सिग्नेचर मिसमैच से चेक लौटा? पहले ये जांचें
चेक 'drawer's signature differs' लिखकर लौटा? रिटर्न कोड 10 से 17 का मतलब, नया चेक देने से पहले क्या जांचें, बैंक चार्ज और धारा 138 का जोखिम।

इस लेख में
"मेरा चेक 'drawer's signature differs' लिखकर लौट आया, जबकि साइन मैंने खुद किया था।" अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो हल यह है: नया चेक लिखने से पहले पता करें कि बैंक के पास असल में आपका कौन सा सिग्नेचर है और इमेज मैच क्यों नहीं हुई, फिर वह वजह ठीक होने के बाद ही नया चेक दें, या ऑनलाइन भुगतान करें। उसी गड़बड़ी के साथ दूसरा चेक देने का मतलब है एक और रिटर्न, एक और चार्ज और, अगर सामने वाला दबाव डाल रहा है, तो आपके खिलाफ और मजबूत केस।
यह गाइड चेक लिखने वाले के लिए है। अगर आपको दिया गया चेक लौटा है, तो हमारी मुख्य गाइड देखें: चेक बाउंस होने पर क्या करें।
रिटर्न की वजह का असल मतलब
बैंक रिटर्न मेमो पर तय रिटर्न रीजन कोड लिखते हैं। एसबीआई के ग्राहक पेज और आरबीआई की मॉडल लिस्ट के मुताबिक सिग्नेचर वाले कोड ये हैं:
| कोड | रिटर्न की वजह | आमतौर पर किस तरफ इशारा |
|---|---|---|
| 10 | सिग्नेचर अधूरा (Drawer's signature incomplete) | आधा सिग्नेचर, सिर्फ इनिशियल |
| 11 | सिग्नेचर पढ़ने लायक नहीं (Drawer's signature illegible) | फैला हुआ, बहुत हल्का, खराब स्कैन |
| 12 | सिग्नेचर अलग (Drawer's signature differs) | रिकॉर्ड वाले नमूने से मेल नहीं |
| 13 | सिग्नेचर जरूरी (Drawer's signature required) | साइन नहीं, या एक साइन करने वाला छूट गया |
| 14 | सिग्नेचर मैंडेट के मुताबिक नहीं (Drawer's signature not as per mandate) | जॉइंट या कंपनी खाते में और साइन करने वाले चाहिए |
| 15 | खाता चलाने के लिए सिग्नेचर नहीं मिला (Drawer's signature to operate account not received) | नए साइन करने वाले का नमूना अभी बैंक के पास नहीं |
| 16 | खाता चलाने का अधिकार नहीं मिला (Drawer's authority to operate account not received) | बोर्ड रेजोल्यूशन या मैंडेट दर्ज नहीं |
| 17 | बदलाव पर पुष्टि जरूरी (Alteration requires drawer's authentication) | चेक पर किया बदलाव प्रमाणित नहीं |
कोड नंबर बैंकों में थोड़े अलग हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ नंबर नहीं, मेमो पर लिखे शब्द पढ़ें। कोड 85 ("alterations other than date field") अलग है: चेक ट्रंकेशन सिस्टम (CTS) में तारीख के अलावा कोई सुधार बिल्कुल स्वीकार नहीं होता।
CTS क्लियरिंग में सिग्नेचर क्यों फेल होते हैं
CTS में भुगतान करने वाला बैंक कागज नहीं, चेक की इमेज जांचता है। 4 अक्टूबर 2025 से आरबीआई की लगातार क्लियरिंग के फेज 1 के तहत चेक दिन भर लगातार क्लियर होते हैं; फेज 2 दिसंबर 2025 में अगले आदेश तक टाल दिया गया। तेज क्लियरिंग का मतलब है कि रिटर्न उसी दिन सामने वाले तक पहुंच सकता है। आम वजहें:
- नमूना पुराना है। यह खाता खोलते समय लिया गया था, शायद 15 साल पहले, और तब से आपका सिग्नेचर बदल गया है।
- आपके एक से ज्यादा सिग्नेचर स्टाइल हैं। खाता फॉर्म पर पूरा सिग्नेचर, चेक पर छोटा वाला।
- स्कैन की दिक्कत। हल्की स्याही, सिग्नेचर का छपी लाइनों या MICR बैंड पर चढ़ जाना, या सिग्नेचर के बीच से मोड़।
- मैंडेट की दिक्कत। "jointly" खोले गए जॉइंट खाते में दोनों के सिग्नेचर चाहिए; कंपनी या पार्टनरशिप में तय अधिकृत कॉम्बिनेशन चाहिए।
- साइन करने वाला बदला, पर अपडेट नहीं हुआ। नया डायरेक्टर या पार्टनर बैंक में उसका अधिकार दर्ज होने से पहले ही साइन कर देता है।
नया चेक देने से पहले क्या जांचें
- रिटर्न मेमो पढ़ें और सही वजह, तारीख और चार्ज नोट कर लें।
- ब्रांच से रिकॉर्ड वाला नमूना दिखाने को कहें (कई बैंक इसे ब्रांच में दिखा देते हैं, फोन पर नहीं)।
- ईमानदारी से मिलान करें। अगर आपका आज का सिग्नेचर अलग है, तो नमूना सिग्नेचर अपडेट करने की रिक्वेस्ट दें। ज्यादातर बैंकों में फॉर्म, फोटो आईडी और ब्रांच में खुद जाना जरूरी होता है।
- खाते का मैंडेट जांचें। जॉइंट, एचयूएफ, कंपनी या ट्रस्ट खाते में पक्का करें कि किसे और किस कॉम्बिनेशन में साइन करना है।
- पूछें कि नया नमूना कब से लागू होगा। क्लियरिंग में इस्तेमाल होने वाले सिग्नेचर रिकॉर्ड अपडेट होने में कुछ दिन लग सकते हैं।
- चेक खुद जांचें। गहरी स्याही इस्तेमाल करें, सिग्नेचर की जगह के अंदर ही साइन करें, ओवरराइट न करें, और सिग्नेचर को MICR बैंड से न छूने दें।
- बड़ी रकम के चेक के लिए पॉजिटिव पे में रजिस्टर करें। आरबीआई का पॉजिटिव पे सिस्टम ₹50,000 और उससे ज्यादा के चेक की जानकारी पहले से कन्फर्म करने देता है; ₹5 लाख और उससे ज्यादा के लिए बैंक इसे जरूरी कर सकते हैं। इससे सिग्नेचर मिसमैच ठीक नहीं होता, लेकिन रिटर्न की एक और वजह से बचाव होता है।
- पुराना चेक वापस लें या कैंसिल करें। सामने वाले से उसे लौटाने को कहें ताकि वह दोबारा जमा न हो सके।
- ऑनलाइन भुगतान पर विचार करें। NEFT, RTGS या IMPS में सिग्नेचर जांच होती ही नहीं; देखें NEFT vs RTGS vs IMPS।
कानूनी पहलू: जल्दी क्यों करें
सिग्नेचर मिसमैच सिर्फ तकनीकी अड़चन नहीं है। Laxmi Dyechem v. State of Gujarat (2012) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिग्नेचर मैच न होने से अनादरित चेक पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 लागू हो सकती है, बशर्ते उस धारा की बाकी शर्तें पूरी हों। कोर्ट तथ्यों को देखते हैं, जैसे कि मिसमैच जानबूझकर किया गया था या नहीं।
समय-सीमा वही है जो किसी भी बाउंस चेक की होती है: सामने वाले को रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन के अंदर लिखित डिमांड नोटिस भेजना होता है, और फिर आपके पास नोटिस मिलने से 15 दिन होते हैं भुगतान करने के लिए। इस अवधि में भुगतान कर देने से धारा 138 का आपराधिक जोखिम खत्म हो जाता है। चेक अपनी तारीख से तीन महीने तक वैध होता है, इसलिए सामने वाला उस अवधि में आपका सुधरा हुआ चेक दोबारा जमा भी कर सकता है।
उदाहरण से समझें: नेहा का ₹48,000 का चेक
नेहा अपने मकान मालिक को 1 अक्टूबर 2026 की तारीख वाला ₹48,000 का चेक देती है। यह 6 अक्टूबर को "12 – drawer's signature differs" लिखकर लौट आता है। मकान मालिक को मेमो उसी दिन मिल जाता है।
| बात | गणना | तारीख या रकम |
|---|---|---|
| चेक की वैधता | 1 अक्टूबर से तीन महीने | 31 दिसंबर 2026 तक वैध |
| मकान मालिक के लिए डिमांड नोटिस भेजने की आखिरी तारीख | 6 अक्टूबर + 30 दिन | 5 नवंबर 2026 |
| अगर नोटिस 10 अक्टूबर को मिला, तो नेहा को भुगतान करना है | 10 अक्टूबर + 15 दिन | 25 अक्टूबर 2026 |
| पॉजिटिव पे जरूरी? | ₹48,000 रकम ₹50,000 से कम है | लागू नहीं |
नेहा 7 अक्टूबर को ब्रांच से पूछती है और पता चलता है कि नमूना 2009 का है। वह उसे अपडेट करवाती है, फिर 8 अक्टूबर को IMPS से किराया चुका देती है और ओरिजिनल चेक वापस ले लेती है। उसके खाते से कटा रिटर्न चार्ज वापस नहीं होगा, क्योंकि मिसमैच उसकी तरफ से था।
अगर ब्रांच दिखाती कि उसका सिग्नेचर मैच करता था और गड़बड़ी बैंक के सिस्टम में थी, तो वह चार्ज वापस करने को कह सकती थी। चेक रिटर्न चार्ज पर आरबीआई के निर्देश कहते हैं कि ये सिर्फ तभी लगने चाहिए जब ग्राहक की गलती हो। थोड़ा बफर रखना, जैसे स्वीप या छोटी एफडी में, जिसे आप हमारे एफडी कैलकुलेटर से जांच सकते हैं, चेक में दिक्कत आने पर तुरंत ऑनलाइन भुगतान करने में मदद करता है।
बैंक की गलती हो तो शिकायत कहां करें
| स्थिति | कहां जाएं |
|---|---|
| नमूना मैच करता था, फिर भी बैंक ने चेक लौटाया | ब्रांच मैनेजर, फिर बैंक का ग्रीवांस या नोडल ऑफिसर |
| सिग्नेचर अपडेट की रिक्वेस्ट पर काम नहीं हुआ | वही, अपनी रिक्वेस्ट की पावती के साथ |
| रिटर्न चार्ज लिस्ट के मुताबिक नहीं या गलत लगाया गया | पहले बैंक; देखें बैंक के छिपे चार्ज का रिफंड |
| 30 दिन में कोई अंतिम जवाब नहीं | cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन या 14448 |
1 जुलाई 2026 से नई ओम्बड्समैन शिकायतें रिजर्व बैंक – इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम, 2026 के तहत आती हैं। देखें बैंक आपकी शिकायत नहीं सुलझा रहा।
कॉपी करने लायक शिकायत मैसेज
विषय: सिग्नेचर मिसमैच से लौटा चेक – दोबारा जांच का अनुरोध – खाता [आखिरी 4 अंक]
महोदय/महोदया,
मेरे खाते [आखिरी 4 अंक] पर जारी चेक नं. [नंबर], दिनांक [तारीख],
₹[रकम] का, [तारीख] को "[वजह/कोड]" कारण से लौटा दिया गया।
[तारीख] को ₹[रकम] का रिटर्न चार्ज काटा गया।
[एक चुनें:] चेक पर किया गया सिग्नेचर रिकॉर्ड वाले मेरे नमूने से मेल खाता है /
मैंने [तारीख] को नमूना सिग्नेचर अपडेट की रिक्वेस्ट दी थी, पावती
नं. [ ], जिसे लागू नहीं किया गया।
कृपया इस रिटर्न की दोबारा जांच करें, वजह लिखित में बताएं, अगर रिटर्न
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार मेरी गलती से नहीं हुआ तो चार्ज वापस करें,
और अभी रिकॉर्ड में मौजूद नमूने की पुष्टि करें।
[नाम], [कस्टमर आईडी], [रजिस्टर्ड मोबाइल]
क्या न करें
- लौटे हुए चेक पर दोबारा साइन या ओवरराइट न करें। CTS तारीख के अलावा कोई बदलाव स्वीकार नहीं करता।
- नमूना जांचे बिना नया चेक न दें। दो रिटर्न एक से ज्यादा बुरे लगते हैं।
- डिमांड नोटिस को नजरअंदाज न करें। उसे मिलने के 15 दिन के अंदर भुगतान करें और लिखित पावती लें।
- "आपका सिग्नेचर ऑनलाइन अपडेट करने" का दावा करने वाले कॉलर से चेकबुक की फोटो, ओटीपी या नेट बैंकिंग डिटेल शेयर न करें। सिग्नेचर अपडेट ब्रांच में होते हैं।
- पुराने सिग्नेचर स्टाइल वाले बिना इस्तेमाल हुए चेक चलन में न रखें; अगर नमूना अपडेट करवा लिया है तो उन्हें कैंसिल कर दें।
मुख्य बातें
- रिटर्न कोड 10 से 17 सिग्नेचर और मैंडेट की दिक्कतें हैं; मेमो पर लिखे सही शब्द पढ़ें।
- नया चेक देने से पहले बैंक के पास मौजूद नमूना और मैंडेट जांचें, और अगर आपका सिग्नेचर बदल गया है तो उसे अपडेट करवाएं।
- सिग्नेचर मिसमैच वाले रिटर्न पर भी धारा 138 लागू हो सकती है; डिमांड नोटिस मिलने के 15 दिन के अंदर भुगतान करें।
- चार्ज सिर्फ आपकी गलती होने पर लगने चाहिए; बैंक की गलती हो तो चार्ज वापस मांगें।
- शक हो तो NEFT, RTGS या IMPS से भुगतान करें और ओरिजिनल चेक वापस ले लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या सिग्नेचर मिसमैच से लौटा चेक धारा 138 में चेक बाउंस माना जाता है?
माना जा सकता है। Laxmi Dyechem v. State of Gujarat (2012) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिग्नेचर मैच न होने से चेक का अनादर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के दायरे में आ सकता है, बशर्ते उसकी बाकी शर्तें पूरी हों। डिमांड नोटिस को गंभीरता से लें और उसे मिलने के 15 दिन के अंदर भुगतान करें।
सिग्नेचर मिसमैच से चेक लौटने पर क्या बैंक मुझसे चार्ज लेगा?
आमतौर पर बैंक अपनी चार्ज लिस्ट के मुताबिक चेक जारी करने वाले से चार्ज लेता है, क्योंकि ऐसा रिटर्न ग्राहक की गलती माना जाता है। अगर आपका सिग्नेचर रिकॉर्ड वाले नमूने से सच में मेल खाता था, या आपने सिग्नेचर बदलवाया था और बैंक ने उसे अपडेट नहीं किया, तो चार्ज वापस करने को कहें।
क्या मैं लौटे हुए चेक पर दोबारा साइन करके उसे वापस दे सकता हूं?
ऐसा करना सुरक्षित नहीं है। चेक ट्रंकेशन सिस्टम में तारीख के अलावा कोई बदलाव स्वीकार नहीं होता, और दोबारा साइन करने से बैंक के नमूने से मिसमैच ठीक नहीं होता। नया चेक दें, या NEFT, RTGS या IMPS से भुगतान करें, और पुराना चेक वापस मांग लें।
बैंक में अपना नमूना सिग्नेचर (स्पेसिमेन सिग्नेचर) कैसे अपडेट करें?
ज्यादातर बैंकों में सिग्नेचर बदलने का फॉर्म, फोटो आईडी और ब्रांच में खुद जाना जरूरी होता है, जहां नया सिग्नेचर अटेस्ट किया जाता है। नए चेक जारी करने से पहले बैंक से पूछ लें कि चेक क्लियरिंग के लिए नया नमूना कब से लागू होगा।
चेक रिटर्न मेमो पर रिटर्न कोड 10 से 17 का क्या मतलब है?
ये सिग्नेचर से जुड़ी वजहें हैं: 10 अधूरा, 11 पढ़ने लायक नहीं, 12 अलग, 13 सिग्नेचर जरूरी, 14 मैंडेट के मुताबिक नहीं, 15 खाता चलाने के लिए सिग्नेचर नहीं मिला, 16 खाता चलाने का अधिकार नहीं मिला, और 17 बदलाव पर चेक जारी करने वाले की पुष्टि जरूरी। बैंकों की लिस्ट में थोड़ा फर्क हो सकता है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।