गोल्ड लोन में सोने की कीमत कम लगाई? ऐसे करें शिकायत
गोल्ड लोन में सोने की वैल्यू उम्मीद से कम लगी? जानें आरबीआई 2025 के नियमों में कीमत, शुद्धता और नेट वजन कैसे तय होते हैं, जांच को चुनौती और शिकायत का तरीका।

इस लेख में
"मैंने 40 ग्राम गहने गिरवी रखे, लेकिन लेंडर कहता है कि इनमें सिर्फ 34 ग्राम सोना है और उम्मीद से बहुत कम लोन ऑफर किया।" गोल्ड लोन वैल्यूएशन की यह सबसे आम शिकायत है। सीधा उपाय: असेइंग सर्टिफिकेट मांगें, कीमत तय करने वाले तीन आंकड़े (नेट वजन, शुद्धता और रेफरेंस प्राइस) जांचें, और जो गलत हो उसे साइन करने से पहले लिखित में चुनौती दें, या अगर साइन कर चुके हैं तो लेंडर की शिकायत प्रक्रिया के जरिए।
अक्टूबर 2026 तक सभी बैंक, कोऑपरेटिव बैंक और NBFC आरबीआई (RBI) के Lending Against Gold and Silver Collateral Directions, 2025 का पालन करने के लिए बाध्य हैं। इन नियमों ने वैल्यूएशन का तरीका एक जैसा कर दिया है और आपको साफ अधिकार दिए हैं। पूरे नियम समझने के लिए हमारी गोल्ड लोन गाइड देखें।
ऐसा क्यों होता है
ज्यादातर वैल्यूएशन विवाद आपकी उम्मीद और नियमों की जरूरत के बीच के इन पांच अंतरों में से किसी एक से पैदा होते हैं:
- कुल वजन बनाम नेट वजन। लेंडर सिर्फ सोने की कीमत लगाता है। पत्थर, मोती, मोम या लाख की भराई, स्प्रिंग और दूसरी धातुएं घटा दी जाती हैं। भारी टेंपल ज्वेलरी या पत्थर जड़े सेट का वजन इस तरह 10% से 25% तक घट सकता है।
- शुद्धता आपकी सोच से कम। 22 कैरेट (91.6% शुद्ध) के नाम पर खरीदे गए गहने जांच में 20 या 18 कैरेट निकल सकते हैं, खासकर पुराने, बिना हॉलमार्क वाले गहने या जिनमें टांके (सोल्डर) लगे हों।
- आज का भाव नहीं, रेफरेंस प्राइस। आरबीआई के नियम के मुताबिक India Bullion and Jewellers Association या SEBI से रेगुलेटेड कमोडिटी एक्सचेंज द्वारा जारी, असली शुद्धता वाले सोने के 30 दिन के औसत क्लोजिंग प्राइस और पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस में से जो कम हो, वही लिया जाता है। जब दाम बढ़ रहे हों, तो यह आज के भाव से कम होता है।
- मेकिंग चार्ज नहीं गिने जाते। ज्वेलर के बिल में मेकिंग चार्ज और जीएसटी शामिल होते हैं। लेंडर सिर्फ धातु की कीमत लगाता है।
- असली गलतियां। बिना कैलिब्रेशन वाला तराजू, सर्टिफिकेट में गलत एंट्री, या लापरवाही से की गई शुद्धता जांच। विवाद उठाकर इन्हीं को ठीक कराया जा सकता है।
आरबीआई नियमों के तहत कीमत कैसे निकाली जाती है
| चरण | 2025 के निर्देश क्या कहते हैं | क्या जांचें |
|---|---|---|
| असेइंग (जांच) | ब्रांच में लेंडर के कर्मचारी करते हैं, मंजूरी के समय कर्जदार मौजूद रहता है | आप मौजूद थे और आपको जांच दिखाई गई |
| नेट वजन | सिर्फ सोने की मात्रा गिनी जाती है; पत्थर और दूसरी धातुएं बाहर | हर गहने की कटौती अलग-अलग लिखी हो |
| शुद्धता | असली शुद्धता के रेफरेंस प्राइस पर कीमत | हर गहने का कैरेट या फाइननेस लिखा हो |
| रेफरेंस प्राइस | 30 दिन का औसत या पिछले दिन का क्लोजिंग, जो कम हो (IBJA या SEBI-रेगुलेटेड एक्सचेंज) | इस्तेमाल किया गया रेट और तारीख |
| तरीका | सभी ब्रांच में एक जैसा; तरीका और प्राइस लेंडर की वेबसाइट पर जारी | वेबसाइट से मिलान करें |
| सर्टिफिकेट | दो प्रतियों में, लेटरहेड पर, शुद्धता, कुल व नेट वजन, कटौतियां, नुकसान, फोटो और कीमत के साथ | आपकी प्रति आपके पास हो |
| LTV सीमा | ₹2.5 लाख तक के लोन पर 85%, ₹2.5 लाख से ऊपर ₹5 लाख तक 80%, ₹5 लाख से ऊपर 75% | ऑफर किया गया लोन सीमा के अंदर हो |
बुलेट रीपेमेंट लोन में LTV सीमा मैच्योरिटी पर देय कुल रकम, यानी मूलधन और ब्याज, पर लागू होती है, इसलिए हाथ में आने वाली रकम और भी कम होती है। प्रति ग्राम आंकड़ा कैसे निकलता है, यह हमारी गोल्ड लोन प्रति ग्राम रेट गाइड में देखें।
उदाहरण: अंतर कहां से आता है
सुनीता 40 ग्राम कुल वजन का एक हार और चूड़ियां लेकर जाती है। उसे उम्मीद है कि कीमत 22 कैरेट के 36 ग्राम सोने पर आज के ₹12,200 प्रति ग्राम (उदाहरण के लिए) के भाव से लगेगी। लेंडर 22 कैरेट पर 34 ग्राम नेट वजन दर्ज करता है और ₹11,800 प्रति ग्राम का रेफरेंस प्राइस लगाता है, जो 30 दिन का औसत है, क्योंकि यह पिछले दिन के क्लोजिंग से कम है।
| सुनीता का अनुमान | लेंडर का आंकड़ा | |
|---|---|---|
| नेट वजन | 36 ग्राम | 34 ग्राम |
| प्रति ग्राम भाव | ₹12,200 | ₹11,800 |
| सोने की कीमत | ₹4,39,200 | ₹4,01,200 |
| 80% LTV पर अधिकतम लोन | ₹3,51,360 | ₹3,20,960 |
दोनों लोन रकम ₹2.5 लाख से ₹5 लाख के दायरे में आती हैं, इसलिए सीमा 80% है। कीमत में कुल अंतर ₹4,39,200 − ₹4,01,200 = ₹38,000 है, और लोन रकम में ₹38,000 × 80% = ₹30,400।
यह देखने के लिए अंतर को बांटें कि कौन सा हिस्सा विवाद लायक है:
- भाव का आधार: 36 ग्राम × (₹12,200 − ₹11,800) = ₹14,400। यह आरबीआई के फॉर्मूले के मुताबिक है, इसकी शिकायत नहीं बनती।
- वजन: 2 ग्राम × ₹11,800 = ₹23,600। यह जांचने लायक है। लेंडर से हर गहने की कटौती दिखाने और आपके सामने दोबारा तौलने को कहें।
अगर वे 2 ग्राम सचमुच पत्थर और लाख हैं, तो वैल्यूएशन सही है। अगर सर्टिफिकेट में उनका जिक्र नहीं है, या दोबारा तौलने पर रीडिंग अलग आती है, तो उसका विवाद सही है। लोन लेने से पहले हमारे ईएमआई कैलकुलेटर से देखें कि कम लोन पर हर महीने कितना खर्च आएगा।
वैल्यूएशन विवाद कैसे सुलझाएं: एक-एक कदम
साइन करने से पहले
- जांच के दौरान काउंटर पर ही रहें। आरबीआई के नियम के मुताबिक मंजूरी के समय सोने की जांच आपकी मौजूदगी में होनी चाहिए। तौल को ध्यान से देखें और पूछें कि कौन सी जांच की जा रही है।
- हर गहने का अलग ब्योरा मांगें। हर गहने का कुल वजन, पत्थर और फिटिंग की कटौती, नेट वजन और शुद्धता, सिर्फ एक कुल आंकड़ा नहीं।
- पूछें कि कौन सा रेफरेंस प्राइस और किस तारीख का लगाया गया। उस दिन लेंडर की वेबसाइट पर जारी प्राइस से इसका मिलान करें।
- कोई आंकड़ा गलत लगे तो कैलिब्रेटेड तराजू पर दोबारा तौलने को कहें। कुछ मिलीग्राम का अंतर सामान्य है; पूरे ग्राम का नहीं।
- संतुष्ट न हों तो लोन न लें। जब तक आप साइन करके पैसा नहीं लेते, आप बंधे नहीं हैं। गहने वापस लें और जाने से पहले सील और गिनती जांच लें।
- स्वतंत्र जांच कराएं। BIS से मान्यता प्राप्त Assaying and Hallmarking Centres आम लोगों के गहनों की जांच करके रिपोर्ट देते हैं; BIS ने चार गहनों तक की फीस ₹200 बताई है। पूछ लें कि जांच कैसे होगी, क्योंकि कुछ तरीकों में गहने से बहुत छोटा सा नमूना निकाला जाता है।
साइन करने के बाद
- अपनी असेइंग सर्टिफिकेट की प्रति को अपने रिकॉर्ड से मिलाएं: खरीद के बिल, हॉलमार्क (HUID) नंबर और पहले की वैल्यूएशन।
- कुछ ही दिनों में ब्रांच मैनेजर को लिखें, लोन अकाउंट नंबर के साथ, और अगर स्वतंत्र जांच रिपोर्ट है तो उसे साथ लगाएं। अपनी मौजूदगी में दोबारा जांच की मांग करें।
- दोबारा जांच में ज्यादा सोना निकले तो संशोधित मंजूरी या टॉप-अप मांगें। कोई भी बढ़ोतरी LTV सीमा के अंदर ही होगी और लेंडर की रिन्यूअल या टॉप-अप प्रक्रिया से होगी; देखें गोल्ड लोन रिन्यूअल और टॉप-अप।
- सब कुछ लिखित में रखें। फोन कॉल का ओम्बड्समैन के लिए कोई रिकॉर्ड नहीं बचता।
शिकायत कहां करें और समय-सीमा
| स्तर | कैसे | अगले स्तर पर कब जाएं |
|---|---|---|
| 1. ब्रांच | लोन नंबर और सर्टिफिकेट की कॉपी के साथ लिखित शिकायत | एक-दो हफ्ते में हल न हो |
| 2. ग्रिवांस या नोडल ऑफिसर | जानकारी लेंडर की वेबसाइट और लोन के कागजात में | 30 दिन में जवाब न मिले, या जवाब खारिज हो |
| 3. आरबीआई ओम्बड्समैन | cms.rbi.org.in या हेल्पलाइन 14448 | RBI Integrated Ombudsman Scheme, 2026 के तहत लेंडर के अंतिम जवाब या 30 दिन की समय-सीमा, जो बाद में हो, उसके 90 दिन के अंदर शिकायत करें |
ओम्बड्समैन यह सबूत चाहेगा कि आपने पहले लेंडर से शिकायत की थी। मजबूत मामलों में शामिल हैं: सर्टिफिकेट में कटौतियां न लिखी होना, स्वतंत्र जांच से अलग शुद्धता या वजन, लेंडर के जारी रेट से मेल न खाता रेफरेंस प्राइस, और आपकी मौजूदगी के बिना जांच। अगर लेंडर आपकी बात नहीं सुनता, तो बैंक शिकायत का हल नहीं कर रहा वाली हमारी गाइड में ओम्बड्समैन की प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई है।
लेंडर को शिकायत का नमूना
विषय: गिरवी रखे सोने की दोबारा जांच का अनुरोध, लोन अकाउंट [नंबर]
महोदय/महोदया,
मैंने [तारीख] को आपकी [ब्रांच] ब्रांच में [संख्या] सोने के गहने गिरवी रखे थे, लोन अकाउंट [नंबर]। असेइंग सर्टिफिकेट में नेट वजन [34 ग्राम] और शुद्धता [22 कैरेट] दर्ज है। मेरे खरीद के बिल और BIS से मान्यता प्राप्त सेंटर की [तारीख] की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट (संलग्न) में नेट वजन [36 ग्राम] दिखाया गया है।
सर्टिफिकेट में पत्थरों या फिटिंग की गहनेवार कटौती नहीं दिखाई गई है। RBI (Lending Against Gold and Silver Collateral) Directions, 2025 के तहत मेरा अनुरोध है कि मेरी मौजूदगी में दोबारा जांच की जाए, गहनेवार ब्योरा दिया जाए, और इस्तेमाल किया गया रेफरेंस प्राइस और तारीख बताई जाए। गलती की पुष्टि होने पर कृपया वैल्यूएशन संशोधित करें।
सादर, [नाम], [मोबाइल नंबर]
क्या न करें
- खाली या अधूरे सर्टिफिकेट पर साइन न करें। साइन करने से पहले हर गहना, वजन और कटौती भरी होनी चाहिए।
- जांच के दौरान काउंटर से न हटें, और ब्रांच के कर्मचारी के अलावा किसी को गहने न दें। आरबीआई के नियम के मुताबिक सोना सिर्फ ब्रांच में लेंडर के अपने स्टाफ द्वारा ही संभाला जाना चाहिए।
- आज के ज्वेलर भाव पर बहस न करें। रेफरेंस प्राइस का नियम तय है; अपनी ताकत वजन और शुद्धता पर लगाएं।
- अंतर बड़ा हो तो लोन लेकर बाद में ठीक कराने की उम्मीद न रखें। सोना सील होने से पहले दोबारा जांच कराना आसान है।
- "ज्यादा वैल्यूएशन" का वादा करने वाले एजेंटों को पैसे न दें। आरबीआई के तरीके से बाहर कोई भी वैल्यूएशन नियमों का उल्लंघन है, और ज्यादा लोन आगे चलकर LTV सीमा टूटने की वजह बन सकता है।
मुख्य बातें
- लेंडर सिर्फ नेट सोने की कीमत लगाते हैं, उसकी असली शुद्धता के लिए 30 दिन के औसत और पिछले दिन के रेफरेंस प्राइस में से जो कम हो, उस पर।
- आपको जांच के दौरान मौजूद रहने और गहनेवार वजन, शुद्धता, कटौतियों और फोटो वाला सर्टिफिकेट पाने का अधिकार है।
- किसी भी अंतर को भाव, वजन और शुद्धता में बांटें; आम तौर पर सिर्फ वजन और शुद्धता की गलतियां ही विवाद लायक होती हैं।
- BIS से मान्यता प्राप्त सेंटर की स्वतंत्र रिपोर्ट मजबूत सबूत है।
- ब्रांच से ग्रिवांस ऑफिसर तक, और 30 दिन में हल न हो तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन तक शिकायत ले जाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गोल्ड लोन में मेरे गहनों की कीमत बाजार भाव से कम क्यों लगाई गई?
आरबीआई के 2025 के निर्देशों के मुताबिक लेंडर को सिर्फ शुद्ध सोने की मात्रा की कीमत रेफरेंस प्राइस पर लगानी होती है। यह रेफरेंस प्राइस उस शुद्धता के लिए 30 दिन के औसत और पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस में से जो कम हो, वह होता है। पत्थर, मोम, लाख और मेकिंग चार्ज नहीं गिने जाते, इसलिए वैल्यू आम तौर पर ज्वेलर को दी गई कीमत से काफी कम होती है।
क्या लेंडर जब मेरा सोना जांचे तब मैं वहां मौजूद रह सकता हूं?
हां। आरबीआई के Lending Against Gold and Silver Collateral Directions, 2025 के तहत लोन मंजूरी के समय सोने की जांच (असेइंग) के दौरान लेंडर को कर्जदार की मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी, और पत्थरों व फिटिंग की कटौती समझानी होगी।
कौन सा दस्तावेज बताता है कि मेरे सोने की कीमत कैसे तय हुई?
लेंडर को आपको दो प्रतियों में असेइंग सर्टिफिकेट देना होगा, जिसमें शुद्धता, कुल वजन, नेट वजन, कटौतियां, कोई नुकसान, फोटो और कीमत लिखी हो। साइन करने से पहले इसे जांच लें, क्योंकि आगे किसी भी विवाद में यही आपका मुख्य सबूत होगा।
अगर मैं वैल्यूएशन से सहमत नहीं हूं तो क्या लोन लेने से मना कर सकता हूं?
हां। जब तक आप साइन करके पैसा नहीं लेते, आप किसी चीज से बंधे नहीं हैं। आप अपने गहने वापस ले सकते हैं, उनकी स्वतंत्र जांच करा सकते हैं और किसी दूसरे लेंडर के पास जा सकते हैं।
गोल्ड लोन में गलत वैल्यूएशन की शिकायत कहां करें?
पहले ब्रांच को लिखें, फिर लेंडर के ग्रिवांस या नोडल ऑफिसर को। अगर 30 दिन में जवाब नहीं मिलता या जवाब संतोषजनक नहीं है, तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन के पास शिकायत करें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।