SHG बचत और लोन फंड: अलग-अलग हिसाब कैसे रखें
स्वयं सहायता समूह सदस्यों की बचत, रिवॉल्विंग फंड, बैंक लोन और ब्याज का हिसाब अलग कैसे रखे: रजिस्टर, ₹3.57 लाख का उदाहरण और आम गलतियों के समाधान।

इस लेख में
स्वयं सहायता समूह (SHG) को सदस्यों की बचत, मिशन फंड (रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड), बैंक लोन और ब्याज की कमाई अलग-अलग हेड में लिखनी चाहिए, भले ही सारा पैसा एक ही बैंक खाते में हो। बचत सदस्यों की है; बैंक लोन समूह का कर्ज है जिसे चुकाना है; ब्याज और फीस समूह की अपनी आय है। इन्हें मिलाने से सदस्यों को लगता है कि उनकी बचत असल से ज्यादा है, समूह का कॉर्पस गलत दिखता है और बैंक की ग्रेडिंग कमजोर होती है। यहां बताए नियम नवंबर 2026 तक के हैं; आपका राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) या प्रमोट करने वाली संस्था अपने फॉर्मेट तय कर सकती है।
SHG बैंक लोन, ब्याज दर और डोज कैसे काम करते हैं, इसके लिए हमारी NRLM SHG लोन और लखपति दीदी गाइड पढ़ें।
अलग हिसाब क्यों जरूरी है
DAY-NRLM पर आरबीआई का मास्टर सर्कुलर (1 अप्रैल 2025) "खाता बही का सही रखरखाव" को पंचसूत्रों में गिनता है, और कहता है कि बैंक लिंकेज से पहले समूह अपनी खाता बही के अनुसार कम से कम 6 महीने से सक्रिय होना चाहिए। बैंक इन्हीं किताबों के आधार पर समूह की ग्रेडिंग करता है।
अलग हिसाब इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बैंक लोन की रकम कॉर्पस के आधार पर तय करता है। सर्कुलर के अनुसार कॉर्पस में समूह को मिला रिवॉल्विंग फंड, अपनी बचत, आंतरिक लोन से कमाया ब्याज और दूसरे स्रोतों का पैसा शामिल है। बैंक लोन खुद कॉर्पस नहीं है। अगर कोषाध्यक्ष लोन को "बचत" में जोड़ दे, तो कॉर्पस असल से बड़ा दिखेगा और सदस्यों को गलत तस्वीर मिलेगी।
हर SHG को ये फंड हेड रखने चाहिए
| फंड हेड | किसका पैसा | कहां से आता है | किसे लौटाना |
|---|---|---|---|
| सदस्यों की बचत | हर सदस्य | हर महीने की बचत | सदस्य को, समूह के नियमों के अनुसार |
| रिवॉल्विंग फंड (RF) | समूह | DAY-NRLM, आमतौर पर ₹20,000-30,000 प्रति SHG | सामान्य तौर पर लौटाना नहीं; SRLM की शर्तें देखें |
| कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (CIF) लोन | समूह पर बकाया | ग्राम या क्लस्टर संगठन | संगठन को |
| बैंक लोन (टर्म लोन या कैश क्रेडिट) | समूह पर बकाया | बैंक ब्रांच | बैंक को |
| ब्याज और जुर्माने की कमाई | समूह | सदस्यों को दिए लोन पर ब्याज | नियमों के अनुसार रखें या बांटें |
| ग्रांट या दूसरे फंड | समूह | योजना या दानदाता | मंजूरी की शर्तों के अनुसार |
पहला कॉलम याद रखें: केवल पहली पंक्ति ही किसी सदस्य का निजी पैसा है।
कौन से रजिस्टर रखें
ज्यादातर SRLM और प्रमोट करने वाली संस्थाएं नीचे जैसा सेट इस्तेमाल करती हैं। कुछ राज्यों ने बहीखाता मिशन के डिजिटल सिस्टम पर कर दिया है, पर तरीका वही है।
- मिनट्स बुक: हर बैठक, हाजिरी, लोन, बचत दर और ब्याज दर के फैसले।
- बचत रजिस्टर या लेजर: हर सदस्य की हर महीने एक लाइन, जिसमें देय रकम, जमा रकम और कुल बैलेंस।
- लोन लेजर: हर सदस्य का अलग पेज, जिसमें हर लोन, उसका स्रोत (बचत, RF, CIF या बैंक), किस्तें, ब्याज और बैलेंस।
- कैश बुक: नकद या बैंक से हर आमद और भुगतान, चालू बैलेंस के साथ।
- जनरल लेजर: हर फंड हेड (बचत, RF, CIF, बैंक लोन, ब्याज आय, खर्च) का एक पेज ताकि हर बैलेंस दिखे।
- सदस्य पासबुक: हर सदस्य के पास उसकी बचत और लोन की अपनी कॉपी।
- बैंक पासबुक या स्टेटमेंट: हर महीने कैश बुक से मिलान।
हर लोन पर उसका स्रोत लिखें
जब समूह किसी सदस्य को ₹10,000 देता है, तो लोन लेजर में लिखें कि पैसा अपनी बचत, RF, CIF या बैंक लोन में से किससे आया। यह तब काम आता है जब बैंक या संगठन पूछे कि उसका पैसा कैसे इस्तेमाल हुआ, और जब कोई सदस्य समूह छोड़े और पता करना हो कि किसका पैसा फंसा है।
उदाहरण: एक बैंक खाता, पांच फंड हेड
12 सदस्यों वाला SHG 24 महीने से चल रहा है। हर सदस्य हर महीने ₹200 बचाती है।
- सदस्यों की बचत: 12 × ₹200 × 24 = ₹57,600 (प्रति सदस्य ₹4,800)
- मिला रिवॉल्विंग फंड: ₹30,000
- अब तक आंतरिक लोन से ब्याज की कमाई: ₹9,800
- बकाया बैंक लोन: ₹2,60,000
कॉर्पस = ₹57,600 + ₹30,000 + ₹9,800 = ₹97,400। बैंक लोन देनदारी है, कॉर्पस नहीं।
आज पैसा कहां है:
| स्रोत | ₹ | उपयोग | ₹ |
|---|---|---|---|
| सदस्यों की बचत | 57,600 | सदस्यों पर बकाया लोन | 3,10,000 |
| रिवॉल्विंग फंड | 30,000 | SHG बैंक खाते में बैलेंस | 45,900 |
| ब्याज आय | 9,800 | कोषाध्यक्ष के पास नकद | 1,500 |
| बकाया बैंक लोन | 2,60,000 | ||
| कुल | 3,57,400 | कुल | 3,57,400 |
दोनों तरफ बराबर हैं, और कोषाध्यक्ष को हर महीने यही जांच करनी चाहिए।
अब आम गलती देखें। अगर कोषाध्यक्ष पूरे ₹3,57,400 को "समूह की बचत" लिख दे, तो हर सदस्य मानेगी कि उसका हिस्सा ₹3,57,400 ÷ 12 = ₹29,783 है। जबकि उसकी असली बचत ₹4,800 है। जब कोई सदस्य छोड़ती है या समूह पैसा बांटता है, तो यही अंतर झगड़े की वजह बनता है।
बैंक लोन पर ब्याज लगता है और किस्तों में चुकाना होता है; समूह की किस्त का हिसाब ईएमआई कैलकुलेटर में जांचें।
हर महीने की क्लोजिंग चेकलिस्ट
- बचत रजिस्टर का जोड़ जनरल लेजर के बचत बैलेंस के बराबर हो।
- सभी सदस्यों के लोन बैलेंस का जोड़ जनरल लेजर के "बकाया लोन" के बराबर हो।
- कैश बुक बैलेंस = बैंक स्टेटमेंट + हाथ में नकद।
- आपकी किताबों में बैंक लोन बैलेंस बैंक के स्टेटमेंट से मेल खाए।
- वसूला गया ब्याज ब्याज आय में जाए, बचत में नहीं।
- RF और CIF के बैलेंस अलग दिखें, बचत के अंदर नहीं।
- बचत रकम, ब्याज दर या दिए गए लोन में कोई बदलाव मिनट्स में दर्ज हो।
- दो पदाधिकारी महीने के जोड़ पर साइन करें; सदस्य अपनी पासबुक देख सकें।
आम गलतियां और समाधान
| गलती | समाधान |
|---|---|
| बैंक लोन को बचत लिख देना | जनरल लेजर में "बैंक लोन" का अलग पेज खोलें और मिनट्स में प्रस्ताव लिखकर गलत एंट्री उलटें |
| ब्याज हर सदस्य की बचत में जोड़ देना | ब्याज समूह की आय रखें; नियम कहें तभी और तब बांटें |
| RF को सदस्यों की बचत में बांट देना | RF को समूह फंड दिखाएं; इसके उपयोग के बारे में SRLM से पूछें |
| सदस्यों के लोन पर स्रोत न लिखना | अब से हर लोन एंट्री पर स्रोत (बचत, RF, CIF, बैंक) लिखें |
| महीनों तक नकद कोषाध्यक्ष के घर रखना | नियमित जमा करें; हाथ में नकद कम और दर्ज रखें |
| बैंक स्टेटमेंट कभी न जांचना | हर महीने मिलान करें और अंतर मिनट्स में लिखें |
समूह की बचत की रक्षा करने वाले अधिकार
- बचत पर लियन नहीं: आरबीआई का DAY-NRLM सर्कुलर कहता है कि SHG बचत खाते पर लियन नहीं लगना चाहिए और लोन मंजूर करते समय डिपॉजिट की मांग नहीं होनी चाहिए।
- ₹10 लाख तक कोलैटरल नहीं: ₹10 लाख तक के लोन पर कोई कोलैटरल या मार्जिन नहीं; उससे ऊपर ₹20 लाख तक, ₹10 लाख से ऊपर की रकम पर अधिकतम 10% मार्जिन लिया जा सकता है।
- केवाईसी: बैंक SHG सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए आरबीआई के केवाईसी मास्टर डायरेक्शन का पालन करते हैं; क्रेडिट लिंकेज के लिए हर सदस्य का बचत खाता खुलवाना शर्त नहीं है।
अगर ब्रांच बचत रोके या डिपॉजिट मांगे, तो ब्रांच मैनेजर को लिखें, फिर बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी को, और 30 दिन बाद आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन के पास cms.rbi.org.in पर जाएं। आपके ब्लॉक या जिला SRLM के कर्मचारी भी बैंकर्स बैठकों में मामला उठा सकते हैं।
संबंधित गाइड
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- SHG बिजनेस का मुनाफा बनाम सदस्यों की मजदूरी
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मुख्य बातें
- सदस्यों की बचत, RF, CIF, बैंक लोन और ब्याज आय अलग-अलग हेड में लिखें, भले ही खाता एक हो।
- कॉर्पस = बचत + RF + कमाया ब्याज + दूसरे फंड; बैंक लोन कॉर्पस नहीं है।
- उदाहरण में हर सदस्य की असली बचत ₹4,800 थी, न कि मिले-जुले रिकॉर्ड से दिखने वाले ₹29,783।
- सदस्यों को दिए हर लोन पर स्रोत लिखें और हर महीने बैंक से किताबों का मिलान करें।
- DAY-NRLM नियमों के तहत बैंकों को SHG बचत पर लियन नहीं लगाना चाहिए और डिपॉजिट की मांग नहीं करनी चाहिए।
संबंधित गाइड: SHG पासबुक को समूह के लेजर से कैसे मिलाएं, SHG डिजिटल बुककीपिंग: एंट्री कौन मंजूर करे, एक्सेस किसे.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
SHG को बचत और लोन फंड का हिसाब अलग क्यों रखना चाहिए?
सदस्यों की बचत सदस्यों की होती है, जबकि बैंक लोन समूह का कर्ज है जिसे लौटाना है। दोनों को एक ही खाते में लिखने पर सदस्य अपनी असली बचत नहीं देख पाते, समूह का कॉर्पस गलत दिखता है और बैंक की ग्रेडिंग में किताबें कमजोर पड़ सकती हैं।
SHG के कॉर्पस में क्या-क्या गिना जाता है?
DAY-NRLM पर आरबीआई के मास्टर सर्कुलर के अनुसार कॉर्पस में समूह को मिला रिवॉल्विंग फंड, उसकी अपनी बचत, आंतरिक लोन से कमाया ब्याज और दूसरे स्रोतों से मिला पैसा शामिल है। समूह पर बकाया बैंक लोन कॉर्पस का हिस्सा नहीं है।
SHG को कौन-कौन सी किताबें रखनी चाहिए?
ज्यादातर समूह मिनट्स बुक, बचत रजिस्टर, हर सदस्य का लोन लेजर, कैश बुक, जनरल लेजर और सदस्यों की पासबुक रखते हैं। आपका राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन या प्रमोट करने वाली संस्था अपने फॉर्मेट या डिजिटल सिस्टम तय कर सकती है।
क्या बैंक लोन के लिए हमारे SHG बचत खाते पर लियन लगा सकता है?
DAY-NRLM पर आरबीआई का मास्टर सर्कुलर कहता है कि SHG बचत खाते पर लियन नहीं लगना चाहिए और लोन मंजूर करते समय डिपॉजिट की मांग नहीं होनी चाहिए। अगर ब्रांच ऐसा कहे तो ब्रांच मैनेजर, बैंक के शिकायत अधिकारी और फिर आरबीआई ओम्बड्समैन के पास जाएं।
क्या रिवॉल्विंग फंड को सदस्यों की बचत में दिखाना चाहिए?
नहीं। रिवॉल्विंग फंड पूरे समूह को मिली सहायता है, इसलिए इसे अलग हेड में लिखें। यह कॉर्पस में गिना जाता है, लेकिन किसी एक सदस्य की बचत नहीं है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।