार्ड और स्कोर पर असर
- नो-कॉस्ट ईएमआई चुनने से पहले चेकलिस्ट
- अगर कुछ गड़बड़ हो जाए
- मुख्य बातें
नो-कॉस्ट ईएमआई हमेशा फ्री नहीं होती। कार्ड कंपनी ब्याज तो लेती है, लेकिन सेलर या ब्रांड आपको उतनी ही छूट पहले दे देता है ताकि आपकी ईएमआई का जोड़ प्रोडक्ट की कीमत के बराबर रहे। आपको आम तौर पर फिर भी उस ब्याज पर 18% जीएसटी, और जीएसटी के साथ प्रोसेसिंग फीस चुकानी पड़ती है, और कभी-कभी वह कैश डिस्काउंट भी गंवाना पड़ता है जो पूरा भुगतान करने पर मिलता। ₹60,000 के फोन पर यह कुछ सौ से लेकर कुछ हजार रुपये तक हो सकता है।
नो-कॉस्ट ईएमआई असल में कैसे काम करती है
जीरो परसेंट ब्याज स्कीमों पर आरबीआई (RBI) के सितंबर 2013 के सर्कुलर ने साफ कर दिया था कि जीरो ब्याज वाला लोन जैसी कोई चीज नहीं होती, और बैंकों को ब्याज प्रोसेसिंग फीस में नहीं छिपाना चाहिए। इसलिए आज की स्कीमें इस तरह बनती हैं:
- आप ₹60,000 का प्रोडक्ट खरीदते हैं और अपने क्रेडिट कार्ड पर 6 महीने की नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते हैं।
- बैंक खरीद को अपनी सामान्य ब्याज दर, मान लीजिए 15% सालाना, पर ईएमआई लोन में बदल देता है।
- सेलर या ब्रांड आपको ब्याज के बराबर तुरंत छूट देता है, इसलिए आपसे मूलधन के रूप में ₹60,000 से कम लिया जाता है।
- ब्याज मिलाकर आपकी 6 ईएमआई ठीक ₹60,000 बनती हैं।
बैंक अपना ब्याज कमाता है, सेलर इसे मार्केटिंग खर्च के रूप में चुकाता है, और आपको "नो कॉस्ट" दिखता है। लेकिन टैक्स और फीस इस छूट का हिस्सा नहीं होते।
किन छिपे चार्ज पर नजर रखें
| चार्ज | क्या है | आम रकम (अक्टूबर 2026 तक) |
|---|---|---|
| ब्याज पर जीएसटी | हर ईएमआई के ब्याज वाले हिस्से पर 18% जीएसटी | कुल ब्याज का 18% |
| प्रोसेसिंग फीस | खरीद को ईएमआई में बदलने की एक बार की फीस | अक्सर ₹99 से ₹500 या एक प्रतिशत, साथ में 18% जीएसटी |
| गंवाया कैश डिस्काउंट | बैंक ऑफर या तुरंत छूट जो सिर्फ पूरे भुगतान पर मिलती है | अलग-अलग, कभी-कभी 5% से 10% |
| ज्यादा लिस्टेड कीमत | कुछ सेलर ईएमआई वाले प्रोडक्ट की कीमत ज्यादा रखते हैं | दूसरे सेलर से तुलना करें |
| फोरक्लोजर फीस | ईएमआई जल्दी बंद करने की फीस | अक्सर बकाया मूलधन का % + जीएसटी |
| गंवाए रिवॉर्ड पॉइंट्स | ईएमआई में बदले खर्च पर रिवॉर्ड नहीं मिल सकते | कार्ड के हिसाब से अलग |
| लेट पेमेंट चार्ज | ईएमआई छूटने पर लेट फीस और कार्ड का ब्याज | कार्ड की सामान्य लेट फीस |
फीस बैंक, कार्ड और मर्चेंट के हिसाब से अलग होती है। सही चार्ज ईएमआई कन्वर्जन स्क्रीन और आपके कार्ड के MITC में दिखते हैं।
उदाहरण: ₹60,000 का फोन 6 महीने की नो-कॉस्ट ईएमआई पर
सिर्फ उदाहरण के लिए। मान लीजिए बैंक की ईएमआई ब्याज दर 15% सालाना है, प्रोसेसिंग फीस ₹199 और जीएसटी है, और सेलर ब्याज के बराबर छूट देता है।
स्टेप 1: छूट के बाद का मूलधन निकालें। ईएमआई ₹60,000 ÷ 6 = ₹10,000 है। 15% (1.25% महीना) पर 6 महीने के लोन में ₹10,000 की ईएमआई बनाने वाला मूलधन करीब ₹57,460 है। इसलिए सेलर की तुरंत छूट ₹60,000 − ₹57,460 = ₹2,540 है, जो आपके चुकाए जाने वाले ब्याज के बराबर है।
स्टेप 2: ब्याज पर जीएसटी। 18% × ₹2,540 = ₹457।
स्टेप 3: प्रोसेसिंग फीस। ₹199 + 18% जीएसटी (₹36) = ₹235।
| मद | रकम |
|---|---|
| प्रोडक्ट की कीमत | ₹60,000 |
| तुरंत छूट (ब्याज की भरपाई) | − ₹2,540 |
| कार्ड पर मूलधन | ₹57,460 |
| 6 ईएमआई में ब्याज | + ₹2,540 |
| ब्याज पर जीएसटी | + ₹457 |
| प्रोसेसिंग फीस + जीएसटी | + ₹235 |
| कुल भुगतान | ₹60,692 |
यानी "नो-कॉस्ट" ईएमआई असल में करीब ₹692 की पड़ती है, जो कीमत का करीब 1.2% है।
अब मान लीजिए वही स्टोर पूरे भुगतान पर ₹3,000 की तुरंत बैंक छूट भी दे रहा था, जो नो-कॉस्ट ईएमआई के साथ नहीं मिल सकती। अगर आप एक बार में भुगतान कर सकते, तो ₹60,692 की जगह ₹57,000 चुकाते, यानी ₹3,692 का फर्क।
उसी दर पर 12 महीने के प्लान में ब्याज की भरपाई करीब ₹4,603 होती है, उस पर जीएसटी करीब ₹829, और कुल अतिरिक्त खर्च करीब ₹1,063।
किसी भी रकम की ईएमआई और ब्याज हमारे ईएमआई कैलकुलेटर में देख सकते हैं।
नो-कॉस्ट ईएमआई कब समझदारी है
नो-कॉस्ट ईएमआई अच्छा सौदा हो सकती है जब:
- पूरा भुगतान करने पर कोई अतिरिक्त छूट नहीं है, इसलिए ईएमआई चुनने से आपका कुछ नहीं जाता।
- आपको खरीद अभी चाहिए और आप अपनी बचत या इमरजेंसी फंड को बचाए रखना चाहते हैं।
- अतिरिक्त खर्च (जीएसटी और फीस) भुगतान को किस्तों में बांटने के फायदे के मुकाबले छोटा है।
- आपको पक्का भरोसा है कि आप हर ईएमआई और कार्ड का बाकी बिल समय पर चुका देंगे।
यह खराब सौदा है जब पूरे भुगतान पर मिलने वाली छूट जीएसटी और फीस से ज्यादा हो, जब यह आपको ऐसी चीज खरीदने को उकसाए जो आप वैसे नहीं खरीद सकते, या जब आपके कार्ड पर पहले से बैलेंस बकाया हो।
क्रेडिट कार्ड ईएमआई बनाम कार्डलेस ईएमआई बनाम पे लेटर
| विकल्प | कैसे काम करता है | क्रेडिट रिपोर्ट पर असर |
|---|---|---|
| क्रेडिट कार्ड नो-कॉस्ट ईएमआई | खरीद आपके कार्ड पर ईएमआई में बदली जाती है | शुरू में पूरी रकम आपकी लिमिट ब्लॉक करती है |
| कार्डलेस ईएमआई | चेकआउट पर NBFC या बैंक से लोन, अक्सर ऐप के जरिए | नया लोन अकाउंट, क्रेडिट इंक्वायरी के साथ |
| बाय नाउ, पे लेटर | किसी लेंडर या उसके पार्टनर से कम समय का क्रेडिट | किसी भी लोन की तरह ब्यूरो को रिपोर्ट होता है |
बैंक और NBFC के लोन के लिए आरबीआई के नियम के मुताबिक साइन करने से पहले आपको Key Facts Statement (KFS) देना जरूरी है, जिसमें सालाना प्रतिशत दर (APR) और सारी फीस दिखें। देख लें कि लेंडर आरबीआई से रेगुलेटेड है; कैसे देखें, यह हमारी इंस्टेंट लोन ऐप और आरबीआई नियम वाली गाइड में बताया गया है।
ईएमआई का आपके कार्ड और स्कोर पर असर
- ब्लॉक हुई लिमिट: ₹1,00,000 लिमिट वाले कार्ड पर ₹60,000 की ईएमआई खरीद तुरंत ₹60,000 ब्लॉक कर देती है, और ₹40,000 बचते हैं। हर ईएमआई चुकाने के साथ लिमिट खुलती जाती है।
- यूटिलाइजेशन: 60% यूटिलाइजेशन बैलेंस घटने तक आपका क्रेडिट स्कोर घटा सकता है। हमारी क्रेडिट यूटिलाइजेशन गाइड देखें।
- मिनिमम ड्यू: हर ईएमआई आपके मासिक मिनिमम अमाउंट ड्यू में जुड़ती है। अगर आप बिल के बाकी हिस्से पर सिर्फ मिनिमम चुकाते हैं, तो बचे बैलेंस पर करीब 3% से 3.75% महीने का कार्ड ब्याज लगता है।
- छूटी ईएमआई: लेट पेमेंट फीस और ब्याज लगता है, और डिफॉल्ट क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट होता है।
नो-कॉस्ट ईएमआई चुनने से पहले चेकलिस्ट
- पूरे भुगतान की कीमत और सिर्फ पूरे भुगतान पर मिलने वाले बैंक ऑफर पूछें।
- ईएमआई कन्वर्जन स्क्रीन पर प्रोसेसिंग फीस देखें।
- ध्यान रखें कि ब्याज पर जीएसटी आपके स्टेटमेंट में दिखेगा।
- अगर पहले चुकाने का इरादा है तो फोरक्लोजर की शर्तें पढ़ें।
- पक्का करें कि आपकी दूसरी ईएमआई और कार्ड खर्च के साथ ईएमआई आपके बजट में फिट हो।
- कन्फर्म करें कि खरीद पर रिवॉर्ड पॉइंट्स मिलेंगे या नहीं।
अगर कुछ गड़बड़ हो जाए
कभी-कभी वादा की गई छूट जमा नहीं होती, ईएमआई कन्वर्जन फेल हो जाता है और पूरी रकम बिल हो जाती है, या ऐसे अतिरिक्त चार्ज दिखते हैं जो चेकआउट पर नहीं बताए गए थे। ये कदम उठाएं:
- सबूत रखें। ऑर्डर पेज, ऑफर की शर्तें और अवधि, फीस व छूट दिखाने वाली ईएमआई कन्वर्जन स्क्रीन सेव करें।
- पहले कार्ड कंपनी से संपर्क करें। बैंक के ऐप या हेल्पलाइन से विवाद दर्ज करें और शिकायत नंबर नोट करें। विवाद चलने तक कम से कम मिनिमम ड्यू चुकाते रहें, ताकि लेट फीस न लगे।
- आरबीआई लोकपाल तक ले जाएं। अगर बैंक आपकी शिकायत खारिज कर दे या 30 दिन में जवाब न दे, तो RBI Integrated Ombudsman Scheme, 2026 के तहत cms.rbi.org.in पर शिकायत करें।
- सेलर की तरफ की समस्या। अगर सेलर ने ऑफर नहीं निभाया, तो प्लेटफॉर्म से संपर्क करें और जरूरत हो तो नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) पर।
मुख्य बातें
- नो-कॉस्ट ईएमआई ब्याज को पहले मिलने वाली छूट के रूप में छिपाती है; लेंडर ब्याज फिर भी लेता है।
- आपको आम तौर पर उस ब्याज पर 18% जीएसटी और जीएसटी के साथ प्रोसेसिंग फीस देनी पड़ती है।
- ₹60,000 और 6 महीने वाले उदाहरण में असली अतिरिक्त खर्च करीब ₹692 था।
- अगर पूरे भुगतान पर जीएसटी और फीस से ज्यादा छूट मिलती है, तो पूरा भुगतान सस्ता पड़ता है।
- पूरी रकम शुरू में ही आपकी कार्ड लिमिट ब्लॉक करती है, जिससे यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है और स्कोर पर असर पड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या नो-कॉस्ट ईएमआई सच में फ्री है?
पूरी तरह नहीं। लेंडर ब्याज तो लेता है, लेकिन सेलर उतनी ही छूट पहले दे देता है ताकि किस्तों का जोड़ प्रोडक्ट की कीमत के बराबर हो। आपको आम तौर पर ब्याज और प्रोसेसिंग फीस पर 18% जीएसटी फिर भी देना पड़ता है, और पूरा भुगतान करने पर मिलने वाली छूट भी छूट सकती है।
नो-कॉस्ट ईएमआई पर जीएसटी क्यों लगता है?
खरीदारी को ईएमआई में बदलने के लिए कार्ड कंपनी जो ब्याज और फीस लेती है, उस पर 18% जीएसटी लगता है। सेलर की छूट आम तौर पर सिर्फ ब्याज को कवर करती है, उस ब्याज पर लगने वाले जीएसटी को नहीं, इसलिए जीएसटी आपके स्टेटमेंट में अलग चार्ज के रूप में दिखता है।
नो-कॉस्ट ईएमआई जल्दी बंद करने पर क्या होता है?
कई कार्ड कंपनियां फोरक्लोजर फीस लेती हैं, जो अक्सर बकाया मूलधन का एक प्रतिशत और जीएसटी होती है। कुछ कंपनियां फोरक्लोज करने पर ब्याज का फायदा या छूट भी वापस ले लेती हैं। पहले भुगतान करने से पहले ईएमआई की शर्तें देख लें।
क्या नो-कॉस्ट ईएमआई से मेरे क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है?
क्रेडिट कार्ड पर शुरू में ही खरीद की पूरी रकम आपकी क्रेडिट लिमिट ब्लॉक कर देती है, जिससे यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है और स्कोर पर असर पड़ सकता है। ईएमआई छूटने पर उसे किसी भी दूसरे छूटे भुगतान की तरह रिपोर्ट किया जाता है। कार्डलेस ईएमआई और पे-लेटर प्लान अलग लोन होते हैं, जो आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में भी दिखते हैं।
क्या आरबीआई ने जीरो परसेंट ईएमआई पर रोक लगाई थी?
सितंबर 2013 में आरबीआई ने बैंकों से कहा था कि जीरो परसेंट ब्याज वाली स्कीमें असल में होती ही नहीं हैं और ब्याज को प्रोसेसिंग फीस में नहीं छिपाया जाना चाहिए। आज की नो-कॉस्ट ईएमआई स्कीमें साफ ब्याज चार्ज के साथ बनाई जाती हैं, जिसकी भरपाई सेलर की छूट से होती है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।