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ईटीएफ क्या है? भारत में ETF कैसे काम करता है

ईटीएफ क्या है और भारत में कैसे काम करता है? ईटीएफ के प्रकार, iNAV, लिक्विडिटी, खर्च, अक्टूबर 2026 के टैक्स नियम और ईटीएफ बनाम इंडेक्स फंड का उदाहरण।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 7 मिनट में पढ़ें
ईटीएफ क्या है? भारत में ETF कैसे काम करता है
इस लेख में
  1. ईटीएफ कैसे काम करता है
  2. भारत में ईटीएफ के प्रकार
  3. ईटीएफ बनाम इंडेक्स फंड
  4. उदाहरण से समझें: प्रीमियम, स्प्रेड और खर्च
  5. ईटीएफ पर टैक्स कैसे लगता है (अक्टूबर 2026 की स्थिति)
  6. ईटीएफ कैसे खरीदें, स्टेप बाय स्टेप
  7. इन जोखिमों का ध्यान रखें
  8. मुख्य बातें
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ईटीएफ (ETF) यानी एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड एक ऐसी म्यूचुअल फंड स्कीम है जिसकी यूनिट स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होती हैं और आपके डीमैट अकाउंट से शेयरों की तरह खरीदी-बेची जाती हैं। भारत में ज्यादातर ईटीएफ किसी इंडेक्स, जैसे निफ्टी 50, या किसी कमोडिटी, जैसे सोने, को ट्रैक करते हैं, इसलिए एक ही यूनिट में कम खर्च पर आपको डाइवर्सिफाइड निवेश मिल जाता है। इसके बदले आप दिन के दौरान बाजार भाव पर खरीदते हैं, इसलिए लिक्विडिटी और ब्रोकरेज की अहमियत यहां आम म्यूचुअल फंड से कहीं ज्यादा है।

ईटीएफ कैसे काम करता है

AMC ईटीएफ लॉन्च करती है, पैसा जुटाती है और उससे जुड़ी बास्केट खरीदती है, जैसे इंडेक्स वेटेज के हिसाब से निफ्टी के 50 शेयर। इसके बाद यूनिट NSE और BSE पर लिस्ट हो जाती हैं।

इसके बाद दो कीमतें समझना जरूरी है:

  • NAV: ईटीएफ की होल्डिंग्स की प्रति यूनिट कीमत, जो हर दिन के आखिर में निकाली जाती है।
  • मार्केट प्राइस: ट्रेडिंग के समय खरीदार और विक्रेता जिस कीमत पर सहमत होते हैं।

दोनों कीमतों को करीब रखने के लिए AMC मार्केट मेकर नियुक्त करती हैं, जो आम तौर पर ब्रोकर होते हैं और लगातार खरीद-बिक्री के भाव देते रहते हैं। बड़े संस्थान AMC से सीधे बड़े ब्लॉक में ईटीएफ यूनिट बना या रिडीम भी कर सकते हैं, जिससे मार्केट प्राइस भटकने पर वापस NAV के पास आ जाता है। आम निवेशक आम तौर पर एक्सचेंज पर ही खरीदते-बेचते हैं।

दिन के दौरान एक्सचेंज और AMC एक iNAV (इंडिकेटिव NAV) जारी करते हैं, जो होल्डिंग्स की लाइव कीमत का अनुमान है और बार-बार अपडेट होता है। मार्केट प्राइस की iNAV से तुलना करके पता चलता है कि आप प्रीमियम दे रहे हैं या डिस्काउंट पा रहे हैं।

ईटीएफ को SEBI म्यूचुअल फंड स्कीम के रूप में रेगुलेट करता है। एसेट्स एक कस्टोडियन के पास रहती हैं, जो AMC की अपनी बैलेंस शीट से अलग होती हैं।

भारत में ईटीएफ के प्रकार

प्रकार इसमें क्या होता है किसे ट्रैक करते हैं, उदाहरण
इक्विटी इंडेक्स ईटीएफ इंडेक्स वेटेज के हिसाब से शेयर निफ्टी 50, सेंसेक्स, निफ्टी नेक्स्ट 50, निफ्टी बैंक, निफ्टी मिडकैप 150
सेक्टर और थीमैटिक ईटीएफ किसी एक सेक्टर या थीम के शेयर आईटी, सरकारी बैंक, CPSE, कंजम्प्शन
स्मार्ट-बीटा / फैक्टर ईटीएफ लो वोलैटिलिटी या मोमेंटम जैसे नियमों से चुने गए शेयर निफ्टी 200 मोमेंटम 30, निफ्टी 100 लो वोलैटिलिटी 30
गोल्ड ईटीएफ तिजोरी में रखा तय शुद्धता का असली सोना घरेलू सोने का भाव
सिल्वर ईटीएफ असली चांदी घरेलू चांदी का भाव
डेट ईटीएफ सरकारी या PSU बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, ओवरनाइट इंस्ट्रूमेंट भारत बॉन्ड ईटीएफ सीरीज, G-sec इंडेक्स, लिक्विड ईटीएफ
इंटरनेशनल ईटीएफ विदेशी शेयर नैस्डैक-100, S&P 500 और ऐसे ही इंडेक्स

सबसे ज्यादा ट्रेडिंग बड़े इक्विटी इंडेक्स ईटीएफ और गोल्ड ईटीएफ में होती है। कई सेक्टर और स्मार्ट-बीटा ईटीएफ में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होता है, जिसका असर आपको मिलने वाली कीमत पर पड़ता है।

ईटीएफ बनाम इंडेक्स फंड

दोनों एक ही इंडेक्स को ट्रैक कर सकते हैं। फर्क इसमें है कि आप कैसे खरीदते हैं और कितना खर्च देते हैं।

फीचर ईटीएफ इंडेक्स फंड
कहां से खरीदें ब्रोकर के जरिए स्टॉक एक्सचेंज पर AMC, ऐप या डिस्ट्रीब्यूटर से
डीमैट अकाउंट जरूरी जरूरी नहीं
कीमत लाइव मार्केट प्राइस दिन के आखिर का NAV
न्यूनतम निवेश एक यूनिट स्कीम का न्यूनतम (अक्सर ₹100-₹500)
एसआईपी ब्रोकर के जरिए, पूरी यूनिट में स्कीम में ही, किसी भी रकम से
एक्सपेंस रेशियो अक्सर कम कम, ईटीएफ से थोड़ा ज्यादा
अतिरिक्त खर्च ब्रोकरेज, बिड-आस्क स्प्रेड, DP चार्ज आम तौर पर कोई नहीं (कुछ में एग्जिट लोड)
लिक्विडिटी जोखिम हां, कम ट्रेड होने वाले ईटीएफ में नहीं, AMC NAV पर रिडीम करती है

अक्टूबर 2026 की स्थिति में, 1 अप्रैल 2026 से लागू SEBI के नए म्यूचुअल फंड रेगुलेशंस के तहत इंडेक्स फंड और ईटीएफ के लिए बेस एक्सपेंस रेशियो की सीमा 0.90% है, और कानूनी शुल्क व ब्रोकरेज अलग से लिए जाते हैं। लोकप्रिय बड़े ईटीएफ इसका बहुत छोटा हिस्सा ही चार्ज करते हैं। इंडेक्स फंड के बारे में पूरी जानकारी के लिए देखें शुरुआती निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड।

उदाहरण से समझें: प्रीमियम, स्प्रेड और खर्च

iNAV पर प्रीमियम। एक निफ्टी 50 ईटीएफ का iNAV ₹250 है, जबकि एक्सचेंज पर सबसे अच्छा बिक्री भाव ₹252 है। अगर आप 100 यूनिट खरीदते हैं:

  • आप देते हैं 100 × ₹252 = ₹25,200।
  • होल्डिंग्स की असली कीमत है 100 × ₹250 = ₹25,000।
  • आपने ₹200 यानी 0.8% का प्रीमियम दिया ((252 − 250) ÷ 250)।

यह एक सौदा 0.1% एक्सपेंस रेशियो के कई साल के खर्च से ज्यादा महंगा पड़ता है। iNAV के करीब लिमिट ऑर्डर लगाकर इससे बचा जा सकता है।

बिड-आस्क स्प्रेड। अगर सबसे अच्छा खरीद भाव ₹249.80 और सबसे अच्छा बिक्री भाव ₹250.20 है, तो स्प्रेड ₹0.40 यानी ₹250 का 0.16% है। हर बार खरीदकर बेचने पर आप लगभग इतना गंवाते हैं। लिक्विड ईटीएफ में स्प्रेड कुछ पैसे का होता है; कम लिक्विड ईटीएफ में यह काफी ज्यादा हो सकता है।

सालाना चलने वाला खर्च। उदाहरण के लिए: ₹5 लाख के निवेश पर 0.05% एक्सपेंस रेशियो वाले ईटीएफ का खर्च करीब ₹250 सालाना है, और उसी इंडेक्स पर 0.20% वाले इंडेक्स फंड का खर्च करीब ₹1,000 सालाना। ईटीएफ से साल में करीब ₹750 बचते हैं, लेकिन खरीदते समय सिर्फ एक बार 0.8% प्रीमियम देने पर ₹4,000 का खर्च हो जाएगा। समझदारी से ट्रेड करने वाले लंबी अवधि के निवेशक के लिए ईटीएफ सस्ता पड़ सकता है; ब्रोकरेज और स्प्रेड के साथ हर महीने छोटी खरीद करने वाले के लिए कुल मिलाकर इंडेक्स फंड कम खर्चीला हो सकता है।

एकमुश्त निवेश की बढ़त का अनुमान लंपसम कैलकुलेटर में लगाएं, और रिटर्न का अनुमान कम रखें व उसे वादा नहीं, सिर्फ अनुमान मानें।

ईटीएफ पर टैक्स कैसे लगता है (अक्टूबर 2026 की स्थिति)

टैक्स इस पर निर्भर करता है कि ईटीएफ में क्या है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए, अक्टूबर 2026 की स्थिति में:

ईटीएफ का प्रकार लॉन्ग-टर्म कब लॉन्ग-टर्म टैक्स शॉर्ट-टर्म टैक्स
इक्विटी ईटीएफ (65%+ भारतीय इक्विटी में) 12 महीने से ज्यादा सालाना ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5% (पुराना सेक्शन 112A, अब Income-tax Act, 2025 का सेक्शन 198) 20% (पुराना सेक्शन 111A, अब सेक्शन 196)
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ 12 महीने से ज्यादा 12.5%, इंडेक्सेशन नहीं स्लैब रेट
डेट ईटीएफ (मुख्य रूप से बॉन्ड) आम तौर पर लागू नहीं स्लैब रेट स्लैब रेट

अगर ईटीएफ डिविडेंड देता है, तो उस पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है। इंटरनेशनल ईटीएफ पर टैक्स इस पर निर्भर करता है कि स्कीम किस कैटेगरी में है, इसलिए AMC का स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट देखें और टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें। एसेट के स्तर पर टैक्स की बड़ी तस्वीर के लिए हमारी तुलना शेयर बनाम बॉन्ड बनाम सोना देखें।

ईटीएफ कैसे खरीदें, स्टेप बाय स्टेप

  1. डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खोलें SEBI में रजिस्टर्ड ब्रोकर के पास, और KYC पूरा करें।
  2. पहले इंडेक्स या एसेट चुनें, फिर ईटीएफ। बड़े इक्विटी ईटीएफ के लिए एक्सपेंस रेशियो, ट्रैकिंग एरर और औसत दैनिक ट्रेडिंग वैल्यू की तुलना करें।
  3. ऑर्डर देने से पहले iNAV देखें AMC या एक्सचेंज की वेबसाइट पर।
  4. iNAV पर या उसके करीब लिमिट ऑर्डर लगाएं, बाजार के सक्रिय समय में, और बेहतर है कि शुरुआती और आखिरी कुछ मिनटों से बचें।
  5. डीमैट अकाउंट में होल्ड करें। भारतीय एक्सचेंजों पर सेटलमेंट T+1 है, इसलिए यूनिट अगले कामकाजी दिन क्रेडिट होती हैं।

इन जोखिमों का ध्यान रखें

  • बाजार जोखिम: इंडेक्स जितना गिरता है, ईटीएफ भी उतना ही गिरता है।
  • लिक्विडिटी जोखिम: कम वॉल्यूम वाले ईटीएफ बड़े प्रीमियम या डिस्काउंट पर ट्रेड हो सकते हैं। SEBI के नियम कुछ तय हालात में AMC से सीधे रिडेम्पशन की इजाजत देते हैं, लेकिन बाहर निकलने के लिए इस पर भरोसा न करें।
  • ट्रैकिंग एरर: खर्च और कैश होल्डिंग की वजह से रिटर्न इंडेक्स से पीछे रह सकता है।
  • कंसन्ट्रेशन: सेक्टर और थीमैटिक ईटीएफ बड़े इंडेक्स के मुकाबले कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले होते हैं।

अगर आप पैसिव और एक्टिव निवेश के बीच बड़े स्तर पर फैसला कर रहे हैं, तो देखें इंडेक्स फंड बनाम एक्टिव फंड।

मुख्य बातें

  • ईटीएफ SEBI से रेगुलेटेड म्यूचुअल फंड स्कीम है, जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर की तरह ट्रेड होती है और आम तौर पर किसी इंडेक्स या कमोडिटी को ट्रैक करती है।
  • डीमैट अकाउंट जरूरी है; खरीद बाजार भाव पर होती है, इसलिए उसकी iNAV से तुलना करें और लिमिट ऑर्डर लगाएं।
  • ईटीएफ का एक्सपेंस रेशियो अक्सर इंडेक्स फंड से कम होता है, लेकिन ब्रोकरेज, स्प्रेड और प्रीमियम यह फायदा खत्म कर सकते हैं।
  • अक्टूबर 2026 की स्थिति में इक्विटी ईटीएफ पर इक्विटी फंड की तरह टैक्स लगता है, गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर 12 महीने बाद 12.5%, और डेट ईटीएफ पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है।
  • किसी खास वजह के बिना निश ईटीएफ की जगह लिक्विड और बड़े ईटीएफ ही चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ईटीएफ खरीदने के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है?

हां। ईटीएफ NSE और BSE पर लिस्टेड होते हैं और शेयरों की तरह खरीदे-बेचे जाते हैं, इसलिए आपको SEBI में रजिस्टर्ड ब्रोकर के पास डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट चाहिए। अगर आप डीमैट अकाउंट नहीं खोलना चाहते, तो उसी इंडेक्स को ट्रैक करने वाला इंडेक्स फंड या फंड ऑफ फंड्स इसका विकल्प है।

क्या ईटीएफ इंडेक्स फंड से बेहतर है?

जरूरी नहीं। ईटीएफ का एक्सपेंस रेशियो अक्सर कम होता है, लेकिन आपको ब्रोकरेज और बिड-आस्क स्प्रेड देना पड़ता है, और कम ट्रेड होने वाला ईटीएफ अपने NAV से अलग कीमत पर बिक सकता है। एसआईपी के लिए इंडेक्स फंड ज्यादा आसान हैं और उनमें लेनदेन हमेशा NAV पर होता है।

क्या ईटीएफ में एसआईपी कर सकते हैं?

कई ब्रोकर स्टॉक या ईटीएफ एसआईपी की सुविधा देते हैं, जिसमें हर महीने बाजार भाव पर तय संख्या में यूनिट या तय रकम की खरीद होती है। ईटीएफ पूरी यूनिट में ही ट्रेड होते हैं, इसलिए हर महीने निवेश की रकम थोड़ी ऊपर-नीचे हो सकती है।

भारत में ईटीएफ पर टैक्स कैसे लगता है?

यह इस पर निर्भर करता है कि ईटीएफ में क्या है। अक्टूबर 2026 की स्थिति में इक्विटी ईटीएफ पर इक्विटी फंड की तरह टैक्स लगता है, 12 महीने से ज्यादा रखे गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर 12.5% लॉन्ग-टर्म टैक्स लगता है, और डेट ईटीएफ के मुनाफे पर आम तौर पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है।

क्या ईटीएफ सुरक्षित हैं?

ईटीएफ SEBI से रेगुलेटेड म्यूचुअल फंड स्कीम हैं और इनकी एसेट्स एक कस्टोडियन के पास रहती हैं, इसलिए AMC की अपनी वित्तीय हालत का जोखिम आप पर नहीं आता। लेकिन ईटीएफ जिस चीज को ट्रैक करता है, उसके बाजार जोखिम का पूरा असर आप पर पड़ता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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