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डिमांड ड्राफ्ट खो गया? डुप्लिकेट डीडी कैसे बनवाएं

डिमांड ड्राफ्ट डाक में खो गया या गुम हो गया? कौन-से रिकॉर्ड चाहिए, पेमेंट कैसे रुकवाएं, डुप्लिकेट डीडी का आरबीआई 15 दिन नियम और देरी पर ब्याज।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
डिमांड ड्राफ्ट खो गया? डुप्लिकेट डीडी कैसे बनवाएं
इस लेख में
  1. डुप्लिकेट रिक्वेस्ट आसान बनाने वाले रिकॉर्ड
  2. क्या करें, कदम-दर-कदम
  3. आरबीआई के नियम क्या कहते हैं
  4. उदाहरण: देर से मिले डुप्लिकेट पर ब्याज
  5. कॉपी करने लायक आवेदन पत्र
  6. क्या न करें
  7. मुख्य बातें
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"मैंने एडमिशन के लिए ₹1.5 लाख का डिमांड ड्राफ्ट डाक से भेजा, और कॉलेज कह रहा है कि वह पहुंचा ही नहीं।" अगर आपके साथ ऐसा हुआ है, तो सीधा उपाय यह है: आज ही जारी करने वाले बैंक से ड्राफ्ट को खोया हुआ दर्ज कराएं और पेमेंट रुकवाएं, डीडी नंबर, तारीख, रकम और काउंटरफॉइल जुटाएं, और इंडेम्निटी बॉन्ड के साथ डुप्लिकेट के लिए आवेदन करें। आरबीआई बैंक से 15 दिन में इसे जारी करने और देरी पर ब्याज देने की अपेक्षा करता है।

डिमांड ड्राफ्ट एक प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट है जिसे बैंक खुद पर जारी करता है, यानी पैसा आपके खाते से पहले ही निकल चुका है। डुप्लिकेट बनवाना कागजी काम है, और आपके पास मौजूद रिकॉर्ड तय करते हैं कि यह कितनी जल्दी होगा।

डुप्लिकेट रिक्वेस्ट आसान बनाने वाले रिकॉर्ड

ब्रांच जाने से पहले ये जुटा लें। पहले तीन सबसे जरूरी हैं।

रिकॉर्ड कहां मिलेगा बैंक को क्यों चाहिए
डीडी नंबर, तारीख और रकम काउंटरफॉइल, खरीद रसीद या SMS सही इंस्ट्रूमेंट पहचानने और मार्क करने के लिए
जारी करने वाली ब्रांच और भुगतान करने वाली (payable at) ब्रांच काउंटरफॉइल या रसीद भुगतान वाली ब्रांच से पुष्टि के बाद जारी करने वाली ब्रांच डुप्लिकेट देती है
पेयी का नाम आपका आवेदन फॉर्म या रसीद डुप्लिकेट उसी पेयी के नाम बनता है
आपके खाते की डेबिट एंट्री बैंक स्टेटमेंट या पासबुक खरीद का सबूत; देखें बैंक स्टेटमेंट कैसे पढ़ें
कूरियर या स्पीड पोस्ट रसीद और ट्रैकिंग कूरियर स्लिप, ट्रैकिंग पेज कब और कैसे खोया, यह दिखाता है
पेयी की ओर से न मिलने की पुष्टि कॉलेज, दफ्तर या विक्रेता का ईमेल या पत्र कई बैंक मांगते हैं; आवेदन मजबूत होता है
पहचान और पते का सबूत आधार, पैन, पासपोर्ट आवेदन करने वाले का केवाईसी

15 सितंबर 2018 से आरबीआई ने बैंकों के लिए डिमांड ड्राफ्ट, पे ऑर्डर और बैंकर्स चेक पर खरीदार का नाम छापना अनिवार्य किया है। इससे बैंक खोए ड्राफ्ट को जल्दी आपसे मिला पाता है।

क्या करें, कदम-दर-कदम

आज

  1. पक्का करें कि ड्राफ्ट सच में खोया है। पेयी से उनके अकाउंट्स या डाक सेक्शन में जांच करवाएं; ड्राफ्ट अक्सर कई दिन बिना खुले पड़े रहते हैं।
  2. जारी करने वाले बैंक को लिखित में बताएं (ब्रांच को पत्र या ईमेल, साथ में नेट बैंकिंग या ऐप से शिकायत)। डीडी को खोया हुआ मार्क करने और भुगतान वाली ब्रांच को "स्टॉप पेमेंट" या सावधानी सूचना भेजने को कहें। तारीख के साथ पावती लें।
  3. पुलिस शिकायत या ऑनलाइन खोई वस्तु रिपोर्ट दर्ज करें अगर बैंक मांगे या ड्राफ्ट चोरी हुआ हो। कई राज्यों में खोए दस्तावेज की ऑनलाइन रिपोर्ट की सुविधा है; उसकी पावती अक्सर काफी होती है।

कुछ दिनों में

  1. बैंक के फॉर्म पर डुप्लिकेट का आवेदन दें, ऊपर बताए रिकॉर्ड के साथ।
  2. इंडेम्निटी बॉन्ड पर साइन करें। यह बैंक को बचाता है अगर मूल ड्राफ्ट बाद में पेश हो जाए। बैंक तय मूल्य के स्टांप पेपर और बड़ी रकम के लिए जमानतदार मांग सकते हैं; फॉर्मेट और स्टांप ड्यूटी बैंक और राज्य के हिसाब से अलग होते हैं।
  3. डुप्लिकेट डीडी का चार्ज चुकाएं, जो बैंक की सर्विस चार्ज सूची में लिखा होता है। चार्ज हर बैंक में अलग है, इसलिए ब्रांच में पूछें।
  4. तय करें: डुप्लिकेट या कैंसिलेशन। अगर पेयी को अब ड्राफ्ट नहीं चाहिए (जैसे अब वे ऑनलाइन ट्रांसफर लेते हैं), तो बैंक से खोया ड्राफ्ट कैंसिल करके रकम खाते में डालने को कहें।

15 दिन बाद

  1. लिखित में फॉलो-अप करें अगर डुप्लिकेट जारी नहीं हुआ। आरबीआई के निर्देश का हवाला देकर देरी का ब्याज मांगें।
  2. बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी तक ले जाएं, और 30 दिन में संतोषजनक जवाब न मिले तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन के पास। देखें बैंक शिकायत हल नहीं कर रहा।

आरबीआई के नियम क्या कहते हैं

आरबीआई के निर्देश (पहली बार 9 मार्च 2000 को जारी और नवंबर 2006 में स्पष्ट किए गए) कहते हैं:

  • बैंकों को रिक्वेस्ट मिलने के एक पखवाड़े के अंदर डुप्लिकेट डिमांड ड्राफ्ट जारी करना चाहिए।
  • उससे ज्यादा देरी पर बैंक को मुआवजे के तौर पर उसी अवधि की फिक्स्ड डिपॉजिट पर लागू दर से ब्याज देना चाहिए।
  • पखवाड़े की सीमा सिर्फ तब लागू है जब खरीदार या लाभार्थी मांगें; तीसरे पक्ष के एंडोर्सी पर नहीं।

अक्टूबर 2026 तक डुप्लिकेट ड्राफ्ट के लिए यही मानक हैं। ज्यादातर बैंक इन्हें अपनी वेबसाइट पर ग्राहक मुआवजा नीति या डिमांड ड्राफ्ट नीति में दोहराते हैं, इसलिए अपने बैंक की सटीक प्रक्रिया वहां देखें।

खोए ड्राफ्ट से जुड़े दूसरे नियम:

  • वैधता: डिमांड ड्राफ्ट, चेक की तरह, जारी होने की तारीख से तीन महीने तक वैध रहते हैं।
  • ₹50,000 और उससे ज्यादा: आरबीआई के मुताबिक ऐसे ड्राफ्ट सिर्फ खाते से डेबिट करके या चेक के बदले जारी होने चाहिए, नकद के बदले नहीं, इसलिए आपकी खरीद का सबूत हमेशा खाते में रहता है।

उदाहरण: देर से मिले डुप्लिकेट पर ब्याज

आशा ने ₹1,50,000 का ड्राफ्ट खरीदा था। उसने सभी दस्तावेजों के साथ 1 अक्टूबर को डुप्लिकेट का आवेदन दिया। बैंक ने 31 अक्टूबर को डुप्लिकेट जारी किया।

मद गणना नतीजा
आरबीआई का पखवाड़ा खत्म 1 अक्टूबर + 14 दिन 15 अक्टूबर
देरी के दिन 16 से 31 अक्टूबर 16 दिन
उस अवधि की एफडी दर (उदाहरण के लिए) 15 से 45 दिन की जमा पर बैंक की दर 5.5% सालाना
देरी का ब्याज ₹1,50,000 × 5.5% × 16 ÷ 365 ₹361.64, करीब ₹362

रकम छोटी है, लेकिन इसे लिखित में मांगने से आम तौर पर डुप्लिकेट जल्दी मिलता है। उसी अवधि के लिए अपने बैंक का असली एफडी रेट कार्ड इस्तेमाल करें; एफडी कैलकुलेटर से आंकड़ा जांच सकते हैं।

कॉपी करने लायक आवेदन पत्र

सेवा में,
शाखा प्रबंधक, [बैंक], [जारी करने वाली ब्रांच]

विषय: डुप्लिकेट डिमांड ड्राफ्ट हेतु आवेदन – डीडी नंबर [नंबर] दिनांक [तारीख]

महोदय/महोदया,

मैंने अपने खाते [आखिरी 4 अंक] से डेबिट करके ₹[रकम] का डिमांड ड्राफ्ट
नंबर [नंबर] दिनांक [तारीख], [पेयी] के पक्ष में, [शहर/ब्रांच] पर देय,
खरीदा था। यह ड्राफ्ट [तारीख] को [कूरियर/डाक] से भेजा गया था और पेयी
को नहीं मिला है [या: खो गया है]।

कृपया इस ड्राफ्ट को खोया हुआ मार्क करके इसका भुगतान रोकें, और उसी
पेयी के पक्ष में डुप्लिकेट ड्राफ्ट जारी करें [या: ड्राफ्ट कैंसिल करके रकम
मेरे खाते में जमा करें]। मैं काउंटरफॉइल/रसीद, पहचान पत्र, [पुलिस/खोई
वस्तु रिपोर्ट की पावती], [पेयी का न मिलने का पत्र] और आपके फॉर्मेट में
इंडेम्निटी बॉन्ड संलग्न कर रहा/रही हूं।

आरबीआई के निर्देशों के अनुसार कृपया एक पखवाड़े में जारी करें, अन्यथा
देरी के लिए लागू एफडी दर पर ब्याज दें।

[नाम], [मोबाइल], [तारीख], [हस्ताक्षर]

क्या न करें

  • ड्राफ्ट के "मिल जाने" का इंतजार न करें। उसी दिन रिपोर्ट करें ताकि वह मार्क हो जाए और गलत भुगतान न हो।
  • मूल काउंटरफॉइल बैंक के अलावा किसी को न दें; फोटोकॉपी रखें।
  • एजेंट या "डीडी रिकवरी" सेवाओं को पैसे न दें। डुप्लिकेट सिर्फ जारी करने वाला बैंक दे सकता है।
  • ओटीपी या खाते का ब्योरा शेयर न करें उन कॉल करने वालों से जो खुद को बैंक या पेयी के दफ्तर से बताते हैं।
  • नया ड्राफ्ट खरीदकर पुराने को भूल न जाएं। कैंसिलेशन के बिना पुरानी रकम आपके खाते से बाहर ही रहती है।

अगर मामला ड्राफ्ट का नहीं, लौटे हुए चेक का है, तो हमारी गाइड चेक बाउंस: क्या करें देखें।

मुख्य बातें

  • खोए डिमांड ड्राफ्ट की सूचना तुरंत लिखित में जारी करने वाले बैंक को दें और स्टॉप पेमेंट मांगें।
  • डीडी नंबर, तारीख, रकम, पेयी, जारी करने और भुगतान वाली ब्रांच, काउंटरफॉइल और डेबिट एंट्री तैयार रखें।
  • आरबीआई खरीदार या लाभार्थी की रिक्वेस्ट पर 15 दिन में डुप्लिकेट की अपेक्षा करता है, देरी पर एफडी दर से ब्याज के साथ।
  • डुप्लिकेट की जगह आम तौर पर कैंसिलेशन और रिफंड भी चुन सकते हैं; दोनों में इंडेम्निटी बॉन्ड लगता है।
  • बैंक पखवाड़े से ज्यादा देर करे तो शिकायत अधिकारी और फिर cms.rbi.org.in तक जाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बैंक डुप्लिकेट डिमांड ड्राफ्ट कितने दिन में देता है?

आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि खरीदार या लाभार्थी की रिक्वेस्ट मिलने के एक पखवाड़े (15 दिन) के अंदर डुप्लिकेट डिमांड ड्राफ्ट जारी करें। ज्यादा समय लगने पर बैंक को देरी की अवधि के लिए उसी अवधि की एफडी दर पर ब्याज देना चाहिए।

डुप्लिकेट डिमांड ड्राफ्ट कौन मांग सकता है?

ड्राफ्ट खरीदने वाला व्यक्ति या उस पर नाम वाला लाभार्थी। अगर रिक्वेस्ट किसी तीसरे पक्ष से आती है जिसके नाम ड्राफ्ट एंडोर्स किया गया था, तो 15 दिन की समय-सीमा लागू नहीं होती।

डुप्लिकेट डीडी के लिए कौन-से दस्तावेज चाहिए?

आम तौर पर लिखित आवेदन, डीडी का काउंटरफॉइल या खरीद रसीद, डीडी नंबर, तारीख, रकम, पेयी और जारी करने वाली ब्रांच का ब्योरा, पहचान पत्र और इंडेम्निटी बॉन्ड। कुछ बैंक पेयी का यह पत्र भी मांगते हैं कि ड्राफ्ट नहीं मिला।

क्या डुप्लिकेट की जगह खोया डिमांड ड्राफ्ट कैंसिल करा सकते हैं?

हां, ज्यादातर बैंक उन्हीं जांचों और इंडेम्निटी के बाद खरीदार को खोया ड्राफ्ट कैंसिल करके रकम खाते में लौटाने देते हैं। कैंसिलेशन चार्ज बैंक के हिसाब से अलग होते हैं, इसलिए सर्विस चार्ज की सूची देखें।

बाद में मिल जाए तो क्या डिमांड ड्राफ्ट वैध रहता है?

डिमांड ड्राफ्ट जारी होने की तारीख से तीन महीने तक वैध रहता है। खोने की सूचना देने के बाद बैंक उसे मार्क कर देता है ताकि मूल ड्राफ्ट का भुगतान न हो, इसलिए मिल जाए तो तुरंत बैंक को बताएं।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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