गोल्ड लोन प्रीपेमेंट और पार्ट रिलीज: चार्ज और नियम
गोल्ड लोन प्रीपेमेंट और पार्ट रिलीज: फोरक्लोजर चार्ज कब लगता है, एक गहना छुड़ाने के लिए कितना चुकाना होगा और आरबीआई का 7 दिन में सोना वापसी नियम।

इस लेख में
गोल्ड लोन आम तौर पर कभी भी समय से पहले चुकाया जा सकता है, और कई लेंडर लोन का कुछ हिस्सा चुकाकर कुछ गहने वापस लेने की सुविधा भी देते हैं, जिसे पार्ट रिलीज कहते हैं। प्रीपेमेंट चार्ज लगेगा या नहीं, यह आपके लोन की शर्तों पर निर्भर है, जो Key Facts Statement (KFS) में लिखी होनी चाहिए। पार्ट रिलीज में आपको इतना चुकाना होता है कि बचा हुआ लोन गिरवी रहने वाले सोने पर LTV सीमा के अंदर रहे।
LTV, अवधि और आरबीआई (RBI) नियमों की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी गोल्ड लोन गाइड देखें।
प्रीपेमेंट, आंशिक भुगतान और पार्ट रिलीज में फर्क
ब्रांच में अक्सर ये शब्द आपस में मिला दिए जाते हैं, जबकि इनका मतलब अलग है।
| विकल्प | आप क्या चुकाते हैं | सोने का क्या होता है | ब्याज पर असर |
|---|---|---|---|
| पूरा प्रीपेमेंट (फोरक्लोजर) | पूरा मूलधन + जमा ब्याज + कोई क्लोजर चार्ज | सारा सोना 7 कामकाजी दिनों में वापस | ब्याज बंद |
| आंशिक भुगतान (पार्ट पेमेंट) | मूलधन में कोई भी रकम | सारा सोना गिरवी रहता है | घटे हुए मूलधन पर ब्याज कम |
| पार्ट रिलीज | इतना कि बचे सोने पर लोन LTV के अंदर आ जाए | चुने हुए गहने वापस | घटे हुए मूलधन पर ब्याज कम |
| रिन्यूअल | देय ब्याज (और कभी-कभी कुछ मूलधन) | सोना गिरवी रहता है; दोबारा कीमत लगती है | नई अवधि शुरू |
आंशिक भुगतान से आपकी LTV गुंजाइश बढ़ती है और सोने के दाम गिरने पर आप सुरक्षित रहते हैं। पार्ट रिलीज से आपको कोई खास गहना वापस मिल जाता है, जैसे शादी या पारिवारिक कार्यक्रम के लिए, लेकिन LTV गुंजाइश कम हो जाती है।
क्या गोल्ड लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज लगता है?
यहां आरबीआई के दो नियम मायने रखते हैं, दोनों अक्टूबर 2026 की स्थिति के हिसाब से।
Pre-payment Charges on Loans Directions, 2025। 1 जनवरी 2026 को या उसके बाद मंजूर या रिन्यू हुए लोन पर बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक और NBFC व्यक्तियों को गैर-कारोबारी काम के लिए दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं ले सकते। लेकिन ज्यादातर गोल्ड लोन फिक्स्ड रेट पर होते हैं, खासकर छोटी अवधि के बुलेट या सिर्फ-ब्याज वाले लोन। फिक्स्ड रेट लोन पर लेंडर अपनी पॉलिसी के तहत प्रीपेमेंट या क्लोजर चार्ज ले सकते हैं, बशर्ते वह पहले से बताया गया हो।
Key Facts Statement के नियम। आरबीआई के मुताबिक लेंडर को सारी फीस और चार्ज दिखाने वाला KFS देना होगा। जो चार्ज KFS में नहीं लिखा, वह बाद में आपकी साफ सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता।
असल में गोल्ड लोन बंद करने का खर्च इनमें से किसी एक रूप में होता है:
- कोई चार्ज नहीं, जो कई बैंकों और कई NBFC स्कीमों में आम है।
- न्यूनतम ब्याज अवधि, जैसे जल्दी चुकाने पर भी कम से कम सात या 15 दिन का ब्याज।
- तय रकम या प्रतिशत वाली क्लोजर फीस, अगर आप लोन मिलने के बाद एक तय अवधि के अंदर बंद करते हैं।
- स्कीम बदलना, जिसमें तय तारीख से पहले बंद करने या डिफॉल्ट करने पर कम "रिबेट" दर खत्म हो जाती है।
ब्रांच से पूछें: "अगर मैं यह लोन एक महीने, तीन महीने और छह महीने बाद बंद करूं तो मुझे ठीक-ठीक कितना चुकाना होगा?"
उदाहरण 1: जल्दी बंद करने से बचत
समझाने के लिए। सुनीता 12% सालाना साधारण ब्याज पर 12 महीने का ₹2,40,000 का बुलेट लोन लेती है। अगर वह छह महीने के अंदर लोन बंद करे, तो उसका लेंडर 1% क्लोजर फीस और उस पर 18% GST लेता है।
- अगर वह पूरे 12 महीने चलाए: ब्याज = ₹2,40,000 × 12% = ₹28,800।
- अगर वह पांच महीने बाद बंद करे: ब्याज = ₹2,40,000 × 12% × 5/12 = ₹12,000।
- क्लोजर फीस: 1% × ₹2,40,000 = ₹2,400, और ₹432 GST = ₹2,832।
- जल्दी बंद करने का कुल खर्च: ₹12,000 + ₹2,832 = ₹14,832।
- पूरी अवधि चलाने के मुकाबले बचत: ₹28,800 − ₹14,832 = ₹13,968।
क्लोजर फीस के बावजूद जल्दी चुकाने से उसके पैसे बचते हैं। फीस फायदा तभी खत्म करती है जब वह बड़ी हो या लोन कुछ ही दिनों में बंद किया जाए। दूसरी स्थितियां आप हमारे लोन प्रीपेमेंट कैलकुलेटर में जांच सकते हैं।
पार्ट रिलीज कैसे काम करता है
आरबीआई का ऐसा कोई खास प्रावधान नहीं है जो आपको पार्ट रिलीज का हक देता हो; यह लेंडर अपनी पॉलिसी के तहत देते हैं। जहां यह सुविधा मिलती है, वहां स्टेप्स लगभग एक जैसे होते हैं:
- ब्रांच में अनुरोध करें, गिरवी की रसीद, आईडी और KYC दस्तावेजों के साथ। कुछ लेंडर ऑनलाइन अनुरोध की सुविधा देते हैं, लेकिन गहना ब्रांच में ही मिलता है।
- लेंडर गहने की पहचान करता है, और मूल वैल्यूएशन से उसका दर्ज नेट वजन और शुद्धता देखता है।
- बचे हुए सोने की दोबारा कीमत लगाता है, मौजूदा रेफरेंस रेट पर।
- छुड़ाने की रकम निकालता है: जमा ब्याज मिलाकर बकाया लोन, घटाव वह अधिकतम लोन जो बचे सोने पर मिल सकता है।
- आप भुगतान करते हैं, और रिलीज नोट पर साइन करने के बाद गहना लौटा दिया जाता है। बाकी सोने के लिए नई गिरवी रसीद दी जाती है।
बचे हुए लोन को आरबीआई की LTV सीमा पूरी करनी होगी, जो पूरे लोन के दौरान बनी रहनी चाहिए: कंजम्प्शन लोन के लिए ₹2.5 लाख तक 85%, ₹2.5 लाख से ऊपर ₹5 लाख तक 80% और ₹5 लाख से ऊपर 75%। कई लेंडर गुंजाइश रखने के लिए पार्ट रिलीज में अपनी कम आंतरिक सीमा लगाते हैं।
उदाहरण 2: एक गहना छुड़ाने की रकम
समझाने के लिए। अर्जुन ने 22 कैरेट के तीन गहने गिरवी रखे हैं, और मान लेते हैं कि रेफरेंस रेट ₹13,000 प्रति ग्राम है। असली रेट रोज बदलते हैं।
| गहना | नेट वजन | कीमत |
|---|---|---|
| हार | 12 ग्राम | ₹1,56,000 |
| चूड़ियां | 8 ग्राम | ₹1,04,000 |
| चेन | 4 ग्राम | ₹52,000 |
| कुल | 24 ग्राम | ₹3,12,000 |
उसका बकाया लोन ₹2,40,000 है, यानी LTV करीब 76.9% (₹2,40,000 ÷ ₹3,12,000)। वह चूड़ियां वापस चाहता है।
- बचा सोना: हार और चेन, 16 ग्राम × ₹13,000 = ₹2,08,000।
- बचे सोने पर 85% पर अधिकतम लोन: 85% × ₹2,08,000 = ₹1,76,800।
- चुकाना होगा मूलधन: ₹2,40,000 − ₹1,76,800 = ₹63,200, और अब तक का जो भी ब्याज बना हो।
अगर उसका लेंडर पार्ट रिलीज के लिए 75% की आंतरिक सीमा लगाता है, तो बचा लोन सिर्फ ₹1,56,000 हो सकता है, इसलिए उसे ₹84,000 चुकाने होंगे। अगर लोन लेने के बाद सोने के दाम गिरे हैं, तो छुड़ाने की रकम भी बढ़ जाती है। भुगतान से पहले रकम हमेशा लिखित में लें।
समय पर सोना वापस पाना
जब आप पूरा लोन चुका देते हैं, तो आरबीआई के Lending Against Gold and Silver Collateral Directions, 2025 के तहत लेंडर को:
- सारा गिरवी सोना सात कामकाजी दिनों के अंदर लौटाना होगा।
- अपनी वजह से हुई हर दिन की देरी के लिए ₹5,000 देने होंगे।
- अपनी वजह से सोने के खोने या खराब होने पर मुआवजा देना होगा।
सोना लेकर निकलने से पहले हर गहने को वैल्यूएशन शीट से मिलाएं: वजन, गहनों की संख्या और कोई दिखने वाली खराबी। कोई भी गड़बड़ी रिलीज के कागज पर ही लिखवाएं।
पार्ट रिलीज में सात दिन का नियम पूरे भुगतान के लिए लिखा गया है, इसलिए ब्रांच से कन्फर्म करें कि गहना कब मिलेगा।
गोल्ड लोन जल्दी चुकाकर खर्च घटाने के टिप्स
- बुलेट लोन में भी हर महीने ब्याज भरें, अगर लेंडर इजाजत दे। इससे बकाया इकट्ठा नहीं होता और रिबेट दर बनी रहती है।
- जब भी अतिरिक्त पैसा हो, आंशिक भुगतान करें। इससे ब्याज घटता है और LTV गुंजाइश बढ़ती है।
- पार्ट रिलीज की योजना दामों को देखकर बनाएं। सोने के दाम गिरने पर गहना छुड़ाने के लिए ज्यादा रकम चाहिए होती है।
- हो सके तो रिन्यूअल से पहले लोन बंद करें; रिन्यूअल में अक्सर नई वैल्यूएशन होती है और कभी-कभी फीस भी लगती है।
- सस्ते लेंडर के पास लोन ले जा रहे हों तो कुल खर्च की तुलना करें। हमारी बैंक बनाम NBFC गोल्ड लोन वाली तुलना बताती है कि फीस और दर को कैसे तौलें।
अगर आप लोन नहीं चुका पा रहे और नीलामी की चिंता है, तो पढ़ें ईएमआई नहीं भर पा रहे तो क्या करें और ड्यू डेट से पहले लेंडर से बात करें।
शिकायत कहां करें
अगर लेंडर KFS में न लिखा चार्ज लेता है, लोन एग्रीमेंट में वादा की गई सुविधा देने से मना करता है, या सोना लौटाने में देरी करता है, तो पहले उसके ग्रीवांस ऑफिसर को लिखें। 30 दिन में संतोषजनक जवाब न मिले तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन से शिकायत कर सकते हैं।
मुख्य बातें
- गोल्ड लोन आम तौर पर कभी भी पहले चुकाया जा सकता है; कोई भी क्लोजर चार्ज Key Facts Statement में होना चाहिए।
- प्रीपेमेंट चार्ज पर आरबीआई की रोक 1 जनवरी 2026 से मंजूर या रिन्यू हुए फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन पर है; कई गोल्ड लोन फिक्स्ड रेट होते हैं, इसलिए अपनी शर्तें जांचें।
- पार्ट रिलीज लेंडर की सुविधा है: इतना चुकाएं कि गिरवी रहने वाले सोने पर बचा लोन LTV के अंदर रहे।
- छुड़ाने की रकम = बकाया लोन घटाव बचे सोने पर अधिकतम लोन, और जमा ब्याज।
- पूरा भुगतान करने पर सोना सात कामकाजी दिनों में लौटाना होगा, वरना लेंडर ₹5,000 प्रतिदिन देगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गोल्ड लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज लगता है?
यह लेंडर और लोन की शर्तों पर निर्भर करता है। कई गोल्ड लोन फिक्स्ड रेट पर होते हैं, इसलिए फ्लोटिंग रेट वाले पर्सनल लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज की आरबीआई की रोक उन पर लागू न हो, ऐसा हो सकता है, और कुछ लेंडर क्लोजर फीस या न्यूनतम ब्याज अवधि रखते हैं। ऐसा कोई भी चार्ज Key Facts Statement में होना चाहिए; जो चार्ज उसमें नहीं लिखा, वह आपकी सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता।
क्या गोल्ड लोन बंद करने से पहले कुछ गहने वापस ले सकते हैं?
कई लेंडर पार्ट रिलीज की सुविधा देते हैं, लेकिन यह लेंडर की सुविधा है, आरबीआई से मिला हक नहीं। आप इतना मूलधन और ब्याज चुकाते हैं कि बचा हुआ लोन गिरवी रहने वाले गहनों पर LTV सीमा के अंदर रहे। ब्रांच से छुड़ाने की सही रकम लिखित में मांगें।
पार्ट रिलीज के लिए कितना चुकाना होगा?
मोटे तौर पर, बकाया लोन में से वह अधिकतम लोन घटाएं जो बचे हुए सोने पर मिल सकता है, और अब तक का ब्याज जोड़ें। जैसे, बचे सोने की कीमत ₹2,08,000 हो और सीमा 85% हो, तो बचा हुआ लोन ज्यादा से ज्यादा ₹1,76,800 हो सकता है। लेंडर अपनी कम आंतरिक LTV सीमा लगा सकते हैं, जिससे यह रकम बढ़ जाती है।
क्या गोल्ड लोन में आंशिक भुगतान से ब्याज घटता है?
हां। ज्यादातर गोल्ड लोन में ब्याज बकाया मूलधन पर लगता है, इसलिए उसका कुछ हिस्सा जल्दी चुकाने से बाकी अवधि का ब्याज घट जाता है। जांच लें कि लेंडर जमा ब्याज चुकाने के बाद आपका भुगतान मूलधन में लगा रहा है।
लोन जल्दी बंद करने के बाद सोना कितने दिन में मिलेगा?
आरबीआई के 2025 के गोल्ड लोन निर्देशों के तहत पूरा लोन चुकाने के सात कामकाजी दिनों के अंदर लेंडर को गिरवी सोना लौटाना होगा। अगर देरी लेंडर की गलती से होती है, तो उसे हर दिन की देरी के लिए ₹5,000 देने होंगे।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।