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प्रॉपर्टी पर पहले से लोन या चार्ज? कौन से कागज मांगें

ऐसी प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं जिस पर लोन या चार्ज हो सकता है? पैसे देने से पहले EC, CERSAI सर्च, विक्रेता का लोन स्टेटमेंट, पेऑफ लेटर और एनओसी मांगें।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
प्रॉपर्टी पर पहले से लोन या चार्ज? कौन से कागज मांगें
इस लेख में
  1. मौजूदा चार्ज किसे कहते हैं
  2. कौन से डॉक्यूमेंट मांगें और हर एक क्या बताता है
  3. उदाहरण: विक्रेता का लोन चलते हुए फ्लैट खरीदना
  4. कोई भी पैसा देने से पहले स्टेप-बाय-स्टेप
  5. क्लोजर के बाद: विक्रेता के लेंडर को डॉक्यूमेंट लौटाने होंगे
  6. शिकायत कहां करें
  7. क्या न करें
  8. मुख्य बातें
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प्रॉपर्टी के पैसे देने से पहले विक्रेता से उतनी अवधि का एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट मांगें जितनी आपके वकील या लेंडर को चाहिए, CERSAI सर्च करें, और विक्रेता का ताजा लोन स्टेटमेंट, उसके लेंडर का पेऑफ लेटर और क्लोजर के बाद लेंडर का नो-ड्यूज लेटर, चार्ज रिलीज और ओरिजिनल टाइटल डीड लें। अगर विक्रेता पर लोन है, तो वह हिस्सा सीधे उसके लेंडर को दें, कभी विक्रेता को नहीं, और रजिस्ट्री तभी कराएं जब लेंडर क्लोजर की पुष्टि कर दे। स्थिति अक्टूबर 2026 तक की।

मौजूदा चार्ज किसे कहते हैं

चार्ज यानी प्रॉपर्टी पर कोई भी कानूनी दावा, जिसे प्रॉपर्टी साफ-सुथरी आपके नाम आने से पहले खत्म करना जरूरी है। आम उदाहरण:

  • विक्रेता के होम लोन या लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का मॉर्गेज, जिसमें ओरिजिनल डीड बैंक के पास रहती हैं
  • रजिस्टर्ड मॉर्गेज डीड या दूसरे रजिस्टर्ड लेनदेन
  • टाइटल डीड जमा करके बना इक्विटेबल मॉर्गेज, जो कई राज्यों में रजिस्टर ही नहीं होता
  • कोर्ट की कुर्की, लियन और टैक्स बकाया, जैसे बकाया प्रॉपर्टी टैक्स या सोसायटी ड्यूज
  • तीसरे पक्ष से समझौते, जैसे पहले का कोई बिना रजिस्ट्री वाला सेल एग्रीमेंट

हर चार्ज अलग जगह दिखता है, इसलिए कोई एक डॉक्यूमेंट काफी नहीं है।

कौन से डॉक्यूमेंट मांगें और हर एक क्या बताता है

डॉक्यूमेंट कहां से मिलता है क्या बताता है क्या नहीं दिखाता
एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) सब-रजिस्ट्रार ऑफिस; कई राज्य ऑनलाइन देते हैं सर्च किए गए सालों में प्रॉपर्टी के रजिस्टर्ड लेनदेन (बिक्री, गिफ्ट, रजिस्टर्ड मॉर्गेज, रिलीज) बिना रजिस्ट्री वाले मॉर्गेज, रजिस्ट्री से बाहर के बकाया
CERSAI सर्च रिपोर्ट CERSAI पोर्टल (cersai.org.in) पब्लिक सर्च बैंक, एनबीएफसी और एचएफसी द्वारा रजिस्टर किए गए सिक्योरिटी इंटरेस्ट वे चार्ज जो लेंडर ने रजिस्टर नहीं किए; प्राइवेट कर्ज
विक्रेता का लोन स्टेटमेंट और सैंक्शन लेटर विक्रेता का लेंडर बकाया रकम और गिरवी रखी प्रॉपर्टी दूसरे लेंडर्स के चार्ज
पेऑफ (फोरक्लोजर) लेटर विक्रेता का लेंडर किसी तारीख तक वैध सटीक क्लोजिंग रकम, भुगतान का अकाउंट —
लेंडर का एनओसी / नो-ड्यूज लेटर और रिलीज डीड (जहां रजिस्टर्ड मॉर्गेज हो) क्लोजर के बाद विक्रेता का लेंडर लोन बंद और चार्ज रिलीज —
ओरिजिनल टाइटल डीड की वापसी विक्रेता के लेंडर से विक्रेता को ओरिजिनल अब विक्रेता के पास —
सोसायटी एनओसी और नो-ड्यूज हाउसिंग सोसायटी मेंटेनेंस बकाया नहीं; ट्रांसफर की अनुमति —
प्रॉपर्टी टैक्स और बिजली-पानी की रसीदें नगर निगम / यूटिलिटी प्रॉपर्टी पर कोई बकाया नहीं —
लिटिगेशन सर्च वकील (कोर्ट रिकॉर्ड) लंबित मुकदमे —

एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट की बुनियादी बातें

कई राज्यों में EC दो रूपों में आता है: एक विस्तृत सर्टिफिकेट जिसमें रजिस्टर्ड लेनदेन लिखे होते हैं, और "निल" सर्टिफिकेट जब उस अवधि में कुछ भी रजिस्टर्ड न हो (तमिलनाडु और कर्नाटक में इन्हें Form 15 और Form 16 कहते हैं)। लेंडर आमतौर पर 13 से 30 साल का EC मांगते हैं; अपने लेंडर या वकील की शर्त मानें। हर एंट्री पढ़ें: रजिस्टर्ड मॉर्गेज के बाद रजिस्टर्ड रिलीज या क्लोजर डॉक्यूमेंट होना चाहिए।

निल EC यह साबित नहीं करता कि प्रॉपर्टी पूरी तरह फ्री है। बैंक अक्सर टाइटल डीड अपने पास रखकर इक्विटेबल मॉर्गेज लेते हैं, जो कभी रजिस्टर नहीं होता। महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में कर्जदार को ऐसे मॉर्गेज की नोटिस ऑफ इंटिमेशन सब-रजिस्ट्रार के पास फाइल करनी होती है (वहां संशोधित रजिस्ट्रेशन एक्ट की Section 89B), इसलिए उन राज्यों में यह रिकॉर्ड में दिख सकता है। बाकी जगह अक्सर नहीं दिखता।

CERSAI सर्च

CERSAI (Central Registry of Securitisation Asset Reconstruction and Security Interest of India) वह केंद्रीय रिकॉर्ड है जहां रेगुलेटेड लेंडर सिक्योरिटी इंटरेस्ट रजिस्टर करते हैं। SARFAESI एक्ट के तहत कोई लेंडर तब तक SARFAESI के जरिए वसूली नहीं कर सकता जब तक उसका सिक्योरिटी इंटरेस्ट सेंट्रल रजिस्ट्री में रजिस्टर न हो, इसलिए लेंडर्स के पास इसे फाइल करने की मजबूत वजह है। पोर्टल पर कोई भी एसेट-आधारित पब्लिक सर्च कर सकता है; लेंडर्स की जानकारी के मुताबिक फीस लगभग ₹10 प्रति सर्च और जीएसटी है। आपका बैंक लोन देने से पहले खुद सर्च करेगा, लेकिन टोकन देने से पहले अपनी तरफ से सर्च करना सस्ता बचाव है।

उदाहरण: विक्रेता का लोन चलते हुए फ्लैट खरीदना

उदाहरण के लिए आंकड़े।

  • तय कीमत: ₹70 लाख। आपका लोन: ₹50 लाख। आपका अपना पैसा: ₹20 लाख।
  • CERSAI सर्च में विक्रेता के बैंक का चार्ज दिखता है। विक्रेता के पेऑफ लेटर के मुताबिक 15 तारीख तक ₹18,00,000 भरने पर लोन बंद हो जाएगा।
भुगतान किसे रकम
विक्रेता का लोन क्लोजर विक्रेता के लेंडर का लोन अकाउंट ₹18,00,000
आपके लोन से बाकी रकम विक्रेता ₹32,00,000
आपका अपना योगदान विक्रेता ₹20,00,000
कुल ₹70,00,000

आमतौर पर आपका लेंडर पेऑफ लेटर के आधार पर ₹18 लाख सीधे विक्रेता के लेंडर को देता है, ओरिजिनल डीड लेता है और आपके लोन के लिए अपने पास रखता है। अगर भुगतान से पहले पेऑफ लेटर की तारीख निकल जाए, तो नया लेटर मांगें; ब्याज रोज जुड़ता रहता है। ₹50 लाख पर अपनी ईएमआई ईएमआई कैलकुलेटर से जांचें।

कोई भी पैसा देने से पहले स्टेप-बाय-स्टेप

  1. विक्रेता से सीधे पूछें कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, ओवरड्राफ्ट या गारंटी तो नहीं है, और यह जवाब सेल एग्रीमेंट में घोषणा के रूप में लिखवाएं।
  2. बड़ा टोकन देने से पहले EC और CERSAI सर्च करवा लें।
  3. पूछें कि ओरिजिनल डीड किसके पास हैं। अगर विक्रेता के पास सिर्फ फोटोकॉपी है, तो वजह जानें।
  4. पेऑफ लेटर लेंडर के लेटरहेड पर लें, स्क्रीनशॉट या व्हाट्सएप मैसेज नहीं।
  5. भुगतान सीधे पेऑफ लेटर में लिखे लेंडर के लोन अकाउंट में करें। किसी के कहने पर कि लेंडर ने "ऐसा कहा है", कभी किसी व्यक्ति के अकाउंट में पैसे न भेजें।
  6. क्लोजर के कागज लें: नो-ड्यूज लेटर, जहां जरूरी हो रिलीज डीड, ओरिजिनल डीड और अपडेटेड CERSAI रिकॉर्ड।
  7. सोसायटी और टैक्स का नो-ड्यूज लें, खासकर रीसेल फ्लैट में।
  8. सेल डीड में इंडेम्निटी क्लॉज जोड़ें, जो किसी छिपाए गए चार्ज को कवर करे।

फ्लैट खरीदने के छिपे खर्च की सूची से मिलान करें, और अगर डीड में नाम विक्रेता के केवाईसी से मेल नहीं खाते, तो सेल डीड और लोन पेपर्स में नाम का अंतर पढ़ें।

क्लोजर के बाद: विक्रेता के लेंडर को डॉक्यूमेंट लौटाने होंगे

आरबीआई (RBI) के 2023 के निर्देशों के तहत रेगुलेटेड लेंडर्स को पूरा भुगतान होने के 30 दिन के भीतर ओरिजिनल प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट लौटाने और किसी भी रजिस्ट्री में दर्ज चार्ज हटाने होते हैं, और अपनी वजह से हुई देरी पर ₹5,000 प्रति दिन देना होता है। अगर लेंडर डॉक्यूमेंट खो दे, तो उसे सर्टिफाइड कॉपी दिलाने में मदद करनी होगी और खर्च उठाना होगा, जिसके लिए 30 दिन और मिलते हैं। यह विक्रेता का अधिकार है, लेकिन इससे आपको समय पर साफ टाइटल मिलता है। अपना लोन बंद करते समय भी यही नियम लागू होते हैं; लोन क्लोजर चेकलिस्ट देखें।

शिकायत कहां करें

  • विक्रेता का लेंडर एनओसी या डॉक्यूमेंट में देरी करे: विक्रेता लेंडर के ग्रीवांस ऑफिसर से शिकायत करे; बैंक और एनबीएफसी के मामले 30 दिन बाद आरबीआई के पास cms.rbi.org.in (14448) पर ले जाए जा सकते हैं; हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के मामले नेशनल हाउसिंग बैंक के GRIDS पोर्टल grids.nhbonline.org.in पर।
  • विक्रेता ने चार्ज छिपाया: सिविल उपायों के लिए वकील से सलाह लें; बिल्डर के मामले में खराब टाइटल की शिकायत राज्य की रेरा (RERA) अथॉरिटी भी सुनती है।

क्या न करें

  • सिर्फ निल EC पर भरोसा न करें।
  • EC, CERSAI सर्च और टाइटल रिपोर्ट साफ होने से पहले बड़ा एडवांस न दें।
  • लोन क्लोजर की रकम किसी के निजी अकाउंट में न भेजें।
  • लेंडर की लिखित क्लोजर पुष्टि और ओरिजिनल डॉक्यूमेंट मिलने से पहले सेल की रजिस्ट्री न कराएं।

मुख्य बातें

  • EC सिर्फ रजिस्टर्ड लेनदेन दिखाता है; इसके साथ CERSAI सर्च और विक्रेता के लोन पेपर्स भी देखें।
  • विक्रेता के लेंडर का पेऑफ लेटर लेकर सीधे लोन अकाउंट में भुगतान करना चार्ज हटाने का सुरक्षित तरीका है।
  • नो-ड्यूज लेटर, जरूरत हो तो रिलीज डीड, ओरिजिनल डीड और सोसायटी व टैक्स का नो-ड्यूज लें।
  • लेंडर्स को क्लोजर के 30 दिन में डॉक्यूमेंट लौटाने होते हैं, वरना अपनी देरी पर ₹5,000 प्रति दिन देना होता है।
  • लेंडर की देरी की शिकायत बैंक और एनबीएफसी के लिए RBI CMS पर, और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए NHB GRIDS पर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कैसे पता करें कि प्रॉपर्टी पर पहले से लोन है?

विक्रेता से सब-रजिस्ट्रार का एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट मांगें, प्रॉपर्टी पर CERSAI सर्च करें, और विक्रेता का ताजा लोन स्टेटमेंट या नो-ड्यूज लेटर मांगें। यह भी देखें कि ओरिजिनल टाइटल डीड विक्रेता के पास हैं या नहीं; अगर बैंक के पास हैं तो आमतौर पर लोन चल रहा होता है।

क्या निल एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट का मतलब है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन नहीं है?

हमेशा नहीं। एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट सिर्फ वही लेनदेन दिखाता है जो सर्च की गई अवधि में सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर हुए हों। टाइटल डीड जमा करके बना मॉर्गेज कुछ राज्यों में नहीं दिखता, इसलिए लेंडर CERSAI सर्च भी करते हैं।

क्या मैं ऐसी प्रॉपर्टी खरीद सकता हूं जिस पर विक्रेता का होम लोन अभी चल रहा है?

हां, यह आम बात है। विक्रेता के लेंडर से क्लोजिंग अमाउंट वाला पेऑफ लेटर लें, वह हिस्सा सीधे लेंडर के लोन अकाउंट में भरें, और रजिस्ट्री से पहले या उसी समय क्लोजर लेटर, एनओसी और ओरिजिनल डॉक्यूमेंट ले लें।

CERSAI सर्च का खर्च कितना है?

लेंडर्स की ओर से प्रकाशित जानकारी के मुताबिक पब्लिक सर्च फीस लगभग Rs 10 प्रति सर्च और जीएसटी है। मौजूदा फीस CERSAI पोर्टल पर देखें, और भारी मार्कअप लेने वाली प्राइवेट साइटों से बचें।

मौजूदा चार्ज हटाने का खर्च किसे उठाना चाहिए?

विक्रेता को। चार्ज विक्रेता के कर्ज की वजह से है, इसलिए वह लोन बंद कराना और चार्ज हटवाना विक्रेता की जिम्मेदारी है, जो आमतौर पर आपके भुगतान से ही होता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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