आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें: रजिस्ट्रार, BSE, NSE
KFin, MUFG Intime, Bigshare जैसी रजिस्ट्रार साइट या BSE-NSE पर आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें, नॉट अलॉटेड का मतलब और रिफंड कब आता है।

इस लेख में
आईपीओ (IPO) अलॉटमेंट स्टेटस चेक करने के लिए इश्यू के रजिस्ट्रार (जैसे KFin Technologies, MUFG Intime India या Bigshare Services) की वेबसाइट खोलें, कंपनी चुनें और अपना PAN, एप्लीकेशन नंबर या डीमैट आईडी डालें। आप BSE या NSE के आईपीओ स्टेटस पेज पर भी चेक कर सकते हैं। सेबी की T+3 समय-सीमा के तहत नतीजा आम तौर पर T+1 की शाम या T+2 को मिल जाता है, और अलॉटमेंट न होने पर ब्लॉक हुई रकम T+2 तक रिलीज हो जानी चाहिए।
अलॉटमेंट का नतीजा कौन जारी करता है
हर आईपीओ में एक रजिस्ट्रार टू द इश्यू नियुक्त होता है। रजिस्ट्रार एक्सचेंज और बैंकों से बोली का डेटा जुटाता है, अवैध बोलियां रिजेक्ट करता है, स्टॉक एक्सचेंज से मंजूर लॉटरी या आनुपातिक अलॉटमेंट चलाता है, और शेयर क्रेडिट करता है। रजिस्ट्रार का नाम RHP के कवर पेज और इश्यू के विज्ञापनों में छपा होता है।
| कहां चेक करें | क्या चाहिए | नोट |
|---|---|---|
| रजिस्ट्रार की वेबसाइट (KFin Technologies, MUFG Intime India, Bigshare Services, अन्य) | PAN, एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट आईडी | सबसे सीधा स्रोत; सबसे पहले अपडेट |
| BSE आईपीओ एप्लीकेशन स्टेटस पेज | इश्यू टाइप, इश्यू का नाम, एप्लीकेशन नंबर या PAN | BSE के जरिए लगी बोलियां |
| NSE आईपीओ बिड/अलॉटमेंट स्टेटस पेज | PAN और एप्लीकेशन नंबर; एक बार लॉगिन की जरूरत पड़ सकती है | NSE के जरिए लगी बोलियां |
| ब्रोकर ऐप | आपका लॉगिन | रजिस्ट्रार की फाइल अपडेट होने के बाद स्टेटस दिखाता है |
| बैंक SMS और डिपॉजिटरी अलर्ट | कुछ नहीं | अनब्लॉक या डेबिट SMS और डीमैट क्रेडिट अलर्ट नतीजे की पुष्टि करते हैं |
MUFG Intime India उस रजिस्ट्रार का नया नाम है जिसे पहले Link Intime India कहा जाता था। पुराने लिंक में अब भी पुराना नाम हो सकता है।
हाल के इश्यू, उनके रजिस्ट्रार और लिस्टिंग की तारीखें आप हमारे लाइव आईपीओ डैशबोर्ड पर देख सकते हैं।
स्टेप बाय स्टेप: रजिस्ट्रार की साइट पर चेक करना
- रजिस्ट्रार का पता लगाएं RHP या इश्यू के विज्ञापन से।
- उसका आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस पेज खोलें। ऑफर डॉक्यूमेंट या रजिस्ट्रार की आधिकारिक वेबसाइट का पता इस्तेमाल करें; मैसेजिंग ग्रुप के लिंक से बचें, ये फिशिंग का आम रास्ता हैं (देखें निवेश के फ्रॉड कैसे पहचानें)।
- ड्रॉपडाउन से कंपनी चुनें। यह अलॉटमेंट का आधार तय होने के बाद ही दिखती है।
- सर्च का विकल्प चुनें: PAN, एप्लीकेशन नंबर, या DP आईडी और क्लाइंट आईडी।
- डिटेल्स और कैप्चा डालें, और सबमिट करें।
- नतीजा पढ़ें: आवेदन किए शेयर, अलॉट हुए शेयर, और कई बार एडजस्ट या रिफंड हुई रकम।
स्टेप बाय स्टेप: BSE या NSE पर चेक करना
- एक्सचेंज का आईपीओ एप्लीकेशन स्टेटस पेज खोलें।
- "Equity" और इश्यू का नाम चुनें।
- अपना एप्लीकेशन नंबर और PAN डालें।
- सबमिट करके देखें कि बोलियां वैध थीं या नहीं और शेयर अलॉट हुए या नहीं।
अगर किसी साइट पर "record not found" दिखे, तो एप्लीकेशन नंबर जैसा दूसरा सर्च विकल्प आजमाएं, या थोड़ी देर बाद फिर चेक करें; हो सकता है फाइल अभी अपलोड न हुई हो।
संभावित नतीजों का मतलब
| स्टेटस | मतलब | आगे क्या होता है |
|---|---|---|
| Allotted (शेयरों की संख्या के साथ) | आपको शेयर मिले | अलॉट हुए शेयरों की रकम डेबिट होती है; बाकी अनब्लॉक; लिस्टिंग से पहले शेयर डीमैट में आते हैं |
| Not allotted | वैध बोली, लेकिन लॉटरी या आनुपातिक अलॉटमेंट में शेयर नहीं मिले | पूरी रकम अनब्लॉक |
| Rejected या invalid | बोली तकनीकी जांच में फेल हुई | पूरी रकम अनब्लॉक; वजह जांचें |
| Record not found | डेटा अभी अपलोड नहीं हुआ, या गलत डिटेल डाली | डिटेल दोबारा जांचें और बाद में कोशिश करें |
"नॉट अलॉटेड" आम क्यों है
जब रिटेल हिस्सा ओवरसब्सक्राइब होता है, तो सेबी के नियमों के मुताबिक रजिस्ट्रार को कंप्यूटराइज्ड लॉटरी से चुनकर ज्यादा से ज्यादा रिटेल आवेदकों को न्यूनतम लॉट देना होता है। अगर रिटेल 40 गुना सब्सक्राइब हुआ है, तो ज्यादातर रिटेल आवेदकों को कुछ नहीं मिलता। यही लॉटरी तरीका छोटे HNI (₹2 लाख से ऊपर ₹10 लाख तक की बोलियां) पर उनके न्यूनतम आवेदन साइज के लिए लागू होता है। शेयर न मिलना आपकी बोली के बारे में कुछ नहीं कहता। हर कैटेगरी में अलॉटमेंट कैसे होता है, यह जानने के लिए देखें आईपीओ कैटेगरी: रिटेल, sHNI और bHNI।
रिजेक्शन की आम वजहें
- क्लोजिंग वाले दिन शाम 5 बजे तक यूपीआई मैंडेट मंजूर नहीं हुआ।
- इश्यू में एक ही PAN से एक से ज्यादा आवेदन।
- बैंक खाता या यूपीआई आईडी आवेदक के नाम पर नहीं।
- PAN, DP आईडी या क्लाइंट आईडी में गड़बड़ी।
- कट-ऑफ विकल्प के बिना फाइनल प्राइस से कम की बोली।
उदाहरण: चांस और रिफंड (समझाने के लिए)
मान लीजिए किसी इश्यू के रिटेल हिस्से में 2,00,000 लॉट उपलब्ध हैं और 8,00,000 वैध रिटेल आवेदन आए हैं।
| आइटम | हिसाब | नतीजा |
|---|---|---|
| रिटेल के लिए उपलब्ध लॉट | 2,00,000 | |
| वैध आवेदन | 8,00,000 | |
| विजेता (हर एक को एक लॉट) | 2,00,000 ÷ 1 लॉट | 2,00,000 आवेदक |
| अलॉटमेंट का चांस | 2,00,000 ÷ 8,00,000 | 25% (4 में 1) |
अर्जुन ने ₹285 के अपर बैंड पर 52 शेयरों के 2 लॉट के लिए आवेदन किया, इसलिए ₹29,640 ब्लॉक हुए (104 × ₹285)। फाइनल प्राइस ₹285 है।
- अगर 1 लॉट अलॉट हुआ: डेबिट = 52 × ₹285 = ₹14,820; अनब्लॉक = ₹29,640 − ₹14,820 = ₹14,820।
- अगर अलॉट नहीं हुआ: पूरे ₹29,640 अनब्लॉक।
1 की जगह 2 लॉट के लिए आवेदन करने से उसका चांस दोगुना नहीं हुआ, क्योंकि लॉटरी में हर रिटेल आवेदन एक टिकट है।
रिफंड और अनब्लॉक की समय-सीमा
सेबी की T+3 समय-सीमा के तहत, जो 1 दिसंबर 2023 से अनिवार्य है:
| दिन | पड़ाव |
|---|---|
| T | इश्यू बंद; यूपीआई मैंडेट की डेडलाइन शाम 5 बजे |
| T+1 | बोलियों की जांच; अलॉटमेंट का आधार तय |
| T+2 | अलॉटमेंट फाइनल, शेयर क्रेडिट, जिन्हें शेयर नहीं मिले उनका पैसा अनब्लॉक |
| T+3 | NSE और BSE पर लिस्टिंग |
आईपीओ का पैसा डेबिट नहीं बल्कि ब्लॉक होता है, इसलिए "रिफंड" का मतलब आम तौर पर अनब्लॉक होना है: आपका बैलेंस फिर से इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो जाता है। अगर अलॉटमेंट के बिना डेबिट दिखे, या T+2 के बाद भी ब्लॉक बना रहे, तो पहले अपने बैंक से बात करें। सेबी के मुआवजा ढांचे के तहत अनब्लॉक में देरी पर बिचौलियों को निवेशकों को मुआवजा देना होता है (रकम इश्यू के General Information Document में लिखी होती है, कम से कम ₹100 प्रति दिन)। स्टेटस और बैंक SMS के स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।
कुछ गड़बड़ हो तो शिकायत कहां करें
- बैंक (SCSB) से, अगर पैसा अब भी ब्लॉक है या गलत तरीके से डेबिट हुआ है।
- रजिस्ट्रार टू द इश्यू से, अलॉटमेंट या डीमैट क्रेडिट की दिक्कत के लिए। उसका इन्वेस्टर ग्रीवांस ईमेल RHP में होता है।
- ब्रोकर से, बोली या मैंडेट की दिक्कत के लिए।
- SEBI SCORES पर, और फिर SMART ODR पोर्टल के जरिए ऑनलाइन विवाद समाधान, अगर बिचौलिया मामला न सुलझाए।
अलॉटमेंट के बाद
अलॉट हुए शेयर लिस्टिंग से पहले आपकी डीमैट होल्डिंग में दिखते हैं, और आप T+3 से बेच सकते हैं। 12 महीने के अंदर बेचने पर शॉर्ट-टर्म गेन बनता है; देखें आईपीओ लिस्टिंग गेन पर टैक्स। अगर आप होल्ड करने का प्लान बना रहे हैं, तो हमारे CAGR कैलकुलेटर से समय के साथ प्रदर्शन ट्रैक करें। आईपीओ में नए हैं? शुरुआत करें ऑनलाइन आईपीओ कैसे भरें से।
यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। इसमें किसी आईपीओ की सिफारिश नहीं है।
मुख्य बातें
- अलॉटमेंट का नतीजा रजिस्ट्रार टू द इश्यू जारी करता है, और यह BSE और NSE के स्टेटस पेज पर भी दिखता है।
- PAN, एप्लीकेशन नंबर या DP और क्लाइंट आईडी से चेक करें, आम तौर पर T+1 की शाम या T+2 से।
- "नॉट अलॉटेड" का मतलब है कि आप लॉटरी में नहीं जीते, यह नहीं कि आपसे गलती हुई; पूरी रकम अनब्लॉक हो जाती है।
- T+3 के तहत अनब्लॉक और डीमैट क्रेडिट T+2 तक, और लिस्टिंग T+3 कामकाजी दिन पर होती है।
- रिटेल में चांस आवेदनों की संख्या पर निर्भर करता है, न कि आपके बोले गए लॉट की संख्या पर।
- सिर्फ रजिस्ट्रार की आधिकारिक साइट इस्तेमाल करें, और जरूरत हो तो बैंक, रजिस्ट्रार और फिर SEBI SCORES पर शिकायत करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आईपीओ अलॉटमेंट स्टेटस कब पता चलता है?
सेबी की T+3 समय-सीमा के तहत अलॉटमेंट का आधार आम तौर पर T+1 की शाम या T+2 को तय हो जाता है, जहां T इश्यू बंद होने का दिन है। इसके बाद स्टेटस रजिस्ट्रार की वेबसाइट और BSE व NSE के पेज पर दिखने लगता है, अक्सर शाम तक।
PAN से आईपीओ अलॉटमेंट कैसे चेक करें?
इश्यू के ऑफर डॉक्यूमेंट में बताए रजिस्ट्रार के आईपीओ अलॉटमेंट पेज पर जाएं, कंपनी चुनें, PAN का विकल्प चुनें और PAN डालें। आप इश्यू का नाम, PAN और एप्लीकेशन नंबर डालकर BSE या NSE के आईपीओ एप्लीकेशन स्टेटस पेज पर भी चेक कर सकते हैं।
आईपीओ में नॉट अलॉटेड का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि आपकी वैध बोली पर शेयर नहीं मिले, आम तौर पर इसलिए क्योंकि कैटेगरी ओवरसब्सक्राइब हुई थी और अलॉटमेंट लॉटरी से हुआ। इसका मतलब यह नहीं कि आपका आवेदन गलत था; ब्लॉक हुई रकम रिलीज हो जाती है।
अलॉटमेंट न होने पर मेरा पैसा कब अनब्लॉक होगा?
T+3 समय-सीमा के तहत पैसा T+2 कामकाजी दिनों तक अनब्लॉक हो जाना चाहिए। अगर इसके बाद भी ब्लॉक बना रहे, तो पहले अपने बैंक से संपर्क करें, और शिकायत के लिए एप्लीकेशन नंबर तैयार रखें।
शेयर अलॉट हो गए लेकिन डीमैट में नहीं दिख रहे। क्या करें?
शेयर आम तौर पर T+2 तक क्रेडिट हो जाते हैं और T+3 पर लिस्टिंग से पहले दिखने लगते हैं। अगर लिस्टिंग वाले दिन भी नहीं दिखें, तो अपने डिपॉजिटरी का स्टेटमेंट जांचें, फिर एप्लीकेशन नंबर के साथ रजिस्ट्रार और ब्रोकर से शिकायत करें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।