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यूपीआई ऑटोपे कैंसिल के बाद भी पैसा कटा? ऐसे पाएं वापस

यूपीआई ऑटोपे कैंसिल करने के बाद भी पैसा कटा? पता करें किस मैंडेट से कटा, उसे हमेशा के लिए रोकें और ऐप, बैंक व आरबीआई के जरिए पैसा वापस पाएं।

लेखक: Moksh Shahअपडेट: 8 मिनट में पढ़ें
यूपीआई ऑटोपे कैंसिल के बाद भी पैसा कटा? ऐसे पाएं वापस
इस लेख में
  1. ऐसा क्यों होता है
  2. स्टेप-बाय-स्टेप: कटौती रोकें और पैसा वापस पाएं
  3. समय सीमा और शिकायत के स्तर एक नजर में
  4. असल जिंदगी का उदाहरण
  5. शिकायत का नमूना
  6. क्या न करें
  7. मुख्य बातें

"मैंने पिछले महीने OTT का ऑटोपे कैंसिल कर दिया था, लेकिन आज सुबह फिर ₹649 कट गए।" अगर आपके साथ ऐसा हुआ है, तो उपाय के दो हिस्से हैं: पहले पता करें कि असल में किस मैंडेट से पैसा कटा, क्योंकि अक्सर यह वह मैंडेट नहीं होता जिसे आपने कैंसिल किया था, और फिर कैंसिलेशन के सबूत के साथ उस डेबिट पर विवाद दर्ज करें। अगर आपका यूपीआई मैंडेट डेबिट की तारीख से पहले रिवोक या पॉज हो चुका था, तो वह डेबिट अनधिकृत है और आपके बैंक को उसे लौटाना चाहिए।

इस गाइड में बताया गया है कि कैंसिल के बाद भी पैसा क्यों कटता रहता है, इसे हमेशा के लिए कैसे रोकें, अक्टूबर 2026 के हिसाब से पैसा कैसे वापस पाएं, और कॉपी करने लायक एक शिकायत। मैंडेट कैंसिल या पॉज करने के बेसिक कदमों के लिए हमारी गाइड यूपीआई ऑटोपे मैंडेट कैसे कैंसिल करें देखें।

ऐसा क्यों होता है

कैंसिल के बाद कटौती लगभग हमेशा इनमें से किसी एक वजह से होती है:

वजह कैसे पहचानें उपाय
गलत यूपीआई ऐप में मैंडेट रिवोक किया उसी अकाउंट से जुड़े किसी दूसरे यूपीआई ऐप में मैंडेट अब भी "एक्टिव" दिखता है उस ऐप में भी पिन डालकर रिवोक करें
कैंसिलेशन पूरा ही नहीं हुआ रिवोक की पुष्टि का कोई एसएमएस या ईमेल नहीं; स्टेटस "रिवोक्ड" नहीं दोबारा रिवोक करें और पुष्टि संभालकर रखें
यह यूपीआई नहीं, कार्ड मैंडेट था डेबिट आपके क्रेडिट या डेबिट कार्ड स्टेटमेंट में दिखता है कार्ड जारीकर्ता या मर्चेंट से स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन कैंसिल कराएं
यह NACH या e-NACH बैंक मैंडेट था स्टेटमेंट में मैंडेट आईडी के साथ NACH, ECS या ACH लिखा है बैंक से लिखित में NACH मैंडेट कैंसिल करने को कहें
मर्चेंट ने अलग पेमेंट से बिल किया डेबिट एक बार का यूपीआई पेमेंट है या आपका मंजूर किया नया मैंडेट जांचें कि कहीं आपने दोबारा सब्सक्राइब तो नहीं किया या कोई रिक्वेस्ट मंजूर तो नहीं की
डेबिट पहले से शेड्यूल था प्री-डेबिट अलर्ट आपके कैंसिल करने से पहले आ गया था विवाद दर्ज करें; लेकिन अगली तारीख से काफी पहले कैंसिल करें
पॉज की अवधि खत्म हो गई आपने रिवोक नहीं, पॉज किया था और आखिरी तारीख निकल गई रिवोक करें, या पॉज बढ़ाएं
एक सेवा के दो मैंडेट पुराने और नए प्लान, दोनों ने अलग मैंडेट बनाया दोनों रिवोक करें

एक और बात जो लोग भूल जाते हैं: मैंडेट रिवोक करने से सब्सक्रिप्शन कैंसिल नहीं होता। मर्चेंट अब भी बकाया दिखा सकता है, और किसी दूसरे सेव किए पेमेंट तरीके से पैसा लेने की कोशिश कर सकता है। मर्चेंट के ऐप में भी सब्सक्रिप्शन कैंसिल करें।

नियम क्या कहते हैं

अक्टूबर 2026 तक, आरबीआई (RBI) का ई-मैंडेट फ्रेमवर्क आपको कभी भी मैंडेट वापस लेने की छूट देता है और आपके बैंक या ऐप के लिए हर डेबिट से कम से कम 24 घंटे पहले प्री-डेबिट नोटिफिकेशन भेजना जरूरी करता है, जिसमें ऑप्ट-आउट का विकल्प हो। NPCI के यूपीआई ऑटोपे नियम आपको अपने यूपीआई ऐप से मैंडेट पॉज या रिवोक करने देते हैं, और कहते हैं कि मर्चेंट अपनी तरफ से पॉज को ओवरराइड नहीं कर सकता। NPCI के अक्टूबर 2025 के सुधारों के तहत यूपीआई ऐप्स से कहा जा रहा है कि वे आपके सभी एक्टिव मैंडेट दिखाएं, सिर्फ उस ऐप में बने मैंडेट नहीं, हालांकि यह हर ऐप में अलग-अलग रफ्तार से लागू हो रहा है।

इसलिए सही तरीके से रिवोक करने के बाद या पॉज के दौरान हुआ डेबिट अनधिकृत है। आपको उस पर विवाद दर्ज करने का हक है।

स्टेप-बाय-स्टेप: कटौती रोकें और पैसा वापस पाएं

आज ही

  1. डेबिट की पहचान करें। बैंक का एसएमएस या स्टेटमेंट की एंट्री खोलें। तारीख, रकम, मर्चेंट का नाम और रेफरेंस नंबर नोट करें। यूपीआई रेफरेंस या "UPI-Mandate" लेबल का मतलब यूपीआई ऑटोपे है; "NACH", "ECS" या "ACH" का मतलब बैंक मैंडेट है; कार्ड स्टेटमेंट में एंट्री का मतलब कार्ड मैंडेट है।
  2. हर यूपीआई ऐप जांचें। अपने फोन के हर यूपीआई ऐप और बैंक के अपने ऐप में AutoPay या Mandates सेक्शन खोलें। उस मर्चेंट का जो भी मैंडेट अब भी एक्टिव दिखे, उसे रिवोक करें और यूपीआई पिन से पुष्टि करें।
  3. कैंसिलेशन का सबूत संभालें। रिवोक्ड स्टेटस, तारीख और समय, और पुष्टि के एसएमएस या ईमेल का स्क्रीनशॉट लें। पहले वाले कैंसिलेशन की पुष्टि भी ढूंढें; यही सबसे अहम सबूत है।
  4. मर्चेंट के यहां भी कैंसिल करें। मर्चेंट के अकाउंट सेटिंग्स में ऑटो-रिन्यू बंद करें और पुष्टि संभालकर रखें।

अगले कुछ दिनों में

  1. यूपीआई ऐप में उसी डेबिट पर विवाद दर्ज करें। "mandate revoked but amount debited" या "unauthorised debit" जैसी मिलती-जुलती वजह चुनें, और अपना सबूत लगाएं।
  2. साथ ही मर्चेंट से रिफंड मांगें। रिवोक का स्क्रीनशॉट दिखाने पर कई मर्चेंट कैंसिल के बाद हुए डेबिट को जल्दी लौटा देते हैं।
  3. अगर डेबिट NACH या कार्ड से हुआ है, या यूपीआई शिकायत आगे नहीं बढ़ रही, तो बैंक से शिकायत करें। बैंक से डेबिट लौटाने और यह पुष्टि करने को कहें कि उसके सिस्टम में मैंडेट कैंसिल हो गया है। अनपेक्षित इलेक्ट्रॉनिक डेबिट की रिपोर्ट जल्दी करें; आरबीआई के ग्राहक जिम्मेदारी नियमों में जल्दी रिपोर्ट करने पर आपको ज्यादा सुरक्षा मिलती है।

अगर फिर भी मामला न सुलझे

  1. अपने शिकायत नंबरों के साथ बैंक के ग्रीवांस या नोडल ऑफिसर तक जाएं।
  2. यूपीआई मैंडेट के लिए NPCI तक जाएं, अपने ऐप के "UPI Help" विकल्प से या npci.org.in के डिस्प्यूट रिड्रेसल सेक्शन से।
  3. आरबीआई ओम्बड्समैन के पास जाएं cms.rbi.org.in पर (हेल्पलाइन 14448), अगर बैंक आपकी शिकायत रिजेक्ट कर दे या 30 दिन में जवाब न दे। Integrated Ombudsman Scheme, 2026 के तहत बैंक के जवाब या जवाब की समय सीमा के 90 दिनों के अंदर शिकायत करें। देखें बैंक शिकायत नहीं सुलझा रहा।
  4. अगर आपने वह मैंडेट कभी मंजूर ही नहीं किया था, तो इसे फ्रॉड मानें: बैंक से यूपीआई ब्लॉक कराएं और 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।

समय सीमा और शिकायत के स्तर एक नजर में

स्तर कहां अगले स्तर पर कब जाएं
1 यूपीआई ऐप या मर्चेंट कुछ कामकाजी दिनों में हल न हो
2 आपका बैंक और उसका ग्रीवांस ऑफिसर 30 दिन में जवाब न मिले या रिजेक्ट हो
3 NPCI (UPI Help, npci.org.in) यूपीआई मैंडेट के लिए, बैंक के साथ या उसके बाद
4 आरबीआई ओम्बड्समैन, cms.rbi.org.in 30 दिन बाद, बैंक के जवाब या समय सीमा के 90 दिनों के अंदर
फ्रॉड 1930 या cybercrime.gov.in, साथ में बैंक तुरंत

असल जिंदगी का उदाहरण

नेहा ने एक ऐप में यूपीआई ऑटोपे से ₹649 महीने का स्ट्रीमिंग प्लान लिया था। 2 सितंबर को उसने वहां मैंडेट रिवोक किया और उसे पुष्टि का एसएमएस मिला। 5 अक्टूबर को फिर से ₹649 कट गए।

  • उसके बैंक स्टेटमेंट में उसी मर्चेंट के नाम के साथ "UPI-Mandate" लिखा था, यानी यह यूपीआई मैंडेट था।
  • अपना दूसरा यूपीआई ऐप जांचने पर उसे उसी मर्चेंट का एक और एक्टिव मैंडेट मिला। जून में उसने उस ऐप से अपना प्लान अपग्रेड किया था, जिससे एक नया मैंडेट बन गया था।
  • उसने उसे रिवोक किया, 5 अक्टूबर के डेबिट पर विवाद दर्ज किया, और दोनों स्क्रीनशॉट के साथ मर्चेंट को ईमेल किया।
  • मर्चेंट ने 9 अक्टूबर को ₹649 लौटा दिए।

उसका सबक: एक रिवोक से दो में से सिर्फ एक मैंडेट रुका। अगर दूसरा मैंडेट 5 अक्टूबर से पहले रिवोक हो गया होता, तो वह डेबिट अनधिकृत होता और उसके बैंक को उसे लौटाना पड़ता। एक साल में, छूटा हुआ ₹649 का मैंडेट 12 × ₹649 = ₹7,788 का पड़ता है, इसलिए हर ऐप जांचने में पांच मिनट लगाना फायदे का सौदा है।

शिकायत का नमूना

विषय: मैंडेट रिवोक करने के बाद यूपीआई ऑटोपे डेबिट - रेफरेंस [यूपीआई रेफरेंस]

महोदय/महोदया,

[तारीख] को मेरे [आखिरी 4 अंक] वाले अकाउंट से [मर्चेंट का नाम, यूपीआई आईडी]
के यूपीआई ऑटोपे मैंडेट के जरिए Rs [रकम] काटे गए।
यूपीआई रेफरेंस: [नंबर]। मैंडेट आईडी/UMN (अगर दिख रहा हो): [नंबर]।

मैंने यह मैंडेट [तारीख] को [ऐप का नाम] में, डेबिट की तारीख से पहले,
रिवोक / पॉज कर दिया था। रिवोक का सबूत साथ में लगा है। इसलिए यह डेबिट
मेरे द्वारा अधिकृत नहीं था।

कृपया:
1. Rs [रकम] मेरे अकाउंट में वापस डालें।
2. लिखित में पुष्टि करें कि मैंडेट रिवोक हो गया है और आगे कोई डेबिट
   प्रोसेस नहीं होगा।

पिछली शिकायत संख्या: [अगर कोई हो]
नाम: [आपका नाम]   रजिस्टर्ड मोबाइल: [नंबर]

NACH डेबिट के लिए "यूपीआई ऑटोपे" की जगह "NACH मैंडेट" लिखें और अपने स्टेटमेंट से मैंडेट रेफरेंस जोड़ें।

क्या न करें

  • यह न मानें कि एक रिवोक से हर ऐप का मैंडेट रुक जाता है। सभी यूपीआई ऐप और बैंक का ऐप जांचें।
  • अगर आपको सेवा दोबारा कभी नहीं चाहिए तो सिर्फ पॉज न करें। पॉज अपने-आप खत्म हो जाता है।
  • प्री-डेबिट अलर्ट को नजरअंदाज न करें। पैसा कटने से पहले ऑप्ट-आउट करने का यही आखिरी मौका होता है।
  • एक मर्चेंट को रोकने के लिए पूरा अकाउंट या कार्ड ब्लॉक न करें, जब तक मामला फ्रॉड का न हो; इसके बजाय मैंडेट रिवोक करें।
  • मर्चेंट की "रिफंड हेल्पलाइन" ऑनलाइन सर्च न करें। ऐप के हेल्प सेक्शन या उसकी आधिकारिक वेबसाइट का इस्तेमाल करें।
  • महीनों इंतजार न करें। ओम्बड्समैन के पास जाने की सीमा बैंक के जवाब या समय सीमा के बाद 90 दिन है।

अगर रिवोक करते समय खुद यूपीआई ही काम नहीं कर रहा, तो देखें यूपीआई काम नहीं कर रहा।

मुख्य बातें

  • कैंसिल के बाद ज्यादातर कटौती किसी दूसरे मैंडेट से होती है: दूसरा यूपीआई ऐप, कार्ड की स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन या बैंक का NACH मैंडेट।
  • सही रिवोक के बाद या पॉज के दौरान हुआ डेबिट अनधिकृत है; कैंसिलेशन के सबूत के साथ उस पर विवाद दर्ज करें।
  • अक्टूबर 2026 तक, बैंकों को हर ऑटोपे डेबिट से कम से कम 24 घंटे पहले प्री-डेबिट अलर्ट भेजना होता है।
  • मैंडेट रिवोक करने के साथ मर्चेंट के यहां सब्सक्रिप्शन भी कैंसिल करें।
  • इसी क्रम में आगे बढ़ें: यूपीआई ऐप और मर्चेंट, बैंक, NPCI, फिर 30 दिन बाद cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन; जो मैंडेट आपने कभी मंजूर नहीं किए, उनकी रिपोर्ट 1930 पर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यूपीआई ऑटोपे कैंसिल करने के बाद पैसा क्यों कटा?

ज्यादातर मामलों में पैसा किसी दूसरे मैंडेट से कटता है: किसी और यूपीआई ऐप का मैंडेट, कार्ड की स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन, या बैंक का NACH मैंडेट। कभी-कभी रिवोक होने से पहले ही डेबिट शेड्यूल हो चुका होता है, या कैंसिलेशन यूपीआई पिन से कभी कन्फर्म ही नहीं हुआ होता।

क्या ऑटोपे कैंसिल के बाद कटा पैसा वापस मिल सकता है?

हां, अगर डेबिट की तारीख से पहले मैंडेट सही तरीके से रिवोक या पॉज किया गया था, तो वह डेबिट अनधिकृत है और आपके बैंक को उसे लौटाना चाहिए। रिवोक के सबूत के साथ यूपीआई ऐप में शिकायत करें, फिर जरूरत हो तो बैंक, NPCI और आरबीआई ओम्बड्समैन तक जाएं।

कैसे पता करें कि किस मैंडेट से पैसा कटा?

बैंक स्टेटमेंट या एसएमएस में वह डेबिट खोलें। यूपीआई ऑटोपे डेबिट में यूपीआई रेफरेंस और मर्चेंट का नाम होता है, कार्ड डेबिट कार्ड स्टेटमेंट में दिखता है, और NACH या ECS डेबिट के विवरण में आम तौर पर ये अक्षर और मैंडेट रेफरेंस लिखा होता है।

क्या यूपीआई ऑटोपे मैंडेट पॉज करने से कटौती रुक जाती है?

हां। पॉज की अवधि में कोई डेबिट नहीं होना चाहिए, और NPCI के नियम कहते हैं कि मर्चेंट अपनी तरफ से पॉज को ओवरराइड नहीं कर सकता। आपने पॉज की जो तारीखें तय की हैं उन्हें जांचें, क्योंकि पॉज खत्म होते ही डेबिट अपने-आप फिर शुरू हो जाते हैं।

आरबीआई ओम्बड्समैन में शिकायत के लिए कितना समय मिलता है?

पहले आपको अपने बैंक से शिकायत करनी होगी। अगर बैंक शिकायत रिजेक्ट कर दे या 30 दिन में जवाब न दे, तो 2026 की स्कीम के तहत बैंक के जवाब या जवाब की समय सीमा के 90 दिनों के अंदर cms.rbi.org.in पर शिकायत कर सकते हैं।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।

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