यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट फ्रॉड: गलती से मंजूर किया तो क्या करें
गलती से यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट मंजूर कर दी? तुरंत 1930 और बैंक को रिपोर्ट करें। जानें यह फ्रॉड कैसे होता है, आपके अधिकार और शिकायत का तरीका।

इस लेख में
"एक खरीदार ने कहा कि वह मेरे पुराने सोफे के पैसे भेजेगा, एक रिक्वेस्ट आई, मैंने पिन डाला, और मेरे खाते से ₹15,000 चले गए।" अगर अभी-अभी ऐसा हुआ है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, फिर अपने बैंक की 24x7 फ्रॉड लाइन पर ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट करें। आपकी फुर्ती से ही ठग के बैंक को पैसा फ्रीज करने का समय मिलता है।
यह चाल इसलिए काम करती है क्योंकि कलेक्ट रिक्वेस्ट देखने में पेमेंट नोटिफिकेशन जैसी लगती है। पर ऐसा है नहीं। कलेक्ट रिक्वेस्ट में आपसे पैसे मांगे जाते हैं, और आपका यूपीआई पिन वह दस्तखत है जिससे पैसा निकलता है। इस गाइड में बताया गया है कि NPCI के 2025 के बदलाव के बाद यह स्कैम कैसे होता है, अक्टूबर 2026 के हिसाब से आप क्या वापस पा सकते हैं, और भेजने लायक शिकायत क्या हो। यूपीआई फ्रॉड की पूरी जानकारी के लिए हमारी गाइड यूपीआई स्कैम और क्या करें देखें।
कलेक्ट रिक्वेस्ट कैसे काम करती है, और स्कैम क्यों कामयाब होता है
यूपीआई में पेमेंट शुरू करने के दो तरीके हैं:
| पुश (पे) | पुल (कलेक्ट रिक्वेस्ट) | |
|---|---|---|
| कौन शुरू करता है | आप, क्यूआर स्कैन करके या यूपीआई आईडी डालकर | सामने वाला, आपको रिक्वेस्ट भेजकर |
| आपको क्या दिखता है | पेमेंट स्क्रीन जो आपने खुद खोली | एक नोटिफिकेशन कि किसी ने पैसे "रिक्वेस्ट" किए हैं |
| आपका पिन क्या करता है | पैसा भेजता है | पैसा भेजता है |
| अक्टूबर 2026 तक कौन भेज सकता है | कोई भी | सिर्फ मर्चेंट; व्यक्ति-से-व्यक्ति कलेक्ट रिक्वेस्ट 1 अक्टूबर 2025 से बंद |
| फ्रॉड का खतरा | कम, क्योंकि आप शुरू करते हैं | ज्यादा, क्योंकि ठग शुरू करता है |
NPCI के 29 जुलाई 2025 के सर्कुलर ने फ्रॉड का हवाला देते हुए बैंकों और यूपीआई ऐप्स से कहा कि 1 अक्टूबर 2025 के बाद व्यक्ति-से-व्यक्ति कलेक्ट ट्रांजैक्शन शुरू, रूट या प्रोसेस न करें। उससे पहले P2P कलेक्ट रिक्वेस्ट पर ₹2,000 प्रति रिक्वेस्ट की सीमा थी, लेकिन ठग बस कई रिक्वेस्ट भेज देते थे। मर्चेंट कलेक्ट रिक्वेस्ट जारी हैं, जैसे जब कोई शॉपिंग या ट्रैवल साइट आपसे यूपीआई ऐप में पेमेंट मंजूर करने को कहती है।
स्कैम खत्म नहीं हुआ, बस उसका रूप बदल गया है। अब ये आम तरीके हैं:
- नकली मर्चेंट रिक्वेस्ट। ठग किसी मर्चेंट अकाउंट (कभी-कभी म्यूल बिजनेस) से "refund", "cashback" या "KYC fee" लिखी रिक्वेस्ट भेजता है।
- "पैसे पाने के लिए स्कैन करें" वाले क्यूआर कोड। OLX जैसी बिक्री या "इनाम" के नाम पर चैट पर भेजे जाते हैं। स्कैन करके पिन डालते ही पैसा ठग को चला जाता है।
- पेमेंट लिंक, जो पहले से भरी रकम के साथ आपका यूपीआई ऐप खोल देते हैं।
- नकली कस्टमर केयर, जो आपको "रिफंड मंजूर करने" के स्टेप बताता है जबकि असल में आप पेमेंट मंजूर कर रहे होते हैं।
इन सबसे बचने का एक नियम: पैसे पाने के लिए आप कभी यूपीआई पिन नहीं डालते।
स्टेप-बाय-स्टेप: क्या करें
पहले घंटे में
- 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल संबंधित बैंकों को अलर्ट करता है ताकि वे पैसे पर रोक लगाने की कोशिश कर सकें। एक्नॉलेजमेंट नंबर नोट करें।
- अपने बैंक को रिपोर्ट करें, उसकी फ्रॉड हेल्पलाइन, ऐप या नेट बैंकिंग से। बैंकों को 24x7 रिपोर्टिंग चैनल देने होते हैं। शिकायत का रेफरेंस नंबर मांगें।
- यूपीआई ऐप में उसी ट्रांजैक्शन पर विवाद दर्ज करें, वजह में "fraud" या "unauthorised" चुनें।
- अपने ऐप की रिक्वेस्ट स्क्रीन से भेजने वाले को ब्लॉक करें, और आगे के किसी मैसेज का जवाब न दें।
- अपना यूपीआई पिन बदलें, अगर आपने उसे अपने यूपीआई ऐप के अलावा कहीं और डाला था, और ठग के कहने पर डाउनलोड किया कोई भी ऐप अनइंस्टॉल करें।
पहले दिन
- सबूत जमा करें: रिक्वेस्ट के स्क्रीनशॉट (भेजने वाले का नाम और यूपीआई आईडी), चैट या कॉल लॉग, विज्ञापन या लिस्टिंग, 12 अंकों का यूपीआई रेफरेंस नंबर और बैंक का एसएमएस।
- संचार साथी पोर्टल की चक्षु सुविधा पर फोन नंबर की रिपोर्ट करें, ताकि उस नंबर की जांच होकर उसे ब्लॉक किया जा सके।
- पुलिस शिकायत दर्ज कराएं, अगर बैंक या साइबर क्राइम पोर्टल मांगे, खासकर बड़ी रकम में।
अगर मामला न सुलझे
- बैंक के ग्रीवांस या नोडल ऑफिसर को लिखें, साथ में 1930 का एक्नॉलेजमेंट और विवाद नंबर दें।
- यूपीआई सिस्टम में NPCI के क्रम से आगे बढ़ें: यूपीआई ऐप, उसका पार्टनर बैंक, आपका बैंक, फिर NPCI।
- cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन के पास जाएं, अगर बैंक आपकी शिकायत रिजेक्ट कर दे या 30 दिन में जवाब न दे। Integrated Ombudsman Scheme, 2026 के तहत बैंक के आखिरी जवाब या जवाब की समय सीमा, जो भी बाद में हो, उसके 90 दिनों के अंदर शिकायत करें।
आरबीआई के नियमों के तहत आप क्या वापस पा सकते हैं
एक कड़वे सच के लिए तैयार रहें: अपने ही पिन से रिक्वेस्ट मंजूर करने को आम तौर पर हैक हुए अकाउंट से अलग माना जाता है।
31 दिसंबर 2026 तक के ट्रांजैक्शन पर आरबीआई (RBI) का 2017 का ग्राहक जिम्मेदारी वाला ढांचा लागू होता है। अगर नुकसान आपकी अपनी लापरवाही से हुआ, जैसे ठग की रिक्वेस्ट पर पिन बताना या डालना, तो रिपोर्ट करने तक का नुकसान आपको उठाना पड़ता है। तब पैसा वापस मिलना मुख्य रूप से इस पर निर्भर करता है कि साइबर क्राइम सिस्टम पैसा पाने वाले खाते में रकम फ्रीज कर पाता है या नहीं, इसीलिए पहले घंटे में रिपोर्ट करना इतना जरूरी है।
1 जनवरी 2027 से होने वाले ट्रांजैक्शन पर 24 जून 2026 को जारी आरबीआई के Commercial Banks (Responsible Business Conduct) Third Amendment Directions, 2026 तस्वीर बदल देते हैं:
- "फ्रॉड" ट्रांजैक्शन में साफ तौर पर वह ट्रांजैक्शन भी शामिल है जो ग्राहक ने दबाव या धोखे में मंजूर किया हो, सिर्फ अनधिकृत ट्रांजैक्शन नहीं।
- ग्राहक की जिम्मेदारी साबित करने का बोझ बैंक पर है।
- आपकी लापरवाही होने पर भी एक बार का मुआवजा मिल सकता है: ₹50,000 तक के कुल नुकसान पर, नेट नुकसान का 85% या ₹25,000, जो भी कम हो, जीवन में एक बार। आपको पांच कैलेंडर दिनों के अंदर 1930 या cybercrime.gov.in और अपने बैंक, दोनों को रिपोर्ट करना होगा, और बैंक को आपके आवेदन के पांच कैलेंडर दिनों में भुगतान करना होगा। यह नए नियमों के पहले साल के फ्रॉड पर लागू है।
- घरेलू फ्रॉड में बैंक को 45 कैलेंडर दिनों में आपकी शिकायत पर फैसला करना होगा।
स्मॉल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक और अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों के लिए भी ऐसे ही निर्देश जारी किए गए हैं। आपके बैंक की वेबसाइट पर प्रकाशित कस्टमर प्रोटेक्शन पॉलिसी में इसकी पूरी जानकारी होती है।
उदाहरण से समझें
अनिल ऑनलाइन एक पुरानी साइकिल बेच रहा है। 20 जनवरी 2027 को एक "खरीदार" मर्चेंट हैंडल से "Payment for cycle, approve to receive" लिखी रिक्वेस्ट भेजता है। अनिल अपना पिन डाल देता है। उसके खाते से ₹18,000 चले जाते हैं।
- वह उसी शाम 1930 और अपने बैंक को रिपोर्ट करता है, यानी पांच कैलेंडर दिनों के काफी अंदर।
- मान लीजिए साइबर क्राइम सिस्टम पैसा पाने वाले खाते में बचे ₹6,000 फ्रीज कर देता है और वे लौटा दिए जाते हैं। उसका नेट नुकसान ₹18,000 − ₹6,000 = ₹12,000 है।
- मुआवजा ₹12,000 के 85% (₹10,200) और ₹25,000 में से कम, यानी ₹10,200 होगा।
- अनिल का अंतिम नुकसान: ₹12,000 − ₹10,200 = ₹1,800।
अगर यही नवंबर 2026 में हुआ होता, तो पुराना ढांचा लागू होता। अनिल को शायद सिर्फ फ्रीज हुए ₹6,000 वापस मिलते, और ₹12,000 का नुकसान रह जाता। दोनों ही हालात में पहला घंटा तय करता है कि कितना पैसा फ्रीज हो सकता है। (आंकड़े सिर्फ समझाने के लिए हैं; असली मुआवजा बैंक की जांच पर निर्भर करता है।)
कॉपी करने लायक शिकायत
विषय: कलेक्ट/पेमेंट रिक्वेस्ट के जरिए फ्रॉड यूपीआई ट्रांजैक्शन - रेफरेंस [UTR]
महोदय/महोदया,
[तारीख] को [समय] पर मेरे [आखिरी 4 अंक] वाले अकाउंट से [भेजने वाले का
नाम / यूपीआई आईडी] की भेजी यूपीआई रिक्वेस्ट के जरिए Rs [रकम] काटे गए।
यूपीआई रेफरेंस (UTR/RRN): [नंबर]।
मुझे धोखे से यह रिक्वेस्ट मंजूर करवाई गई। भेजने वाले ने दावा किया था कि
मुझे [पेमेंट मिलेगा / रिफंड मिलेगा / कैशबैक मिलेगा]। मेरा पैसे देने का
कोई इरादा नहीं था।
मैंने [तारीख, समय] पर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल / 1930 पर
इसकी रिपोर्ट की है। एक्नॉलेजमेंट नंबर: [नंबर]।
कृपया:
1. इसे फ्रॉड ट्रांजैक्शन मानें और लाभार्थी बैंक से पैसा फ्रीज करके
लौटाने का अनुरोध करें।
2. जरूरत हो तो मेरे अकाउंट पर यूपीआई से आगे के डेबिट ब्लॉक करें।
3. आरबीआई के ग्राहक जिम्मेदारी नियमों और अपनी कस्टमर प्रोटेक्शन
पॉलिसी के तहत मेरी जिम्मेदारी और बनने वाले रिवर्सल या मुआवजे की
पुष्टि करें।
संलग्न सबूत: रिक्वेस्ट, चैट और एसएमएस के स्क्रीनशॉट।
नाम: [आपका नाम] रजिस्टर्ड मोबाइल: [नंबर]
क्या न करें
- जो रिक्वेस्ट आपने शुरू नहीं की, उस पर कभी यूपीआई पिन न डालें। उसे रिजेक्ट करें।
- रिक्वेस्ट पर लिखे लेबल पर भरोसा न करें। ठग नोट वाले खाने में "refund", "receive" या "cashback" लिख देते हैं।
- अपने-आप वापस होने का इंतजार न करें। मंजूर हो चुके यूपीआई पेमेंट खुद वापस नहीं होते।
- फीस लेकर पैसा वापस दिलाने का वादा करने वाले "रिकवरी एजेंट" या "साइबर वकील" को पैसे न दें। यह अक्सर दूसरा स्कैम होता है।
- पुलिस या बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाले कॉलर्स को 1930 का एक्नॉलेजमेंट या बैंक डिटेल न दें; सिर्फ आधिकारिक चैनलों से फॉलो-अप करें।
- चैट या कॉल लॉग डिलीट न करें। यही आपके सबूत हैं।
अगर रिक्वेस्ट एक बार के पेमेंट की जगह बार-बार कटने वाले मैंडेट की थी, तो हमारी गाइड यूपीआई ऑटोपे मैंडेट कैंसिल करना देखें। यूपीआई से जुड़े खाते में सिर्फ रोज के खर्च का पैसा रखना, और इमरजेंसी फंड को अलग खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट में रखना (हमारे एफडी कैलकुलेटर से प्लान करें), किसी एक गलती से होने वाले नुकसान को भी सीमित करता है।
संबंधित गाइड
मुख्य बातें
- कलेक्ट रिक्वेस्ट में आपसे पैसे मांगे जाते हैं। यूपीआई पिन से हमेशा पैसा जाता है; पैसे पाने के लिए इसकी कभी जरूरत नहीं होती।
- NPCI ने 1 अक्टूबर 2025 से व्यक्ति-से-व्यक्ति कलेक्ट रिक्वेस्ट बंद कर दीं; मर्चेंट रिक्वेस्ट जारी हैं, और ठग अब मर्चेंट बनकर या क्यूआर कोड और लिंक से ठगते हैं।
- पैसा फ्रीज होने की संभावना बढ़ाने के लिए एक घंटे के अंदर 1930 या cybercrime.gov.in और अपने बैंक को रिपोर्ट करें।
- 31 दिसंबर 2026 तक पिन से मंजूर स्कैम का नुकसान आम तौर पर आपका होता है; 1 जनवरी 2027 से पांच कैलेंडर दिनों में रिपोर्ट किए गए छोटे फ्रॉड पर ₹25,000 तक का एक बार का मुआवजा लागू है।
- बैंक के ग्रीवांस ऑफिसर से होते हुए 90 दिनों के अंदर आरबीआई ओम्बड्समैन तक जाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट क्या होती है?
यह आपके यूपीआई ऐप पर भेजी गई एक रिक्वेस्ट है जिसमें आपसे पैसे देने को कहा जाता है। आपके खाते से पैसा तभी जाता है जब आप यूपीआई पिन डालकर उसे मंजूर करते हैं। 1 अक्टूबर 2025 से NPCI ने व्यक्ति-से-व्यक्ति कलेक्ट रिक्वेस्ट बंद कर दी हैं, इसलिए अब असली कलेक्ट रिक्वेस्ट सिर्फ मर्चेंट से आती हैं।
मैंने पैसे पाने वाली रिक्वेस्ट पर यूपीआई पिन डाल दिया। क्या हुआ?
आपने अपने खाते से पेमेंट मंजूर कर दिया। यूपीआई पिन डालने से हमेशा पैसा जाता है; पैसे पाने के लिए पिन की कभी जरूरत नहीं होती। तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर और अपने बैंक के फ्रॉड चैनल पर रिपोर्ट करें।
क्या यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट स्कैम में गया पैसा बैंक लौटाएगा?
31 दिसंबर 2026 तक लागू आरबीआई के नियमों में अपने पिन से रिक्वेस्ट मंजूर करना आम तौर पर ग्राहक की लापरवाही माना जाता है, इसलिए पैसा वापस मिलना इस पर निर्भर करता है कि ठग का खाता कितनी जल्दी फ्रीज होता है। 1 जनवरी 2027 से, पांच कैलेंडर दिनों में रिपोर्ट करने पर छोटे फ्रॉड में ₹25,000 तक का एक बार का मुआवजा मिल सकता है।
क्या NPCI की रोक के बाद भी कोई मुझे कलेक्ट रिक्वेस्ट भेज सकता है?
1 अक्टूबर 2025 के बाद आम लोग यूपीआई पर व्यक्ति-से-व्यक्ति कलेक्ट रिक्वेस्ट नहीं भेज सकते। मर्चेंट अब भी भेज सकते हैं। ठग अब मर्चेंट बनकर, क्यूआर कोड भेजकर या पेमेंट लिंक भेजकर ठगी करते हैं, इसलिए पैसे देने की कोई भी अनचाही रिक्वेस्ट संदिग्ध मानें।
किसी खास यूपीआई आईडी से आने वाली कलेक्ट रिक्वेस्ट कैसे ब्लॉक करें?
ज्यादातर यूपीआई ऐप में आप रिक्वेस्ट स्क्रीन से ही रिक्वेस्ट रिजेक्ट करके भेजने वाले को ब्लॉक या रिपोर्ट कर सकते हैं। ऐप का report spam या block विकल्प इस्तेमाल करें, और संचार साथी पोर्टल की चक्षु सुविधा पर भी उस नंबर की रिपोर्ट करें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।