पर्सनल लोन ब्याज दर 2026: बैंक रेट, ईएमआई और APR
बड़े बैंकों में पर्सनल लोन की ब्याज दर करीब 10% से शुरू होती है। जानें दर कैसे तय होती है, ईएमआई पर कितना असर पड़ता है और APR से ऑफर की तुलना कैसे करें।

इस लेख में
बड़े भारतीय बैंकों में पर्सनल लोन की ब्याज दर करीब 10% सालाना से शुरू होती है, और लेंडर व आपकी प्रोफाइल के हिसाब से ऊपरी सीमा करीब 15% से 24% तक जाती है। आपकी असली दर मुख्य रूप से आपके क्रेडिट स्कोर, आय, नियोक्ता और मौजूदा कर्ज पर निर्भर करती है। फीस से लागत काफी बढ़ सकती है, इसलिए ऑफर की तुलना हेडलाइन रेट पर नहीं, बल्कि APR (सालाना कुल लागत) पर करें।
बड़े बैंकों में पर्सनल लोन की दरें
नीचे की टेबल में बड़े बैंकों की घोषित दरों की रेंज है, जैसी अगस्त 2026 की रेट तुलनाओं में दी गई थी। ये सिर्फ अनुमान हैं; लेंडर इन्हें अक्सर बदलते हैं, और 7 अक्टूबर 2026 को आरबीआई (RBI) की रेपो रेट बढ़ोतरी के बाद नए लोन की दरें बदल सकती हैं। अप्लाई करने से पहले हमेशा लेंडर की वेबसाइट पर कन्फर्म करें।
| लेंडर | घोषित ब्याज दर रेंज (सालाना) |
|---|---|
| State Bank of India | 10.00% – 15.00% |
| HDFC Bank | 9.99% – 24.00% |
| ICICI Bank | 9.99% – 16.50% |
| Kotak Mahindra Bank | 10.99% से शुरू |
दो बातें ध्यान रखें:
- सबसे कम दर सबसे अच्छी प्रोफाइल वालों को मिलती है। शुरुआती दरें आम तौर पर जानी-मानी कंपनियों या सरकारी संस्थाओं के नौकरीपेशा लोगों के लिए होती हैं, जिनका क्रेडिट स्कोर ऊंचा और आय अच्छी हो।
- NBFC और फिनटेक ऐप अक्सर जल्दी मंजूरी देते हैं और कम क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी लोन देते हैं, लेकिन आम तौर पर ज्यादा दर और फीस पर।
लेंडर आपकी पर्सनल लोन दर कैसे तय करते हैं
पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड होता है; लेंडर के पास कोई गिरवी नहीं होती। इसलिए दर इस बात को दिखाती है कि लेंडर आपको कितना जोखिम भरा मानता है।
- क्रेडिट स्कोर: सबसे बड़ा अकेला कारक। 750+ सिबिल स्कोर पर आम तौर पर सबसे अच्छे ऑफर मिलते हैं। हमारी गाइड देखें सिबिल स्कोर कैसे सुधारें।
- आय और नियोक्ता: ज्यादा और स्थिर आय, और लिस्टेड कंपनी, PSU या सरकारी संस्था में नौकरी से दर कम होती है।
- मौजूदा ईएमआई: लेंडर आपका फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो (FOIR) देखते हैं। पहले से ज्यादा ईएमआई का मतलब है ऊंची दर या छोटा लोन।
- बैंक से आपका रिश्ता: सैलरी अकाउंट वालों को अक्सर कम दर पर प्री-अप्रूव्ड ऑफर मिलते हैं।
- लोन की रकम और अवधि: दोनों के हिसाब से दर बदल सकती है।
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी मायने रखता है। कार्ड पर ज्यादा बकाया या छूटे भुगतान आपका स्कोर गिराते हैं, जो पर्सनल लोन की ऊंची दर के रूप में सामने आता है। हमारी गाइड क्रेडिट कार्ड का ब्याज कैसे लगता है बताती है कि कार्ड का बकाया आगे बढ़ाना क्यों महंगा पड़ता है।
अलग-अलग दरों पर कितना खर्च: उदाहरण
रिड्यूसिंग बैलेंस ईएमआई फॉर्मूले से देखें कि 5 साल (60 ईएमआई) के ₹5 लाख के पर्सनल लोन पर अलग-अलग दरों पर कितना खर्च आता है:
| ब्याज दर | मासिक ईएमआई | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 10.5% | ₹10,747 | ₹1.45 लाख |
| 12% | ₹11,122 | ₹1.67 लाख |
| 14% | ₹11,634 | ₹1.98 लाख |
| 16% | ₹12,159 | ₹2.30 लाख |
| 18% | ₹12,697 | ₹2.62 लाख |
| 21% | ₹13,527 | ₹3.12 लाख |
10.5% और 18% वाले लोन में हर महीने करीब ₹1,950 और पांच साल में लगभग ₹1.17 लाख का फर्क है। अपनी रकम और अवधि हमारे ईएमआई कैलकुलेटर में डालकर देखें, और इन आंकड़ों के पीछे का फॉर्मूला समझने के लिए पढ़ें ईएमआई कैसे कैलकुलेट होती है।
ब्याज दर बनाम APR: असली लागत
ऑफर लेटर पर लिखी दर पूरी लागत नहीं होती। पर्सनल लोन के साथ आम तौर पर ये भी जुड़े होते हैं:
- प्रोसेसिंग फीस: लोन का कुछ प्रतिशत या एक तय रकम, साथ में 18% GST। कुछ लेंडर करीब 5% तक लेते हैं।
- लोन के साथ जुड़ा इंश्योरेंस (अक्सर वैकल्पिक, हालांकि कई बार जोर देकर बेचा जाता है)।
- डॉक्यूमेंटेशन, स्टांप ड्यूटी और दूसरे एक बार के चार्ज।
रिटेल लोन पर लागू आरबीआई के Key Facts Statement (KFS) नियमों के तहत लेंडर को साइन करने से पहले आपको एक तय फॉर्मेट वाला KFS देना होता है। इसमें Annual Percentage Rate (APR), जिसमें ब्याज और सारे चार्ज शामिल हैं, और रीपेमेंट शेड्यूल दिखाना जरूरी है। KFS में जो फीस नहीं लिखी, वह लेंडर आपकी साफ सहमति के बिना नहीं ले सकता।
उदाहरण: आप 11% पर 5 साल के लिए ₹5,00,000 उधार लेते हैं। ईएमआई करीब ₹10,871 बनती है। लेंडर 2% प्रोसेसिंग फीस और 18% GST लेता है, यानी ₹11,800, जो लोन की रकम से काट लिया जाता है। आपको ₹4,88,200 मिलते हैं, लेकिन ईएमआई ₹5,00,000 पर गिनी जाती है। असली APR करीब 12.05% बैठता है, यानी हेडलाइन रेट से पूरा एक प्रतिशत अंक ज्यादा।
इसलिए 2% फीस वाला 11% का ऑफर, बिना फीस वाले 11.75% के ऑफर से महंगा पड़ सकता है। APR की तुलना साथ-साथ करें।
फिक्स्ड बनाम फ्लोटिंग पर्सनल लोन
भारत में ज्यादातर पर्सनल लोन फिक्स्ड रेट होते हैं: पूरी अवधि में आपकी ईएमआई एक जैसी रहती है। अभी यह इसलिए अहम है क्योंकि:
- आरबीआई ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया। मौजूदा फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन पर इसका असर नहीं पड़ता।
- जहां फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन मिलते हैं, वे अपनी अगली रीसेट तारीख पर बदलेंगे।
प्रीपेमेंट के नियम लोन के प्रकार के हिसाब से अलग हैं। 1 जनवरी 2026 से लागू आरबीआई के Pre-payment Charges on Loans Directions, 2025 के तहत लेंडर व्यक्तियों को गैर-कारोबारी काम के लिए दिए फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर फीस नहीं ले सकते। फिक्स्ड रेट लोन पर लोन एग्रीमेंट के मुताबिक फोरक्लोजर चार्ज अब भी लग सकता है, जो अक्सर बकाया मूलधन का कुछ प्रतिशत और GST होता है, और कुछ लेंडर तय संख्या में ईएमआई के बाद ही पार्ट-प्रीपेमेंट की इजाजत देते हैं। अगर आप लोन जल्दी बंद कर सकते हैं, तो साइन करने से पहले KFS में ये शर्तें देख लें।
पर्सनल लोन कम दर पर कैसे पाएं
- पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट देखें और अप्लाई करने से पहले गलतियां ठीक कराएं।
- अपने सैलरी बैंक से शुरुआत करें। प्री-अप्रूव्ड ऑफर अक्सर सस्ते और जल्दी मिलते हैं।
- कम से कम तीन ऑफर की तुलना करें, सिर्फ ब्याज दर पर नहीं बल्कि APR पर।
- प्रोसेसिंग फीस पर मोलभाव करें। इसमें अक्सर दर से ज्यादा गुंजाइश होती है।
- सिर्फ जरूरत जितना ही उधार लें और सबसे छोटी अवधि चुनें जिसकी ईएमआई आप भर सकें।
- एक साथ कई जगह अप्लाई न करें। हर आवेदन से आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर हार्ड इन्क्वायरी होती है।
- जिन ऐड-ऑन की जरूरत नहीं, उन्हें मना करें, जैसे जुड़ा हुआ इंश्योरेंस, अगर वह वैकल्पिक है।
पर्सनल लोन कब ठीक है, और कब नहीं
पर्सनल लोन लचीले हैं लेकिन महंगे। ये असली जरूरतों के लिए ठीक हो सकते हैं, जैसे इलाज का खर्च, घर की जरूरी मरम्मत, या महंगे कर्ज को एक साथ चुकाना। जैसे, 12% के पर्सनल लोन से उस क्रेडिट कार्ड बकाये को चुकाना जिस पर हर महीने कहीं ज्यादा ब्याज लगता है, काफी पैसा बचा सकता है, बशर्ते आप कार्ड पर फिर से बकाया न चढ़ाएं।
छुट्टियों या गैजेट जैसे शौक के खर्च, या निवेश के लिए ये सही नहीं हैं। अगर आपके पास गिरवी रखने को कुछ है, तो एफडी पर लोन या गोल्ड लोन जैसा सिक्योर्ड विकल्प सस्ता पड़ सकता है। इन्हें व्यक्तिगत सलाह नहीं, सामान्य बातें मानें; आपके लिए क्या सही है, यह आपकी अपनी स्थिति तय करेगी।
मुख्य बातें
- बड़े बैंक पर्सनल लोन की दरें करीब 10% से शुरू बताते हैं, और ऊपरी सीमा करीब 24% तक जाती है।
- आपकी असली दर आपका क्रेडिट स्कोर, आय, नियोक्ता और मौजूदा ईएमआई तय करते हैं।
- 5 साल के ₹5 लाख के लोन पर 10.5% और 18% के बीच ब्याज में करीब ₹1.17 लाख का फर्क है।
- ऑफर की तुलना Key Facts Statement में दिए APR पर करें; फीस से लागत एक प्रतिशत अंक या उससे ज्यादा बढ़ सकती है।
- ज्यादातर पर्सनल लोन फिक्स्ड रेट होते हैं, इसलिए अक्टूबर 2026 की रेपो बढ़ोतरी से मौजूदा ईएमआई नहीं बदलती, लेकिन फिक्स्ड लोन पर फोरक्लोजर चार्ज लग सकता है।
- सिर्फ जरूरत जितना और सबसे छोटी संभव अवधि के लिए उधार लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत में अभी पर्सनल लोन की ब्याज दर कितनी है?
बड़े बैंक पर्सनल लोन की दरें करीब 10% सालाना से शुरू बताते हैं, और लेंडर के हिसाब से ऊपरी सीमा करीब 15% से 24% तक जाती है। NBFC और फिनटेक की दरें इससे ज्यादा हो सकती हैं। आपकी असली दर आपके क्रेडिट स्कोर, आय और नियोक्ता पर निर्भर करती है।
कौन सा बैंक सबसे कम ब्याज पर पर्सनल लोन देता है?
SBI, HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े बैंकों की घोषित शुरुआती दरें एक-दूसरे के करीब, लगभग 10% हैं। आपको सबसे कम कितनी दर मिलेगी, यह आपकी प्रोफाइल पर निर्भर है, इसलिए हेडलाइन रेट के बजाय असली ऑफर की तुलना करें।
पर्सनल लोन में APR क्या होता है?
APR यानी Annual Percentage Rate लोन की सालाना कुल लागत है, जिसमें ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और दूसरे चार्ज शामिल होते हैं। आरबीआई के नियमों के तहत रिटेल लोन में लेंडर को इसे Key Facts Statement में दिखाना होता है।
क्या पर्सनल लोन बिना चार्ज के प्रीपे कर सकते हैं?
1 जनवरी 2026 से लागू आरबीआई के नियमों के तहत व्यक्तियों को गैर-कारोबारी काम के लिए दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लग सकता। ज्यादातर पर्सनल लोन फिक्स्ड रेट होते हैं, और उन पर लेंडर लोन एग्रीमेंट में बताया गया फोरक्लोजर चार्ज ले सकता है।
क्या सिबिल स्कोर से पर्सनल लोन की ब्याज दर पर असर पड़ता है?
हां। पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड होता है, इसलिए लेंडर आपके क्रेडिट स्कोर पर काफी भरोसा करते हैं। 750 या उससे ज्यादा स्कोर पर आम तौर पर बेहतर दर और ज्यादा लिमिट मिलती है।
क्या अक्टूबर 2026 में रेपो रेट बढ़ने के बाद पर्सनल लोन की दरें बढ़ेंगी?
मौजूदा फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन नहीं बदलते। अगर लेंडर अपने बेंचमार्क बढ़ाते हैं तो नए लोन की दरें बढ़ सकती हैं, इसलिए अप्लाई करने से पहले मौजूदा ऑफर जरूर देख लें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।