फॉर्म 16 में होम लोन ब्याज नहीं दिखा? आईटीआर में क्लेम करें
फॉर्म 16 में होम लोन डिडक्शन छूट गया? आईटीआर या रिवाइज्ड रिटर्न में ब्याज और मूलधन अब भी क्लेम कर सकते हैं। जानें डेडलाइन, टैक्स व्यवस्था के नियम और उदाहरण।

इस लेख में
"मेरे फॉर्म 16 में होम लोन ब्याज नहीं दिख रहा, और अब मेरा रिफंड बहुत कम लग रहा है।" हर साल हजारों नौकरीपेशा लोगों के साथ ऐसा होता है, और इसे ठीक किया जा सकता है। फॉर्म 16 (टैक्स ईयर 2026-27 से सैलरी के लिए Form 130) सिर्फ आपकी कंपनी का नजरिया है; आप पुरानी व्यवस्था में अपने इनकम टैक्स रिटर्न में खुद होम लोन डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं, या रिटर्न भर चुके हैं तो रिवाइज्ड रिटर्न में, बशर्ते नीचे दी गई डेडलाइन का पालन करें।
यह गाइड अक्टूबर 2026 की स्थिति में वित्त वर्ष 2025-26 के रिटर्न में सुधार और चालू वित्त वर्ष 2026-27 दोनों को कवर करती है। होम लोन के सभी टैक्स नियमों के लिए हमारी होम लोन टैक्स बेनिफिट वाली मुख्य गाइड देखें।
ऐसा क्यों होता है
- आपने समय पर सबूत नहीं दिया। कंपनियां एक कट-ऑफ तारीख तक, अक्सर जनवरी या फरवरी में, लेंडर के प्रोविजनल और फाइनल इंटरेस्ट सर्टिफिकेट मांगती हैं। तारीख छूटी तो क्लेम हट जाता है।
- कंपनी ने नई व्यवस्था लगा दी। टीडीएस के लिए नई व्यवस्था डिफॉल्ट है। अगर आपने कंपनी को पुरानी व्यवस्था चुनने के बारे में नहीं बताया, तो सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर का होम लोन डिडक्शन नहीं मिला, क्योंकि नई व्यवस्था में इसकी इजाजत नहीं है।
- डिक्लेरेशन अधूरा था। टैक्स ईयर 2026-27 से कंपनी को दिया जाने वाला डिक्लेरेशन Form 124 (पुराना Form 12BB) है। लेंडर की जानकारी, पैन या लोन का मकसद न लिखा हो तो क्लेम खारिज हो सकता है।
- पजेशन साल के आखिर में मिला। मूलधन और निर्माण से पहले का ब्याज सिर्फ निर्माण पूरा होने के बाद मिलता है, इसलिए कंपनियां कभी-कभी इन्हें पूरी तरह छोड़ देती हैं।
- जॉइंट लोन को लेकर गड़बड़ी। कंपनी ने आपका हिस्सा गलत अनुपात में गिना, या सर्टिफिकेट में को-बॉरोअर का नाम पहले होने से कुछ भी नहीं गिना।
अगर आप हकदार हैं, तो इनमें से कोई भी कारण आपको अपने रिटर्न में क्लेम करने से नहीं रोकता।
आपकी स्थिति में कौन सा रास्ता सही है
| आपकी स्थिति (अक्टूबर 2026 तक) | क्या करें | डेडलाइन | पुराना सेक्शन | नया सेक्शन (2025 Act) |
|---|---|---|---|---|
| वित्त वर्ष 2025-26: ड्यू डेट तक पुरानी व्यवस्था में भरा, डिडक्शन छूटा | रिवाइज्ड रिटर्न | 31 दिसंबर 2026 तक मुफ्त; 31 मार्च 2027 तक फीस के साथ | 139(5) | बाद के सालों के लिए 263(5) |
| वित्त वर्ष 2025-26: ड्यू डेट तक नई व्यवस्था में भरा | टैक्स बचे तो पुरानी व्यवस्था चुनकर रिवाइज्ड रिटर्न | ऊपर जैसा | 139(5) | — |
| वित्त वर्ष 2025-26: अभी तक नहीं भरा | बिलेटेड रिटर्न, लेकिन पुरानी व्यवस्था आम तौर पर नहीं मिलती | 31 दिसंबर 2026 | 139(4) | बाद के सालों के लिए 263(4) |
| वित्त वर्ष 2026-27: चालू साल | सर्टिफिकेट और Form 124 अभी कंपनी को दें | कंपनी की सबूत कट-ऑफ | — | Section 392 टीडीएस |
| वित्त वर्ष 2026-27: कंपनी फिर भी छोड़ दे | पुरानी व्यवस्था में आईटीआर में क्लेम करें | ज्यादातर नौकरीपेशा के लिए 31 जुलाई 2027 | — | — |
वित्त वर्ष 2025-26 के रिटर्न Income-tax Act, 1961 के तहत आते हैं; टैक्स ईयर 2026-27 से 2025 Act की नंबरिंग लागू होती है। टैक्स प्रोफेशनल आम तौर पर मानते हैं कि जिस नौकरीपेशा व्यक्ति का मूल रिटर्न समय पर भरा गया था, वह रिवाइज्ड रिटर्न में पुरानी व्यवस्था चुन सकता है, लेकिन अगर मूल रिटर्न बिलेटेड था, तो उस साल के लिए पुरानी व्यवस्था आम तौर पर बंद रहती है। अपडेटेड रिटर्न (ITR-U, पुराना Section 139(8A), अब Section 263(6)) से छूटा डिडक्शन क्लेम नहीं हो सकता, क्योंकि इससे टैक्स घटाया या रिफंड बढ़ाया नहीं जा सकता।
उदाहरण: क्लेम करें, लेकिन पहले दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करें
वित्त वर्ष 2025-26 में अर्जुन की सैलरी ₹20,00,000 है और उसने कंपनी को पुरानी व्यवस्था चुनने के बारे में बताया था। कंपनी ने ₹50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन, पुराने Section 80C के तहत ₹1,50,000 (ईपीएफ और पीपीएफ), हेल्थ इंश्योरेंस के ₹25,000 और एनपीएस के ₹50,000 गिने। सेल्फ-ऑक्यूपाइड फ्लैट पर उसका ₹2,40,000 का होम लोन ब्याज छूट गया, क्योंकि सर्टिफिकेट कट-ऑफ के बाद पहुंचा।
फॉर्म 16 में टैक्सेबल आय: ₹20,00,000 − ₹50,000 − ₹1,50,000 − ₹25,000 − ₹50,000 = ₹17,25,000।
| फॉर्म 16 (पुरानी व्यवस्था, ब्याज नहीं) | आईटीआर, पुरानी व्यवस्था ब्याज के साथ | आईटीआर, नई व्यवस्था | |
|---|---|---|---|
| डिडक्शन | ₹2,75,000 | ₹4,75,000 (ब्याज ₹2,00,000 की सीमा में) | ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन |
| टैक्सेबल आय | ₹17,25,000 | ₹15,25,000 | ₹19,25,000 |
| सेस से पहले टैक्स | ₹3,30,000 | ₹2,70,000 | ₹1,85,000 |
| 4% सेस के साथ टैक्स | ₹3,43,200 | ₹2,80,800 | ₹1,92,400 |
| टीडीएस ₹3,43,200 था तो रिफंड | — | ₹62,400 | ₹1,50,800 |
आंकड़े कैसे बने:
- ब्याज के साथ पुरानी व्यवस्था: ₹12,500 (₹2.5-5 लाख पर 5%) + ₹1,00,000 (₹5-10 लाख पर 20%) + ₹5,25,000 × 30% = ₹1,57,500, कुल ₹2,70,000। ₹62,400 की बचत = ₹2,00,000 × 31.2%।
- नई व्यवस्था: ₹20,000 + ₹40,000 + ₹60,000 (₹16 लाख तक 5%, 10% और 15% के स्लैब) + ₹3,25,000 × 20% = ₹65,000, कुल ₹1,85,000।
छूटा हुआ ब्याज क्लेम करने से ₹62,400 मिलते हैं, लेकिन रिटर्न में नई व्यवस्था चुनने से ₹1,50,800। इस उदाहरण में पुरानी व्यवस्था नई से तभी बेहतर होती जब स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलाकर कुल डिडक्शन करीब ₹7.6 लाख से ज्यादा होते। फैसला लेने से पहले इनकम टैक्स कैलकुलेटर में अपना हिसाब लगाएं। दोनों सालों के स्लैब एक जैसे हैं, इसलिए यह तुलना वित्त वर्ष 2026-27 पर भी लागू होती है।
इसे कैसे ठीक करें: स्टेप बाय स्टेप
- लेंडर से पूरे साल (1 अप्रैल से 31 मार्च) का फाइनल इंटरेस्ट सर्टिफिकेट डाउनलोड करें। इसमें ब्याज और मूलधन अलग-अलग दिखाए जाते हैं। हमारी होम लोन इंटरेस्ट सर्टिफिकेट वाली गाइड हर लाइन समझाती है।
- पात्रता जांचें। सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर, खरीद या निर्माण के लिए लोन, लोन लेने वाले साल के अंत से पांच साल के अंदर निर्माण पूरा (वरना सीमा घटकर ₹30,000 रह जाती है), और आप मालिक व कर्जदार दोनों हों।
- दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करें, सिर्फ सैलरी नहीं बल्कि पूरी आय के साथ।
- अगर अभी रिटर्न नहीं भरा और ड्यू डेट बाकी है, तो पुरानी व्यवस्था चुनकर रिटर्न भरें; ब्याज को मकान से आय (income from house property) में और मूलधन को पुराने Section 80C (टैक्स ईयर 2026-27 से Section 123) में दिखाएं।
- अगर रिटर्न समय पर भर चुके हैं, तो ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिवाइज्ड रिटर्न भरें: "revised return" चुनें, मूल रिटर्न का एक्नॉलेजमेंट नंबर और तारीख डालें, और पूरा रिटर्न दोबारा भरें। 30 दिन के अंदर ई-वेरिफाई करें।
- मिलान की जांच के लिए तैयार रहें। विभाग आपके रिटर्न का फॉर्म 16 से मिलान करता है। कम्युनिकेशन आए तो 30 दिन के अंदर e-Proceedings सेक्शन में इंटरेस्ट सर्टिफिकेट लगाकर जवाब दें। हमारी होम लोन डिडक्शन मिसमैच पर इनकम टैक्स नोटिस वाली गाइड जवाब देने का तरीका बताती है।
- चालू साल के लिए कंपनी को अभी प्रोविजनल सर्टिफिकेट और Form 124 दें, और कट-ऑफ से पहले फाइनल सर्टिफिकेट, ताकि टीडीएस सही कटे और आपको रिफंड का इंतजार न करना पड़े।
कुछ गड़बड़ हो तो कहां जाएं
| समस्या | कहां कार्रवाई करें | समय सीमा |
|---|---|---|
| क्लेम खारिज करने वाला प्रस्तावित एडजस्टमेंट | ई-फाइलिंग पोर्टल, e-Proceedings: कारण बताकर सहमति या असहमति दें | कम्युनिकेशन के 30 दिन के अंदर |
| इंटिमेशन में डिमांड आ चुकी है | रिकॉर्ड से साफ दिखने वाली गलतियों के लिए रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट (पुराना Section 154, अब Section 287), या समय बचा हो तो रिवाइज्ड रिटर्न | पुराने कानून में रेक्टिफिकेशन आम तौर पर चार साल के अंदर |
| प्रोसेसिंग के बाद रिफंड नहीं आया | पोर्टल पर e-Nivaran शिकायत, फिर CPGRAMS | जब पोर्टल पर स्टेटस आगे न बढ़े |
| कंपनी फॉर्म 16 सुधारने से मना करे | जरूरी नहीं; अपने रिटर्न में क्लेम करें | — |
मिसमैच क्वेरी का सैंपल जवाब
असेसमेंट ईयर: 2026-27 पैन: [आपका पैन]
हाउसिंग लोन के ब्याज के लिए Rs [2,00,000] का डिडक्शन
(मकान से आय, सेल्फ-ऑक्यूपाइड) और मूलधन चुकाने के लिए
section 80C के तहत Rs [रकम] मेरी कंपनी ने फॉर्म 16 में नहीं
गिने, क्योंकि लेंडर का सर्टिफिकेट कंपनी की सबूत जमा करने
की डेडलाइन के बाद दिया गया था। मैंने [तारीख] को भरे गए अपने
रिटर्न में पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनी है।
यह लोन [लेंडर] से [शहर] में मेरे रिहायशी घर की खरीद के लिए
लिया गया था, जिसका मैं [अकेला/जॉइंट, X%] मालिक और
को-बॉरोअर हूं। पजेशन [तारीख] को मिला।
संलग्न: वित्त वर्ष 2025-26 का फाइनल इंटरेस्ट सर्टिफिकेट,
सैंक्शन लेटर, सेल डीड / पजेशन लेटर।
अनुरोध है कि क्लेम को रिटर्न में भरे अनुसार मंजूर किया जाए।
क्या न करें
- पुरानी व्यवस्था की उम्मीद में बिलेटेड रिटर्न न भरें। ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए यह नई व्यवस्था में प्रोसेस होगा, जिसमें सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर के ब्याज की छूट नहीं है।
- जॉइंट लोन में अपने हिस्से से ज्यादा क्लेम न करें, और न ही अभी बन रहे घर पर पूरे ₹2 लाख।
- इसके लिए ITR-U का इस्तेमाल न करें। इससे टैक्स घटाया या रिफंड बढ़ाया नहीं जा सकता।
- मिसमैच कम्युनिकेशन को नजरअंदाज न करें। 30 दिन में जवाब न देने पर क्लेम आम तौर पर अपने-आप खारिज हो जाता है।
- होम लोन है, इसलिए पुरानी व्यवस्था बेहतर है, यह न मानें। पहले तुलना करें; देखें नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था।
मुख्य बातें
- फॉर्म 16 आपके डिडक्शन की सीमा तय नहीं करता; पुरानी व्यवस्था में आप अपने आईटीआर में होम लोन ब्याज और मूलधन खुद क्लेम कर सकते हैं।
- वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 31 दिसंबर 2026 तक मुफ्त में, या 31 मार्च 2027 तक फीस के साथ रिवाइज करें।
- बिलेटेड रिटर्न में आम तौर पर नई व्यवस्था ही लागू होती है, जिसमें सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर के ब्याज की छूट नहीं है।
- उदाहरण में छूटे ब्याज से ₹62,400 मिलते हैं, लेकिन नई व्यवस्था ₹1,50,800 बचाती है; हमेशा तुलना करें।
- लेंडर का सर्टिफिकेट तैयार रखें और किसी भी मिसमैच क्वेरी का जवाब ई-फाइलिंग पोर्टल पर 30 दिन में दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर फॉर्म 16 में नहीं है तो क्या आईटीआर में होम लोन ब्याज क्लेम कर सकते हैं?
हां। फॉर्म 16 आपकी कंपनी का टीडीएस हिसाब है, आपके क्लेम की सीमा नहीं। अगर आप रिटर्न में पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं, तो सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर पर ₹2 लाख तक ब्याज (पुराना Section 24(b), अब Section 22) और ₹1.5 लाख की सीमा में मूलधन (पुराना Section 80C, अब Section 123) क्लेम कर सकते हैं, सबूत के तौर पर लेंडर का सर्टिफिकेट रखें।
मैंने होम लोन डिडक्शन के बिना आईटीआर भर दिया है। अब क्या करें?
रिवाइज्ड रिटर्न भरें। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आप 31 मार्च 2027 तक रिवाइज कर सकते हैं, 31 दिसंबर 2026 तक मुफ्त और उसके बाद ₹1,000 या ₹5,000 फीस के साथ। अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) से यह नहीं हो सकता, क्योंकि उससे टैक्स घटाया या रिफंड बढ़ाया नहीं जा सकता।
क्या बिलेटेड रिटर्न में होम लोन डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं?
सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर के लिए आम तौर पर नहीं। पुरानी व्यवस्था सिर्फ मूल ड्यू डेट तक भरे गए रिटर्न में चुनी जा सकती है, और बिलेटेड रिटर्न पर नई व्यवस्था से टैक्स लगता है, जिसमें सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर के ब्याज की कोई छूट नहीं है।
अगर आईटीआर का डिडक्शन फॉर्म 16 से अलग हो तो क्या नोटिस आएगा?
आपको क्लेम कन्फर्म करने के लिए कम्युनिकेशन मिल सकता है, क्योंकि विभाग आपके रिटर्न का फॉर्म 16 से मिलान करता है। ई-फाइलिंग पोर्टल पर 30 दिन के अंदर होम लोन इंटरेस्ट सर्टिफिकेट के साथ जवाब दें; सही क्लेम आम तौर पर मान लिया जाता है।
क्या पुरानी व्यवस्था में होम लोन डिडक्शन क्लेम करना फायदेमंद है?
हमेशा नहीं। वित्त वर्ष 2026-27 की नई व्यवस्था के स्लैब के साथ कई नौकरीपेशा लोग पुरानी व्यवस्था में पूरा होम लोन क्लेम करने के बाद भी नई व्यवस्था में कम टैक्स देते हैं। रिटर्न भरने से पहले दोनों की तुलना करें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।