जॉइंट होम लोन: पात्रता, टैक्स फायदे और जोखिम
जॉइंट होम लोन से लोन की पात्रता बढ़ती है और पुराने टैक्स रिजीम में टैक्स फायदा दोगुना हो सकता है, पर हर को-बॉरोअर पूरे लोन का जिम्मेदार है।

इस लेख में
जॉइंट होम लोन में दो या ज्यादा लोग, आम तौर पर पति-पत्नी या माता-पिता और बच्चा, अपनी आय जोड़कर ज्यादा लोन ले सकते हैं, और पुराने टैक्स रिजीम में हर व्यक्ति अपना-अपना होम लोन डिडक्शन क्लेम कर सकता है। अक्टूबर 2026 की स्थिति के मुताबिक, खुद रहने वाले घर के को-ओनर पति-पत्नी मिलकर साल में ₹4 लाख तक ब्याज और ₹3 लाख तक मूलधन पर डिडक्शन ले सकते हैं। इसकी कीमत यह है कि हर को-बॉरोअर पूरे लोन का जिम्मेदार होता है, सिर्फ अपने हिस्से का नहीं।
इस गाइड में जानें कि कौन आवेदन कर सकता है, आप कितना ज्यादा लोन ले सकते हैं, टैक्स के नियम क्या हैं, और साइन करने से पहले क्या-क्या तय कर लेना चाहिए।
को-बॉरोअर, को-ओनर और गारंटर: तीनों अलग हैं
| भूमिका | प्रॉपर्टी का मालिक? | लोन का जिम्मेदार? | टैक्स फायदा ले सकता है? |
|---|---|---|---|
| को-ओनर और को-बॉरोअर | हां | हां, पूरी रकम के लिए | हां, अगर ईएमआई भरता है (पुराना रिजीम) |
| सिर्फ को-बॉरोअर | नहीं | हां, पूरी रकम के लिए | नहीं |
| गारंटर | नहीं | सिर्फ बॉरोअर के डिफॉल्ट करने पर, लेकिन तब पूरी रकम के लिए | नहीं |
ज्यादातर लेंडर जोर देते हैं कि प्रॉपर्टी का हर को-ओनर को-बॉरोअर के रूप में जुड़े। लेकिन उल्टा हमेशा सही नहीं है: पात्रता बढ़ाने के लिए माता-पिता को-बॉरोअर बन सकते हैं, भले ही प्रॉपर्टी के कागजों में उनका नाम न हो। गड़बड़ी होने पर क्या होता है, यह हमारे को-एप्लिकेंट और गारंटर की जिम्मेदारी वाले लेख में बताया गया है।
लेंडर आम तौर पर करीबी रिश्तेदारों को को-बॉरोअर बनने देते हैं: पति या पत्नी, माता-पिता, बच्चे और कभी-कभी भाई-बहन। बिना शादी के पार्टनर और दोस्तों को ज्यादातर बैंक को-बॉरोअर के रूप में स्वीकार नहीं करते।
ज्यादा पात्रता: उदाहरण से समझें
नेहा की हाथ में आने वाली सैलरी ₹1.1 लाख महीना है और उनके पति अर्जुन की ₹70,000। उनका लेंडर कुल ईएमआई को नेट आय के 50% (FOIR) तक सीमित रखता है। समझने के लिए 8.5% ब्याज और 20 साल की अवधि मानें:
| आवेदक | नेट मासिक आय | 50% FOIR पर अधिकतम ईएमआई | अनुमानित लोन |
|---|---|---|---|
| सिर्फ नेहा | ₹1,10,000 | ₹55,000 | ₹63.4 लाख |
| नेहा और अर्जुन मिलकर | ₹1,80,000 | ₹90,000 | ₹1.04 करोड़ |
अक्टूबर 2026 की स्थिति में लोन पर आरबीआई की लोन-टू-वैल्यू सीमा भी लागू रहती है: ₹30 लाख तक के लोन पर 90%, ₹30 लाख से ऊपर ₹75 लाख तक 80%, और ₹75 लाख से ऊपर 75%। ₹1.04 करोड़ के लोन के लिए प्रॉपर्टी की कीमत करीब ₹1.38 करोड़ या उससे ज्यादा होनी चाहिए। पूरा तरीका हमारी होम लोन पात्रता और दस्तावेज वाली गाइड में है।
ज्यादा पात्रता का मतलब यह नहीं कि आप उतना लोन आराम से चुका पाएंगे। अगर एक की आय रुक जाए, तो क्या दूसरा अकेले ₹90,000 महीना भर पाएगा? ईएमआई कैलकुलेटर में उस रकम से हिसाब लगाएं जो आप में से कोई एक अकेले चुका सके।
लेंडर दोनों के क्रेडिट स्कोर भी देखते हैं। एक को-बॉरोअर का कमजोर स्कोर ब्याज दर बढ़ा सकता है या लोन रिजेक्ट करवा सकता है, इसलिए पहले दोनों की रिपोर्ट जांच लें।
जॉइंट होम लोन के टैक्स फायदे
पुराने टैक्स रिजीम में, वित्त वर्ष 2026-27 के हिसाब से, हर वह को-बॉरोअर जो को-ओनर भी है और ईएमआई में योगदान देता है, अलग-अलग क्लेम कर सकता है:
- ब्याज: खुद रहने वाले घर पर साल में ₹2 लाख तक, पुराने सेक्शन 24(b) के तहत, जो अब Income-tax Act, 2025 का सेक्शन 22 है।
- मूलधन: पुराने सेक्शन 80C, अब सेक्शन 123, के तहत अपनी ₹1.5 लाख की सीमा के अंदर, और साथ में जिस साल भुगतान हुआ उस साल की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन।
क्लेम मालिकाना हिस्से और असल भुगतान के हिसाब से होना चाहिए। अगर नेहा 50% की मालिक हैं लेकिन ईएमआई का 70% भरती हैं, तो टैक्स एक्सपर्ट बाद में अनुपात से बाहर क्लेम करने की बजाय खरीद के समय ही मालिकाना अनुपात बदलने की सलाह दे सकते हैं।
उदाहरण: ₹90 लाख के लोन पर टैक्स बचत
₹90 लाख का लोन, 8.5% ब्याज, 20 साल, ईएमआई ₹78,104। पहले साल ब्याज करीब ₹7.58 लाख और मूलधन करीब ₹1.79 लाख है। दोनों 30% स्लैब में हैं, पुराना रिजीम, 4% सेस, और घर 50:50 के मालिक हैं।
| अकेला बॉरोअर | जॉइंट, 50:50 | |
|---|---|---|
| ब्याज का हिस्सा | ₹7.58 लाख | हर एक का ₹3.79 लाख |
| मिलने वाला ब्याज डिडक्शन | ₹2 लाख | हर एक का ₹2 लाख = ₹4 लाख |
| ब्याज पर टैक्स बचत (31.2%) | ₹62,400 | ₹1,24,800 |
| मूलधन का हिस्सा | ₹1.79 लाख (₹1.5 लाख की सीमा तक) | हर एक का करीब ₹0.9 लाख |
यहां जॉइंट लोन से ब्याज डिडक्शन दोगुना हो जाता है। मूलधन डिडक्शन से कुछ अतिरिक्त फायदा होगा या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि हर व्यक्ति की ₹1.5 लाख की सीमा पहले से EPF, PPF या इंश्योरेंस में कितनी इस्तेमाल हो चुकी है।
नया रिजीम यह गणित बदल देता है। डिफॉल्ट नए रिजीम में खुद रहने वाले घर पर न ब्याज और न मूलधन का कोई डिडक्शन मिलता है। अगर आप दोनों के लिए नया रिजीम बेहतर है, तो जॉइंट लोन का टैक्स वाला फायदा खत्म हो जाता है। पूरी जानकारी हमारी होम लोन टैक्स फायदे वाली गाइड में है।
दूसरे फायदे
- महिलाओं के लिए स्टांप ड्यूटी में छूट: अक्टूबर 2026 की स्थिति में कई राज्य महिला खरीदारों से कम स्टांप ड्यूटी लेते हैं, जैसे दिल्ली (पुरुषों के 6% के मुकाबले 4%) और उत्तर प्रदेश (एक तय कीमत तक 1 प्रतिशत अंक की छूट)। कुछ राज्य किसी महिला के साथ जॉइंट ओनरशिप पर भी इस फायदे का कुछ हिस्सा देते हैं। अपने राज्य के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर कन्फर्म करें।
- कम ब्याज दर के ऑफर: जब कोई महिला प्राइमरी बॉरोअर या को-ओनर हो, तो कुछ लेंडर ब्याज दर में थोड़ी छूट देते हैं, अक्सर करीब 0.05 प्रतिशत अंक।
- साझा मालिकाना हक दोनों के योगदान को दिखाता है, जो उत्तराधिकार और तलाक के निपटारे में मदद करता है।
साइन करने से पहले ये जोखिम तय कर लें
- संयुक्त और अलग-अलग जिम्मेदारी। बैंक पूरी ईएमआई किसी भी बॉरोअर से वसूल सकता है। अगर दूसरा भुगतान बंद कर दे, तो "मैंने अपना आधा भर दिया" कहना बचाव नहीं है।
- क्रेडिट स्कोर का जुड़ाव। हर छूटी ईएमआई दोनों की सिबिल रिपोर्ट में दिखती है और दोनों के आगे के लोन को सीमित करती है।
- तलाक या अलगाव। लोन अपने-आप नहीं बंटता। किसी एक को अपने नाम पर रीफाइनेंस करना होगा, या घर बेचना होगा। हिस्सा ट्रांसफर करने के लिए आम तौर पर रजिस्टर्ड रिलीज डीड या गिफ्ट डीड चाहिए।
- किसी को-बॉरोअर की मौत। बचे हुए व्यक्ति पर पूरा लोन आ जाता है। हर कमाने वाले को-बॉरोअर के पास कम से कम बकाया लोन जितना टर्म इंश्योरेंस होना चाहिए; लेंडर का बेचा सिंगल-प्रीमियम कवर जरूरी नहीं है और अक्सर महंगा होता है।
- पारिवारिक विवाद। जब माता-पिता या भाई-बहन को-ओनर हों, तो लिखित में तय करें कि कौन कितना भरेगा और प्रॉपर्टी बिकने पर क्या होगा।
जॉइंट लोन या एक बॉरोअर: एक आसान टेस्ट
जॉइंट लोन सबसे ज्यादा काम का तब है जब इनमें से कम से कम दो बातें सही हों:
- एक व्यक्ति की आय से जरूरी लोन नहीं मिल रहा, लेकिन दोनों की आय मिलाकर आराम से मिल जाता है।
- आप दोनों पुराने टैक्स रिजीम में रहेंगे और दोनों के पास ₹2 लाख की सीमा इस्तेमाल करने लायक ब्याज है।
- आप दोनों घर का कानूनी मालिकाना हक चाहते हैं, और दोनों डाउन पेमेंट और ईएमआई में योगदान देते हैं।
- आप ऐसे राज्य में रहते हैं जहां महिला को-ओनर होने पर स्टांप ड्यूटी कम लगती है।
अगर सिर्फ एक व्यक्ति कमाता है, तो दूसरे का नाम लोन में जोड़ने से पात्रता नहीं बढ़ती, सिर्फ जिम्मेदारी बढ़ती है। ऐसे में एक बॉरोअर और पति या पत्नी को को-ओनर बनाना (जहां लेंडर इजाजत दे) ज्यादा आसान हो सकता है।
आवेदन कैसे करें
- कौन कितना योगदान देगा, इसके आधार पर मालिकाना हिस्सा तय करें और उसे सेल डीड में दर्ज करें।
- आवेदन से पहले दोनों की क्रेडिट रिपोर्ट जांचें और गलतियां ठीक कराएं।
- हर आवेदक के KYC, आय के सबूत और बैंक स्टेटमेंट इकट्ठा करें।
- कम से कम तीन लेंडर्स की ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस की तुलना करें।
- सैंक्शन लेटर और Key Facts Statement साथ में पढ़ें, और लोन एग्रीमेंट में दोनों नाम कन्फर्म करें।
- ईएमआई जॉइंट अकाउंट से, या हर व्यक्ति के खाते से अनुपात में सेट करें, ताकि भुगतान का रिकॉर्ड टैक्स क्लेम को सपोर्ट करे।
मुख्य बातें
- जॉइंट होम लोन में आय जुड़ती है; हमारे उदाहरण में पात्रता करीब ₹63 लाख से बढ़कर ₹1.04 करोड़ हो गई।
- पुराने रिजीम में हर को-ओनर को-बॉरोअर वित्त वर्ष 2026-27 के हिसाब से ₹2 लाख तक ब्याज और अपनी ₹1.5 लाख की मूलधन सीमा क्लेम कर सकता है।
- नए रिजीम में खुद रहने वाले घर पर किसी भी बॉरोअर को कोई डिडक्शन नहीं मिलता।
- हर को-बॉरोअर पूरे लोन का जिम्मेदार है, और यह खाता हर को-बॉरोअर के क्रेडिट स्कोर पर असर डालता है।
- साइन करने से पहले योगदान, मालिकाना हिस्से और टर्म इंश्योरेंस पर सहमति बना लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जॉइंट होम लोन कौन ले सकता है?
लेंडर आम तौर पर पति-पत्नी, माता-पिता और बच्चों जैसे करीबी परिवार वालों को, और कभी-कभी भाई-बहन को भी, को-बॉरोअर बनने देते हैं। ज्यादातर लेंडर प्रॉपर्टी के को-ओनर को को-बॉरोअर बनाना जरूरी मानते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर को-बॉरोअर को-ओनर भी हो।
क्या दोनों को-बॉरोअर होम लोन का टैक्स फायदा ले सकते हैं?
हां, पुराने टैक्स रिजीम में, अगर दोनों को-ओनर और को-बॉरोअर हैं और सच में ईएमआई में पैसा देते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के हिसाब से हर व्यक्ति खुद रहने वाले घर पर ₹2 लाख तक ब्याज और अपनी ₹1.5 लाख की सीमा में मूलधन क्लेम कर सकता है।
क्या जॉइंट होम लोन का असर दोनों के सिबिल स्कोर पर पड़ता है?
हां। लोन हर को-बॉरोअर की क्रेडिट रिपोर्ट में दिखता है। समय पर ईएमआई भरने से दोनों का स्कोर सुधरता है, और एक भी ईएमआई छूटने पर दोनों का स्कोर गिरता है, भले ही भुगतान सिर्फ एक व्यक्ति को करना था।
तलाक या मौत के बाद जॉइंट होम लोन का क्या होता है?
लेंडर पूरी बकाया रकम किसी भी बचे हुए को-बॉरोअर से वसूल सकता है। तलाक होने पर लोन चलता रहता है, जब तक लेंडर की मंजूरी से उसे एक व्यक्ति के नाम पर रीफाइनेंस न किया जाए। हर कमाने वाले को-बॉरोअर का पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस परिवार को सुरक्षा देता है।
क्या होम लोन से को-बॉरोअर का नाम हटाया जा सकता है?
सिर्फ लेंडर की सहमति से, और आम तौर पर तब जब बचा हुआ बॉरोअर दिखा दे कि उसकी आय अकेले लोन चुकाने के लिए काफी है। मालिकाना हक बदलने के लिए रजिस्टर्ड रिलीज डीड और स्टांप ड्यूटी की भी जरूरत पड़ सकती है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।