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निर्माणाधीन घर के होम लोन पर टैक्स छूट: प्री-ईएमआई ब्याज

निर्माणाधीन फ्लैट के होम लोन पर टैक्स छूट: प्री-ईएमआई ब्याज कब्जे के बाद 5 किस्तों में कैसे क्लेम होता है, ₹2 लाख की सीमा और 5 साल के नियम जानें।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
निर्माणाधीन घर के होम लोन पर टैक्स छूट: प्री-ईएमआई ब्याज
इस लेख में
  1. नए कानून में यह नियम कहां है
  2. प्री-कंस्ट्रक्शन अवधि किसे माना जाता है
  3. उदाहरण: नेहा का निर्माणाधीन फ्लैट
  4. पांच साल वाले दो नियम
  5. निर्माण के दौरान मूलधन और स्टांप ड्यूटी
  6. निर्माणाधीन घर के लिए पुरानी बनाम नई व्यवस्था
  7. क्लेम कैसे करें
  8. आम गलतियां
  9. मुख्य बातें
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अगर आपका फ्लैट अभी बन रहा है, तो आप अभी होम लोन पर कोई छूट क्लेम नहीं कर सकते। पुरानी टैक्स व्यवस्था में निर्माण पूरा होने से पहले चुकाया गया ब्याज (जिसे अक्सर प्री-ईएमआई ब्याज कहते हैं) जोड़ा जाता है और कब्जा मिलने वाले साल से पांच बराबर सालाना किस्तों में घटाया जाता है, सेल्फ-ऑक्युपाइड घर की ₹2 लाख की सीमा के अंदर। कब्जे से पहले चुकाए गए मूलधन पर कभी छूट नहीं मिलती। ये नियम अक्टूबर 2026, FY 2026-27 के हिसाब से हैं।

नए कानून में यह नियम कहां है

1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 ने 1961 के अधिनियम की जगह ले ली है। होम लोन का ब्याज, प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज समेत, पुराने सेक्शन 24(b) से सेक्शन 22 में चला गया है। मूलधन और स्टांप ड्यूटी पुराने सेक्शन 80C से सेक्शन 123 (शेड्यूल XV के साथ) में चले गए हैं। तरीका नहीं बदला। सभी सीमाओं के लिए हमारी मुख्य गाइड होम लोन टैक्स बेनिफिट देखें।

मद निर्माण के दौरान कब्जे वाले साल से
निर्माण के सालों में चुकाया ब्याज उस साल छूट नहीं कुल रकम 5 बराबर सालाना किस्तों में
कब्जे वाले साल और बाद में चुकाया ब्याज — उसी साल छूट
कब्जे से पहले चुकाया मूलधन छूट नहीं कभी छूट नहीं
कब्जे के बाद चुकाया मूलधन — सेक्शन 123 की ₹1.5 लाख सीमा में (पुरानी व्यवस्था)
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन भुगतान वाले साल में, ₹1.5 लाख के अंदर वही
ब्याज की कुल सीमा, सेल्फ-ऑक्युपाइड — ₹2 लाख सालाना, किस्त समेत

प्री-कंस्ट्रक्शन अवधि किसे माना जाता है

प्री-कंस्ट्रक्शन अवधि लोन लेने की तारीख से शुरू होती है और निर्माण पूरा होने वाले टैक्स साल से ठीक पहले की 31 मार्च को खत्म होती है। निर्माण पूरा होने वाले साल में चुकाया गया ब्याज प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज नहीं है; वह उस साल का सामान्य ब्याज है।

यानी अगर आपने जुलाई 2023 में लोन लिया और बिल्डर सितंबर 2026 में कब्जा देता है:

  • प्री-कंस्ट्रक्शन अवधि: जुलाई 2023 से 31 मार्च 2026 (FY 2023-24, 2024-25, 2025-26)
  • पहली किस्त का साल: FY 2026-27
  • अप्रैल 2026 से चुकाया ब्याज: FY 2026-27 का सामान्य ब्याज

पजेशन लेटर या कंप्लीशन सर्टिफिकेट संभालकर रखें। इसी से तय होता है कि आपकी किस्तें किस साल से शुरू होंगी।

उदाहरण: नेहा का निर्माणाधीन फ्लैट

नेहा ने जुलाई 2023 में एक फ्लैट के लिए होम लोन लिया, जिसका कब्जा सितंबर 2026 में मिला। वे उसमें रहती हैं, इसलिए यह सेल्फ-ऑक्युपाइड है। वे पुरानी व्यवस्था में 30% स्लैब में हैं।

निर्माण के दौरान चुकाया ब्याज (प्री-ईएमआई):

टैक्स साल चुकाया ब्याज
FY 2023-24 ₹1,20,000
FY 2024-25 ₹2,10,000
FY 2025-26 ₹2,20,000
कुल ₹5,50,000

सालाना किस्त: ₹5,50,000 ÷ 5 = FY 2026-27 से FY 2030-31 तक हर साल ₹1,10,000।

FY 2026-27 का क्लेम:

  • प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज की किस्त: ₹1,10,000
  • FY 2026-27 में चुकाया ब्याज: ₹2,30,000
  • कुल योग्य ब्याज: ₹3,40,000
  • सेल्फ-ऑक्युपाइड घर पर मिलने वाली छूट: ₹2,00,000 (सीमा)
  • इस साल बेकार गया: ₹1,40,000

ब्याज पर टैक्स बचत: ₹2,00,000 × 31.2% (30% और 4% सेस) = ₹62,400।

लोन चुकने के साथ नेहा का सामान्य ब्याज धीरे-धीरे ही घटेगा, इसलिए हर साल ₹1,10,000 की किस्त जुड़ने से उनका कुल ब्याज पांचों साल ₹2 लाख से ऊपर रहने की संभावना है और हर बार सीमा लागू होगी। छोटे लोन वाले व्यक्ति के लिए किस्त जुड़कर कुल रकम ठीक ₹2 लाख तक पहुंच सकती है, बिना कुछ बेकार गए।

अगर नेहा फ्लैट किराये पर देतीं, तो पूरा ₹3,40,000 किराये से घटाया जा सकता था। इससे घाटा बनता तो पुरानी व्यवस्था में वे ₹2 लाख तक सैलरी से सेट ऑफ कर सकती थीं और बाकी आठ साल तक कैरी फॉरवर्ड कर सकती थीं। नई व्यवस्था में वह घाटा बस खत्म हो जाता।

पांच साल वाले दो नियम

पांच साल की दो अलग-अलग शर्तें हैं, और लोग अक्सर इन्हें मिला देते हैं।

1. लोन लेने के पांच साल के अंदर निर्माण पूरा होना। सेल्फ-ऑक्युपाइड घर पर ₹2 लाख की सीमा के लिए, लोन लेने वाले टैक्स साल के अंत से पांच साल के अंदर घर खरीदा या बनाया जाना चाहिए। नेहा ने FY 2023-24 में लोन लिया, इसलिए उनकी डेडलाइन 31 मार्च 2029 थी। अगर कब्जा उस तारीख के बाद मिलता, तो उनकी ब्याज छूट घटकर ₹30,000 सालाना रह जाती। देर से चल रहे प्रोजेक्ट यहां सबसे बड़ा जोखिम हैं। अगर आपका बिल्डर पीछे चल रहा है, तो फैसला करने से पहले निर्माणाधीन बनाम रेडी-टू-मूव घर की हमारी तुलना देखें।

2. कब्जे के पांच साल के अंदर बिक्री नहीं। अगर आप कब्जा मिलने वाले टैक्स साल के अंत से पांच साल के अंदर घर ट्रांसफर करते हैं, तो पुराने सेक्शन 80C (अब सेक्शन 123) में ली गई मूलधन की सारी छूट वापस होकर बिक्री वाले साल की आपकी आय में जुड़ जाती है। ब्याज की छूट वापस नहीं होती।

निर्माण के दौरान मूलधन और स्टांप ड्यूटी

  • मूलधन: कब्जे से पहले चुकाया गया मूलधन टैक्स के लिहाज से बेकार जाता है। कई निर्माणाधीन लोन प्री-ईएमआई (सिर्फ ब्याज) पर होते हैं, इसलिए यह अक्सर कम होता है। अगर आपने पहले डिस्बर्सल से ही पूरी ईएमआई चुनी है, तो उन शुरुआती ईएमआई के मूलधन वाले हिस्से पर कोई छूट नहीं मिलती। इसका फायदा-नुकसान हमारी गाइड प्री-ईएमआई बनाम पूरी ईएमआई में समझाया गया है।
  • स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन: ये उसी टैक्स साल में घटते हैं जिसमें आप असल में भुगतान करते हैं, सेक्शन 123 की ₹1.5 लाख सीमा के अंदर। अगर आप निर्माण के दौरान एग्रीमेंट रजिस्टर कराते हैं, तो क्लेम उसी साल का होगा, कब्जे वाले साल का नहीं।

निर्माणाधीन घर के लिए पुरानी बनाम नई व्यवस्था

डिफॉल्ट नई व्यवस्था (पुराना सेक्शन 115BAC, अब सेक्शन 202) में सेल्फ-ऑक्युपाइड घर के लिए इनमें से कुछ भी काम नहीं आता: न ब्याज पर छूट, न प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज की किस्त, न सेक्शन 123 की छूट। इसलिए किस्तें तभी मायने रखती हैं जब फ्लैट तैयार होने पर पुरानी व्यवस्था आपके लिए सस्ती पड़े।

हिसाब कब्जे वाले साल के लिए लगाएं, आज के लिए नहीं। निर्माण के सालों में शायद आपके पास क्लेम करने को कुछ न हो, इसलिए अक्सर नई व्यवस्था बेहतर रहती है। कब्जे वाले साल से ₹2 लाख ब्याज और सेक्शन 123 का क्लेम जोड़ें और हमारे इनकम टैक्स कैलकुलेटर से फिर तुलना करें। सैलरीड टैक्सपेयर रिटर्न भरते समय हर साल नए सिरे से व्यवस्था चुन सकते हैं।

क्लेम कैसे करें

  1. अपने लेंडर से पूरी निर्माण अवधि का साल-वार ब्याज स्टेटमेंट मांगें। इसमें ब्याज और मूलधन अलग-अलग हों और हर डिस्बर्सल की तारीख दिखे।
  2. कुल प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज निकालें और पांच से भाग दें। यह हिसाब पांचों साल के लिए संभालकर रखें; आपको इसकी दोबारा जरूरत पड़ेगी।
  3. अपने एम्प्लॉयर को बताएं, अपने डिक्लेरेशन (Form 124, जिसने Form 12BB की जगह ली है) में लेंडर के सर्टिफिकेट और पजेशन लेटर के साथ, ताकि टीडीएस में यह क्लेम दिखे।
  4. अपने रिटर्न में किस्त को उस साल के ब्याज के साथ हाउस प्रॉपर्टी की आय में दिखाएं। पजेशन लेटर, सेल एग्रीमेंट और ब्याज स्टेटमेंट अपने रिकॉर्ड में रखें।

आम गलतियां

  • कब्जे से पहले, जिन सालों में प्री-ईएमआई ब्याज चुकाया, उन्हीं सालों में उसे क्लेम करना।
  • सेल्फ-ऑक्युपाइड घर पर ₹2 लाख की सीमा के ऊपर किस्त क्लेम करना।
  • नौकरी या टैक्स प्रिपेयरर बदलने के बाद दूसरी से पांचवीं किस्त क्लेम करना भूल जाना।
  • कब्जे वाले साल में चुकाए ब्याज को प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज में गिनना।
  • यह मान लेना कि निर्माण के दौरान चुकाए मूलधन पर बाद में छूट मिल जाएगी।

मुख्य बातें

  • घर बनने के दौरान होम लोन पर कोई छूट नहीं मिलती।
  • प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज निर्माण पूरा होने वाले साल से पांच बराबर किस्तों में क्लेम होता है, पुरानी व्यवस्था में सेल्फ-ऑक्युपाइड घर की ₹2 लाख सीमा के अंदर।
  • कब्जे से पहले चुकाए मूलधन पर कभी छूट नहीं मिलती; स्टांप ड्यूटी भुगतान वाले साल में गिनी जाती है।
  • लोन वाले साल के अंत से पांच साल के बाद निर्माण पूरा होने पर ब्याज की सीमा ₹30,000 रह जाती है।
  • कब्जे के पांच साल के अंदर बेचने पर मूलधन की छूट वापस हो जाती है।
  • नई व्यवस्था में सेल्फ-ऑक्युपाइड घर पर कोई फायदा नहीं, इसलिए कब्जे वाले साल से दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या फ्लैट बनने के दौरान होम लोन ब्याज पर छूट ले सकते हैं?

जिन सालों में घर बन रहा है, उनमें कोई छूट नहीं मिलती। उस दौरान चुकाया गया ब्याज जोड़ा जाता है और जिस टैक्स साल में निर्माण पूरा होता है या आपको कब्जा मिलता है, वहां से पांच बराबर किस्तों में क्लेम किया जाता है।

क्या कब्जे से पहले चुकाए मूलधन पर छूट मिलती है?

नहीं। निर्माण पूरा होने से पहले चुकाया गया मूलधन पुराने सेक्शन 80C (अब सेक्शन 123) में कभी नहीं आता, बाद में भी नहीं। सिर्फ कब्जे वाले साल से आगे चुकाया गया मूलधन गिना जाता है।

क्या प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज ₹2 लाख की सीमा के ऊपर मिलता है?

सेल्फ-ऑक्युपाइड घर के लिए नहीं। पुरानी व्यवस्था में प्री-कंस्ट्रक्शन ब्याज की सालाना किस्त और उस साल का ब्याज मिलाकर ₹2 लाख की सीमा है। किराये पर दिए घर में ब्याज पर कोई सीमा नहीं है।

अगर निर्माण में पांच साल से ज्यादा लग जाएं तो?

अगर लोन लेने वाले टैक्स साल के अंत से पांच साल के अंदर घर खरीदा या बनाया नहीं जाता, तो सेल्फ-ऑक्युपाइड घर पर ब्याज की छूट ₹2 लाख से घटकर ₹30,000 सालाना रह जाती है।

क्या नई टैक्स व्यवस्था में प्री-ईएमआई ब्याज पर छूट मिलती है?

सेल्फ-ऑक्युपाइड घर पर नहीं। किराये वाले घर पर इसे किराये से घटाया जा सकता है, लेकिन नई व्यवस्था में इससे बनने वाला घाटा न दूसरी आय से सेट ऑफ होता है, न कैरी फॉरवर्ड।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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