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बैंक खाते में मोबाइल नंबर कैसे बदलें (2026)

नेट बैंकिंग, एटीएम, ऐप या ब्रांच से बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलें, पुराने सिम के बिना भी। यूपीआई दोबारा रजिस्ट्रेशन, समय और फ्रॉड के खतरे जानें।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 7 मिनट में पढ़ें
बैंक खाते में मोबाइल नंबर कैसे बदलें (2026)
इस लेख में
  1. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर इतना जरूरी क्यों है
  2. नंबर बदलने के तरीके
  3. कदम-दर-कदम
  4. आपके अधिकार और बैंक की जिम्मेदारियां
  5. कॉपी करने लायक अनुरोध या शिकायत
  6. क्या न करें
  7. अपडेट के बाद
  8. मुख्य बातें

"मेरे पास नया नंबर है, लेकिन बैंक के ओटीपी अब भी पुराने नंबर पर जा रहे हैं।" समाधान: अगर पुराना सिम आपके पास है तो बैंक की नेट बैंकिंग या ऐप से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट करें, डेबिट कार्ड से बैंक के एटीएम पर करें, या अगर पुराना सिम खो गया है तो पहचान पत्र लेकर किसी भी ब्रांच में जाएं। फिर नए नंबर से यूपीआई दोबारा रजिस्टर करें। यह जल्दी करें, क्योंकि जो फोन नंबर अब आपके कंट्रोल में नहीं है, वही आपके बैंक खाते की चाबी है।

यह गाइड अक्टूबर 2026 के हिसाब से हर तरीका, पुराना सिम न होने पर क्या करें, यूपीआई का क्या होता है, और आपको मिलने वाली सुरक्षा के बारे में बताती है। यह हमारी बैंक केवाईसी अपडेट वाली विस्तृत गाइड के साथ पढ़ें, जिसमें पता और दस्तावेज बदलने की जानकारी है।

रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर इतना जरूरी क्यों है

बैंक में रजिस्टर्ड नंबर पर हर ट्रांजैक्शन अलर्ट और हर ओटीपी आता है। यूपीआई ऐप्स भी इसी से आपको पहचानते हैं और आपका डिवाइस जोड़ते हैं। अगर यह पुराना है:

  • आपको डेबिट अलर्ट नहीं मिलेंगे, इसलिए फ्रॉड का पता नहीं चल पाएगा, और आरबीआई के कस्टमर लायबिलिटी नियम इस पर निर्भर करते हैं कि आप कितनी जल्दी रिपोर्ट करते हैं;
  • आप अपना यूपीआई पिन रीसेट नहीं कर सकते या नेट बैंकिंग में लॉगिन नहीं कर सकते;
  • अगर आपका पुराना नंबर किसी और को दे दिया गया, तो कोई अजनबी आपके ओटीपी पा सकता है।

यह आखिरी खतरा असली है। टेलीकॉम ऑपरेटर लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर नंबर बंद कर सकते हैं और एक इंतजार अवधि के बाद उसे किसी और को दे सकते हैं। अप्रैल 2025 से NPCI ने बैंकों और यूपीआई ऐप्स के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार Mobile Number Revocation List चेक करना और रद्द हुए नंबरों पर कार्रवाई करना जरूरी किया है, जिससे उनसे जुड़ी यूपीआई आईडी बंद हो सकती हैं।

नंबर बदलने के तरीके

तरीका आपको क्या चाहिए पुराने सिम के बिना काम करेगा? आम समय
नेट बैंकिंग लॉगिन, पुराने और नए नंबर पर ओटीपी (बैंक के हिसाब से) आम तौर पर नहीं उसी दिन से 1 दिन
बैंक का मोबाइल ऐप लॉगिन, ओटीपी, कभी-कभी डेबिट कार्ड की जानकारी आम तौर पर नहीं उसी दिन से 1 दिन
बैंक का अपना एटीएम डेबिट कार्ड और एटीएम पिन, फिर नए नंबर पर कन्फर्मेशन कॉल या ओटीपी हां, कई बैंकों में 1 से 3 कामकाजी दिन
ब्रांच साइन किया रिक्वेस्ट फॉर्म, ओरिजिनल पहचान पत्र, पासबुक या चेक बुक हां कुछ कामकाजी दिन
वीडियो केवाईसी / डोरस्टेप (कुछ बैंक) लाइव पहचान जांच हां अलग-अलग

हर बैंक हर तरीका नहीं देता। नेट बैंकिंग या ऐप के प्रोफाइल सेक्शन में "Update contact details" या "Change mobile number" देखें।

कदम-दर-कदम

अगर पुराना सिम आपके पास है

  1. नेट बैंकिंग या बैंक के ऐप में लॉगिन करें और प्रोफाइल या सर्विस रिक्वेस्ट सेक्शन खोलें।
  2. "Update mobile number" चुनें और नया नंबर डालें।
  3. पुराने और नए नंबर पर आए ओटीपी डालें, और मांगे जाने पर डेबिट कार्ड की जानकारी भी।
  4. सर्विस रिक्वेस्ट नंबर नोट करें और दोनों नंबरों पर कन्फर्मेशन SMS का इंतजार करें।
  5. पुराना सिम तब तक चालू रखें जब तक हर बैंक, कार्ड, बीमा कंपनी और निवेश खाता नए नंबर पर न आ जाए।

अगर पुराना सिम खो गया है या पहले ही बंद हो चुका है

  1. पहले देखें कि पुराना नंबर वापस मिल सकता है या नहीं। अगर सिम खो गया या खराब हो गया, तो टेलीकॉम ऑपरेटर पहचान पत्र दिखाने पर उसी नंबर का डुप्लीकेट सिम दे सकता है। अक्सर यही सबसे जल्दी का उपाय होता है।
  2. अगर नहीं, तो एटीएम का तरीका अपनाएं, अगर आपका बैंक यह सुविधा देता है: कार्ड डालें, पिन डालें, रजिस्ट्रेशन या मोबाइल अपडेट का विकल्प चुनें और निर्देशों का पालन करें।
  3. या किसी भी ब्रांच में जाएं, ओरिजिनल पहचान पत्र (आधार, पैन, पासपोर्ट या वोटर आईडी), भरा हुआ रिक्वेस्ट फॉर्म और खाते की जानकारी लेकर। बिल्कुल वैसे ही साइन करें जैसे बैंक के रिकॉर्ड में है।
  4. तारीख के साथ लिखित पावती मांगें।
  5. अगर आपको शक है कि नंबर पर किसी और ने कब्जा कर लिया है (अचानक सिग्नल गायब होना, अनचाहे ओटीपी आना), तो तुरंत बैंक को ऑनलाइन बैंकिंग और यूपीआई ब्लॉक करने को कहें; देखें सिम स्वैप फ्रॉड।

बदलाव के बाद

  1. यूपीआई दोबारा रजिस्टर करें। फोन में नया सिम डालें, यूपीआई ऐप खोलें, नए नंबर से डिवाइस दोबारा वेरिफाई करें, बैंक खाता जोड़ें और यूपीआई पिन सेट या रीसेट करें।
  2. दूसरी जगहों पर भी नंबर अपडेट करें: क्रेडिट कार्ड, डीमैट और म्यूचुअल फंड खाते, बीमा, ईपीएफओ, इनकम टैक्स पोर्टल और आधार।
  3. एक छोटा ट्रांजैक्शन करके देखें कि अलर्ट आ रहे हैं या नहीं।

आपके अधिकार और बैंक की जिम्मेदारियां

  • आरबीआई के केवाईसी नियम रजिस्टर्ड ईमेल या मोबाइल के जरिए और डिजिटल व नॉन-डिजिटल चैनलों से अपडेट की इजाजत देते हैं, और बैंकों को संपर्क जानकारी अपडेट करने का तरीका देना होता है।
  • बैंकों को ट्रांजैक्शन अलर्ट भेजने होते हैं। आरबीआई का कस्टमर लायबिलिटी फ्रेमवर्क बैंकों से कहता है कि वे ग्राहकों से SMS अलर्ट के लिए मोबाइल नंबर रजिस्टर करवाएं और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन के अलर्ट भेजें। मौजूदा नंबर न होने पर आप यह सुरक्षा खो देते हैं।
  • रिपोर्ट करने की रफ्तार लायबिलिटी तय करती है। मौजूदा नियमों के तहत तीन कामकाजी दिनों में रिपोर्ट किए गए थर्ड-पार्टी फ्रॉड पर आपकी लायबिलिटी जीरो है। 1 जनवरी 2027 से कमर्शियल बैंकों में इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन के लिए आरबीआई के संशोधित निर्देश इसे पांच कैलेंडर दिन कर देते हैं। देखें अनधिकृत ट्रांजैक्शन और जीरो लायबिलिटी।
  • शिकायत का जवाब देना जरूरी है। अगर बैंक बिना कारण आपके अनुरोध में देरी करता है, तो आप शिकायत आगे बढ़ा सकते हैं और 30 दिन बाद cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन के पास जा सकते हैं।

उदाहरण: देरी महंगी क्यों पड़ती है

रोहित ने जनवरी में नंबर बदला लेकिन बैंक में कभी अपडेट नहीं किया। मार्च में एक थर्ड-पार्टी ब्रीच के जरिए एक ठग ने उसके सेविंग खाते से ₹30,000 का डेबिट कर लिया। अलर्ट पुराने नंबर पर जाने की वजह से उसे इसका पता 8वें कामकाजी दिन चला, जब उसने अपना स्टेटमेंट देखा।

  • मौजूदा नियमों के तहत 7 कामकाजी दिनों के बाद रिपोर्ट किया गया थर्ड-पार्टी ब्रीच बैंक की बोर्ड से मंजूर पॉलिसी के तहत आता है, इसलिए रिफंड पक्का नहीं है।
  • अगर अलर्ट उस तक पहुंचते और वह 3 कामकाजी दिनों में रिपोर्ट करता, तो उसकी लायबिलिटी ₹0 होती।
  • अगर वह 5वें दिन रिपोर्ट करता, तो उसकी लायबिलिटी ₹30,000 और ₹10,000 में से कम, यानी ₹10,000 होती, और बैंक ₹20,000 लौटाता।

पांच मिनट का नंबर अपडेट पूरे ₹30,000 को बचा सकता था।

कॉपी करने लायक अनुरोध या शिकायत

विषय: रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट करने का अनुरोध

महोदय/महोदया,

कृपया मेरे खाते, जिसके आखिरी अंक [आखिरी 4 अंक] हैं / कस्टमर आईडी [नंबर],
पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर अपडेट करें।

पुराना नंबर: [पुराना नंबर] ([तारीख] से इस्तेमाल में नहीं / सिम खो गया)
नया नंबर: [नया नंबर]

मैंने यह अनुरोध [तारीख] को [ब्रांच / एटीएम / नेट बैंकिंग] से जमा किया था,
रेफरेंस [नंबर], लेकिन बदलाव नहीं हुआ है। कृपया इसे अपडेट करें और नए नंबर
पर पुष्टि करें।

चूंकि मेरा पुराना नंबर किसी और को दिया जा सकता है, कृपया इसे जरूरी मानें
और पुराने नंबर पर ओटीपी भेजना बंद करें।

नाम:
संलग्न पहचान पत्र: [प्रकार]
हस्ताक्षर:

अगर 30 दिन में जवाब न मिले, तो ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर और फिर आरबीआई ओम्बड्समैन (cms.rbi.org.in, 14448) के पास जाएं।

क्या न करें

  • आपका बैंक नंबर अपडेट करने की पेशकश करने वाले कॉलर्स को अपना नया नंबर, ओटीपी या आधार की जानकारी न दें। बैंक यह काम सिर्फ अपने चैनलों से करते हैं।
  • सभी वित्तीय खाते शिफ्ट करने से पहले पुराना सिम सरेंडर न करें या बंद न होने दें।
  • परिवार के किसी सदस्य का नंबर बैंक में रजिस्टर्ड नंबर के तौर पर इस्तेमाल न करें, जब तक खाता जॉइंट न हो और दोनों सहमत न हों; आपके ओटीपी उनके फोन पर जाएंगे।
  • अनचाहे ओटीपी या "mobile number updated" SMS को नजरअंदाज न करें। तुरंत बैंक के आधिकारिक नंबर पर कॉल करें।
  • SMS या व्हाट्सऐप के लिंक से फॉर्म न भरें जो कहते हैं कि "ब्लॉक होने से बचने के लिए नंबर अपडेट करना जरूरी है"।

अपडेट के बाद

नंबर बदलने के बाद यूपीआई पर और शायद नए पेयी जोड़ने पर कुछ समय की रोक की उम्मीद रखें; बैंक इससे उन ठगों को रोकते हैं जो खाता खाली करने से पहले नंबर बदल देते हैं। बड़े भुगतान एक दिन पहले प्लान करें, या NEFT इस्तेमाल करें। अगर यूपीआई फिर भी काम न करे, तो देखें यूपीआई काम नहीं कर रहा। और अगर आप वैसे भी अपने खाते व्यवस्थित कर रहे हैं, तो यह देखने का अच्छा मौका है कि आपकी खाली पड़ी बचत कहां रखी है; एफडी कैलकुलेटर दिखाता है कि सेविंग में छोड़ने के मुकाबले अलग फिक्स्ड डिपॉजिट पर कितना मिलेगा।

मुख्य बातें

  • पुराना सिम हो तो नेट बैंकिंग या ऐप से, और न हो तो एटीएम या ब्रांच से बैंक में रजिस्टर्ड नंबर बदलें।
  • सिम खो जाने पर ऑपरेटर से पुराने नंबर का डुप्लीकेट सिम लेना अक्सर सबसे जल्दी का उपाय होता है।
  • नए नंबर से यूपीआई दोबारा रजिस्टर करें और लगभग 24 घंटे कम लिमिट की उम्मीद रखें।
  • पुराना नंबर रहने का मतलब है अलर्ट छूटना, और देर से रिपोर्ट करने से यह बदल सकता है कि फ्रॉड का नुकसान कौन उठाएगा।
  • किसी को भी कॉल या लिंक के जरिए अपना नंबर अपडेट न करने दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मैं अपने बैंक खाते में मोबाइल नंबर कैसे बदल सकता हूं?

ज्यादातर बैंक इसकी सुविधा नेट बैंकिंग या बैंक के ऐप से पुराने और नए नंबर पर ओटीपी के साथ, बैंक के एटीएम पर डेबिट कार्ड और पिन से, या किसी भी ब्रांच में रिक्वेस्ट फॉर्म और पहचान पत्र के साथ देते हैं। सही विकल्प आपके बैंक पर निर्भर करते हैं।

अगर पुराना सिम खो गया हो तो क्या बैंक में मोबाइल नंबर बदल सकते हैं?

हां। ओरिजिनल पहचान पत्र और साइन किए हुए रिक्वेस्ट फॉर्म के साथ ब्रांच जाएं, या अगर आपका बैंक एटीएम से सुविधा देता है तो वह रास्ता अपनाएं। ऑनलाइन तरीकों में आम तौर पर पुराने नंबर पर ओटीपी चाहिए होता है, इसलिए पुराने सिम के बिना वे काम नहीं करेंगे।

बैंक में मोबाइल नंबर बदलने में कितना समय लगता है?

ऑनलाइन और एटीएम से किया गया बदलाव अक्सर एक दिन के अंदर लागू हो जाता है। ब्रांच में दिए अनुरोध में कुछ कामकाजी दिन लग सकते हैं। कई बैंक सुरक्षा के लिए बदलाव के बाद कुछ समय तक नए पेयी जोड़ने या लिमिट पर रोक भी लगाते हैं।

बैंक मोबाइल नंबर बदलने के बाद क्या यूपीआई काम करेगा?

अपने-आप नहीं। आपको फोन में नया सिम डालकर नए नंबर से ऐप में यूपीआई दोबारा रजिस्टर करना होगा, और यूपीआई पिन सेट या रीसेट करना होगा। पहले लगभग 24 घंटे लिमिट कम रहने की उम्मीद रखें।

अगर मेरा पुराना नंबर किसी और को दे दिया जाए तो क्या होगा?

जितनी जल्दी हो सके अपना बैंक, यूपीआई ऐप्स, ईमेल और दूसरे वित्तीय खाते अपडेट करें। टेलीकॉम ऑपरेटर बंद हुए नंबर एक इंतजार अवधि के बाद दूसरों को दे सकते हैं, और NPCI ने बैंकों और यूपीआई ऐप्स के लिए रद्द हुए नंबरों की जांच जरूरी की है ताकि उनसे जुड़ी यूपीआई आईडी बंद की जा सकें।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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