लोन में गारंटर और को-एप्लीकेंट की जिम्मेदारी क्या है
लोन में को-एप्लीकेंट या गारंटर बने हैं? कर्जदार डिफॉल्ट करे तो आपको क्या चुकाना होगा, सिबिल पर असर, कानूनी अधिकार और बाहर निकलने का तरीका।

इस लेख में
अगर आपने किसी लोन में को-एप्लीकेंट या गारंटर के तौर पर साइन किया है और मुख्य कर्जदार ने भुगतान बंद कर दिया है, तो कानूनी तौर पर बकाया चुकाने की जिम्मेदारी आपकी भी है। को-एप्लीकेंट संयुक्त कर्जदार के तौर पर पहले दिन से हर ईएमआई का देनदार होता है। गारंटर की जिम्मेदारी कर्जदार के "बराबर" (co-extensive) होती है, इसलिए लेंडर पहले कर्जदार पर केस किए बिना आपसे पूरी बकाया रकम मांग सकता है। अच्छी बात यह है कि आपके भी अधिकार हैं, और जल्दी कदम उठाने से नुकसान सीमित रहता है।
को-एप्लीकेंट, को-बॉरोअर, को-ओनर और गारंटर
| भूमिका | ईएमआई के लिए जिम्मेदार? | आय गिनी जाती है? | आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखता है? | आम उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| को-एप्लीकेंट / को-बॉरोअर | हां, पहले दिन से संयुक्त रूप से | हां | हां, जॉइंट अकाउंट के तौर पर | होम लोन में पति या पत्नी |
| को-ओनर (प्रॉपर्टी) | सिर्फ तभी जब को-बॉरोअर भी हो | सिर्फ को-बॉरोअर होने पर | सिर्फ को-बॉरोअर होने पर | प्रॉपर्टी का संयुक्त मालिकाना हक |
| गारंटर | हां, कर्जदार के डिफॉल्ट और गारंटी लागू होने के बाद | नहीं | आम तौर पर, गारंटी के तौर पर | बच्चे के लोन की गारंटी देने वाले माता-पिता |
| नॉमिनी (इंश्योरेंस) | नहीं | नहीं | नहीं | इंश्योरेंस की रकम पाता है |
को-एप्लीकेंट से लोन की पात्रता बढ़ती है क्योंकि दोनों की आय गिनी जाती है; इसका असर आप हमारे लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर में देख सकते हैं। यही संयुक्त जिम्मेदारी इस भूमिका को जोखिम भरा बनाती है।
कानून क्या कहता है
- धारा 128, भारतीय संविदा अधिनियम, 1872: जब तक कॉन्ट्रैक्ट में कुछ और न हो, जमानतदार (गारंटर) की जिम्मेदारी मुख्य कर्जदार के बराबर होती है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार साफ किया है कि लेंडर कर्जदार के खिलाफ सारे रास्ते आजमाए बिना गारंटर के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
- धारा 133: अगर लेंडर गारंटर की सहमति के बिना लोन की शर्तें बदलता है (जैसे लिमिट बढ़ाना), तो उस बदलाव के बाद के लेनदेन के लिए गारंटर मुक्त हो जाता है।
- धारा 140 और 145: भुगतान करने वाला गारंटर लेंडर के अधिकार, जिसमें कोई भी सिक्योरिटी शामिल है, हासिल कर लेता है और कर्जदार से रकम वापस पाने का हकदार होता है।
- विलफुल डिफॉल्टर नियम: आरबीआई (RBI) के निर्देशों के तहत जो गारंटर क्षमता होने के बावजूद लागू की गई गारंटी का भुगतान करने से मना करे, उसे विलफुल डिफॉल्टर माना जा सकता है।
- कंपनियों के पर्सनल गारंटर: इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के भाग III के तहत कॉर्पोरेट कर्जदारों के पर्सनल गारंटरों के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी कार्यवाही शुरू की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कंपनी का रेजोल्यूशन प्लान उसके पर्सनल गारंटरों को अपने आप मुक्त नहीं करता।
कर्जदार डिफॉल्ट करे तो क्या करें: एक-एक कदम
1. लेंडर से पूरी जानकारी लें
लिखित में लोन अकाउंट स्टेटमेंट, ओवरड्यू रकम, बकाया मूलधन, लगाए गए चार्ज और आपके साइन किए गए एग्रीमेंट और गारंटी की कॉपी मांगें। आपसे जो रकम मांगी जा रही है, उसके बारे में जानना आपका हक है।
2. अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जांचें
CIBIL और दूसरे ब्यूरो से अपनी मुफ्त सालाना रिपोर्ट डाउनलोड करें। देखें कि लोन दिख रहा है या नहीं और किस स्टेटस के साथ। डिफॉल्ट रिपोर्ट करने से पहले लेंडर को कर्जदार को सूचना देनी होती है; लेंडर से कहें कि ऐसे नोटिस आपको भी भेजे।
3. तुरंत कर्जदार से बात करें
पता करें कि दिक्कत अस्थायी है या नहीं। 90 दिन ओवरड्यू होने पर अकाउंट NPA बन जाता है; उससे पहले एक-दो ईएमआई भरकर छोटी चूक अक्सर ठीक की जा सकती है।
4. हो सके तो ओवरड्यू ईएमआई भरें, और इसका रिकॉर्ड रखें
बकाया भरने से आपका अपना स्कोर बचता है। रसीदें संभालकर रखें; गारंटर के तौर पर आप बाद में यह रकम कर्जदार से वसूल सकते हैं।
5. लेंडर से समाधान पर बात करें
विकल्पों में रीस्ट्रक्चरिंग (देखें लोन रीस्ट्रक्चरिंग के विकल्प), नया रीपेमेंट प्लान, या लोन चुकाने के लिए कर्जदार का कोई एसेट बेचना शामिल है।
6. रिलीज सिर्फ लेंडर की लिखित सहमति से ही मांगें
बाहर निकलने के लिए दूसरा गारंटर, अतिरिक्त सिक्योरिटी या लोन का कुछ हिस्सा प्रीपे करने का प्रस्ताव दें। को-एप्लीकेंट को हटाने के लिए आम तौर पर दोनों कर्जदारों की सहमति चाहिए और बचे हुए कर्जदार को अकेले पात्र होना चाहिए। लिखित रिलीज के बिना आप जिम्मेदार बने रहते हैं।
7. अगर आपने भुगतान किया है तो कर्जदार से वसूलें
कानूनी नोटिस भेजें, और जरूरत हो तो धारा 140 और 145 के तहत वसूली के लिए सिविल केस दायर करें।
उदाहरण से समझें: गारंटर पर कितना बोझ आ सकता है
आपका दोस्त 13% पर 5 साल के लिए ₹10 लाख का पर्सनल लोन लेता है, और आप गारंटर हैं। ईएमआई ₹22,753 है। 20 ईएमआई के बाद वह भुगतान बंद कर देता है।
- 20 ईएमआई के बाद बकाया मूलधन: करीब ₹7,35,400
- फिर वह तीन ईएमआई छोड़ देता है (3 × ₹22,753 = ₹68,259 ओवरड्यू)। चूंकि कुछ नहीं चुकाया गया, मूलधन ₹7,35,400 ही रहता है और तीन महीने का ब्याज जुड़ता है: ₹7,35,400 × 13% ÷ 12 × 3 ≈ ₹23,900
- चार्ज से पहले कुल बकाया: करीब ₹7,59,300, और इसके ऊपर लोन के Key Facts Statement में बताए गए पेनल चार्ज
गारंटी लागू होने के बाद लेंडर सिर्फ ₹68,259 का ओवरड्यू नहीं, बल्कि यह पूरी रकम सीधे आपसे मांग सकता है। अगर आप भुगतान करते हैं, तो उतनी ही रकम के लिए अपने दोस्त पर केस कर सकते हैं। इसीलिए किसी लोन की गारंटी देने को ऐसे समझना चाहिए जैसे आप खुद लोन ले रहे हों।
को-एप्लीकेंट या गारंटर के तौर पर आपके अधिकार
- उचित वसूली: रिकवरी एजेंटों पर आरबीआई के नियम गारंटर और को-बॉरोअर पर भी उसी तरह लागू होते हैं। कॉल सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच, कोई धमकी नहीं, आपको शर्मिंदा करने के लिए आपके रिश्तेदारों या नियोक्ता से संपर्क नहीं। फरवरी 2026 में आरबीआई ने इन घंटों के बाहर कर्जदारों को कॉल करने पर एक NBFC पर जुर्माना लगाया था।
- पेनल चार्ज, पेनल ब्याज नहीं: आरबीआई के 2023 के फेयर लेंडिंग सर्कुलर के तहत जुर्माना पहले से बताया गया फ्लैट चार्ज होना चाहिए, ब्याज में जोड़कर कंपाउंड नहीं किया जा सकता।
- कोई प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं: व्यक्तियों को दिए गए फ्लोटिंग रेट टर्म लोन पर, को-ऑब्लिगेंट हों या न हों, कोई फोरक्लोजर चार्ज नहीं लगता, इसलिए आप लोन जल्दी बंद कर सकते हैं।
- दस्तावेज वापसी: लोन पूरा चुकने के बाद लेंडर को 30 दिन के अंदर प्रॉपर्टी के मूल दस्तावेज लौटाने होंगे, वरना अपनी वजह से हुई देरी पर ₹5,000 प्रतिदिन देने होंगे। कर्जदार की मृत्यु होने पर कानूनी वारिसों को दस्तावेज लौटाने की प्रक्रिया भी लेंडर के पास होनी चाहिए।
- तय प्रक्रिया: सिक्योर्ड लोन में प्रॉपर्टी पर कब्जा लेने से पहले लेंडर को SARFAESI Act, 2002 की नोटिस प्रक्रिया का पालन करना होगा।
अगर रिकवरी एजेंट पहले से कॉल कर रहे हैं, तो हमारी गाइड लोन रिकवरी एजेंट का उत्पीड़न और आपके अधिकार पढ़ें।
शिकायत कहां करें
- लेंडर का ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर: गलत चार्ज, स्टेटमेंट न मिलने, उत्पीड़न या दस्तावेज देने से मना करने पर।
- आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन: अगर 30 दिन में जवाब न मिले या आप संतुष्ट न हों, तो cms.rbi.org.in पर मुफ्त शिकायत करें। 1 जुलाई 2026 से लागू Reserve Bank – Integrated Ombudsman Scheme, 2026 के तहत जवाब मिलने या जवाब की समय-सीमा खत्म होने के 90 दिन के अंदर शिकायत करें।
- पुलिस और साइबर क्राइम: धमकी, गाली-गलौज या मॉर्फ की गई फोटो अपराध हैं। 1930 पर कॉल करें, cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें, या FIR दर्ज कराएं।
- बिना रजिस्ट्रेशन वाले लेंडर: sachet.rbi.org.in पर जांचें और रिपोर्ट करें।
क्या न करें
- उतनी रकम के लिए गारंटर या को-एप्लीकेंट के तौर पर साइन न करें जो आप खुद न चुका सकें।
- "यह मेरा लोन नहीं है" सोचकर नोटिस को नजरअंदाज न करें; कानूनी तौर पर यह आपका भी है।
- रिकवरी एजेंट को नकद या किसी निजी अकाउंट में भुगतान न करें; सिर्फ लेंडर के आधिकारिक चैनल से भुगतान करें और रसीद लें।
- बैंक के मौखिक वादे को रिलीज न मानें; लिखित रिलीज पर जोर दें।
- जिस लोन की आपने गारंटी दी है, उसे यह समझे बिना सेटलमेंट में न जाने दें कि "settled" का टैग आपकी रिपोर्ट में भी आ सकता है।
मुख्य बातें
- को-एप्लीकेंट संयुक्त कर्जदार होते हैं; गारंटर डिफॉल्ट होने पर पूरी रकम के लिए जिम्मेदार बनते हैं।
- कॉन्ट्रैक्ट एक्ट की धारा 128 लेंडर को सीधे गारंटर से वसूली की इजाजत देती है।
- लोन आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिख सकता है और ईएमआई छूटने पर आपका स्कोर खराब कर सकता है।
- आप सिर्फ लेंडर की लिखित सहमति से बाहर निकल सकते हैं, आम तौर पर दूसरा गारंटर या सिक्योरिटी देकर।
- अगर आप गारंटर के तौर पर भुगतान करते हैं, तो धारा 140 और 145 के तहत कर्जदार से पैसा वसूल सकते हैं।
- पहले लेंडर से, फिर cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन से शिकायत करें; धमकी की रिपोर्ट 1930 पर करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर कर्जदार लोन न चुकाए तो क्या गारंटर जिम्मेदार है?
हां। भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act), 1872 की धारा 128 के तहत, जब तक कॉन्ट्रैक्ट में कुछ और न लिखा हो, गारंटर की जिम्मेदारी कर्जदार के बराबर होती है। लेंडर कर्जदार के खिलाफ सारे रास्ते आजमाए बिना ही गारंटर से पूरी बकाया रकम मांग सकता है।
क्या गारंटर बनने से मेरे सिबिल स्कोर पर असर पड़ता है?
जिस लोन की आपने गारंटी दी है, वह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिख सकता है, और आपके अपने लोन आवेदन पर लेंडर इसे ध्यान में रखते हैं। अगर कर्जदार डिफॉल्ट करता है, तो ओवरड्यू स्टेटस से आपका स्कोर भी खराब हो सकता है।
को-एप्लीकेंट और गारंटर में क्या फर्क है?
को-एप्लीकेंट या को-बॉरोअर संयुक्त कर्जदार होता है, जिसकी आय गिनी जाती है और जो पहले दिन से हर ईएमआई के लिए जिम्मेदार होता है। गारंटर दूसरे दर्जे का पक्ष है, जो कर्जदार के डिफॉल्ट करने पर जिम्मेदार बनता है, और पात्रता के लिए उसकी आय नहीं गिनी जाती।
क्या मैं किसी चल रहे लोन से गारंटर के तौर पर हट सकता हूं?
अपने आप नहीं। आप लेंडर से रिलीज करने को कह सकते हैं, आम तौर पर दूसरा गारंटर या अतिरिक्त सिक्योरिटी देकर, लेकिन रिलीज तभी होती है जब लेंडर लिखित में सहमति दे।
अगर मैंने गारंटर के तौर पर कर्जदार का बकाया चुका दिया, तो क्या पैसा वापस ले सकता हूं?
हां। भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 140 और 145 के तहत भुगतान करने वाला गारंटर कर्जदार के खिलाफ लेंडर की जगह ले लेता है और चुकाई गई रकम वसूलने के लिए कर्जदार पर केस कर सकता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।