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एफडी, म्यूचुअल फंड और शेयर पर टैक्स 2026-27

2026-27 में एफडी ब्याज, डेट और इक्विटी म्यूचुअल फंड, शेयर, डिविडेंड और गोल्ड पर टैक्स कैसे लगता है: टीडीएस सीमा, नई धाराएं और उदाहरण से तुलना।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 6 मिनट में पढ़ें
एफडी, म्यूचुअल फंड और शेयर पर टैक्स 2026-27
इस लेख में
  1. एक नजर में तुलना (टैक्स वर्ष 2026-27)
  2. नई धाराओं के नंबर पहचानें
  3. फिक्स्ड डिपॉजिट और आरडी
  4. इक्विटी म्यूचुअल फंड और शेयर
  5. डेट फंड, गोल्ड और इंटरनेशनल फंड
  6. डिविडेंड, बायबैक और ट्रेडिंग
  7. उदाहरण: एफडी बनाम इक्विटी फंड में ₹10 लाख (सिर्फ समझाने के लिए)
  8. मुख्य बातें
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एफडी के ब्याज पर हर साल आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड और लिस्टेड शेयरों पर टैक्स सिर्फ बेचने पर लगता है: 12 महीने तक रखने पर 20%, और उससे ज्यादा रखने पर साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के गेन पर 12.5%। 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट फंड पर बेचते समय स्लैब रेट से टैक्स लगता है। डिविडेंड पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है। ये दरें अक्टूबर 2026 की स्थिति में, इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत टैक्स वर्ष 2026-27 पर लागू हैं।

एक नजर में तुलना (टैक्स वर्ष 2026-27)

निवेश टैक्स कब लगता है शॉर्ट-टर्म लॉन्ग-टर्म टीडीएस
बैंक / पोस्ट ऑफिस एफडी, आरडी हर साल, ब्याज बनते ही स्लैब रेट स्लैब रेट एक बैंक से साल में ब्याज ₹50,000 से ज्यादा हो तो 10% (सीनियर के लिए ₹1 लाख)
सेविंग्स अकाउंट का ब्याज हर साल स्लैब रेट स्लैब रेट कोई नहीं
लिस्टेड शेयर, इक्विटी एमएफ, इक्विटी ईटीएफ बेचने पर 20% (≤ 12 महीने रखे हों) साल में ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5% (> 12 महीने रखे हों) रेजिडेंट के लिए कोई नहीं
1 अप्रैल 2023 या बाद में खरीदे डेट एमएफ बेचने पर स्लैब रेट स्लैब रेट (LTCG का फायदा नहीं) रेजिडेंट के लिए कोई नहीं
गोल्ड ईटीएफ, इंटरनेशनल और ज्यादातर दूसरे फंड बेचने पर स्लैब रेट (लिस्टेड के लिए ≤ 12 महीने, अनलिस्टेड के लिए ≤ 24 महीने) 12.5%, इंडेक्सेशन नहीं रेजिडेंट के लिए कोई नहीं
डिविडेंड (शेयर और एमएफ) मिलने पर स्लैब रेट स्लैब रेट एक भुगतानकर्ता से साल में > ₹10,000 हो तो 10%
इंट्राडे ट्रेडिंग सालाना स्लैब पर स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम — कोई नहीं
F&O ट्रेडिंग सालाना स्लैब पर नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम — कोई नहीं

इन सभी पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस जोड़ें, और अगर आपकी आय ₹50 लाख से ज्यादा है तो सरचार्ज भी (इक्विटी गेन और डिविडेंड पर अधिकतम 15%)।

नई धाराओं के नंबर पहचानें

इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से 1961 के एक्ट की जगह ली है। दरें नहीं बदलीं, लेकिन धाराओं के नंबर बदल गए:

  • 20% वाला इक्विटी STCG: धारा 196 (पुरानी धारा 111A)
  • 12.5% वाला दूसरा LTCG: धारा 197 (पुरानी धारा 112)
  • ₹1.25 लाख से ऊपर इक्विटी LTCG: धारा 198 (पुरानी धारा 112A)
  • डेट फंड के गेन जिन्हें शॉर्ट-टर्म माना जाता है: धारा 76 (पुरानी धारा 50AA)
  • ब्याज और डिविडेंड, यानी दूसरे स्रोतों से आय: धारा 92 (पुरानी धारा 56)
  • एफडी ब्याज, डिविडेंड और सैलरी के अलावा ज्यादातर भुगतानों पर टीडीएस: धारा 393 (पुरानी 194A, 194 और दूसरी)
  • सेविंग्स अकाउंट के ब्याज (₹10,000) और सीनियर सिटीजन (₹50,000) के लिए ब्याज पर कटौती: धारा 153 (पुरानी 80TTA और 80TTB), सिर्फ पुरानी व्यवस्था में

1 अप्रैल 2026 से पहले की गई बिक्री पर 1961 का एक्ट और उसकी धाराएं ही लागू रहेंगी।

फिक्स्ड डिपॉजिट और आरडी

एफडी का ब्याज बनते ही (accrual पर) टैक्सेबल होता है, इसलिए जो क्यूमुलेटिव एफडी सिर्फ मैच्योरिटी पर पैसा देती है, उस पर भी साल-दर-साल टैक्स लगता है। कई लोग सिर्फ मैच्योरिटी पर टैक्स भरते हैं और उनके AIS से आंकड़े मेल नहीं खाते।

टीडीएस। जब किसी बैंक से टैक्स वर्ष में ब्याज ₹50,000 से ज्यादा हो जाता है (सीनियर सिटीजन के लिए ₹1 लाख), तो बैंक 10% टीडीएस काटता है। यह सीमा हर बैंक के लिए, आपकी सभी जमाओं को मिलाकर है, और सीमा पार होते ही पूरे ब्याज पर टीडीएस लगता है। पैन न होने पर टीडीएस 20% है। टीडीएस सिर्फ एडवांस है; अगर आपका स्लैब 20% या 30% है, तो रिटर्न भरते समय बाकी अंतर भरना होगा।

टीडीएस से कैसे बचें। अगर आपकी कुल आय टैक्सेबल सीमा से कम है, तो आप बैंक को सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म दे सकते हैं (फॉर्म 15G/15H, जिसे इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 के तहत एक नए फॉर्म में मिलाया जा रहा है)। अगर आपकी आय टैक्सेबल है, तो यह फॉर्म न दें।

सीनियर सिटीजन। पुरानी व्यवस्था में रेजिडेंट सीनियर सिटीजन बैंक और पोस्ट ऑफिस के ₹50,000 तक के ब्याज पर कटौती ले सकते हैं (धारा 153, पुरानी 80TTB)। विकल्पों की तुलना पीपीएफ बनाम एफडी बनाम ईएलएसएस और हमारी एफडी लैडर गाइड में करें।

इक्विटी म्यूचुअल फंड और शेयर

कोई फंड "इक्विटी-ओरिएंटेड" तब होता है जब वह कम से कम 65% भारतीय लिस्टेड इक्विटी में रखता है। इंडेक्स फंड, ईएलएसएस, लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप और इक्विटी ईटीएफ सभी इसमें आते हैं।

  • 12 महीने या कम रखने पर: 20% STCG, कोई छूट नहीं।
  • 12 महीने से ज्यादा रखने पर: टैक्स वर्ष में कुल इक्विटी LTCG के ₹1.25 लाख से ऊपर वाले हिस्से पर 12.5% LTCG, इंडेक्सेशन के बिना।
  • एसआईपी की हर किस्त एक अलग खरीद है। यूनिट्स पहले-आओ-पहले-जाओ (FIFO) के हिसाब से रिडीम होती हैं, इसलिए एक ही रिडेम्प्शन में कुछ यूनिट लॉन्ग-टर्म और कुछ शॉर्ट-टर्म हो सकती हैं।
  • ग्रैंडफादरिंग: 1 फरवरी 2018 से पहले खरीदे गए शेयरों और इक्विटी फंड के लिए, अगर 31 जनवरी 2018 की कीमत ज्यादा है तो लागत उसी को माना जा सकता है।
  • रिबेट लागू नहीं: इन स्पेशल रेट वाले गेन पर टैक्स देना होगा, भले ही आपकी कुल आय ₹12 लाख से कम हो। हालांकि जिन रेजिडेंट्स की दूसरी आय बेसिक छूट सीमा से कम है, वे बची हुई सीमा का इस्तेमाल इन गेन के खिलाफ कर सकते हैं।

म्यूचुअल फंड के पूरे नियमों के लिए म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स देखें।

डेट फंड, गोल्ड और इंटरनेशनल फंड

डेट फंड (65% से ज्यादा डेट और मनी-मार्केट इंस्ट्रूमेंट में) जो 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए, उन पर होल्डिंग पीरियड कुछ भी हो, स्लैब रेट से टैक्स लगता है। उस तारीख से पहले खरीदी गई यूनिट्स को 24 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% LTCG लगता है।

गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड फंड, इंटरनेशनल फंड और 35% से 65% इक्विटी वाले हाइब्रिड फंड पर 24 महीने से ज्यादा रखने पर (ईटीएफ जैसी लिस्टेड यूनिट्स के लिए 12 महीने) इंडेक्सेशन के बिना 12.5% टैक्स लगता है, वरना स्लैब रेट से।

डिविडेंड, बायबैक और ट्रेडिंग

  • डिविडेंड आय में जुड़ता है और स्लैब रेट से टैक्स लगता है। ऊंचे स्लैब वालों के लिए म्यूचुअल फंड का IDCW (डिविडेंड) विकल्प आम तौर पर ग्रोथ विकल्प से कम टैक्स-फ्रेंडली होता है।
  • बायबैक: यूनियन बजट 2026 ने टैक्स वर्ष 2026-27 से शेयरधारकों के लिए बायबैक की रकम को फिर से कैपिटल गेन के तौर पर माना है, और प्रमोटरों के लिए असल दरें ज्यादा रखी हैं। हर बायबैक कैसे रिपोर्ट हुआ, यह ब्रोकर के टैक्स स्टेटमेंट में देखें।
  • इंट्राडे ट्रेडिंग स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम है। F&O नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम है, जो ITR-3 में भरी जाती है। 1 अप्रैल 2026 से फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT बढ़ाया गया है।

उदाहरण: एफडी बनाम इक्विटी फंड में ₹10 लाख (सिर्फ समझाने के लिए)

राहुल नई व्यवस्था में 30% स्लैब में है और ₹10 लाख निवेश करता है।

एक साल के लिए 7% पर एफडी

  • ब्याज: ₹70,000
  • 30% टैक्स + 4% सेस: ₹21,000 + ₹840 = ₹21,840
  • बैंक द्वारा काटा गया टीडीएस (ब्याज > ₹50,000): ₹7,000; बाकी ₹14,840 राहुल रिटर्न भरते समय देता है
  • टैक्स के बाद कमाई: ₹48,160 (टैक्स के बाद 4.8% रिटर्न)

तीन साल रखा इक्विटी इंडेक्स फंड, कीमत ₹13,25,000 (सिर्फ समझाने के लिए)

  • LTCG: ₹3,25,000। मान लें कि वह पूरी होल्डिंग एक ही साल में रिडीम करता है और उसका कोई दूसरा इक्विटी LTCG नहीं है।
  • टैक्सेबल LTCG: ₹3,25,000 − ₹1,25,000 = ₹2,00,000
  • 12.5% टैक्स + सेस: ₹25,000 + ₹1,000 = ₹26,000
  • टैक्स के बाद कमाई: तीन साल में ₹2,99,000

इक्विटी वाला आंकड़ा एक अनुमान है, भविष्यवाणी नहीं; इक्विटी का रिटर्न नेगेटिव भी हो सकता है। असली बात ढांचे की है: एफडी के ब्याज पर हर साल पूरे स्लैब रेट से टैक्स लगता है, जबकि इक्विटी गेन पर एक बार, कम दर पर, सालाना छूट के बाद टैक्स लगता है। एफडी की मैच्योरिटी रकम एफडी कैलकुलेटर में जांचें।

मुख्य बातें

  • अक्टूबर 2026 की स्थिति में एफडी और आरडी के ब्याज पर हर साल स्लैब रेट से टैक्स लगता है, और एक बैंक से ₹50,000 से ज्यादा ब्याज पर 10% टीडीएस (सीनियर के लिए ₹1 लाख)।
  • इक्विटी शेयर और फंड: 12 महीने तक 20% STCG, उसके बाद साल में ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5% LTCG, अब धारा 196 और 198 के तहत।
  • 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे डेट फंड पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है, लेकिन सिर्फ रिडीम करने पर।
  • डिविडेंड पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है, और एक भुगतानकर्ता से ₹10,000 से ज्यादा पर टीडीएस।
  • नई व्यवस्था का रिबेट स्पेशल रेट वाले कैपिटल गेन को कवर नहीं करता।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत में एफडी के ब्याज पर टैक्स कैसे लगता है?

एफडी का ब्याज आपकी कुल आय में जुड़ता है और हर साल आपके स्लैब रेट पर टैक्स लगता है, चाहे ब्याज आपको मिले या दोबारा निवेश हो जाए। जब ब्याज एक बैंक से साल में ₹50,000 से ज्यादा हो जाता है, या सीनियर सिटीजन के लिए ₹1 लाख से ज्यादा, तो बैंक 10% टीडीएस काटता है।

एक साल से ज्यादा रखे शेयर बेचने पर कितना टैक्स लगता है?

12 महीने से ज्यादा रखे लिस्टेड शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर गेन लॉन्ग-टर्म होता है। इस पर साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के गेन पर 12.5% टैक्स और सेस लगता है, इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 198 (पुरानी धारा 112A) के तहत।

क्या डेट म्यूचुअल फंड पर एफडी जैसा टैक्स लगता है?

काफी हद तक हां। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट फंड के गेन पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है, चाहे आप उन्हें कितने भी समय रखें। लेकिन एफडी के उलट, टैक्स सिर्फ रिडीम करने पर देना होता है, हर साल नहीं।

क्या डिविडेंड की आय पर टैक्स लगता है?

हां। शेयरों और म्यूचुअल फंड से मिले डिविडेंड पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है। अगर किसी कंपनी या फंड से साल में ₹10,000 से ज्यादा डिविडेंड मिले, तो वह 10% टीडीएस काटता है।

क्या ₹12 लाख की टैक्स फ्री सीमा कैपिटल गेन पर भी लागू है?

नहीं। नई व्यवस्था का रिबेट इक्विटी STCG और LTCG पर लगने वाले टैक्स पर लागू नहीं होता, जिन पर स्पेशल रेट से टैक्स लगता है। कुल आय ₹12 लाख से कम होने पर भी आपको इन गेन पर टैक्स देना पड़ सकता है।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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