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एक ही बिल्डर प्रोजेक्ट में फ्लैट बदलना: होम लोन के कागजात

उसी बिल्डर प्रोजेक्ट में दूसरा फ्लैट ले रहे हैं? जानें होम लोन के कौन से कागज बदलेंगे: सैंक्शन, एग्रीमेंट, ट्राइपार्टाइट, एनओसी, वैल्यूएशन और इंश्योरेंस।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 8 मिनट में पढ़ें
एक ही बिल्डर प्रोजेक्ट में फ्लैट बदलना: होम लोन के कागजात
इस लेख में
  1. बैंक फ्लैट बदलने को नई प्रॉपर्टी क्यों मानता है
  2. कौन से कागजात अपडेट करने होंगे
  3. उदाहरण: 72 लाख रुपये के फ्लैट से 80 लाख रुपये के फ्लैट में जाना
  4. स्टेप-बाय-स्टेप: लोन अटकाए बिना फ्लैट कैसे बदलें
  5. फ्लैट बदलने के दौरान ब्याज
  6. अगर कुछ गड़बड़ हो जाए
  7. मुख्य बातें
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आमतौर पर आप उसी बिल्डर प्रोजेक्ट में दूसरे फ्लैट में शिफ्ट हो सकते हैं, लेकिन आपका होम लोन अपने आप साथ नहीं जाता। बैंक के सैंक्शन, मॉर्गेज और डिस्बर्समेंट रिकॉर्ड में एक खास यूनिट का नाम होता है, इसलिए आगे पैसा जारी होने से पहले आपको नया या संशोधित एग्रीमेंट फॉर सेल, आपके भुगतान ट्रांसफर करने वाला बिल्डर का लेटर, मॉर्गेज की नई अनुमति, रिवाइज्ड सैंक्शन या अमेंडमेंट लेटर, और अपडेटेड ट्राइपार्टाइट एग्रीमेंट, वैल्यूएशन और इंश्योरेंस चाहिए। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की है।

बैंक फ्लैट बदलने को नई प्रॉपर्टी क्यों मानता है

होम लोन एक पहचानी गई प्रॉपर्टी के बदले सिक्योर्ड होता है। जब आपने फ्लैट A बुक किया था, तब बैंक ने उस यूनिट का टाइटल, मंजूरियां, कारपेट एरिया और कीमत जांची थी, और उसका चार्ज (और अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट में ट्राइपार्टाइट एग्रीमेंट) फ्लैट A से जुड़ा है। अगर आप फ्लैट B में जाते हैं, भले ही उसी टावर की दूसरी मंजिल पर, तो बैंक को:

  • पक्का करना होगा कि नई यूनिट बिक्री के लिए खाली है और प्रोजेक्ट के रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन और मंजूरियों में शामिल है
  • उसका दोबारा वैल्यूएशन करके लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो फिर से निकालना होगा
  • अपना सिक्योरिटी इंटरेस्ट फ्लैट A से फ्लैट B पर ले जाना होगा
  • पक्का करना होगा कि बिल्डर को पहले दिया गया हर रुपया अब फ्लैट B के खाते में जमा है

जब तक यह नहीं होता, ज्यादातर बैंक आगे के डिस्बर्समेंट रोक देते हैं। अगर आपका लोन आंशिक रूप से ही डिस्बर्स हुआ है तो पढ़ें सैंक्शन और डिस्बर्समेंट में क्या अंतर है।

कौन से कागजात अपडेट करने होंगे

दस्तावेज कौन जारी करता है क्या बदलता है
अलॉटमेंट लेटर बिल्डर नया यूनिट नंबर, एरिया, कीमत और पेमेंट प्लान
पुराने एग्रीमेंट फॉर सेल का रद्दीकरण या संशोधन बिल्डर और आप पुरानी यूनिट मुक्त; अगर पुराना एग्रीमेंट रजिस्टर्ड था तो यह भी रजिस्टर्ड
नया एग्रीमेंट फॉर सेल बिल्डर और आप नई यूनिट, कीमत, पजेशन की तारीख, रेरा कारपेट एरिया
पेमेंट ट्रांसफर लेटर बिल्डर पुष्टि कि चुकाई गई रकम (आपकी और बैंक की) नई यूनिट में ट्रांसफर हुई
मॉर्गेज की अनुमति / एनओसी बिल्डर बैंक को नई यूनिट पर चार्ज लेने की इजाजत
ट्राइपार्टाइट एग्रीमेंट बिल्डर, बैंक, आप नई यूनिट के लिए दोबारा या संशोधित रूप में साइन
रिवाइज्ड सैंक्शन या अमेंडमेंट लेटर, और शर्तें बदलें तो अपडेटेड की फैक्ट स्टेटमेंट बैंक प्रॉपर्टी विवरण, लोन राशि, ईएमआई, कोई नई फीस
लीगल और टेक्निकल (वैल्यूएशन) रिपोर्ट बैंक का पैनल नई यूनिट पर नई राय
सिक्योरिटी इंटरेस्ट रिकॉर्ड (CERSAI) बैंक नई प्रॉपर्टी के विवरण से अपडेट
प्रॉपर्टी और लोन इंश्योरेंस बीमा कंपनी नया प्रॉपर्टी पता और कीमत, अगर कवर यूनिट से जुड़ा है
डिमांड लेटर और पेमेंट शेड्यूल बिल्डर नई यूनिट की अगली किस्तें

बैंक से उसकी अपनी चेकलिस्ट लिखित में मांगें; बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की जरूरतें और क्रम अलग-अलग होते हैं।

एग्रीमेंट फॉर सेल और स्टांप ड्यूटी

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 13 के तहत बिल्डर लिखित और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट फॉर सेल किए बिना फ्लैट की कीमत का 10% से ज्यादा एडवांस नहीं ले सकता। इसलिए अगर आपने 10% से ज्यादा चुकाया है, तो फ्लैट A का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट लगभग तय है। यूनिट बदलने का मतलब है उसे रद्द या संशोधित करना और फ्लैट B के लिए नया एग्रीमेंट रजिस्टर कराना।

पुराने एग्रीमेंट पर दी गई स्टांप ड्यूटी अपने आप आगे नहीं जुड़ती। राज्य इसे अलग-अलग तरह से देखते हैं: कुछ रद्द एग्रीमेंट पर सख्त समय-सीमा के भीतर रिफंड देते हैं (उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में आवेदन की अवधि कम है और कैंसलेशन डीड के रजिस्ट्रेशन से गिनी जाती है, और 2026 का एक संशोधन बिल इसमें बदलाव का प्रस्ताव रखता है), जबकि कुछ बहुत कम या कुछ नहीं देते। कैंसलेशन पर साइन करने से पहले सब-रजिस्ट्रार से पूछ लें। अगर नया फ्लैट महंगा है, तो नए एग्रीमेंट पर स्टांप ड्यूटी नई कीमत पर लगेगी।

बिल्डर का पेमेंट ट्रांसफर लेटर

बैंक के लिए यह सबसे अहम कागज है। बिल्डर के लेटरहेड पर इसमें लिखा होना चाहिए:

  1. पुराना यूनिट नंबर, उस पर कुल चुकाई गई रकम, जिसमें आपका अपना हिस्सा और बैंक के डिस्बर्समेंट तारीखों के साथ अलग-अलग हों
  2. कि पूरी रकम नई यूनिट में ट्रांसफर और जमा कर दी गई है
  3. कोई ट्रांसफर या यूनिट-बदलाव फीस ली गई हो तो वह, और यह कि कोई रकम जब्त नहीं की गई
  4. कि पुरानी यूनिट के लिए आपको कोई रिफंड नहीं दिया जा रहा

इसके बिना बैंक पक्का नहीं हो सकता कि उसका पैसा अब भी सुरक्षित है।

उदाहरण: 72 लाख रुपये के फ्लैट से 80 लाख रुपये के फ्लैट में जाना

आंकड़े सिर्फ समझाने के लिए हैं, किसी लेंडर का ऑफर नहीं।

  • फ्लैट A की कीमत: ₹72 लाख। सैंक्शन लोन: ₹57.6 लाख (कीमत का 80%; बैंकों के लिए आरबीआई 30 लाख रुपये से ऊपर और 75 लाख रुपये तक के लोन पर 80% तक LTV की इजाजत देता है)।
  • अब तक भुगतान: ₹14.4 लाख अपना हिस्सा + ₹20 लाख बैंक से डिस्बर्स = ₹34.4 लाख।
  • आप ₹80 लाख कीमत वाले फ्लैट B में जाते हैं। बिल्डर पूरे ₹34.4 लाख ट्रांसफर कर देता है।
  • लेकिन बैंक का वैल्यूअर फ्लैट B की कीमत ₹76 लाख आंकता है (उदाहरण के लिए, क्योंकि आसपास की रीसेल कीमतें बिल्डर की नई प्राइस लिस्ट से कम हैं)।

बैंक कीमत और वैल्यूएशन में से जो कम हो, उस पर लोन देते हैं। इसलिए फ्लैट B पर अधिकतम लोन 80% × ₹76 लाख = ₹60.8 लाख होगा, 80% × ₹80 लाख = ₹64 लाख नहीं।

फ्लैट A फ्लैट B
कीमत ₹72,00,000 ₹80,00,000
बैंक वैल्यूएशन ₹72,00,000 ₹76,00,000
लागू LTV (लोन बैंड ₹30-75 लाख) 80% 80%
अधिकतम लोन ₹57,60,000 ₹60,80,000
जरूरी अपना हिस्सा (कीमत घटा लोन) ₹14,40,000 ₹19,20,000
अपनी जेब से पहले चुकाया ₹14,40,000 ₹14,40,000
अतिरिक्त अपना पैसा चाहिए शून्य ₹4,80,000

कीमत ₹8 लाख बढ़ी लेकिन लोन सिर्फ ₹3.2 लाख बढ़ सकता है, इसलिए ₹4.8 लाख आपको खुद जुटाने होंगे, साथ में कोई अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर फीस भी। अगर रिवाइज्ड लोन ₹75 लाख से ऊपर जाता, तो बैंक की LTV सीमा घटकर 75% हो जाती। बैंक यह भी दोबारा जांचता है कि आपकी आय बढ़ी हुई ईएमआई उठा सकती है या नहीं। फ्लैट बदलने का फैसला करने से पहले रिवाइज्ड लोन राशि पर ईएमआई जांचने के लिए ईएमआई कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें।

स्टेप-बाय-स्टेप: लोन अटकाए बिना फ्लैट कैसे बदलें

  1. पहले बिल्डर का ऑफर लिखित में लें। कुछ भी रद्द करने से पहले नई यूनिट की कीमत, कारपेट एरिया, पेमेंट प्लान, ट्रांसफर फीस और पजेशन की तारीख मांगें।
  2. साइन करने से पहले बैंक को बताएं। ऑफर शेयर करें और पूछें कि क्या बैंक नई यूनिट को फंड करेगा, कितनी रकम पर, और दस्तावेजों व फीस (लीगल, वैल्यूएशन, अमेंडमेंट चार्ज) की सूची क्या है।
  3. नई यूनिट की खुद जांच करें। राज्य की रेरा वेबसाइट पर पक्का करें कि टावर या फेज रजिस्टर्ड है और पजेशन की तारीख क्या है। इसकी तुलना अंडर-कंस्ट्रक्शन बनाम रेडी-टू-मूव के जोखिम से करें।
  4. कैंसलेशन और नया एग्रीमेंट एक साथ साइन करें। ऐसा अंतराल न आने दें जिसमें पुराना एग्रीमेंट रद्द हो जाए लेकिन नया रजिस्टर न हो।
  5. पेमेंट ट्रांसफर लेटर, एनओसी और नया डिमांड लेटर लें। इन्हें नए एग्रीमेंट के साथ बैंक में जमा करें।
  6. रिवाइज्ड सैंक्शन या अमेंडमेंट लेटर और नया ट्राइपार्टाइट एग्रीमेंट साइन करें। फीस और किसी रेट रीसेट समेत हर बदली हुई शर्त पढ़ें; सैंक्शन लेटर बनाम लोन एग्रीमेंट में बताए तरीके से लाइन-दर-लाइन मिलाएं।
  7. जरूरत हो तो इंश्योरेंस और पीएमएवाई या टैक्स रिकॉर्ड अपडेट करें। प्रॉपर्टी से जुड़ी बीमा पॉलिसी में नया पता चाहिए। अगर आप ऐसे फायदे ले रहे हैं जो कारपेट एरिया या प्रॉपर्टी की कीमत पर निर्भर हैं, तो नई यूनिट के लिए पात्रता दोबारा जांचें।
  8. डिस्बर्समेंट फिर शुरू करें। फंड जारी करने से पहले हर नए डिमांड लेटर को निर्माण के चरण से मिलाएं, जैसा बिल्डर डिमांड लेटर की जांच में बताया गया है।

फ्लैट बदलने के दौरान ब्याज

ब्याज पहले से डिस्बर्स हुई रकम पर चलता है, फ्लैट पर नहीं। ऊपर के उदाहरण में अगर बैंक की दर 8.5% है, तो ₹20 लाख पर साधारण प्री-ईएमआई ब्याज करीब ₹14,167 महीना (₹20,00,000 × 8.5% ÷ 12) होगा। कागजी काम पूरा होने तक यह चलता रहता है। अगर देरी बिल्डर की वजह से हुई है, तो नई यूनिट पर देर से भुगतान के किसी भी ब्याज की माफी लिखित में मांगें।

अगर कुछ गड़बड़ हो जाए

  • बिल्डर पूरी रकम ट्रांसफर करने से मना करे या कुछ हिस्सा जब्त करे: रेरा की धारा 11(5) कहती है कि बिल्डर अलॉटमेंट सिर्फ एग्रीमेंट फॉर सेल की शर्तों के अनुसार ही रद्द कर सकता है, और अगर रद्दीकरण एकतरफा और बिना पर्याप्त कारण के है तो आप राज्य रेरा अथॉरिटी के पास जा सकते हैं।
  • बैंक देरी करे या बिना वजह बताए फीस मांगे: बैंक के ग्रीवांस ऑफिसर को लिखें और फीस को सैंक्शन लेटर और KFS में दिखाने को कहें। अगर 30 दिन में जवाब न मिले, तो बैंकों और एनबीएफसी की शिकायत आरबीआई के पास cms.rbi.org.in (हेल्पलाइन 14448) पर की जा सकती है। हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के मामले में नेशनल हाउसिंग बैंक के GRIDS पोर्टल grids.nhbonline.org.in पर शिकायत करें।
  • किसी एजेंट के पर्सनल अकाउंट में "प्रोसेसिंग" का पैसा कभी न भेजें और फ्लैट बदलने के नाम पर ओटीपी शेयर न करें। बिल्डर और बैंक को सिर्फ उनके आधिकारिक खातों में भुगतान करें।

मुख्य बातें

  • एक ही प्रोजेक्ट में फ्लैट बदलना बैंक के लिए नई प्रॉपर्टी है: नई लीगल जांच, वैल्यूएशन और चार्ज।
  • बिल्डर से ऐसा लेटर लें जो बैंक डिस्बर्समेंट समेत चुकाए गए हर रुपये को नई यूनिट में ट्रांसफर करे।
  • बैंक कीमत और अपने वैल्यूएशन में से कम पर, आरबीआई की LTV सीमाओं (बैंकों के लिए लोन के आकार के हिसाब से 90%, 80%, 75%) के भीतर लोन देता है, इसलिए महंगे फ्लैट के लिए ज्यादा अपना पैसा लग सकता है।
  • पुराने एग्रीमेंट की स्टांप ड्यूटी शायद आगे न जुड़े; रद्द करने से पहले अपने राज्य की रिफंड अवधि जांचें।
  • फ्लैट बदलने के दौरान प्री-ईएमआई या ईएमआई भरते रहें; ब्याज पहले से डिस्बर्स रकम पर चलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या होम लोन डिस्बर्स होने के बाद मैं उसी प्रोजेक्ट में अपना फ्लैट बदल सकता हूं?

आमतौर पर हां, अगर बिल्डर राजी हो और बैंक नई यूनिट को मंजूरी दे। बैंक का चार्ज पुराने फ्लैट से नए फ्लैट पर जाना होता है, इसलिए आगे कोई भी डिस्बर्समेंट होने से पहले नई लीगल और टेक्निकल जांच, रिवाइज्ड सैंक्शन या अमेंडमेंट लेटर और बिल्डर के नए कागजात की उम्मीद रखें।

अगर नया फ्लैट महंगा है तो क्या मेरी होम लोन राशि बदलेगी?

बदल सकती है। बैंक नए फ्लैट का दोबारा वैल्यूएशन करता है और आरबीआई की लोन-टू-वैल्यू सीमाएं फिर से लागू करता है: बैंकों के लिए 30 लाख रुपये तक के लोन पर 90% तक, 30 लाख से ऊपर 75 लाख रुपये तक 80%, और 75 लाख रुपये से ऊपर 75%। आपकी आय के आधार पर पात्रता भी दोबारा जांची जाती है, इसलिए अंतर की रकम आपको अपनी जेब से देनी पड़ सकती है।

फ्लैट बदलने पर क्या नया एग्रीमेंट फॉर सेल चाहिए?

हां। एग्रीमेंट में एक खास यूनिट का जिक्र होता है, इसलिए बिल्डर को पुराना एग्रीमेंट रद्द या संशोधित करके नए फ्लैट के लिए नया एग्रीमेंट करना होगा। अगर पुराना एग्रीमेंट रजिस्टर्ड था, तो आमतौर पर रद्दीकरण भी रजिस्टर कराना होता है, और स्टांप ड्यूटी का मामला आपके राज्य पर निर्भर करता है।

क्या पुराने फ्लैट के एग्रीमेंट पर दी गई स्टांप ड्यूटी वापस मिलती है?

यह राज्य पर निर्भर करता है। कुछ राज्य रद्द एग्रीमेंट पर स्टांप ड्यूटी का रिफंड या एडजस्टमेंट तभी देते हैं जब आप तय सख्त समय-सीमा के अंदर आवेदन करें। कैंसलेशन डीड पर साइन करने से पहले सब-रजिस्ट्रार या प्रॉपर्टी वकील से पूछें।

अगर फ्लैट बदलने से डिस्बर्समेंट में देरी हो तो अतिरिक्त प्री-ईएमआई ब्याज कौन देगा?

ब्याज उस रकम पर लगता है जो बैंक पहले ही डिस्बर्स कर चुका है, इसलिए बदलाव के दौरान आपको प्री-ईएमआई या ईएमआई भरते रहना होगा। अगर देरी बिल्डर की वजह से है, तो उससे लिखित में बात करें, जैसे नई यूनिट पर देर से भुगतान के ब्याज की माफी।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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