सोना सस्ता हुआ, लेंडर और सोना या पैसा मांग रहा? क्या करें
सोने के दाम गिरने पर गोल्ड लोन का मार्जिन कॉल आया? जानें आरबीआई के LTV नियम, कितना पैसा या सोना देना होगा, उदाहरण, और नीलामी से कैसे बचें।

इस लेख में
"सोने के दाम गिर गए हैं और मेरे लेंडर ने मैसेज भेजकर कुछ दिनों में पैसे भरने या और सोना गिरवी रखने को कहा है। मैंने हर किस्त समय पर भरी है।" इसे गोल्ड लोन मार्जिन कॉल कहते हैं। हिसाब समझ में आ जाए तो इसका हल आसान है: कमी (शॉर्टफॉल) की रकम लिखित में लें, फिर अपने लोन एग्रीमेंट की डेडलाइन से पहले या तो आंशिक भुगतान करें या थोड़ा और सोना गिरवी रखें, ताकि लोन वापस आरबीआई (RBI) की लोन-टू-वैल्यू (LTV) सीमा के अंदर आ जाए।
आपने कुछ गलत नहीं किया है। यह नियम इसलिए है क्योंकि लेंडर की एकमात्र सिक्योरिटी आपका सोना है। यह गाइड अक्टूबर 2026 की स्थिति के मुताबिक नियम समझाती है, बताती है कि लेंडर का आंकड़ा कैसे जांचें, और मामले को नीलामी तक पहुंचने से कैसे रोकें। बाकी नियमों के लिए हमारी गोल्ड लोन गाइड देखें।
ऐसा क्यों होता है
आरबीआई के Lending Against Gold and Silver Collateral Directions, 2025 के तहत, जिन्हें हर बैंक, कोऑपरेटिव बैंक और NBFC को 1 अप्रैल 2026 तक लागू करना था:
- अधिकतम LTV ₹2.5 लाख तक के लोन पर 85%, ₹2.5 लाख से ऊपर ₹5 लाख तक 80%, और ₹5 लाख से ऊपर 75% है।
- LTV पूरी अवधि के दौरान लगातार सीमा के अंदर रहना चाहिए, सिर्फ मंजूरी वाले दिन नहीं।
- बुलेट रीपेमेंट लोन में LTV मैच्योरिटी पर देय कुल रकम, यानी मूलधन और ब्याज, पर गिना जाता है।
- हर लेंडर की बोर्ड से मंजूर पॉलिसी में साफ लिखा होना चाहिए कि LTV सीमा पार होने पर वह क्या कदम उठाएगा।
यानी तीन चीजें आपको सीमा के पार धकेलती हैं:
- सोने के दाम गिरना। लेंडर आपके गिरवी सोने की कीमत मौजूदा रेफरेंस प्राइस पर दोबारा लगाता है।
- ब्याज जुड़ते जाना। बुलेट लोन या जिन लोन का ब्याज नहीं भरा गया, उनमें सोना उतना ही रहता है पर बकाया हर महीने बढ़ता है।
- अधिकतम सीमा तक लोन लेना। 84% LTV वाले लोन में लगभग कोई गुंजाइश नहीं होती; दाम में 2% की गिरावट भी सीमा पार करा सकती है।
| आपकी स्थिति | सीमा पार होने से पहले की गुंजाइश | मार्जिन कॉल का खतरा |
|---|---|---|
| 60% LTV पर ईएमआई लोन | ज्यादा; भुगतान के साथ और बढ़ती है | कम |
| हर महीने ब्याज भरा, 75% LTV | ठीक-ठाक | मध्यम |
| करीब 85% पर मंजूर बुलेट लोन (ब्याज समेत) | बहुत कम | ज्यादा |
| किसी भी लोन पर बकाया ब्याज | हर महीने घटती | ज्यादा |
उदाहरण: कितना पैसा या सोना देना होगा
रमेश 10% सालाना साधारण ब्याज पर ₹2,00,000 का 12 महीने का बुलेट लोन लेता है। मैच्योरिटी पर देय रकम: ₹2,00,000 + ₹20,000 = ₹2,20,000। लोन ₹2.5 लाख से कम है, इसलिए LTV सीमा 85% है।
मंजूरी के समय: 22 कैरेट का 25 ग्राम नेट सोना, ₹11,000 प्रति ग्राम के रेफरेंस प्राइस पर (सिर्फ उदाहरण) = ₹2,75,000। LTV = ₹2,20,000 ÷ ₹2,75,000 = 80%, सीमा के अंदर।
तीन महीने बाद: रेफरेंस प्राइस 10% गिरकर ₹9,900 प्रति ग्राम हो जाता है। सोने की कीमत = 25 × ₹9,900 = ₹2,47,500। LTV = ₹2,20,000 ÷ ₹2,47,500 = 88.9%, यानी 85% से ऊपर।
| विकल्प | हिसाब | नतीजा |
|---|---|---|
| अभी अधिकतम मंजूर बकाया | 85% × ₹2,47,500 | ₹2,10,375 |
| विकल्प A: लोन का कुछ हिस्सा चुकाएं | ₹2,20,000 − ₹2,10,375 | करीब ₹9,625 |
| मौजूदा बकाया के लिए जरूरी सोने की कीमत | ₹2,20,000 ÷ 0.85 | ₹2,58,824 |
| विकल्प B: और सोना गिरवी रखें | (₹2,58,824 − ₹2,47,500) ÷ ₹9,900 | 22 कैरेट का करीब 1.15 ग्राम नेट सोना |
असल में जरूरी आंशिक भुगतान थोड़ा कम होता है, क्योंकि मूलधन जल्दी चुकाने से वह बचा हुआ ब्याज भी घट जाता है जो मैच्योरिटी की रकम में गिना जाता है। सटीक आंकड़ा लेंडर से पूछें। आंशिक भुगतान से ब्याज भी बचता है, जबकि और सोना गिरवी रखने में अभी कोई खर्च नहीं होता लेकिन ज्यादा गहने फंस जाते हैं। अगर आप हर महीने तय भुगतान पसंद करते हैं, तो हमारे ईएमआई कैलकुलेटर में हिसाब लगाएं और पूछें कि क्या लोन को ईएमआई में बदला जा सकता है।
समस्या कैसे सुलझाएं: स्टेप-बाय-स्टेप
- नोटिस ध्यान से पढ़ें। कमी की रकम, डेडलाइन और जवाब देने का तरीका नोट करें। पक्का करें कि यह आपके लेंडर के आधिकारिक नंबर, ईमेल या ब्रांच से आया है, किसी अनजान लिंक से नहीं।
- हिसाब लिखित में मांगें। इस्तेमाल किया गया रेफरेंस प्राइस और उसकी तारीख, नेट वजन, शुद्धता, कुल बकाया और निकाला गया LTV मांगें। इन्हें अपने एसे सर्टिफिकेट से मिलाएं।
- दाम की जांच करें। लेंडर का रेफरेंस प्राइस उस तारीख के लिए उसकी वेबसाइट पर प्रकाशित रेट से मेल खाना चाहिए। सोने के दाम रोज बदलते हैं, इसलिए समय के फर्क से थोड़ा अंतर होना सामान्य है।
- अपना उपाय चुनें:
- आंशिक भुगतान नकद या बैंक ट्रांसफर से, लोन अकाउंट में जमा, रसीद के साथ।
- अतिरिक्त सोना, जिसकी जांच आपके सामने हो, और नए गहनों के साथ अपडेटेड सर्टिफिकेट मिले।
- बकाया ब्याज भरें, अगर बकाया ब्याज की वजह से सीमा पार हुई है।
- डेडलाइन से पहले कदम उठाएं। नोटिस की अवधि लेंडर की पॉलिसी और आपके लोन एग्रीमेंट से तय होती है; आरबीआई ने कोई एक संख्या तय नहीं की है। अगर कुछ और दिन चाहिए, तो डेडलाइन खत्म होने से पहले लिखित में मांगें।
- लिखित पुष्टि लें कि LTV ठीक हो गया है और नोटिस बंद कर दिया गया है।
- लोन के ढांचे पर दोबारा सोचें। अगर दाम लगातार ऊपर-नीचे हो रहे हैं, तो मासिक ब्याज या ईएमआई भुगतान में बदलने, या कुछ हिस्सा चुकाकर गुंजाइश बनाने के बारे में पूछें। चार्ज और कुछ गहने वापस पाने का तरीका हमारी गाइड गोल्ड लोन प्रीपेमेंट और पार्ट रिलीज में है।
अगर आप सच में न पैसे दे सकते हैं और न और सोना गिरवी रख सकते हैं, तो जल्दी ब्रांच से बात करें। लोन वापस मांगे जाने से पहले लेंडर ज्यादा लचीला होता है, बाद में नहीं। पैसों की तंगी में पूरी योजना के लिए पढ़ें ईएमआई नहीं भर पा रहे तो क्या करें।
मार्जिन कॉल के दौरान आपके अधिकार
- पारदर्शी वैल्यूएशन। दोबारा कीमत उसी रेफरेंस प्राइस तरीके से लगनी चाहिए जो मंजूरी के समय इस्तेमाल हुआ था: आपके सोने की शुद्धता के लिए 30 दिन के औसत और पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस में से जो कम हो।
- पॉलिसी बताई जानी चाहिए। LTV सीमा पार होने पर कार्रवाई और उसकी समय सीमा लेंडर की पॉलिसी का हिस्सा होनी चाहिए और आपके लोन कागजात व Key Facts Statement में दिखनी चाहिए।
- बिना नोटिस नीलामी नहीं। अगर मार्जिन पूरा नहीं होता और लोन वापस मांगा जाता है, तो नीलामी सिर्फ आपको नोटिस देने, अखबार में विज्ञापन देने और मौजूदा कीमत के कम से कम 90% रिजर्व प्राइस के साथ ही हो सकती है। बची हुई रकम सात कामकाजी दिनों में लौटानी होगी। पूरी जानकारी हमारी गाइड गोल्ड लोन नीलामी के नियम में है।
- उचित बर्ताव। रिमाइंडर और वसूली कॉल आरबीआई के फेयर प्रैक्टिसेज कोड के मुताबिक होने चाहिए; धमकी या गाली-गलौज की इजाजत नहीं है।
शिकायत कहां करें और समय सीमा
- ब्रांच: अगर कमी का आंकड़ा गलत लगे या नोटिस में जवाब देने का असल में समय न दिया गया हो, तो लिखित में शिकायत करें। लोन अकाउंट नंबर जरूर लिखें।
- ग्रीवांस या नोडल ऑफिसर: संपर्क की जानकारी लेंडर की वेबसाइट पर होती है। जवाब के लिए 30 दिन दें।
- आरबीआई ओम्बड्समैन: 30 दिन में जवाब न आए या आप संतुष्ट न हों, तो cms.rbi.org.in पर शिकायत करें (हेल्पलाइन 14448)। RBI Integrated Ombudsman Scheme, 2026 के तहत लेंडर के अंतिम जवाब या जवाब की डेडलाइन, जो भी बाद में हो, उसके 90 दिन के अंदर शिकायत करें।
शिकायत के अच्छे आधार हैं: दोबारा कीमत लगाने में इस्तेमाल हुआ दाम लेंडर के प्रकाशित रेट से मेल न खाना, ऐसा मार्जिन कॉल या नीलामी का कदम जिसकी आपके लोन एग्रीमेंट में इजाजत नहीं है, और कार्रवाई से पहले कोई लिखित नोटिस न मिलना।
लेंडर को अनुरोध का नमूना
विषय: LTV कमी का नोटिस - लोन अकाउंट [नंबर]
महोदय/महोदया,
मुझे आपका [तारीख] का नोटिस मिला है, जिसमें कहा गया है कि मेरा गोल्ड लोन
मंजूर LTV से ज्यादा है और मुझे [तारीख] तक ₹[रकम] भरने को कहा गया है।
कृपया लिखित में बताएं:
1. दोबारा कीमत लगाने में इस्तेमाल हुआ प्रति ग्राम रेफरेंस प्राइस और उसकी तारीख
2. मेरे एसे सर्टिफिकेट के मुताबिक नेट वजन और शुद्धता
3. LTV के हिसाब में इस्तेमाल हुआ कुल बकाया (मूलधन + ब्याज)
4. LTV ठीक करने के लिए जरूरी सटीक रकम, या अतिरिक्त सोना कितने ग्राम
मैं डेडलाइन से पहले [आंशिक भुगतान करना / अतिरिक्त सोना गिरवी रखना]
चाहता/चाहती हूं। कृपया पुष्टि करें कि मार्जिन पूरा होने के बाद
कोई और कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सादर,
[नाम], [रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर]
क्या न करें
- नोटिस को नजरअंदाज न करें। बिना जवाब का मार्जिन कॉल लोन वापसी की मांग और नीलामी के नोटिस में बदल सकता है।
- घबराहट में तुलना किए बिना महंगा पर्सनल लोन या ऐप लोन न लें; बचत या परिवार से छोटा आंशिक भुगतान सस्ता पड़ता है।
- बिना मांगे आए मैसेज में भेजे गए पेमेंट लिंक पर क्लिक न करें। भुगतान सिर्फ ब्रांच, लेंडर के आधिकारिक ऐप या अपने लोन अकाउंट की डिटेल से करें।
- कमी पूरी करने के लिए नया टॉप-अप लोन न लें। टॉप-अप उसी सोने पर अतिरिक्त उधार है और सिर्फ LTV सीमा के अंदर ही मिलता है, इसलिए इससे सीमा पार होने की समस्या ठीक नहीं हो सकती।
- दाम वापस बढ़ने का इंतजार न करें। दाम और गिर सकते हैं, और डेडलाइन नहीं बदलेगी।
मुख्य बातें
- आरबीआई के मुताबिक गोल्ड लोन का LTV पूरे लोन के दौरान 85%, 80% या 75% के अंदर रहना चाहिए, इसलिए समय पर भुगतान करने पर भी दाम गिरने से मार्जिन कॉल आ सकता है।
- बुलेट लोन में LTV में मैच्योरिटी पर देय ब्याज भी शामिल होता है, जिससे गुंजाइश कम रहती है।
- उदाहरण में दाम 10% गिरने पर करीब ₹9,625 का आंशिक भुगतान या करीब 1.15 ग्राम अतिरिक्त सोना चाहिए।
- कमी का हिसाब लिखित में मांगें और रेफरेंस प्राइस की जांच करें।
- ब्रांच से ग्रीवांस ऑफिसर तक, फिर 30 दिन बाद cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन तक जाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मैंने कोई किस्त नहीं छोड़ी, फिर भी लेंडर पैसे क्यों मांग रहा है?
आरबीआई के 2025 के गोल्ड लोन निर्देशों के मुताबिक लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात पूरे लोन के दौरान सीमा के अंदर रहना चाहिए, सिर्फ मंजूरी के समय नहीं। अगर सोने के दाम गिरते हैं, तो गिरवी सोने की कीमत घट जाती है और लोन सीमा से ऊपर जा सकता है, इसलिए हर भुगतान समय पर होने के बावजूद लेंडर आपसे मार्जिन पूरा करने को कहता है।
गोल्ड लोन मार्जिन कॉल के बाद मुझे कितना चुकाना होगा?
इतना कि लोन फिर से मंजूर LTV के अंदर आ जाए, जो ₹2.5 लाख तक के लोन पर 85%, ₹5 लाख तक 80% और उससे ऊपर 75% है। बुलेट लोन में LTV मैच्योरिटी पर देय मूलधन और ब्याज मिलाकर जांचा जाता है, इसलिए लेंडर से कमी की सटीक रकम लिखित में मांगें।
क्या नकद की जगह और सोना गिरवी रख सकते हैं?
आम तौर पर हां। ज्यादातर लेंडर मार्जिन पूरा करने के लिए आंशिक भुगतान या अतिरिक्त सोना, दोनों में से कुछ भी स्वीकार करते हैं। अतिरिक्त सोने की जांच भी उसी तरह होती है जैसे पहली बार गिरवी रखे सोने की हुई थी।
अगर मैं मार्जिन कॉल का जवाब न दूं तो क्या लेंडर मेरा सोना नीलाम कर सकता है?
अगर आप लोन एग्रीमेंट के मुताबिक LTV ठीक नहीं करते, तो लेंडर लोन वापस मांग सकता है और नीलामी की ओर बढ़ सकता है, लेकिन सिर्फ आपको नोटिस देने और आरबीआई के नीलामी नियमों का पालन करने के बाद, जिनमें मौजूदा कीमत का कम से कम 90% रिजर्व प्राइस शामिल है।
क्या मार्जिन कॉल की अवधि आरबीआई तय करता है?
नहीं। आरबीआई कहता है कि LTV सीमा पार होने पर लेंडर क्या कदम उठाएगा, यह हर लेंडर की बोर्ड से मंजूर पॉलिसी में तय हो। नोटिस की अवधि और विकल्प आपके लोन एग्रीमेंट में होने चाहिए, इसलिए उसे पढ़ें और ब्रांच से लिखित में पूछें।
गलत मार्जिन कॉल की शिकायत कहां करें?
ब्रांच से और फिर लेंडर के ग्रीवांस ऑफिसर से शिकायत करें। 30 दिन में जवाब न आए या आप उससे असहमत हों, तो cms.rbi.org.in पर आरबीआई ओम्बड्समैन के पास शिकायत करें।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।