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लोन ऐप परमिशन: ऐप क्या देख सकता है और क्या नहीं

लोन ऐप कॉन्टैक्ट्स या फोटो मांग रहा है? जानें आरबीआई और गूगल प्ले के नियम, परमिशन कैसे हटाएं, डेटा कैसे डिलीट कराएं और शिकायत कहां करें।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 8 मिनट में पढ़ें
लोन ऐप परमिशन: ऐप क्या देख सकता है और क्या नहीं
इस लेख में
  1. लोन ऐप आपके फोन का डेटा क्यों चाहते हैं
  2. नियम क्या कहते हैं: हर परमिशन का हिसाब
  3. स्टेप-बाय-स्टेप: अगर ऐप के पास जरूरत से ज्यादा एक्सेस है
  4. आपके अधिकार, संक्षेप में
  5. शिकायत कहां करें
  6. क्या न करें
  7. मुख्य बातें
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अगर कोई लोन ऐप आपके कॉन्टैक्ट्स, फोटो, कॉल लॉग या फाइलों का एक्सेस मांग रहा है, तो रुक जाइए: असली लेंडर्स को यह डेटा लेने की इजाजत नहीं है। आरबीआई (RBI) के डिजिटल लेंडिंग नियमों के तहत बैंक और NBFC के ऐप सिर्फ केवाईसी के लिए, आपकी साफ सहमति से, कैमरा, माइक्रोफोन या लोकेशन का एक बार का एक्सेस मांग सकते हैं। गूगल प्ले भी पर्सनल लोन ऐप्स को कॉन्टैक्ट्स, फोटो, सटीक लोकेशन और कई दूसरी संवेदनशील परमिशन मांगने से रोकता है। आप आज ही परमिशन हटा सकते हैं, लिखकर अपनी सहमति वापस ले सकते हैं और डेटा के गलत इस्तेमाल पर शिकायत कर सकते हैं।

यह गाइड फोन परमिशन और डेटा पर है। इंस्टेंट लोन से जुड़े बाकी नियमों के लिए देखें इंस्टेंट लोन ऐप और आरबीआई के नियम। अगर आपको पहले से धमकी मिल रही है या ब्लैकमेल किया जा रहा है, तो सीधे पढ़ें फर्जी लोन ऐप फ्रॉड: शिकायत कैसे करें।

लोन ऐप आपके फोन का डेटा क्यों चाहते हैं

गैरकानूनी लेंडर कॉन्टैक्ट्स और फोटो को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं। जब कर्जदार की किस्त छूटती है, तो वे उसके दोस्तों, रिश्तेदारों और साथ काम करने वालों को मैसेज भेजते हैं, या एडिट की हुई (मॉर्फ्ड) तस्वीरें फैलाते हैं, ताकि शर्मिंदगी के डर से वह पैसे चुका दे। कुछ लोग यह डेटा बेच भी देते हैं या उसका गलत इस्तेमाल करते हैं। फोन एक्सेस पर आरबीआई के नियम इसी चलन की वजह से बने हैं।

नियम क्या कहते हैं: हर परमिशन का हिसाब

अक्टूबर 2026 तक, आरबीआई के Digital Lending Directions, 2025 और गूगल प्ले की Financial Services पॉलिसी के आधार पर, किसी रेगुलेटेड लेंडर का लोन ऐप यह मांग सकता है:

परमिशन या डेटा आरबीआई का नियम गूगल प्ले (पर्सनल लोन ऐप)
कॉन्टैक्ट्स इजाजत नहीं प्रतिबंधित (READ_CONTACTS)
फोटो, वीडियो, फाइलें इजाजत नहीं प्रतिबंधित (READ_MEDIA_IMAGES, READ_MEDIA_VIDEO, एक्सटर्नल स्टोरेज)
कॉल लॉग इजाजत नहीं प्ले की SMS और Call Log परमिशन पॉलिसी के तहत सीमित
फोन नंबर और टेलीफोनी फंक्शन इजाजत नहीं प्रतिबंधित (READ_PHONE_NUMBERS)
इंस्टॉल किए गए ऐप्स की लिस्ट अलग से जिक्र नहीं प्रतिबंधित (QUERY_ALL_PACKAGES)
सटीक लोकेशन एक बार, सिर्फ ऑनबोर्डिंग या केवाईसी के लिए प्रतिबंधित (ACCESS_FINE_LOCATION)
कैमरा एक बार, सिर्फ ऑनबोर्डिंग या केवाईसी के लिए जरूरत हो तो इजाजत
माइक्रोफोन एक बार, सिर्फ ऑनबोर्डिंग या केवाईसी के लिए जरूरत हो तो इजाजत
SMS इजाजत वाली सूची में नहीं प्ले की SMS और Call Log परमिशन पॉलिसी के तहत सीमित

आसान शब्दों में आरबीआई का नियम: लेंडर्स को यह पक्का करना होगा कि उनके ऐप फाइल और मीडिया, कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉल लॉग और टेलीफोनी फंक्शन जैसे मोबाइल फोन के संसाधनों तक न पहुंचें। ऑनबोर्डिंग या केवाईसी के लिए जरूरी कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन या किसी दूसरी सुविधा का एक बार का एक्सेस लिया जा सकता है, वह भी सिर्फ आपकी साफ सहमति से।

आपकी सुरक्षा करने वाले डेटा से जुड़े दूसरे नियम

  • जरूरत के हिसाब से डेटा: डेटा सिर्फ साफ मकसद के लिए, आपकी पहले से ली गई साफ सहमति से और ऑडिट हो सकने वाले रिकॉर्ड के साथ लिया जाना चाहिए।
  • मना करने का हक: आप किसी खास डेटा के लिए सहमति देने से मना कर सकते हैं, दी हुई सहमति वापस ले सकते हैं, थर्ड पार्टी के साथ शेयरिंग रोक सकते हैं और डेटा डिलीट करने को कह सकते हैं, बशर्ते कानूनन रिकॉर्ड रखने के नियम इसकी इजाजत दें।
  • भारत में स्टोरेज: कर्जदार का डेटा भारत में मौजूद सर्वर पर ही रखा जाना चाहिए।
  • ऐप और एजेंट्स का सीमित स्टोरेज: आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग नियम यह सीमित करते हैं कि ऐप और लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर क्या स्टोर कर सकते हैं, और कानून की इजाजत के बिना बायोमेट्रिक डेटा लेने पर रोक लगाते हैं।
  • प्राइवेसी पॉलिसी: ऐप को अपनी प्राइवेसी पॉलिसी प्रकाशित करनी होगी, जिसमें उन थर्ड पार्टी की जानकारी हो जिन्हें आपका डेटा लेने की इजाजत है।

गूगल प्ले की अतिरिक्त जांच

भारत के लिए गूगल प्ले की Financial Services पॉलिसी कहती है कि पर्सनल लोन ऐप तभी सबमिट किए जा सकते हैं जब लेंडर आरबीआई की उस प्रकाशित सूची में हो जिसमें रेगुलेटेड संस्थाओं के डिजिटल लेंडिंग ऐप्स दर्ज हैं। नए ऐप्स को 30 अक्टूबर 2025 से यह शर्त पूरी करनी पड़ रही है, और पुराने ऐप्स के पास 28 जनवरी 2026 तक का समय था। जो ऐप सिर्फ लोन दिलाने का काम करते हैं, उन्हें ऐप के विवरण में अपने सभी पार्टनर बैंक और NBFC के नाम बताने होंगे। SMS, व्हाट्सऐप या विज्ञापनों के लिंक से डाउनलोड किए गए ऐप (APK फाइलें) इन सभी जांचों से पूरी तरह बच निकलते हैं।

डेटा प्रोटेक्शन कानून

Digital Personal Data Protection Act, 2023 और DPDP Rules, 2025 (नवंबर 2025 में नोटिफाई) आरबीआई के नियमों के ऊपर एक सामान्य प्राइवेसी कानून जोड़ते हैं। ये नियम चरणों में लागू हो रहे हैं: कंपनियों की ज्यादातर जिम्मेदारियां, जैसे नोटिस, सहमति, सुरक्षा इंतजाम और डेटा प्रिंसिपल के अधिकार, नोटिफिकेशन के करीब 18 महीने बाद, यानी 2027 में लागू होंगी। तब तक लोन ऐप इस्तेमाल करने वालों के लिए आरबीआई के नियम ही मुख्य सुरक्षा हैं।

स्टेप-बाय-स्टेप: अगर ऐप के पास जरूरत से ज्यादा एक्सेस है

1. जांचें कि ऐप किसी रेगुलेटेड लेंडर से जुड़ा है

आरबीआई की वेबसाइट rbi.org.in पर Citizen's Corner में रेगुलेटेड संस्थाओं के डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की सूची में ऐप को खोजें, और पक्का करें कि जिस बैंक या NBFC का नाम दिया गया है वह आरबीआई में रजिस्टर्ड है।

2. परमिशन जांचें और हटाएं

ज्यादातर एंड्रॉयड फोन पर: Settings → Apps → [ऐप का नाम] → Permissions। Contacts, Files and media, Photos and videos, Phone, Call logs और SMS को Don't allow पर सेट करें। केवाईसी पूरा होने के बाद Location और Camera को Ask every time या Don't allow पर करें। एंड्रॉयड का Permission manager (Settings → Security and privacy → Privacy में) दिखाता है कि किस परमिशन का एक्सेस किन-किन ऐप्स के पास है।

आईफोन पर: Settings → Privacy & Security में जाकर Contacts, Photos, Location Services, Camera और Microphone जांचें।

3. अनइंस्टॉल करने से पहले सबूत सेव करें

परमिशन मांगने वाली स्क्रीन, ऐप की लिस्टिंग, लोन की डिटेल, KFS और सभी मैसेज के स्क्रीनशॉट ले लें। अगर ऐप ने किसी को परेशान किया है, तो शिकायत के लिए ये सबूत जरूरी होंगे।

4. लिखकर सहमति वापस लें और डेटा डिलीट करने को कहें

लेंडर के ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर को ईमेल करें (उनका नाम ऐप और लेंडर की वेबसाइट पर होता है)। उसमें अपना लोन अकाउंट नंबर लिखें, और बताएं कि लोन के लिए जरूरी न होने वाले किसी भी डेटा के लिए आप अपनी सहमति वापस ले रहे हैं, थर्ड पार्टी के साथ शेयरिंग बंद की जाए, और कानूनन रखने के लिए जरूरी न होने वाला डेटा डिलीट किया जाए। मिली हुई पावती (एक्नॉलेजमेंट) संभालकर रखें।

5. कूलिंग-ऑफ अवधि में लोन से बाहर निकलने पर विचार करें

आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग नियमों के तहत हर डिजिटल लोन में एक कूलिंग-ऑफ अवधि होती है, जिसे लेंडर का बोर्ड तय करता है और जो कम से कम एक दिन की होती है। इस दौरान आप मूलधन और उतने दिनों का ब्याज चुकाकर, बिना प्रीपेमेंट पेनल्टी के लोन से बाहर निकल सकते हैं। अगर KFS में बताई गई हो, तो एक बार की उचित प्रोसेसिंग फीस लेंडर रख सकता है।

उदाहरण (सिर्फ समझाने के लिए): आपने 24% APR पर ₹20,000 का लोन लिया और दूसरे दिन तय किया कि लोन से बाहर निकलना है, क्योंकि ऐप ने कॉन्टैक्ट्स का एक्सेस मांगा। उतने दिनों का ब्याज = ₹20,000 × 24% × 2 ÷ 365 = ₹26.30। आप ₹20,026.30 चुकाते हैं, साथ में KFS में बताई गई प्रोसेसिंग फीस, अगर कोई हो। इसकी तुलना उस हालत से करें जिसमें आप महीनों तक ऐसे लेंडर से बंधे रहते जिस पर आपको भरोसा नहीं है। किसी सामान्य लोन की पूरी अवधि में कितनी लागत आनी चाहिए, यह देखने के लिए हमारा ईएमआई कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।

6. ऐप अनइंस्टॉल करें और अपने अकाउंट सुरक्षित करें

सबूत सेव करने के बाद ऐप अनइंस्टॉल कर दें। अगर आपने कोई ओटीपी या लॉगिन डिटेल शेयर की थी, तो ईमेल और बैंकिंग के पासवर्ड बदलें, और अपने यूपीआई ऐप में यूपीआई ऑटोपे (AutoPay) मैंडेट जांच लें।

आपके अधिकार, संक्षेप में

  • आरबीआई के Digital Lending Directions, 2025 कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग, फाइल, मीडिया और टेलीफोनी के एक्सेस पर रोक लगाते हैं, और साफ, खास मकसद वाली सहमति को जरूरी बनाते हैं।
  • आप सहमति देने से मना कर सकते हैं, उसे वापस ले सकते हैं या सीमित कर सकते हैं, और डेटा डिलीट करने को कह सकते हैं।
  • अपने ऐप और अपने लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर्स, जिनमें रिकवरी एजेंट भी शामिल हैं, की जिम्मेदारी लेंडर की है।
  • रिकवरी एजेंट आपको शर्मिंदा करने के लिए आपके दोस्तों या रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर सकते, और सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कॉल कर सकते हैं। देखें लोन रिकवरी एजेंट के उत्पीड़न पर आपके अधिकार।

शिकायत कहां करें

  1. लेंडर का ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर: उसकी जानकारी ऐप में दिखाना जरूरी है। लिखित में शिकायत करें।
  2. आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन: अगर 30 दिन में मामला न सुलझे, या आप जवाब से संतुष्ट न हों, तो cms.rbi.org.in पर शिकायत करें या 14448 पर कॉल करें।
  3. बिना रेगुलेशन वाला ऐप या लेंडर: sachet.rbi.org.in पर रिपोर्ट करें।
  4. उत्पीड़न, ब्लैकमेल या आपके कॉन्टैक्ट्स का गलत इस्तेमाल: cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें, और पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
  5. ऐप स्टोर: गूगल प्ले या ऐप स्टोर पर ऐप को रिपोर्ट करें।

क्या न करें

  • SMS, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या सोशल मीडिया विज्ञापनों के लिंक से लोन ऐप इंस्टॉल न करें।
  • किसी भी लोन ऐप को कॉन्टैक्ट्स, फोटो, फाइल या कॉल लॉग का एक्सेस न दें, चाहे वह कहे कि इसके बिना लोन नहीं मिलेगा।
  • लेंडर के नाम पर बात करने वाले किसी को भी ओटीपी न बताएं और न अपनी स्क्रीन शेयर करें।
  • अपना डेटा "डिलीट" कराने या धमकियां रुकवाने के लिए अलग से पैसे न दें। यह जबरन वसूली है।
  • पहला लोन चुकाने के लिए दूसरे ऐप से लोन न लें।
  • चुप न रहें। अपने करीबी लोगों को बता दें कि आपके बारे में आने वाले कोई भी मैसेज फर्जी हैं; इससे ब्लैकमेल करने वाले का दबाव खत्म हो जाता है।

मुख्य बातें

  • रेगुलेटेड लेंडर्स के लोन ऐप आपके कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग, फाइल, मीडिया या टेलीफोनी फंक्शन तक नहीं पहुंच सकते; केवाईसी के लिए सिर्फ कैमरा, माइक्रोफोन या लोकेशन का एक बार का एक्सेस मिल सकता है।
  • गूगल प्ले पर्सनल लोन ऐप्स को कॉन्टैक्ट्स, फोटो, सटीक लोकेशन और इंस्टॉल ऐप्स की लिस्ट लेने से रोकता है, और जनवरी 2026 से उनका आरबीआई की DLA सूची में होना जरूरी है।
  • आप परमिशन हटा सकते हैं, सहमति वापस ले सकते हैं, शेयरिंग सीमित कर सकते हैं और डेटा डिलीट करा सकते हैं।
  • डिजिटल लोन की कूलिंग-ऑफ अवधि (कम से कम एक दिन) में आप मूलधन और उतने दिनों का ब्याज चुकाकर लोन से बाहर निकल सकते हैं।
  • पहले लेंडर से शिकायत करें, फिर 30 दिन बाद आरबीआई ओम्बड्समैन के पास जाएं; उत्पीड़न की रिपोर्ट 1930 या cybercrime.gov.in पर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या लोन ऐप कानूनी तौर पर मेरे कॉन्टैक्ट्स देख सकता है?

नहीं। आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग नियम रेगुलेटेड लेंडर्स के ऐप्स को आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉल लॉग, फाइल और मीडिया तथा टेलीफोनी फंक्शन तक पहुंचने से रोकते हैं। गूगल प्ले की पॉलिसी भी पर्सनल लोन ऐप्स को कॉन्टैक्ट्स की परमिशन मांगने से रोकती है। जो ऐप यह मांगता है, वह नियम तोड़ रहा है।

लोन ऐप कौन सी परमिशन मांग सकता है?

सिर्फ कैमरा, माइक्रोफोन या लोकेशन का एक बार का एक्सेस, और वह भी तभी जब ऑनबोर्डिंग या केवाईसी के लिए जरूरी हो और आपकी साफ सहमति हो। जो भी डेटा लिया जाए वह जरूरत के हिसाब से हो, उसका मकसद साफ हो और उसका ऑडिट ट्रेल हो।

लोन ऐप को मेरा डेटा इस्तेमाल करने से कैसे रोकूं?

फोन की सेटिंग्स में जाकर उसकी परमिशन हटाएं, फिर लेंडर के ग्रीवांस ऑफिसर को लिखकर अपनी सहमति वापस लें और कानूनन जरूरी न होने वाला डेटा डिलीट करने को कहें। आरबीआई के नियम आपको सहमति वापस लेने, थर्ड पार्टी के साथ शेयरिंग रोकने और डेटा डिलीट कराने का हक देते हैं।

क्या लोन चुकाने के बाद भी लेंडर मेरा डेटा रख सकता है?

लेंडर कुछ रिकॉर्ड कानून में तय अवधि तक रख सकते हैं, जैसे एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों के तहत केवाईसी और लोन के रिकॉर्ड। लेकिन जिस मकसद के लिए आपने सहमति दी थी, उससे ज्यादा डेटा उन्हें न रखना चाहिए और न इस्तेमाल करना चाहिए।

अगर लोन ऐप मेरे डेटा का गलत इस्तेमाल करे तो शिकायत कहां करें?

पहले ऐप में बताए गए लेंडर के ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर से शिकायत करें। 30 दिन में मामला न सुलझे तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन के पास जाएं। उत्पीड़न, ब्लैकमेल या आपके दोस्तों से संपर्क के मामले में cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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