आउटस्टेशन चेक का पैसा नहीं आया? बैंक से क्या मांगें
दूसरे शहर का चेक जमा किया पर पैसा नहीं आया? 2026 में सीटीएस क्लियरिंग कैसे होती है, बैंक से कौन से रेफरेंस मांगें, देरी का मुआवजा और शिकायत कहां करें।

इस लेख में
"मैंने दस दिन पहले दूसरे शहर के बैंक का चेक जमा किया था और अब तक पैसा नहीं आया।" अगर आपके साथ भी ऐसा है, तो एक लाइन में हल यह है: अपनी ब्रांच से लिखित में चेक का मौजूदा स्टेटस मांगें, साथ में उसका क्लियरिंग या कलेक्शन रेफरेंस, उसे पेश किए जाने की तारीख और बैंक की चेक कलेक्शन पॉलिसी के तहत वादा की गई समय-सीमा, और देरी हुई हो तो मुआवजा मांगें। आज ज्यादातर चेक एक-दो दिन में क्लियर हो जाते हैं, इसलिए हफ्ते भर अटका चेक आमतौर पर इसका मतलब है कि वह या तो लौट गया, किसी सवाल पर रुका है, मैन्युअल कलेक्शन के लिए भेजा गया है, या खो गया है।
इस शब्द पर एक छोटी बात: पुराना "आउटस्टेशन चेक", जो कलेक्शन के लिए कागज के रूप में दूसरे शहर जाता था, अब लगभग खत्म हो चुका है। नीचे दी गई स्थिति अक्टूबर 2026 तक की है; कलेक्शन पॉलिसी हर बैंक में अलग होती है, इसलिए अपने बैंक की देखें।
दूसरे शहर के चेक अब कैसे क्लियर होते हैं
| चरण | आपके लिए इसका मतलब |
|---|---|
| सीटीएस (इमेज से क्लियरिंग) | आपका बैंक कागज नहीं, चेक की इमेज भुगतान करने वाले बैंक को भेजता है |
| पूरे भारत में कवरेज | आरबीआई ने बैंकों से 30 सितंबर 2021 तक सभी ब्रांच को सीटीएस में लाने को कहा |
| नेशनल ग्रिड ("वन नेशन वन ग्रिड") | क्षेत्रीय ग्रिड मिलाकर एक कर दिए गए, इसलिए दूसरे शहर का चेक लोकल की तरह क्लियर होता है, आमतौर पर बिना आउटस्टेशन चार्ज के |
| लगातार क्लियरिंग (4 अक्टूबर 2025 से) | चेक दिन में ही स्कैन होकर पेश होते हैं, और पैसा आमतौर पर सेटलमेंट के कुछ घंटों में आ जाता है |
| फेज 2 (तीन घंटे में कन्फर्मेशन) | आरबीआई ने दिसंबर 2025 में अगले आदेश तक टाल दिया |
| गैर-मानक इंस्ट्रूमेंट | जो चेक सीटीएस से नहीं जा सकते, और विदेश में देय चेक, बैंक की अपनी समय-सीमा के तहत कलेक्शन के लिए भेजे जाते हैं |
आरबीआई ने लोकल और आउटस्टेशन कलेक्शन की अनिवार्य समय-सीमा 2004 में ही हटा दी थी और बैंकों पर छोड़ दिया कि वे इसे बोर्ड से मंजूर चेक कलेक्शन पॉलिसी में तय करें, जिसे प्रकाशित करना जरूरी है। समय-सीमा और मुआवजे के लिए यही पॉलिसी आपका आधार दस्तावेज है।
चेक क्यों अटक सकता है
- चेक लौट गया, लेकिन आपको मेमो नहीं मिला। रिटर्न मेमो और चेक ब्रांच में पड़े हो सकते हैं। सिग्नेचर मेल न खाने, तारीख की गलती या पैसे कम होने पर चेक लौटना आम है; देखें चेक बाउंस: क्या करें।
- चेक किसी सवाल की वजह से रुका है। पॉजिटिव पे के तहत बड़ी रकम के चेक के लिए भुगतान करने वाले बैंक को पुष्टि चाहिए हो सकती है, या इमेज साफ नहीं थी।
- ड्रॉप बॉक्स में देर से या गलती के साथ डाला गया, जैसे पे-इन स्लिप पर गलत अकाउंट नंबर।
- चेक सीटीएस के हिसाब से नहीं था, इसलिए क्लियरिंग से बाहर कलेक्शन के लिए गया, जिसमें ज्यादा समय लगता है।
- चेक खो गया ब्रांच में, स्कैनिंग हब तक जाते हुए, या भुगतान करने वाले बैंक में।
स्टेप बाय स्टेप: क्या करें
पैसा आने की उम्मीद वाली तारीख के 1-2 दिन बाद
- अपना स्टेटमेंट और एसएमएस देखें कि पैसा आया या रिटर्न की एंट्री हुई। बैंक स्टेटमेंट कैसे पढ़ें पर हमारी गाइड बताती है कि क्लियरिंग की एंट्री कैसे लिखी होती हैं।
- जमा करने का सबूत ढूंढें: बैंक की मुहर वाली पे-इन स्लिप की काउंटरफॉयल, या काउंटर पावती। आरबीआई बैंकों से कहता है कि ड्रॉप बॉक्स के साथ काउंटर पावती की सुविधा भी दें, और यह बात ड्रॉप बॉक्स पर लिखें।
तीसरे दिन से: खास रेफरेंस मांगें
- ब्रांच जाएं या लिखकर दें और ये मांगें:
| मांगने वाला रेफरेंस | यह क्यों जरूरी है |
|---|---|
| चेक स्कैन होने और पेश किए जाने की तारीख और समय | पता चलता है कि देरी आपके बैंक में है या भुगतान करने वाले बैंक में |
| क्लियरिंग बैच या प्रेजेंटेशन रेफरेंस | स्टाफ इससे सीटीएस सिस्टम में चेक ढूंढ सकता है |
| क्लियरिंग से बाहर भेजा गया हो तो कलेक्शन शेड्यूल या रेफरेंस नंबर | मैन्युअल कलेक्शन का पीछा करने के लिए जरूरी |
| लौटा हो तो रिटर्न मेमो और वजह | आपका सबूत, और चेक बाउंस हुआ हो तो कानूनी समय-सीमा की शुरुआत |
| बैंक की चेक कलेक्शन पॉलिसी की कॉपी | इसमें समय-सीमा, मुआवजा और रास्ते में खोने के नियम लिखे होते हैं |
| शिकायत या सर्विस रिक्वेस्ट नंबर | मामला आगे ले जाने के लिए जरूरी |
- चेक जारी करने वाले को फोन करें (जिसने आपको चेक दिया) और पूछें कि क्या उनके खाते से पैसा कटा। अगर कटा है लेकिन आपके खाते में नहीं आया, तो समस्या दोनों बैंकों के बीच है, और यह बात अपनी शिकायत में लिखें।
अगर चेक खो गया
- ज्यादातर बैंकों की कलेक्शन पॉलिसी के तहत, खोने का पता चलते ही बैंक को आपको बताना होता है, ताकि चेक जारी करने वाला स्टॉप पेमेंट करके नया चेक दे सके। कई पॉलिसी डुप्लीकेट इंस्ट्रूमेंट लेने का वाजिब खर्च, तय सीमा तक, लौटाती हैं और देरी के लिए ब्याज भी देती हैं। दोनों मांगें।
देरी का मुआवजा: उदाहरण से समझें
कई बैंक अपनी बताई समय-सीमा से ज्यादा देरी के दिनों के लिए सेविंग्स बैंक रेट पर ब्याज देते हैं। मान लीजिए:
- चेक की रकम: ₹2,00,000
- बैंक की वादा की गई क्रेडिट तारीख: 10 नवंबर
- असल में पैसा आया: 20 नवंबर (10 दिन देर से)
- आपके खाते पर सेविंग्स रेट (उदाहरण): 2.5% सालाना
मुआवजा = ₹2,00,000 × 2.5% × 10 ÷ 365 = ₹137 (राउंड करके)।
रकम छोटी है, लेकिन इसे मांगने से बैंक को देरी का हिसाब देना पड़ता है। अगर इस देरी की वजह से आपका जारी किया कोई चेक बाउंस हुआ, तो बैंक से बाउंस चार्ज भी वापस करने को कहें।
शिकायत कहां करें
| समस्या | कहां जाएं |
|---|---|
| बैंक की समय-सीमा के बाद भी न स्टेटस मिला, न पैसा | ब्रांच मैनेजर, फिर बैंक का ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर |
| बैंक कहता है चेक खो गया, लेकिन मुआवजा नहीं | ग्रीवांस या नोडल ऑफिसर, कलेक्शन पॉलिसी का हवाला देकर |
| 30 दिन में जवाब नहीं, या जवाब से संतुष्ट नहीं | cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन (हेल्पलाइन 14448) |
| चेक खोने या लौटने के बाद जारी करने वाला नया चेक देने से मना करे | कानूनी रास्ते; चेक बाउंस वाली गाइड देखें |
इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम, 2026 के तहत ओम्बड्समैन सेवा में कमी के मामले देख सकता है, जैसे चेक कलेक्शन में देरी या चेक खोना। पहले आपको बैंक से लिखित शिकायत करनी होगी। अगर बैंक टालता रहे, तो देखें बैंक शिकायत हल नहीं कर रहा।
कॉपी करने लायक शिकायत
सेवा में,
शाखा प्रबंधक / ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर,
[बैंक का नाम], [ब्रांच]
विषय: [तारीख] को जमा किया चेक क्रेडिट नहीं हुआ – स्टेटस और
मुआवजे हेतु अनुरोध
मैंने [बैंक, ब्रांच, शहर] का चेक नं. [नंबर], दिनांक [तारीख], ₹[रकम]
का, [तारीख] को अपने खाता नं. [नंबर] में जमा किया था
(काउंटरफॉयल/पावती संलग्न)। यह रकम अब तक क्रेडिट नहीं हुई है और
मुझे कोई रिटर्न मेमो भी नहीं दिया गया है।
कृपया लिखित में बताएं: (1) चेक पेश करने की तारीख और क्लियरिंग
रेफरेंस या कलेक्शन रेफरेंस, (2) मौजूदा स्टेटस, (3) चेक लौटा हो तो
रिटर्न मेमो, और (4) अपनी चेक कलेक्शन पॉलिसी की कॉपी। अगर देरी
आपकी वादा की गई समय-सीमा से ज्यादा है, तो पॉलिसी के अनुसार
मुआवजा क्रेडिट करें।
[नाम], [मोबाइल], [तारीख]
क्या न करें
- चेक जारी करने वाले से दूसरा चेक जमा न करें जब तक पक्का न हो जाए कि पहला रुक गया या लौट गया है; दोनों क्लियर हो सकते हैं।
- काउंटरफॉयल न फेंकें जब तक पैसा आ न जाए और आप जांच न लें।
- ओटीपी, पिन या नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी को न बताएं जो फोन करके चेक "जल्दी" क्लियर करवाने की पेशकश करे। क्लियरिंग के लिए बैंक को इनकी कभी जरूरत नहीं होती।
- ऑनलाइन "बैंक कस्टमर केयर" नंबर न खोजें; ठग फर्जी लिस्टिंग चलाते हैं। अपनी पासबुक, कार्ड या बैंक की आधिकारिक साइट पर दिया नंबर इस्तेमाल करें।
मुख्य बातें
- दूसरे शहरों के ज्यादातर चेक अब राष्ट्रीय सीटीएस ग्रिड से क्लियर होते हैं, लगातार क्लियरिंग में आमतौर पर एक-दो दिन में।
- लंबी देरी का मतलब आमतौर पर चेक लौटना, कोई सवाल, सीटीएस से बाहर मैन्युअल कलेक्शन, या चेक खोना होता है।
- लिखित में चेक पेश करने की तारीख, क्लियरिंग या कलेक्शन रेफरेंस, रिटर्न मेमो और बैंक की चेक कलेक्शन पॉलिसी मांगें।
- बैंक आमतौर पर अपनी समय-सीमा से ज्यादा देरी पर सेविंग्स रेट से ब्याज देते हैं, और चेक खोने पर डुप्लीकेट चेक का खर्च लौटाते हैं।
- ग्रीवांस ऑफिसर के पास जाएं, फिर 30 दिन बाद cms.rbi.org.in पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में आउटस्टेशन चेक क्लियर होने में कितना समय लगता है?
ज्यादातर चेक अब सीटीएस के हिसाब से बने होते हैं और एक ही राष्ट्रीय सीटीएस ग्रिड से क्लियर होते हैं, इसलिए दूसरे शहर के बैंक का चेक आमतौर पर लोकल चेक की तरह माना जाता है। 4 अक्टूबर 2025 से आरबीआई की लगातार क्लियरिंग की वजह से पैसा अक्सर उसी दिन या अगले कामकाजी दिन आ जाता है। जो गैर-मानक इंस्ट्रूमेंट सीटीएस से बाहर कलेक्शन के लिए भेजे जाते हैं, उनमें ज्यादा समय लगता है और वे बैंक की चेक कलेक्शन पॉलिसी के हिसाब से चलते हैं।
क्या बैंक अब भी आउटस्टेशन चेक का चार्ज लेते हैं?
जब चेक सीटीएस ग्रिड से क्लियर होता है, तो आमतौर पर आउटस्टेशन चेक कलेक्शन चार्ज नहीं लगता। क्लियरिंग से बाहर कलेक्शन के लिए भेजे गए इंस्ट्रूमेंट, जैसे कुछ नॉन-सीटीएस या विदेशी चेक, पर बैंक की चार्ज लिस्ट के हिसाब से चार्ज लग सकता है।
अगर चेक का पैसा देर से आए तो क्या बैंक मुआवजा देगा?
बैंक कलेक्शन की समय-सीमा और मुआवजा अपनी बोर्ड से मंजूर चेक कलेक्शन पॉलिसी में तय करते हैं। कई बैंक अपनी बताई समय-सीमा से ज्यादा देरी के दिनों के लिए सेविंग्स बैंक रेट पर ब्याज देते हैं, अक्सर बिना अलग क्लेम के। पॉलिसी और मुआवजा लिखित में मांगें।
अगर मेरा चेक रास्ते में खो जाए तो बैंक को क्या करना चाहिए?
बैंकों की चेक कलेक्शन पॉलिसी कहती है कि उन्हें आपको तुरंत बताना चाहिए, ताकि आप चेक जारी करने वाले से स्टॉप पेमेंट करवाकर नया चेक ले सकें। कई बैंक देरी के लिए ब्याज भी देते हैं और डुप्लीकेट इंस्ट्रूमेंट लेने का वाजिब खर्च, पॉलिसी में तय सीमा तक, लौटाते हैं।
चेक जमा करते समय कौन से रेफरेंस लेने चाहिए?
तारीख और मुहर वाली काउंटरफॉयल या काउंटर पावती, चेक नंबर, रकम, जिस बैंक और ब्रांच का चेक है, और जमा करने की तारीख संभालकर रखें। अगर बैंक चेक को क्लियरिंग से बाहर कलेक्शन के लिए भेजता है, तो कलेक्शन रेफरेंस या शेड्यूल नंबर मांगें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।