फर्ज़ी सरकारी योजना वेबसाइट: असली पोर्टल कैसे पहचानें
भारत में फर्ज़ी सरकारी लोन और सब्सिडी वेबसाइट कैसे पहचानें, पीएम योजनाओं का आधिकारिक पोर्टल कैसे खोजें, और फर्ज़ी रजिस्ट्रेशन फीस भर दी हो तो क्या करें।

इस लेख में
किसी सरकारी लोन या सब्सिडी के आधिकारिक आवेदन पोर्टल तक पहुंचने का सबसे सुरक्षित तरीका है किसी सरकारी स्रोत से शुरू करना, जैसे india.gov.in, myscheme.gov.in या मंत्रालय की अपनी वेबसाइट, न कि सर्च विज्ञापन, यूट्यूब डिस्क्रिप्शन या व्हाट्सऐप फॉरवर्ड से। फर्ज़ी साइट का सबसे साफ संकेत है योजना का लाभ "रजिस्टर", "मंज़ूर" या "रिलीज़" करने के लिए पैसे की मांग: पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा, पीएमईजीपी और पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं के आधिकारिक पोर्टल आवेदन के लिए कुछ नहीं लेते।
फर्ज़ी योजना साइटें अशोक चिह्न की नकल करती हैं, "pmyojana-gov.online" जैसे नाम इस्तेमाल करती हैं और सरकारी दिखने वाले मंज़ूरी पत्र भेजती हैं। यह गाइड बताती है कि साइट कैसे जांचें, आम योजनाओं के असली पोर्टल कौन-से हैं (अक्टूबर 2026 तक), और पैसा भर चुके हों तो ठीक-ठीक क्या करें।
किसे निशाना बनाया जाता है
- बिना गारंटी लोन ढूंढ रहे छोटे कारोबारी और रेहड़ी-पटरी वाले
- सोलर पंप, मशीनरी या फसल सब्सिडी ढूंढ रहे किसान
- स्कॉलरशिप और लैपटॉप ढूंढ रहे छात्र
- फर्ज़ी "पीएम योजना के तहत भर्ती" साइटों के ज़रिए नौकरी ढूंढने वाले
- बुज़ुर्ग और पहली बार इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले, जो "योजना ऑनलाइन आवेदन" सर्च करके पहला लिंक खोल लेते हैं
सरकार द्वारा पकड़े गए असली मामले
| मामला | ठगों ने क्या मांगा | सच क्या था |
|---|---|---|
| फर्ज़ी मुद्रा लोन मंज़ूरी पत्र (पीआईबी फैक्ट चेक, जून 2026) | ₹10 लाख लोन के लिए ₹6,550 "प्रोसेसिंग फीस" | मुद्रा कर्ज़दाताओं को रीफाइनेंस करता है, सीधे लोगों को लोन नहीं देता |
| पीएम-कुसुम फर्ज़ी रजिस्ट्रेशन (पीआईबी फैक्ट चेक, सितंबर 2024) | ₹8,000 "रजिस्ट्रेशन फीस", फर्ज़ी मंज़ूरी पत्रों के साथ | एमएनआरई ने आवेदकों को आधिकारिक साइट pmkusum.mnre.gov.in बताई |
| "पीएम नेशनल लैपटॉप योजना" साइट (पीआईबी फैक्ट चेक, 2022) | छात्रों से ₹450 रजिस्ट्रेशन फीस | ऐसी कोई योजना थी ही नहीं |
| "पीएम शिशु विकास योजना" (दिल्ली पुलिस गिरफ्तारियां, अगस्त 2020) | गांव के एजेंटों के ज़रिए रजिस्ट्रेशन और "बाल बीमा" का पैसा | पीआईबी ने कहा ऐसी कोई योजना नहीं है; पुलिस के अनुसार 15,000 से ज़्यादा लोग जोड़े गए |
| फर्ज़ी "आधार पर ₹3 लाख लोन" योजना (पीआईबी फैक्ट चेक) | निजी जानकारी और फीस | सरकार ऐसी कोई योजना नहीं चलाती |
तरीका बार-बार वही है: असली लगने वाला योजना का नाम, एडवांस फीस, घबराहट पैदा करने वाली डेडलाइन, और ऐसा डोमेन जो मंत्रालय का नहीं है।
आधिकारिक पोर्टल कैसे पहचानें: 7 जांच
- पता किसी भरोसेमंद स्रोत से लें। myScheme या india.gov.in पर योजना पेज खोलें, या पीआईबी प्रेस रिलीज़ देखें, और वहीं दिया गया लिंक इस्तेमाल करें। लोन योजनाओं के लिए जनसमर्थ (jansamarth.in) कई क्रेडिट-लिंक्ड योजनाओं का सरकारी साझा पोर्टल है।
- डोमेन दाएं से बाएं पढ़ें।
pmkusum.mnre.gov.inमें असली डोमेनgov.inहै।pmkusum.gov.in.apply-now.onlineमें असली डोमेनapply-now.onlineहै, जिसे कोई भी खरीद सकता है। - .gov.in का मतलब समझें। .gov.in ज़ोन एनआईसी रजिस्टर करता है, और इसकी गाइडलाइन इसे केंद्र और राज्य के मंत्रालयों, विभागों, उनके दफ्तरों और स्थानीय सरकारों तक सीमित रखती है। .com, .org, .online, .in या .co.in वाली साइट अपने-आप फर्ज़ी नहीं होती, पर जब तक मंत्रालय खुद उसका लिंक न दे, उस पर शक करें।
- सर्च विज्ञापन और मिलते-जुलते नाम नज़रअंदाज़ करें। ठग "पीएम योजना अप्लाई" के लिए विज्ञापन खरीदते हैं। "Sponsored" नतीजों से आगे बढ़ें और पेज का लोगो नहीं, एड्रेस बार देखें।
- पैसे की मांग पर नज़र रखें। मंज़ूरी से पहले रजिस्ट्रेशन फीस, "फाइल चार्ज", जीएसटी, स्टांप ड्यूटी या बीमा मांगने वाला कोई भी पेज सरकारी योजना के लिए खतरे का संकेत है।
- संपर्क जानकारी जांचें। आधिकारिक पोर्टल टोल-फ्री नंबर या मंत्रालय का ईमेल (gov.in या nic.in पर खत्म) देते हैं। निजी मोबाइल नंबर या जीमेल पता चेतावनी का संकेत है।
- पीआईबी फैक्ट चेक से पुष्टि करें। factcheck.pib.gov.in पर खोजें, या लिंक व्हाट्सऐप पर +91 8799711259 पर भेजें। यह यूनिट भारत सरकार से जुड़े मामले देखती है और कोई फीस नहीं लेती।
आम योजनाओं के आधिकारिक पोर्टल (अक्टूबर 2026 तक)
| योजना | आवेदन की आधिकारिक जगह | गाइड |
|---|---|---|
| पीएम स्वनिधि (रेहड़ी-पटरी लोन) | pmsvanidhi.mohua.gov.in, या बैंक या सीएससी | पीएम स्वनिधि |
| पीएम विश्वकर्मा (कारीगर) | सीएससी के ज़रिए pmvishwakarma.gov.in (नए रजिस्ट्रेशन खुले हैं या नहीं, पक्का करें) | पीएम विश्वकर्मा |
| पीएमईजीपी (सब्सिडी वाले लोन) | kviconline.gov.in | पीएमईजीपी |
| मुद्रा लोन | कोई भी बैंक, एनबीएफसी या एमएफआई; jansamarth.in भी | बिज़नेस और मुद्रा लोन |
| सीजीटीएमएसई (बिना गारंटी कवर) | अपने कर्ज़दाता के ज़रिए; जानकारी के लिए cgtmse.in | सीजीटीएमएसई |
| पीएम-कुसुम सोलर पंप | pmkusum.mnre.gov.in और राज्य की नोडल एजेंसी | पीएम-कुसुम |
| पीएम जन धन खाता | कोई भी बैंक शाखा या बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट | पीएम जन धन |
| केंद्रीय स्कॉलरशिप | scholarships.gov.in | नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल |
| गुजरात स्कॉलरशिप | digitalgujarat.gov.in या gssp.gujarat.gov.in | डिजिटल गुजरात स्कॉलरशिप |
| महाराष्ट्र की योजनाएं | mahadbt2.maharashtra.gov.in | महाडीबीटी 2.0 |
ध्यान दें कि jansamarth.in और cgtmse.in जैसे कुछ असली पोर्टल .gov.in पर नहीं हैं। इसीलिए पहली जांच, यानी पता किसी सरकारी पेज से लेना, सिर्फ डोमेन के आखिरी हिस्से से ज़्यादा मायने रखती है।
असली लोन प्रक्रिया कैसी होती है
क्रेडिट-लिंक्ड योजनाओं में लोन बैंक तय करता है, कोई वेबसाइट नहीं। पोर्टल सिर्फ आपका आवेदन दर्ज करके बैंक को भेजता है। आपसे केवाईसी और कारोबार के दस्तावेज़ मांगे जाएंगे, और बैंक अपने नियमों के तहत प्रोसेसिंग फीस ले सकता है, जो मंज़ूरी पत्र और की फैक्ट स्टेटमेंट में लिखी होती है। लोन "मंज़ूर" कराने के लिए आपसे कभी किसी निजी यूपीआई आईडी या किसी व्यक्ति के बैंक खाते में पैसा नहीं मंगाया जाएगा। हमारी फर्ज़ी लोन ऐप फ्रॉड गाइड लोन ऐप्स के बारे में है, जो इसी तरह का खेल खेलते हैं।
उदाहरण: फीस कैसे बढ़ती जाती है
सूरत का एक दर्ज़ी स्पॉन्सर्ड लिंक पर "पीएम मुद्रा लोन योजना ऑनलाइन अप्लाई" देखता है और ₹5 लाख के लोन का फॉर्म भरता है। उदाहरण काल्पनिक है, पर सामने आए मामलों जैसा ही:
- "रजिस्ट्रेशन फीस": ₹1,450
- "मंज़ूरी पत्र" के बाद "फाइल चार्ज और स्टांप ड्यूटी": ₹6,550
- "डिस्बर्सल" से पहले "बीमा और जीएसटी": ₹11,800
- कुल भुगतान: ₹1,450 + ₹6,550 + ₹11,800 = ₹19,800
लोन कभी नहीं आता। हर नई फीस ठग की यह जांच है कि आप फिर से पैसा देंगे या नहीं। अगर उसने यही लोन बैंक से लिया होता, तो कोई "मंज़ूरी" फीस नहीं लगती, सिर्फ बैंक की लिखित प्रोसेसिंग फीस। असली ₹5 लाख के लोन की मासिक किस्त हमारे ईएमआई कैलकुलेटर से देखें।
अगर पैसा भर चुके हैं तो क्या करें
पहले घंटे में
- 1930 पर कॉल करें (राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन) और रकम, यूपीआई आईडी या खाता और समय बताएं। जल्दी शिकायत से पैसा रोके जाने की संभावना सबसे ज़्यादा होती है।
- बैंक के आधिकारिक ऐप या कस्टमर केयर से बैंक को बताएं और जो कार्ड या यूपीआई जानकारी शेयर की थी उसे ब्लॉक कराएं।
उसी दिन
- साइट के स्क्रीनशॉट, रसीदें, चैट और "मंज़ूरी पत्र" के साथ cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। एक्नॉलेजमेंट नंबर नोट करें।
- कहीं पासवर्ड और यूपीआई पिन डाले हों तो उन्हें बदलें, और कुछ इंस्टॉल किया हो तो अनजान ऐप्स जांचें।
- जिस मैसेज से आप साइट तक पहुंचे, उसकी शिकायत संचार साथी के चक्षु पर करें, और साइट का लिंक पीआईबी फैक्ट चेक को भेजें।
बाद में
- जो पुलिस स्टेशन शिकायत लेता है, उससे फॉलो-अप करें। हमारी साइबर फ्रॉड पैसा वापसी और यूपीआई स्कैम गाइड वापसी की प्रक्रिया समझाती हैं।
क्या न करें
- पहली फीस वापस पाने के लिए "रिलीज़ फीस" न दें। यह उसी ठगी का अगला चरण है।
- "आवेदन" में मदद करने वाले किसी के साथ ओटीपी, आधार बायोमेट्रिक या यूपीआई पिन शेयर न करें।
- अशोक चिह्न और मंत्री की फोटो वाले सरकारी दिखने वाले पत्रों पर भरोसा न करें; ठग इन्हें मिनटों में बना लेते हैं।
- साइट की "पुष्टि" के लिए फर्ज़ी साइट पर दिए नंबर पर कॉल न करें।
- किसी एजेंट को अपनी पासबुक, आधार या एटीएम कार्ड न रखने दें। कॉमन सर्विस सेंटर इस्तेमाल करें और किसी भी सर्विस चार्ज की रसीद लें।
मुख्य बातें
- आधिकारिक पोर्टल का पता myScheme, india.gov.in, मंत्रालय की साइट या पीआईबी रिलीज़ से लें, विज्ञापनों या फॉरवर्ड से नहीं।
- डोमेन दाएं से पढ़ें; .gov.in और .nic.in सिर्फ सरकार के लिए हैं, पर कुछ असली पोर्टल दूसरे डोमेन पर हैं।
- केंद्रीय लोन और सब्सिडी योजनाओं में आवेदन मुफ्त है; "मंज़ूरी" के लिए कोई भी फीस ठगी का संकेत है।
- योजना के लोन बैंक मंज़ूर करते हैं, वेबसाइटें नहीं।
- पैसा भर दिया है तो एक घंटे के अंदर 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कैसे पता करें कि सरकारी योजना की वेबसाइट असली है?
भरोसेमंद स्रोत से शुरू करें, जैसे india.gov.in, myscheme.gov.in या मंत्रालय की अपनी साइट, न कि सर्च विज्ञापन या फॉरवर्ड लिंक से। ज़्यादातर आधिकारिक पोर्टल .gov.in या .nic.in पर खत्म होते हैं, जिन्हें सिर्फ सरकारी संस्थाएं रजिस्टर कर सकती हैं, लेकिन कुछ आधिकारिक पोर्टल दूसरे डोमेन पर हैं, इसलिए पता मंत्रालय या पीआईबी रिलीज़ से पक्का करें।
क्या सरकारी लोन योजनाएं रजिस्ट्रेशन फीस लेती हैं?
पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा या पीएमईजीपी जैसी योजनाओं में आधिकारिक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन या आवेदन मुफ्त है। बैंक अपने नियमों के तहत सामान्य लोन फीस ले सकते हैं, लेकिन सरकारी लोन या सब्सिडी मंज़ूर करने के लिए कोई आपसे पैसा नहीं ले सकता। मंज़ूरी के लिए एडवांस फीस ठगी का सबसे बड़ा संकेत है।
प्रोसेसिंग फीस मांगने वाला मुद्रा लोन लेटर असली है?
नहीं। जून 2026 में पीआईबी फैक्ट चेक ने ₹6,550 भरने पर ₹10 लाख का मुद्रा लोन देने वाले वायरल लेटर को फर्ज़ी बताया। मुद्रा सीधे लोगों को लोन नहीं देता; मुद्रा लोन सिर्फ बैंक, एनबीएफसी और माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं से मिलते हैं।
फर्ज़ी सरकारी योजना वेबसाइट की शिकायत कहां करें?
पैसा गया है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। लिंक पीआईबी फैक्ट चेक को व्हाट्सऐप +91 8799711259 पर या factcheck.pib.gov.in पर भेज सकते हैं, और संदिग्ध कॉल, एसएमएस या व्हाट्सऐप मैसेज की शिकायत संचार साथी के चक्षु पर कर सकते हैं।
फर्ज़ी योजना की फीस भरने के बाद क्या पैसा वापस मिल सकता है?
कभी-कभी, अगर आप जल्दी शिकायत करें। कुछ ही घंटों में 1930 पर कॉल करें ताकि पैसा ट्रेस होकर पाने वाले खाते में रोका जा सके, फिर cybercrime.gov.in पर लिखित शिकायत करें और अपने बैंक को बताएं। वापसी की गारंटी नहीं है और आमतौर पर पुलिस या अदालत की प्रक्रिया लगती है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।