TReDS पर खरीदार की मंजूरी अटकी? MSME सेलर क्या जांचें
TReDS पर इनवॉइस डाला पर खरीदार ने मंजूर नहीं किया? आम कारण, सेलर की चेकलिस्ट, इंतजार की लागत रुपये में, और MSME कैसे शिकायत आगे बढ़ाएं।

इस लेख में
अगर आपका इनवॉइस TReDS प्लेटफॉर्म पर "खरीदार की मंजूरी बाकी" स्टेटस में पड़ा है, तो खरीदार के मंजूर करने तक फाइनेंसर बोली नहीं लगा सकते, इसलिए हल लगभग हमेशा खरीदार की तरफ होता है: परचेज ऑर्डर या गुड्स-रिसीट का मेल न खाना, क्वालिटी जांच बाकी, GST डेटा का फर्क, या अटकी अंदरूनी मंजूरी। सेलर के रूप में आपका काम है अपने अपलोड की गलतियां हटाना, पता करना कि कौन सा मंजूरी स्टेप अटका है, और MSMED एक्ट की 45 दिन की घड़ी खत्म होने से पहले लिखित में मामला आगे बढ़ाना। यह गाइड वही चेकलिस्ट देती है और देरी की लागत दिखाती है।
TReDS मंजूरी कैसे काम करती है
TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) आरबीआई से अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है, जहां MSME सेलर के इनवॉइस बैंक और NBFC नीलामी के जरिए फाइनेंस करते हैं। मौजूदा नियम रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) निर्देश, 2026 हैं, जो 23 जून 2026 को जारी हुए।
आम प्रक्रिया:
- सेलर (या कभी खरीदार) इनवॉइस अपलोड करता है, जिससे फैक्टरिंग यूनिट बनती है।
- खरीदार प्लेटफॉर्म पर मंजूर करता है, रकम और ड्यू डेट की पुष्टि करते हुए।
- फाइनेंसर डिस्काउंट रेट की बोली लगाते हैं; सेलर एक बोली चुनता है।
- फाइनेंसर सेलर को भुगतान करता है, आमतौर पर एक-दो कारोबारी दिनों में।
- ड्यू डेट पर खरीदार फाइनेंसर को भुगतान करता है।
2026 के निर्देशों की दो बातें बताती हैं कि मंजूरी ही अड़चन क्यों है। फैक्टरिंग यूनिट मंजूर होने के बाद खरीदार पर ड्यू डेट पर भुगतान की बिना शर्त जिम्मेदारी होती है, और क्वालिटी या किसी और कारण से सेट-ऑफ का विकल्प नहीं होता। और फाइनेंसिंग सेलर पर बिना रिकोर्स होती है। इसलिए खरीदार "accept" दबाने से पहले ध्यान से जांचते हैं, क्योंकि उसके बाद वे बाद की क्वालिटी शिकायत भुगतान से नहीं काट सकते।
बड़ी कंपनियों को जुड़ना होता है: ₹250 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को TReDS पर रजिस्टर करना जरूरी है (नवंबर 2024 में सीमा ₹500 करोड़ से घटाई गई)। लेकिन रजिस्ट्रेशन खरीदार को किसी इनवॉइस को जल्दी मंजूर करने के लिए मजबूर नहीं करता।
मंजूरी में देरी क्यों होती है
| कारण | आपको क्या दिखता है | हल क्या है |
|---|---|---|
| PO से मेल नहीं | खरीदार कहता है रकम या रेट परचेज ऑर्डर से अलग है | PO से मेल खाता संशोधित इनवॉइस या क्रेडिट नोट |
| गुड्स रिसीट दर्ज नहीं | खरीदार के स्टोर ने रसीद (GRN) दर्ज नहीं की | खरीदार के स्टोर और अकाउंट्स टीम को डिलीवरी प्रूफ |
| क्वालिटी जांच बाकी | माल जांच में है या आंशिक रिजेक्ट | इंस्पेक्शन रिपोर्ट; मंजूर हिस्सा अलग करें |
| GST डेटा फर्क | GSTIN, इनवॉइस नंबर, वैल्यू या ई-इनवॉइस संदर्भ अलग | अपलोड सुधारें; जरूरत हो तो GST रिटर्न संशोधित करें |
| ड्यू डेट शर्तों से बाहर | ड्यू डेट खरीदार की अनुमति से लंबी या छोटी | तय ड्यू डेट के साथ दोबारा अपलोड |
| डुप्लिकेट या पहले से भुगतान | प्लेटफॉर्म या खरीदार डुप्लिकेट बताता है | जांचें कि खरीदार ने TReDS के बाहर भुगतान तो नहीं किया |
| अंदरूनी मंजूरी अटकी | मेकर ने डाला, चेकर ने मंजूर नहीं किया | मंजूरी देने वाले का नाम और एस्केलेशन संपर्क |
| खरीदार ऑनबोर्ड नहीं या निष्क्रिय | खरीदार की यूजर लिस्ट खाली या KYC बाकी | खरीदार से ऑनबोर्डिंग पूरी करवाएं |
खरीदार मंजूरी में कितना समय ले सकता है और बिना मंजूरी वाली फैक्टरिंग यूनिट कब खत्म होती है, यह हर प्लेटफॉर्म के ऑपरेटिंग नियमों और खरीदार की सेटिंग पर निर्भर है। तय दिनों की संख्या मानने की बजाय स्टेटस स्क्रीन और प्लेटफॉर्म के FAQ देखें।
खरीदार के पीछे लगने से पहले सेलर की चेकलिस्ट
- फैक्टरिंग यूनिट डिटेल: इनवॉइस नंबर, तारीख, रकम, दोनों पक्षों का GSTIN और ड्यू डेट बिल्कुल टैक्स इनवॉइस जैसी
- PO संदर्भ: खरीदार का PO नंबर और लाइन आइटम मेल खाते हों
- डिलीवरी सबूत: साइन किया डिलीवरी चालान, ई-वे बिल, लॉरी रसीद
- गुड्स रिसीट: खरीदार से GRN नंबर मांगें
- आंशिक मंजूरी: अगर सिर्फ हिस्से पर विवाद है, तो खरीदार से बिना विवाद वाली रकम मंजूर करने को कहें, बाकी के लिए क्रेडिट नोट या अलग यूनिट
- बैंक खाता: प्लेटफॉर्म का पैसा सिर्फ सेलर के अपने रजिस्टर्ड खाते में जाता है, इसलिए खाता डिटेल और KYC अपडेट रखें
- उद्यम रजिस्ट्रेशन: इसे चालू रखें; प्लेटफॉर्म MSME स्टेटस की जांच करता है
उदाहरण: इंतजार की लागत
सिर्फ समझाने के लिए; TReDS पर डिस्काउंट रेट खरीदार की क्रेडिट रेटिंग और बाजार पर निर्भर करते हैं। पुणे की एक इंजीनियरिंग यूनिट ₹8 लाख का इनवॉइस अपलोड करती है, जिसकी ड्यू डेट इनवॉइस तारीख से 60 दिन बाद है।
अगर खरीदार 5वें दिन मंजूर करे: ड्यू डेट तक 55 दिन बचते हैं। 9% सालाना डिस्काउंट रेट पर फाइनेंसर का डिस्काउंट करीब ₹8,00,000 × 9% × 55 / 365 = ₹10,849 है, और सेलर को लगभग ₹7.89 लाख मिलते हैं (प्लेटफॉर्म फीस से पहले)।
अगर मंजूरी 30वें दिन आए: सिर्फ 30 दिन बचते हैं, तो डिस्काउंट घटकर करीब ₹5,918 हो जाता है। यह सस्ता दिखता है, लेकिन सेलर ने 25 दिन ज्यादा इंतजार किया। अगर उसने यह अंतर 11% वाले कैश क्रेडिट खाते से भरा, तो ₹8 लाख पर 25 दिन का ब्याज करीब ₹8,00,000 × 11% × 25 / 365 = ₹6,027 है।
| स्थिति | दिया गया डिस्काउंट | इंतजार में अतिरिक्त ब्याज | कुल लागत |
|---|---|---|---|
| 5वें दिन मंजूर | ₹10,849 | शून्य | ₹10,849 |
| 30वें दिन मंजूर | ₹5,918 | ₹6,027 | ₹11,945 |
देरी वाले केस में करीब ₹1,100 ज्यादा लगते हैं, और बड़ी लागत अनिश्चितता है: जिस पैसे की कोई तारीख नहीं, उसके भरोसे सेलर कच्चे माल की खरीद या सैलरी प्लान नहीं कर सकता। क्रेडिट शर्तों के पूरे हिसाब के लिए देखें 30 दिन की उधारी पर बेचने की लागत।
खरीदार और प्लेटफॉर्म से क्या पूछें
खरीदार के अकाउंट्स या वेंडर डेस्क से:
- कौन सा स्टेप बाकी है: GRN, क्वालिटी, PO मिलान या मंजूरी?
- मंजूरी कौन देगा, और किस तारीख तक?
- अगर इनवॉइस के हिस्से पर विवाद है, तो क्या बिना विवाद वाला हिस्सा अभी मंजूर हो सकता है?
- क्या आपकी कंपनी में वेंडर शिकायत या MSME वेंडर सेल है?
प्लेटफॉर्म सपोर्ट टीम से:
- क्या फैक्टरिंग यूनिट खरीदार के सक्रिय खाते से सही जुड़ी है?
- क्या खरीदार ने इसे खोला या रिजेक्ट किया, किस टिप्पणी के साथ?
- तय तारीख तक मंजूर न होने पर क्या यूनिट खत्म हो जाएगी, और क्या दोबारा अपलोड हो सकती है?
शिकायत आगे बढ़ाने का रास्ता
- इनवॉइस, डिलीवरी प्रूफ और TReDS संदर्भ के साथ खरीदार को लिखित रिमाइंडर।
- खरीदार के सीनियर फाइनेंस या प्रोक्योरमेंट प्रमुख, और अगर है तो उसका MSME वेंडर सेल।
- प्लेटफॉर्म की तकनीकी या ऑनबोर्डिंग दिक्कतों के लिए प्लेटफॉर्म का शिकायत चैनल।
- MSME ODR पोर्टल, अगर आप उद्यम रजिस्ट्रेशन वाले माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज हैं और खरीदार ने MSMED एक्ट की समय सीमा में भुगतान नहीं किया: माल या सेवा स्वीकार करने से ज्यादा से ज्यादा 45 दिन, या लिखित समझौता न हो तो 15 दिन। अक्टूबर 2026 तक MSME मंत्रालय का यह पोर्टल देरी-भुगतान के नए मामले लेता है (अक्टूबर 2025 से नए मामलों के लिए इसने MSME समाधान की जगह ली), जो राज्य की माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल तक जाते हैं। देरी वाली रकम पर आरबीआई बैंक दर के तीन गुना पर चक्रवृद्धि ब्याज लगता है।
आरबीआई लोकपाल आरबीआई द्वारा रेगुलेटेड संस्थाओं की सेवा की शिकायतें देखता है, जैसे बैंक का आपके खाते में गड़बड़ी करना। खरीदार की धीमी मंजूरी व्यावसायिक मामला है और आमतौर पर इसके दायरे से बाहर है।
आम गलतियां
- माल मिलने और जांच से पहले अपलोड करना, फिर ऐसे GRN का इंतजार जो अभी हुआ ही नहीं
- रकम राउंड करना या GST इनवॉइस से अलग इनवॉइस नंबर डालना
- तय क्रेडिट अवधि से मेल न खाती ड्यू डेट चुनना
- आंशिक विवाद वाले इनवॉइस को न बांटना
- अभी मंजूर न हुए TReDS पैसे के भरोसे सप्लायर उधारी या सैलरी तय कर देना
बैंक इनवॉइस डिस्काउंटिंग और फैक्टरिंग से TReDS की तुलना के लिए पढ़ें इनवॉइस डिस्काउंटिंग बनाम फैक्टरिंग बनाम TReDS। अगर अभी तक उद्यम पर रजिस्ट्रेशन नहीं किया है, तो देखें उद्यम रजिस्ट्रेशन और MSME लोन के फायदे।
मुख्य बातें
- खरीदार के फैक्टरिंग यूनिट मंजूर करने तक फाइनेंसर बोली नहीं लगा सकते; ज्यादातर देरी PO, GRN, क्वालिटी या GST के फर्क से होती है।
- मंजूरी के बाद खरीदार को ड्यू डेट पर बिना सेट-ऑफ भुगतान करना होता है, और फाइनेंसिंग सेलर पर बिना रिकोर्स है।
- पहले अपने अपलोड की गलतियां सुधारें, फिर खरीदार से पूछें कि ठीक कौन सा स्टेप बाकी है।
- देर से मंजूरी आपकी अपनी वर्किंग कैपिटल पर ब्याज बढ़ाती है, भले TReDS डिस्काउंट कम दिखे।
- माइक्रो और स्मॉल सेलर MSMED एक्ट की सीमा के बाद बकाया इनवॉइस MSME ODR पोर्टल से उठा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरा TReDS इनवॉइस अब भी खरीदार की मंजूरी के लिए पेंडिंग क्यों है?
सबसे आम कारण हैं परचेज ऑर्डर या गुड्स रिसीट से मेल न खाना, क्वालिटी जांच बाकी होना, GST जानकारी का फर्क, खरीदार की शर्तों से बाहर की ड्यू डेट, या खरीदार की अंदरूनी मंजूरी में देरी। पहले फैक्टरिंग यूनिट की डिटेल जांचें, फिर खरीदार की अकाउंट्स टीम से पूछें कि कौन सा स्टेप बाकी है।
क्या TReDS इनवॉइस मंजूर करने के बाद खरीदार भुगतान से मना कर सकता है?
आरबीआई के TReDS निर्देशों के तहत फैक्टरिंग यूनिट मंजूर होने के बाद खरीदार पर ड्यू डेट पर भुगतान की बिना शर्त जिम्मेदारी होती है, और माल की क्वालिटी या किसी और कारण से सेट-ऑफ का विकल्प नहीं होता। इसीलिए खरीदार मंजूरी से पहले ध्यान से जांचते हैं।
क्या TReDS फाइनेंसिंग MSME सेलर पर रिकोर्स के साथ है या बिना?
TReDS पर डिस्काउंट हुई फैक्टरिंग यूनिट सेलर पर बिना रिकोर्स होती है। अगर खरीदार ड्यू डेट पर फाइनेंसर को भुगतान नहीं करता, तो फाइनेंसर वह पैसा MSME सेलर से नहीं मांग सकता।
क्या इनवॉइस TReDS पर होने पर भी MSME का 45 दिन भुगतान नियम लागू होता है?
MSMED एक्ट की माल या सेवा स्वीकार करने से 45 दिन की सीमा खरीदार की भुगतान जिम्मेदारी पर लागू होती है, चाहे आप TReDS इस्तेमाल करें या नहीं। अगर इनवॉइस न मंजूर हो और समय पर भुगतान न हो, तो उद्यम रजिस्ट्रेशन वाला माइक्रो या स्मॉल सेलर MSME ODR पोर्टल से मामला उठा सकता है।
क्या TReDS मंजूरी में देरी की शिकायत आरबीआई लोकपाल से कर सकते हैं?
खरीदार की मंजूरी में देरी आपके और खरीदार के बीच का व्यावसायिक मामला है, बैंक की सेवा में कमी नहीं, इसलिए लोकपाल आमतौर पर सही रास्ता नहीं है। तकनीकी दिक्कत के लिए प्लेटफॉर्म सपोर्ट, खरीदार का एस्केलेशन रास्ता, और देरी से भुगतान के लिए MSME ODR पोर्टल इस्तेमाल करें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।