गाड़ी का डाउन पेमेंट किस्तों में: कौन-सी रसीदें रखें
कार या बाइक का डाउन पेमेंट डीलर को टुकड़ों में दे रहे हैं? जानें कौन-सी रसीदें, इनवॉइस और लोन पेपर रखें, नकद की सीमा, TCS नियम और विवाद से कैसे बचें।

इस लेख में
अगर आप गाड़ी का डाउन पेमेंट डीलर को किस्तों में दे रहे हैं, तो हर भुगतान की डीलर की नंबर वाली रसीद, हर भुगतान का बैंक रेफरेंस, और एक आखिरी मार्जिन मनी रसीद रखें जो सब जोड़कर ऑन-रोड कीमत में आपके हिस्से के बराबर हो। बैंक ट्रांसफर, कार्ड या चेक से डीलर के बिजनेस अकाउंट में भुगतान करें, गाड़ी के लिए कुल नकद ₹2 लाख से कम रखें, और पक्का करें कि आखिरी इनवॉइस और आपके लोन पेपर्स में एक ही कुल रकम हो। ये रिकॉर्ड तब आपकी रक्षा करते हैं जब भुगतान की गई रकम पर विवाद हो, बुकिंग कैंसिल हो, या लेंडर आपके योगदान पर सवाल उठाए।
नीचे दिए सभी नियम और आंकड़े अक्टूबर 2026 की स्थिति के अनुसार हैं।
किस्तों में डाउन पेमेंट आमतौर पर कैसे होता है
"डाउन पेमेंट" या "मार्जिन मनी" गाड़ी की कीमत का वह हिस्सा है जो लोन से नहीं ढकता। जब आप इसे एक साथ नहीं दे पाते, तो डीलर अक्सर इसे चरणों में लेते हैं:
- मॉडल और वेरिएंट चुनते समय बुकिंग अमाउंट
- लोन प्रोसेस होने या गाड़ी अलॉट होने के दौरान एक या ज्यादा आंशिक भुगतान
- इनवॉइस और डिलीवरी के समय या उससे पहले आखिरी बकाया
इस बीच लेंडर लोन सैंक्शन करता है, आपकी मार्जिन मनी का सबूत लेता है और लोन की रकम सीधे डीलर को देता है, अक्सर डिलीवरी ऑर्डर जारी करने के बाद। फिर डीलर लेंडर के हाइपोथिकेशन के साथ आपके नाम टैक्स इनवॉइस बनाता है, और गाड़ी आरसी पर लेंडर के नाम के साथ रजिस्टर होती है।
यह व्यवस्था आपके और डीलर के बीच है। यह डीलर का लोन नहीं है, और इस पर ब्याज नहीं लगना चाहिए। अगर डीलर या कोई तीसरा पक्ष खुद ब्याज पर डाउन पेमेंट फंड करने की पेशकश करे, तो यह दूसरा लोन है; इसकी शर्तें किसी भी लोन की तरह पढ़ें।
कौन-से दस्तावेज रखें
| चरण | दस्तावेज | क्या जांचें |
|---|---|---|
| बुकिंग | बुकिंग फॉर्म या ऑर्डर कन्फर्मेशन | मॉडल, वेरिएंट, रंग, एक्स-शोरूम और ऑन-रोड ब्रेकअप, बुकिंग अमाउंट, कैंसिलेशन और रिफंड की शर्तें |
| हर किस्त | डीलर की रसीद | रसीद नंबर, तारीख, रकम, तरीका, UTR या चेक नंबर, डीलर का नाम और GSTIN, आपका नाम |
| हर किस्त | आपका बैंक या कार्ड स्टेटमेंट | डेबिट रसीद की रकम और तारीख से मेल खाए, डीलर के बिजनेस अकाउंट में गया हो |
| डिस्बर्समेंट से पहले | मार्जिन मनी रसीद या सारांश | कुल डाउन पेमेंट = ऑन-रोड कीमत − लोन रकम |
| लोन | सैंक्शन लेटर और KFS | लोन रकम, ब्याज दर, APR, ईएमआई, चार्ज |
| लोन | डिलीवरी ऑर्डर या डिस्बर्समेंट एडवाइस | लेंडर ने डीलर को कितनी रकम और किस तारीख को दी |
| डिलीवरी | टैक्स इनवॉइस | कीमत, जीएसटी, लागू हो तो TCS, कुल, लेंडर के पक्ष में हाइपोथिकेशन |
| डिलीवरी | बीमा पॉलिसी, अस्थायी या स्थायी रजिस्ट्रेशन | आपका नाम, गाड़ी की सही जानकारी, फाइनेंसर के रूप में लेंडर |
| डिलीवरी के बाद | सेल सर्टिफिकेट (फॉर्म 21) और आरसी | मालिकाना हक आपके नाम, हाइपोथिकेशन दर्ज |
इन्हें डिजिटल और कागज दोनों रूपों में तब तक साथ रखें जब तक लोन बंद न हो और हाइपोथिकेशन न हटे। लोन बंद करते समय इनमें से कुछ की फिर जरूरत होगी; देखें लोन क्लोजर चेकलिस्ट।
भुगतान के तरीके पर असर डालने वाले नियम
नकद की सीमा
आयकर कानून के कैश-रिसीट नियम (पुरानी धारा 269ST, जो आयकर अधिनियम, 2025 में जारी है) के तहत कोई भी व्यक्ति किसी एक व्यक्ति से एक दिन में, एक लेन-देन के लिए, या एक मौके से जुड़े लेन-देन के लिए ₹2 लाख या ज्यादा नकद नहीं ले सकता। जुर्माना नकद लेने वाले पर लगता है, लेकिन दांव पर आपका पैसा और रिकॉर्ड भी है। एक गाड़ी खरीदना एक लेन-देन है, इसलिए नकद को छोटी किस्तों में बांटने से यह नियम नहीं टलता। गाड़ी के लिए कुल नकद ₹2 लाख से कम रखें, और बेहतर है कि सब कुछ बैंक से भरें।
₹10 लाख से ज्यादा की गाड़ी पर TCS
जब मोटर वाहन की कीमत ₹10 लाख से ज्यादा हो, तो विक्रेता को बिक्री मूल्य का 1% टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) वसूलना होता है। यह पहले धारा 206C(1F) थी; प्रकाशित टिप्पणियों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से यह आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 394 में है, दर और सीमा में बदलाव नहीं। TCS आपके इनवॉइस पर दिखता है और डीलर के रिटर्न भरने के बाद आपके फॉर्म 26AS और AIS में। अगर आप इसे आयकर रिटर्न में क्रेडिट के रूप में क्लेम करते हैं, तो यह लागत नहीं है।
कार्ड से भुगतान
कुछ डीलर डाउन पेमेंट का कुछ हिस्सा क्रेडिट कार्ड से लेते हैं। जांचें कि वे सरचार्ज जोड़ते हैं या नहीं, और रसीद पर कार्ड भुगतान दिखे। देखें कार्ड भुगतान पर मर्चेंट सरचार्ज। अगर डाउन पेमेंट के लिए कार्ड की ईएमआई सुविधा इस्तेमाल करते हैं, तो असल में आप दूसरा लोन ले रहे हैं।
लोन रकम और KFS
आपके लेंडर की लोन रकम, ब्याज दर और चार्ज की फैक्ट्स स्टेटमेंट में होते हैं, जो साइन करने से पहले आपको मिलना चाहिए। आरबीआई के KFS निर्देशों के तहत, उसमें न लिखे चार्ज बाद में आपकी स्पष्ट सहमति के बिना नहीं जोड़े जा सकते। कुल लागत की तुलना APR से करें; देखें कार लोन गाइड।
उदाहरण (सांकेतिक)
आप ₹9,40,000 ऑन-रोड कीमत (₹8,10,000 एक्स-शोरूम के साथ रजिस्ट्रेशन, बीमा और एक्सेसरीज) वाली कार खरीदते हैं। लेंडर ₹7,00,000 सैंक्शन करता है।
- आपका डाउन पेमेंट: ₹9,40,000 − ₹7,00,000 = ₹2,40,000
आप इसे तीन हिस्सों में देते हैं:
| तारीख | तरीका | रकम | कुल अब तक |
|---|---|---|---|
| 2 अक्टूबर | डीलर के बिजनेस अकाउंट में यूपीआई | ₹21,000 | ₹21,000 |
| 16 अक्टूबर | नेट बैंकिंग (NEFT) | ₹1,00,000 | ₹1,21,000 |
| 28 अक्टूबर | चेक | ₹1,19,000 | ₹2,40,000 |
डीलर की मार्जिन मनी रसीद में ₹2,40,000 और लेंडर की डिस्बर्समेंट एडवाइस में ₹7,00,000 दिखना चाहिए, जो मिलकर इनवॉइस के कुल ₹9,40,000 बनें।
9% पर 5 साल के लिए ₹7,00,000 की ईएमआई करीब ₹14,531 है; अपनी ईएमआई ईएमआई कैलकुलेटर से जांचें।
अगर आपने नकद दिया होता? ₹1,00,000 और फिर ₹1,19,000 नकद देने पर एक गाड़ी के लिए कुल नकद ₹2,19,000 हो जाता, जो ₹2 लाख की सीमा से ऊपर है, भले ही कोई एक किस्त सीमा पार न करे।
TCS जांच: ₹8,10,000 एक्स-शोरूम कीमत पर ₹10 लाख की सीमा पार नहीं होती, इसलिए TCS नहीं। ₹12,00,000 बिक्री मूल्य वाली कार पर TCS 1% × ₹12,00,000 = ₹12,000 होगा, जो इनवॉइस पर दिखेगा और रिटर्न में क्लेम हो सकेगा।
डीलर से विवाद कैसे टालें
- कीमत का आधार तय करें। बुकिंग फॉर्म में अक्सर लिखा होता है कि इनवॉइस की तारीख पर लागू कीमत ली जाएगी। पूछें कि डिलीवरी से पहले कीमत बढ़ने पर आपका बकाया बदलेगा या नहीं, और जवाब लिखित में लें।
- रिफंड की शर्तें लिखवाएं। अगर लोन रिजेक्ट हो या आप कैंसिल करें, तो बुकिंग अमाउंट और बाद की किस्तों में से कितना और कितने दिनों में वापस मिलेगा?
- इनवॉइस का रसीदों से मिलान करें। डिलीवरी पेपर साइन करने से पहले सभी रसीदें जोड़ें और इनवॉइस व लेंडर के डिस्बर्समेंट से तुलना करें। मौखिक रूप से वादा की गई छूट इनवॉइस पर दिखनी चाहिए।
- सिर्फ डीलर के बिजनेस अकाउंट में भुगतान करें। कोई भी किस्त सेल्सपर्सन की पर्सनल यूपीआई आईडी या खाते में न दें, चाहे कितना भी आसान लगे। डीलर के खाते की जानकारी लेटरहेड पर या आधिकारिक वेबसाइट से लें।
- लोन प्रोसेसिंग या KYC के दौरान आए ओटीपी डीलर स्टाफ या कॉलर को न बताएं।
अगर कुछ गड़बड़ हो
- डीलर किसी किस्त पर विवाद करे: डीलर को तारीख के साथ ईमेल भेजें जिसमें हर भुगतान UTR और रसीद नंबर के साथ लिखा हो, और मिली कुल रकम की लिखित पुष्टि मांगें।
- बुकिंग कैंसिल, रिफंड में देरी: डीलर को लिखें और जवाब न मिले तो निर्माता कंपनी की कस्टमर केयर को। अनसुलझे उपभोक्ता विवाद नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) या उपभोक्ता आयोग में ले जाए जा सकते हैं।
- लेंडर की समस्या (गलत रकम डिस्बर्स, KFS में न लिखे चार्ज): लेंडर के ग्रीवांस ऑफिसर से शिकायत करें, फिर 30 दिन में संतोषजनक जवाब न मिले तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन से।
- धोखाधड़ी (फर्जी खाते में भुगतान): तुरंत cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें, और अपने बैंक को बताएं।
यही तरीका टू-व्हीलर पर भी लागू होता है; देखें टू-व्हीलर लोन गाइड।
मुख्य बातें
- हर किस्त के लिए GSTIN वाली डीलर की नंबर वाली रसीद, और कुल रकम के लिए आखिरी मार्जिन मनी रसीद लें।
- पक्का करें कि डाउन पेमेंट और लोन रकम मिलकर इनवॉइस के कुल के बराबर हों।
- एक गाड़ी के लिए कुल नकद ₹2 लाख से कम रखें; किस्तों में बांटने से सीमा नहीं बदलती।
- गाड़ी की कीमत ₹10 लाख से ज्यादा होने पर 1% TCS लगता है; इसे टैक्स रिटर्न में क्लेम करें।
- सिर्फ डीलर के बिजनेस अकाउंट में भुगतान करें और बुकिंग, रिफंड व कीमत की शर्तें लिखित में रखें।
संबंधित गाइड: कार लोन गाइड, टू-व्हीलर लोन गाइड, लोन क्लोजर चेकलिस्ट।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैं कार का डाउन पेमेंट किस्तों में दे सकता हूं?
कई डीलर पहले बुकिंग अमाउंट और बाकी डाउन पेमेंट डिलीवरी से पहले एक या ज्यादा हिस्सों में ले लेते हैं। यह एक व्यावसायिक व्यवस्था है, इसलिए शेड्यूल और तय कुल रकम बुकिंग फॉर्म या डीलर के लेटर पर लिखित में लें।
मार्जिन मनी रसीद क्या होती है?
यह डीलर की पावती है कि आपने गाड़ी की कीमत में अपना हिस्सा, यानी लोन से न ढका हिस्सा, चुका दिया है। लेंडर आमतौर पर डीलर को लोन की रकम जारी करने से पहले यही रसीद, या इतनी रकम जोड़ने वाली रसीदें मांगते हैं।
क्या मैं डाउन पेमेंट नकद में दे सकता हूं?
सिर्फ सीमा के अंदर। डीलर एक लेन-देन के लिए ₹2 लाख या ज्यादा नकद नहीं ले सकता, और किस्तों में एक गाड़ी खरीदना एक ही लेन-देन माना जाता है, इसलिए सभी किस्तों का कुल नकद ₹2 लाख से कम रहना चाहिए। बैंक ट्रांसफर ज्यादा सुरक्षित है और साबित करना आसान है।
क्या कार खरीद पर TCS लगता है?
जब गाड़ी की कीमत ₹10 लाख से ज्यादा हो, तो विक्रेता बिक्री मूल्य पर 1% TCS वसूलता है, उस नियम के तहत जो पहले धारा 206C(1F) में था और आयकर अधिनियम, 2025 में जारी है। रिटर्न भरते समय आप इसे अपने टैक्स के सामने क्रेडिट के रूप में क्लेम कर सकते हैं।
अगर डीलर किसी किस्त की रसीद न दे तो?
हर भुगतान के लिए डीलर के लेटरहेड पर उसके GSTIN के साथ नंबर वाली रसीद पर जोर दें, जिसमें रकम, तारीख और तरीका हो। अगर बैंक ट्रांसफर किया है, तो UTR रखें और डीलर को भुगतान की सूची वाला ईमेल भेजें ताकि लिखित रिकॉर्ड रहे।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।