मृत्यु के बाद बैंक खाता और निवेश: क्लेम कैसे करें
मृत्यु के बाद बैंक खाते, FD, म्यूचुअल फंड, शेयर, EPF और बीमा का क्या होता है, और नॉमिनी व कानूनी वारिस इन्हें कैसे क्लेम करें (अक्टूबर 2026)।

इस लेख में
किसी की मृत्यु होने पर उसके बैंक खाते, जमा और निवेश न तो गायब होते हैं, न सरकार के पास जाते हैं। ये आसान क्लेम पर नॉमिनी या जीवित जॉइंट होल्डर को मिलते हैं, या नॉमिनी न होने पर कानूनी वारिसों को, जिसमें ज्यादा कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है। अक्टूबर 2026 के हिसाब से बैंकों को पूरे दस्तावेज मिलने के 15 दिन के अंदर जमा रकम का क्लेम निपटाना होता है, और हर तरह की संपत्ति (बैंक, डीमैट, म्यूचुअल फंड, EPF, बीमा) के क्लेम का अपना अलग तरीका है।
यह गाइड बताती है कि क्या करना है, किस क्रम में करना है, और आम देरी से कैसे बचना है।
मृत्यु के बाद पहले कदम
- मृत्यु प्रमाण पत्र की कई सर्टिफाइड कॉपी नगर निगम या ग्राम पंचायत से लें। हर संस्था एक कॉपी मांगेगी।
- हर संपत्ति की सूची बनाएं। पासबुक, ईमेल, SMS अलर्ट, ITR (Form 26AS और Annual Information Statement में ब्याज, डिविडेंड और निवेश दिखते हैं), CAMS/KFintech और NSDL/CDSL के CAS स्टेटमेंट, और बीमा पॉलिसी के कागजात जांचें।
- हर संस्था को लिखित में सूचना दें। बैंक खाते से पैसे निकलना बंद कर देगा, जिससे ऑटो-डेबिट और स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन भी रुक जाते हैं।
- मृतक का डेबिट कार्ड, यूपीआई या नेट बैंकिंग इस्तेमाल न करें। मृत्यु के बाद इस तरह पैसा निकालना, परिवार द्वारा भी, अनधिकृत माना जा सकता है।
- लोन की जांच करें। बकाया लोन मृतक की संपत्ति से वसूले जाते हैं, वारिसों से निजी तौर पर नहीं, जब तक कोई को-एप्लिकेंट या गारंटर न हो। देखें को-एप्लिकेंट और गारंटर की जिम्मेदारी।
पैसा किसे मिलता है: नॉमिनी, जॉइंट होल्डर या कानूनी वारिस
| स्थिति | किसे मिलता है | क्या चाहिए |
|---|---|---|
| जॉइंट खाता, "Either or Survivor" | जीवित खाताधारक | मृत्यु प्रमाण पत्र; खाता जारी रहता है या बंद होता है |
| नॉमिनी के साथ सिंगल खाता | नॉमिनी | क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, नॉमिनी का KYC |
| नॉमिनी नहीं, क्लेम बैंक की सीमा के अंदर | कानूनी वारिस | क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, इंडेम्निटी, वारिसों की घोषणाएं |
| नॉमिनी नहीं, बड़ा क्लेम या विवाद | कानूनी वारिस | सक्सेशन सर्टिफिकेट, प्रोबेट या लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, या कोर्ट का आदेश |
नॉमिनी ट्रस्टी है, हमेशा मालिक नहीं। नॉमिनी बैंक को वैध रसीद देता है। अदालतों ने बार-बार कहा है कि नॉमिनेशन वसीयत या उत्तराधिकार कानून से ऊपर नहीं है। शेयरों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Shakti Yezdani v. Jayanand Jayant Salgaonkar (2023) में कहा कि नॉमिनी पूरा मालिक नहीं बन जाता। इसलिए नॉमिनी को पैसा कानूनी वारिसों को सौंपना पड़ सकता है।
बैंक खाते, FD और लॉकर
आरबीआई के Settlement of Claims in respect of Deceased Customers of Banks Directions, 2025, जिन्हें बैंकों को 31 मार्च 2026 तक लागू करना था, ने पूरी प्रक्रिया एक जैसी कर दी है। अक्टूबर 2026 के हिसाब से:
- 15 दिन की समय-सीमा: बैंक को सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के 15 कैलेंडर दिनों के अंदर जमा रकम का क्लेम निपटाना होगा।
- देरी पर हर्जाना: अगर देरी बैंक की गलती से होती है, तो उसे देरी की अवधि के लिए रकम पर Bank Rate जमा 4% सालाना ब्याज देना होगा। लॉकर के मामले में देरी पर ₹5,000 प्रतिदिन देने होंगे।
- नॉमिनी न होने पर आसान प्रक्रिया: कमर्शियल बैंक में ₹15 लाख तक (को-ऑपरेटिव बैंक में ₹5 लाख तक) के क्लेम बैंक क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, KYC, इंडेम्निटी और वारिसों की घोषणाओं पर निपटाते हैं। इस सीमा के अंदर के क्लेम के लिए किसी जमानतदार की जरूरत नहीं है।
- फिक्स्ड डिपॉजिट को ज्यादातर बैंकों की पॉलिसी में क्लेम करने वाला व्यक्ति बिना समय-पूर्व निकासी पेनल्टी के पहले बंद कर सकता है, या मैच्योरिटी तक चलने दे सकता है।
चार नॉमिनी तक। 1 नवंबर 2025 से Banking Laws (Amendment) Act, 2025 के तहत जमाकर्ता चार नॉमिनी तक बना सकते हैं। एक साथ (simultaneous) नॉमिनी तय प्रतिशत में पैसा बांटते हैं, जिनका जोड़ 100% होता है। क्रमिक (successive) नॉमिनी प्राथमिकता के क्रम में एक के बाद एक हकदार होते हैं। लॉकर और सेफ कस्टडी की चीजों में सिर्फ क्रमिक नॉमिनेशन की इजाजत है।
उदाहरण: एक क्लेम और उसमें देरी
रमेश की मृत्यु होती है। एक प्राइवेट बैंक में उनके सेविंग्स खाते में ₹4.2 लाख और ₹10 लाख की FD है। उन्होंने तीन एक साथ नॉमिनी बनाए थे: पत्नी 50%, बेटा 30%, बेटी 20%। कुल: ₹14.2 लाख।
| नॉमिनी | हिस्सा | रकम |
|---|---|---|
| पत्नी | 50% | ₹7,10,000 |
| बेटा | 30% | ₹4,26,000 |
| बेटी | 20% | ₹2,84,000 |
| कुल | 100% | ₹14,20,000 |
परिवार 1 नवंबर को पूरे दस्तावेज जमा करता है। 15 दिन की समय-सीमा 16 नवंबर है, लेकिन बैंक 6 दिसंबर को भुगतान करता है, यानी बैंक की वजह से 20 दिन की देरी।
आरबीआई की अक्टूबर 2026 पॉलिसी के बाद Bank Rate 5.75% है, इसलिए हर्जाना कम से कम 5.75% + 4% = 9.75% सालाना होगा:
₹14,20,000 × 9.75% × 20 ÷ 365 ≈ ₹7,586, जो क्लेम की रकम के ऊपर दिया जाएगा और उसी अनुपात में बंटेगा।
अगर कोई नॉमिनी नहीं होता, तब भी ₹14.2 लाख की रकम ₹15 लाख की आसान प्रक्रिया वाली सीमा के अंदर है, इसलिए वारिसों को सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं पड़ती।
म्यूचुअल फंड और डीमैट खाते
- म्यूचुअल फंड: नॉमिनी या जॉइंट होल्डर ट्रांसमिशन रिक्वेस्ट फॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और KYC के साथ AMC या रजिस्ट्रार (CAMS या KFintech) को आवेदन करता है। यूनिट्स क्लेम करने वाले के नाम ट्रांसफर हो जाती हैं; उन्हें बेचना जरूरी नहीं है। SEBI, AMC या डिपॉजिटरी को रजिस्टर्ड नॉमिनी से एफिडेविट या इंडेम्निटी बॉन्ड मांगने की इजाजत नहीं देता।
- डीमैट खाते: क्लेम करने वाला व्यक्ति डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट को ट्रांसमिशन फॉर्म और मृत्यु प्रमाण पत्र देता है। शेयर उसके डीमैट खाते में चले जाते हैं।
- नॉमिनी न होने पर: इंडेम्निटी, कानूनी वारिस के दस्तावेज, और बड़ी रकम के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट या प्रोबेट की उम्मीद रखें।
SEBI ने 1 सितंबर 2026 से डीमैट खातों और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन के नियम फिर बदले हैं: आप प्रतिशत हिस्से के साथ तीन नॉमिनी तक बना सकते हैं, और सिंगल होल्डर को या तो नॉमिनी बनाना होगा या ऑप्ट-आउट घोषणा पर साइन करना होगा। (बैंक जमा का नियम अलग है: 1 नवंबर 2025 से चार नॉमिनी तक।) देखें डीमैट खाता कैसे खोलें।
टैक्स के लिए ट्रांसमिशन बिक्री नहीं है। वारिस को मूल खरीद लागत और होल्डिंग अवधि मिलती है, इसलिए कैपिटल गेन टैक्स तभी बनता है जब वारिस उसे बेचता है। विस्तार से जानें म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स में।
EPF, PPF, NPS और छोटी बचत योजनाएं
| संपत्ति | कहां क्लेम करें | अक्टूबर 2026 के हिसाब से नोट |
|---|---|---|
| EPF | EPFO, ऑनलाइन या एम्प्लॉयर के जरिए | PF बैलेंस, पेंशन (EPS) और सैलरी व सर्विस के हिसाब से ₹2.5-7 लाख का EDLI बीमा |
| PPF / पोस्ट ऑफिस योजनाएं | खाता रखने वाला बैंक या पोस्ट ऑफिस | आरबीआई के 2025 के निर्देश लागू नहीं; योजना के नियम लागू |
| NPS | पॉइंट ऑफ प्रेजेंस या CRA के जरिए | नॉमिनी या कानूनी वारिस को पूरा कॉर्पस; सब्सक्राइबर की मृत्यु पर एन्युटी जरूरी नहीं |
| सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड | जारी करने वाला बैंक या पोस्ट ऑफिस | नॉमिनी इन्हें रख सकता है या समय से पहले भुनाने का आवेदन कर सकता है |
जीवन और स्वास्थ्य बीमा
नॉमिनी बीमा कंपनी में डेथ क्लेम दाखिल करता है, जिसके साथ पॉलिसी के कागजात, मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और बैंक डिटेल लगती है, और कुछ मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट या FIR भी। अगर क्लेम गलत तरीके से खारिज होता है या देर होती है, तो पहले बीमा कंपनी के ग्रीवांस ऑफिसर से, फिर IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल पर, और फिर इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के पास शिकायत करें।
बिना क्लेम वाला पैसा और 10 साल का नियम
जो बैंक बैलेंस 10 साल तक इस्तेमाल नहीं होते, और जिन टर्म डिपॉजिट पर मैच्योरिटी के 10 साल के अंदर क्लेम नहीं होता, वे आरबीआई के Depositor Education and Awareness (DEA) Fund में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। पैसा खोता नहीं है। इसे आरबीआई के UDGAM पोर्टल पर खोजें, फिर संबंधित बैंक से क्लेम करें, जो लागू ब्याज के साथ भुगतान करता है।
बिना क्लेम वाले डिविडेंड और शेयर सात साल बाद IEPF में चले जाते हैं और IEPF-5 आवेदन के जरिए वापस लिए जा सकते हैं।
मृत्यु के बाद टैक्स और कागजी काम
- मृतक का आखिरी ITR भरें। कानूनी वारिस इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिप्रेजेंटेटिव असेसी के रूप में रजिस्टर करता है और मृत्यु की तारीख तक की आय का रिटर्न भरता है।
- मृत्यु के बाद की आय (ब्याज, डिविडेंड) वारिस की या संपत्ति की आय मानी जाती है, मृतक की नहीं।
- भारत में फिलहाल कोई विरासत या एस्टेट टैक्स नहीं है।
अपने परिवार के लिए इसे आसान कैसे बनाएं
- हर बैंक खाते, FD, डीमैट, फोलियो, PPF, EPF और बीमा पॉलिसी में नॉमिनी जोड़ें, और शादी, तलाक या परिवार में किसी की मृत्यु के बाद उन्हें दोबारा जांचें।
- रजिस्टर्ड वसीयत बनाएं; नॉमिनी सिर्फ संरक्षक होते हैं, मालिकाना हक वसीयत तय करती है।
- खाता नंबर और संपर्क जानकारी के साथ संपत्तियों की अपडेटेड सूची ऐसी जगह रखें जो परिवार को पता हो।
- घर के खर्च के पैसे के लिए "Either or Survivor" जॉइंट खाते रखें।
- पक्का करें कि आपका टर्म इंश्योरेंस कवर और इमरजेंसी फंड क्लेम में लगने वाले हफ्तों तक परिवार का खर्च चला सके।
मुख्य बातें
- नॉमिनी और जीवित जॉइंट होल्डर जल्दी क्लेम कर लेते हैं; नॉमिनी न होने पर कानूनी वारिसों को ज्यादा कागजी काम करना पड़ता है।
- अक्टूबर 2026 के हिसाब से बैंकों को पूरे दस्तावेज मिलने के 15 दिन में मृतक जमाकर्ता का क्लेम निपटाना होगा, वरना देरी के लिए Bank Rate + 4% देना होगा।
- नॉमिनी न होने पर कमर्शियल बैंक ₹15 लाख तक आसान प्रक्रिया अपनाते हैं, इसलिए हमेशा सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती।
- 1 नवंबर 2025 से बैंक खाते में चार नॉमिनी तक बनाए जा सकते हैं; नॉमिनेशन वसीयत या उत्तराधिकार कानून से ऊपर नहीं है।
- बिना क्लेम वाली जमा 10 साल बाद आरबीआई के DEA Fund में चली जाती है, लेकिन इसे UDGAM पर खोजकर बैंक से क्लेम किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
खाताधारक की मृत्यु होने पर बैंक खाते का क्या होता है?
बैंक को मृत्यु की जानकारी मिलते ही खाते से पैसे निकालना बंद कर दिया जाता है। क्लेम फॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और जरूरी दस्तावेज जमा करने के बाद बैलेंस नॉमिनी को, जीवित जॉइंट होल्डर को, या दोनों न हों तो कानूनी वारिसों को दिया जाता है।
क्या नॉमिनी ही पैसे का मालिक होता है?
जरूरी नहीं। नॉमिनी पैसा लेता है और बैंक को वैध रसीद देता है, लेकिन भारत की अदालतों ने माना है कि नॉमिनेशन उत्तराधिकार कानून से ऊपर नहीं है। नॉमिनी को वसीयत या लागू पर्सनल लॉ के हिसाब से पैसा कानूनी वारिसों को देना पड़ सकता है।
मृतक जमाकर्ता का क्लेम बैंक कितने दिन में निपटाता है?
आरबीआई के Settlement of Claims in respect of Deceased Customers of Banks Directions, 2025 के तहत बैंकों को सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के 15 कैलेंडर दिनों के अंदर जमा रकम का क्लेम निपटाना होता है, और बैंक की वजह से देरी होने पर हर्जाना देना होता है।
क्या बैंक खाते के क्लेम के लिए कानूनी वारिसों को सक्सेशन सर्टिफिकेट चाहिए?
छोटी रकम के लिए नहीं। जहां न नॉमिनी है न जीवित जॉइंट होल्डर, वहां कमर्शियल बैंक ₹15 लाख तक (को-ऑपरेटिव बैंक में ₹5 लाख तक) के क्लेम के लिए इंडेम्निटी और घोषणाओं के आधार पर आसान प्रक्रिया अपनाते हैं। इससे ज्यादा रकम पर बैंक सक्सेशन सर्टिफिकेट, प्रोबेट या लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन मांग सकते हैं।
परिवार के किसी मृत सदस्य की बिना क्लेम वाली बैंक जमा कैसे खोजें?
आरबीआई के UDGAM पोर्टल (udgam.rbi.org.in) पर खोजें, जिसमें ज्यादातर बिना क्लेम वाली जमा रखने वाले बैंक शामिल हैं। क्लेम संबंधित बैंक में ही करना होता है, भले ही पैसा आरबीआई के DEA Fund में चला गया हो।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।