पीएम कुसुम योजना 2026: सोलर पंप सब्सिडी की स्थिति, विकल्प
पीएम कुसुम योजना 2026 में: फेज 1 नए आवेदकों के लिए बंद, पीएम-कुसुम 2.0 कैबिनेट मंजूरी के इंतजार में। सब्सिडी क्या थी, अब क्या करें और फर्जी साइटों से कैसे बचें।

इस लेख में
पीएम-कुसुम, यानी किसानों के सोलर सिंचाई पंपों पर सब्सिडी देने वाली केंद्र की योजना, अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रीय स्तर पर नए आवेदन नहीं ले रही है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अगस्त 2026 में कहा कि "पीएम कुसुम 1 पूरी हो चुकी है" और योजना बंद है, जबकि इसकी अगली योजना पीएम-कुसुम 2.0 अभी केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के इंतजार में है। अगर आपको अभी सोलर पंप चाहिए, तो व्यावहारिक विकल्प हैं आपके राज्य की अपनी योजना, बैंक लोन, या किसान समूहों के लिए कृषि अवसंरचना कोष; यह गाइड हर विकल्प समझाती है और बार-बार सामने आने वाली फर्जी "पीएम-कुसुम रजिस्ट्रेशन" साइटों से बचना बताती है।
नीचे दी गई सारी जानकारी 24 अक्टूबर 2026 तक की है।
पीएम-कुसुम के साथ क्या हुआ
पीएम-कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने 2019 में शुरू की थी और यह मार्च 2026 तक चली, जिसका केंद्रीय खर्च करीब ₹34,422 करोड़ था।
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 2019 | तीन हिस्सों (A, B, C) के साथ योजना शुरू |
| दिसंबर 2025 | अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा योजना नहीं बढ़ेगी और नई योजना आएगी |
| मार्च 2026 | फेज 1 की अवधि खत्म; MNRE ने पहले से दिए गए प्रोजेक्ट पूरे करने की समय सीमा बढ़ाई |
| अगस्त 2026 | मंत्री ने कहा फेज 1 बंद है और पीएम कुसुम 2 "बहुत जल्द" आ सकती है |
| अक्टूबर 2026 | MNRE सचिव ने कहा कि 2.0 का प्रस्ताव तैयार होने पर कैबिनेट को भेजा जाएगा |
पहले से मंजूर प्रोजेक्ट: 28 मार्च 2026 के MNRE ऑफिस मेमोरेंडम की रिपोर्टों के मुताबिक, जिन प्रोजेक्ट के समझौते या काम शुरू करने के नोटिस 31 दिसंबर 2025 तक जारी हुए थे, वे 31 मार्च 2027 तक पूरे किए जा सकते हैं, और कुछ राज्य नियामकों ने भी समय सीमा उसी हिसाब से बढ़ाई है। स्टैंडअलोन पंपों की सटीक तारीख पर दूसरे स्रोतों में अंतर है, इसलिए अगर आपने अपना हिस्सा जमा कर दिया है और इंस्टॉलेशन का इंतजार है, तो अपनी राज्य एजेंसी से पूछें कि आप पर कौन सी समय सीमा लागू है।
फेज 1 में क्या हासिल हुआ
जुलाई 2026 तक मंत्री द्वारा साझा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
- 13.07 लाख स्टैंडअलोन सोलर पंप मंजूर और 11.69 लाख लगाए गए।
- कंपोनेंट A में किसानों के अपने 1,986.3 MW ग्रिड से जुड़े सोलर प्लांट लगे, जबकि 10,000 MW मंजूर थे।
- 55,392 मंजूर में से 16,259 ग्रिड से जुड़े पंपों का अलग-अलग सोलराइजेशन हुआ, और फीडर स्तर के प्रोजेक्ट से 16,54,044 पंप सोलर पर आए।
पीएम-कुसुम सब्सिडी कैसे काम करती थी
उम्मीद है कि पीएम-कुसुम 2.0 का ढांचा मोटे तौर पर ऐसा ही रहेगा, इसलिए यह जानना काम का है कि फेज 1 कैसे बना था।
| कंपोनेंट | किसके लिए पैसा | केंद्र की मदद |
|---|---|---|
| A | बंजर या खेती की जमीन पर किसानों के 500 kW से 2 MW के सोलर प्लांट, जो बिजली डिस्कॉम को बेचते हैं | बिजली खरीदने पर डिस्कॉम को प्रोत्साहन |
| B | 7.5 HP तक के स्टैंडअलोन (ऑफ-ग्रिड) सोलर पंप, मुख्य रूप से डीजल पंप की जगह | बेंचमार्क या टेंडर लागत का 30%, जो कम हो; पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों और द्वीपीय UT में 50% |
| C (IPS) | ग्रिड से जुड़े मौजूदा पंप का सोलराइजेशन | 30% (विशेष श्रेणी वाले इलाकों में 50%) |
| C (FLS) | पूरे कृषि फीडर का सोलराइजेशन | 30%, प्रति MW ₹1.05 करोड़ तक |
विशेष श्रेणी से बाहर के इलाकों में कंपोनेंट B का आम बंटवारा था: 30% केंद्र, कम से कम 30% राज्य, और 40% तक किसान, जिसमें से बैंक 30% तक लोन दे सकते थे, ताकि किसान को शुरुआत में करीब 10% ही देना पड़े। 7.5 HP से बड़े पंप भी लग सकते थे, लेकिन मदद 7.5 HP के स्तर तक ही सीमित थी।
उदाहरण (सिर्फ समझाने के लिए)
मान लीजिए 5 HP के स्टैंडअलोन पंप की बेंचमार्क लागत ₹2,50,000 है। असली बेंचमार्क और टेंडर कीमतें राज्य और साल के हिसाब से अलग होती हैं।
| हिस्सा | सामान्य इलाका | पूर्वोत्तर / पहाड़ी राज्य |
|---|---|---|
| केंद्र (30% या 50%) | ₹75,000 | ₹1,25,000 |
| राज्य (30%) | ₹75,000 | ₹75,000 |
| किसान (40% या 20%) | ₹1,00,000 | ₹50,000 |
| इसमें से संभव बैंक लोन | ₹75,000 तक | राज्य के नियमों के मुताबिक |
| किसान का शुरुआती भुगतान | करीब ₹25,000 | राज्य के नियमों के मुताबिक |
अगर किसान अपने हिस्से के ₹75,000 के लिए 9% (मानी गई दर) पर 5 साल का लोन लेता, तो ईएमआई करीब ₹1,557 होती। दूसरी दरें ईएमआई कैलकुलेटर में आजमाएं। कुछ राज्यों ने अतिरिक्त सब्सिडी दी, जिससे किसानों को और भी कम देना पड़ा।
मंत्री ने अगस्त 2026 में यह भी कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर GST 12% से घटकर 5% होने से 5 HP का सोलर पंप करीब ₹17,500 सस्ता हुआ है।
2026 में इसकी जगह क्या करें
1. आपके राज्य की अपनी सोलर पंप योजना
कई राज्यों ने पीएम-कुसुम के साथ या उसके ऊपर अपनी सोलर पंप योजनाएं चलाई हैं, अक्सर राज्य की अक्षय ऊर्जा एजेंसी या बिजली वितरण कंपनी के जरिए। अपने राज्य के कृषि विभाग या नोडल एजेंसी की वेबसाइट देखें, या ब्लॉक कृषि कार्यालय में पूछें। शर्तें काफी अलग-अलग होती हैं, इसलिए कुछ भी भुगतान करने से पहले राज्य की आधिकारिक अधिसूचना पढ़ें।
2. पीएम-कुसुम 2.0 के लिए सिर्फ आधिकारिक माध्यम से रुचि दर्ज कराएं
अधिकारियों ने कहा है कि अगला चरण खेती की योजनाओं से जुड़ा होगा और इसमें एग्रीवोल्टाइक्स का अलग हिस्सा होगा, जिसमें ऊंचे लगे सोलर पैनलों के नीचे फसल उगती है। कैबिनेट मंजूरी तक सब्सिडी दरें, पात्रता और तारीखें तय नहीं हैं। योजना खुलने पर आवेदन की घोषणा MNRE और आपके राज्य की नोडल एजेंसी करेगी। तब तक "पीएम-कुसुम 2.0 रजिस्ट्रेशन शुरू, ₹X जमा करें" कहने वाली कोई भी साइट खतरे का संकेत है।
3. किसान समूहों और FPO के लिए कृषि अवसंरचना कोष
कृषि अवसंरचना कोष पीएम-कुसुम के साथ मिलाकर स्टैंडअलोन सोलर पंप, पंप सोलराइजेशन और किसानों के सोलर प्लांट को पात्र संपत्तियों में गिनता है, और किसी भी पात्र खेती ढांचे के सोलराइजेशन की अनुमति देता है। यह ₹2 करोड़ तक के लोन पर 3% ब्याज सबवेंशन देता है, और ब्याज 9% तक सीमित है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर SHG, FPO, सहकारी समितियों और जल उपयोगकर्ता समूहों ने किया है।
4. सोलर पंप के लिए बैंक लोन
बैंक सोलर पंप को कृषि टर्म लोन के रूप में फाइनेंस करते हैं, कभी-कभी किसान क्रेडिट कार्ड लिमिट के अंदर निवेश ऋण के रूप में। ये बैंक की सामान्य कृषि दर पर मिलते हैं, 4% वाली फसल लोन दर पर नहीं। डीलर का कोटेशन लें, जांचें कि पंप MNRE सूचीबद्ध निर्माता का है, और ईएमआई की तुलना डीजल या बिजली की बचत से करें।
फेज 1 में पात्रता (संदर्भ के लिए)
- कंपोनेंट A: व्यक्तिगत किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां, पंचायतें, FPO और जल उपयोगकर्ता संघ, आमतौर पर सबस्टेशन से करीब 5 किमी के अंदर की जमीन पर।
- कंपोनेंट B: व्यक्तिगत किसान, जल उपयोगकर्ता संघ और सामुदायिक या क्लस्टर आधारित सिंचाई प्रणालियां, मुख्य रूप से उन इलाकों में जहां ग्रिड बिजली नहीं है।
- कंपोनेंट C: ग्रिड से जुड़े मौजूदा कृषि पंप वाले किसान।
- आम दस्तावेज: आधार, जमीन के कागज, बैंक खाते की जानकारी, फोटो और कंपोनेंट B के लिए ग्रिड कनेक्शन या डीजल पंप बदलने के बारे में घोषणा।
फर्जी पीएम-कुसुम वेबसाइटों और एजेंटों से सावधान
MNRE ने 2019, 2020 और 2021 समेत कई बार सार्वजनिक चेतावनी जारी की है कि पीएम-कुसुम के नाम की नकल करने वाली फर्जी वेबसाइटें "रजिस्ट्रेशन फीस" और निजी जानकारी इकट्ठा करती हैं। इन चेतावनियों में kusum-yojana.co.in और kusumyojanaonline.com जैसी साइटों के नाम थे, और बताया गया कि व्हाट्सऐप मैसेज का भी इस्तेमाल हो रहा है। ये नियम मानें:
- आधिकारिक राष्ट्रीय वेबसाइट pmkusum.mnre.gov.in है। राज्य एजेंसियां अपनी सरकारी (.gov.in या .nic.in) साइटों पर आवेदन लेती हैं।
- किसी निजी साइट, व्हाट्सऐप नंबर या "एजेंट" को रजिस्ट्रेशन फीस न दें।
- अनाधिकारिक लिंक पर OTP, बैंक जानकारी या आधार साझा न करें।
- अगर आपने किसी ठग को पैसा दे दिया है, तो तुरंत cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें। आम तरीकों के लिए देखें निवेश घोटालों को कैसे पहचानें।
शिकायत कैसे करें
- मंजूर पंप न लगा हो, या सेवा खराब हो: अपना आवेदन नंबर और भुगतान रसीद लिखकर राज्य नोडल एजेंसी को लिखें।
- वेंडर 5 साल का रखरखाव न करे, जो फेज 1 के टेंडरों में आमतौर पर जरूरी था: वेंडर को सूचीबद्ध करने वाली राज्य एजेंसी से शिकायत करें।
- जवाब न मिले: MNRE की वेबसाइट या केंद्रीय शिकायत पोर्टल (pgportal.gov.in) के जरिए मामला आगे बढ़ाएं।
- बैंक लोन की समस्या: बैंक का शिकायत अधिकारी, फिर 30 दिन बाद cms.rbi.org.in पर आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन।
मुख्य बातें
- अक्टूबर 2026 तक पीएम-कुसुम फेज 1 नए आवेदकों के लिए बंद है; पहले से मंजूर प्रोजेक्ट पूरे किए जा रहे हैं।
- एग्रीवोल्टाइक्स वाली पीएम-कुसुम 2.0 की योजना है, लेकिन यह केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के इंतजार में है और इसकी शर्तें तय नहीं हैं।
- फेज 1 में 7.5 HP तक के सोलर पंप पर केंद्र 30% (विशेष इलाकों में 50%) देता था, और राज्य कम से कम 30% जोड़ते थे।
- अभी के विकल्प: राज्य की योजनाएं, बैंक लोन, या किसान समूहों के लिए कृषि अवसंरचना कोष।
- किसी पीएम-कुसुम वेबसाइट या एजेंट को "रजिस्ट्रेशन फीस" कभी न दें; pmkusum.mnre.gov.in और अपनी राज्य एजेंसी का ही इस्तेमाल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या 2026 में पीएम-कुसुम नए आवेदनों के लिए खुली है?
अक्टूबर 2026 तक कोई नया राष्ट्रीय दौर खुला नहीं है। अक्षय ऊर्जा मंत्री ने अगस्त 2026 में कहा कि पीएम-कुसुम फेज 1 बंद हो चुका है, और इसकी अगली योजना पीएम-कुसुम 2.0 अक्टूबर 2026 के मध्य तक कैबिनेट मंजूरी के लिए तैयार की जा रही थी। पहले से मंजूर प्रोजेक्ट पूरे किए जा रहे हैं।
पीएम-कुसुम में सोलर पंप पर कितनी सब्सिडी मिलती थी?
कंपोनेंट B में 7.5 HP तक के स्टैंडअलोन सोलर पंप पर केंद्र सरकार बेंचमार्क या टेंडर लागत (जो कम हो) का 30% देती थी, और पूर्वोत्तर, पहाड़ी राज्यों और द्वीपीय केंद्रशासित प्रदेशों में 50%। राज्य कम से कम 30% देता था और बाकी किसान, जिसका एक हिस्सा बैंक लोन से मिल सकता था।
पीएम-कुसुम 2.0 क्या है?
यह पीएम-कुसुम का प्रस्तावित अगला चरण है। 2026 के सरकारी बयानों के मुताबिक इसमें एग्रीवोल्टाइक्स का हिस्सा और खेती की योजनाओं से तालमेल होने की उम्मीद है, लेकिन केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी तक इसकी शर्तें, सब्सिडी दरें और शुरू होने की तारीख तय नहीं हैं।
फर्जी पीएम-कुसुम वेबसाइट को कैसे पहचानें?
MNRE ने कई बार चेतावनी दी है कि फर्जी साइटें किसानों से रजिस्ट्रेशन फीस मांगती हैं। आधिकारिक राष्ट्रीय साइट pmkusum.mnre.gov.in है, और आवेदन आपके राज्य की नोडल एजेंसी संभालती है। पंप दिलाने का वादा करने वाली किसी वेबसाइट, व्हाट्सऐप नंबर या एजेंट को कोई फीस न दें।
किसान अभी पीएम-कुसुम की जगह क्या इस्तेमाल कर सकते हैं?
देखें कि क्या आपका राज्य अपनी सोलर पंप सब्सिडी योजना चलाता है, पीएम-कुसुम 2.0 के लिए राज्य की नोडल एजेंसी में रुचि दर्ज कराएं, या बैंक लोन से पंप लें। किसान समूह और FPO कृषि अवसंरचना कोष का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जो पात्र सोलर संपत्तियों पर 3% ब्याज सबवेंशन देता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।