सोलर लगने के बाद सब्सिडी नहीं आई? क्या जांचें
इंस्टॉलेशन के बाद पीएम सूर्य घर सब्सिडी पेंडिंग? नेट मीटर से DISCOM जांच और कमीशनिंग तक हर चरण, आम समय-सीमा, रुकने की वजहें और शिकायत का तरीका।

इस लेख में
पीएम सूर्य घर में सब्सिडी पैनल लगते ही नहीं मिलती। यह चार काम क्रम से होने के बाद ही मिलती है: वेंडर इंस्टॉलेशन विवरण अपलोड करता है, DISCOM नेट मीटर लगाता है, DISCOM पोर्टल पर प्लांट की जांच और कमीशनिंग करता है, और आप क्लेम के लिए बैंक विवरण जमा करते हैं। अगर आपकी सब्सिडी पेंडिंग है, तो पोर्टल लॉगिन बताता है कि इनमें से कौन सा चरण अटका है, और उसी से पता चलता है कि किसके पीछे लगना है।
यह गाइड अक्टूबर 2026 के हिसाब से बताती है कि इंस्टॉलेशन के बाद क्या होता है, आम समय-सीमा क्या है, क्या जांचें और शिकायत कैसे करें। योजना की बुनियादी बातों के लिए हमारी पीएम सूर्य घर सब्सिडी और लोन गाइड देखें।
यह किन पर लागू होता है
- जिन परिवारों ने पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना में रजिस्टर्ड वेंडर से रूफटॉप सोलर लगवाया है।
- जिनके पोर्टल पर हफ्तों से "installation submitted", "inspection pending", "commissioned" या "subsidy pending" दिख रहा है।
- जिनके लोन खाते में सब्सिडी नहीं आई।
इंस्टॉलेशन के बाद क्या होता है
| चरण | कौन करता है | पोर्टल पर क्या दिखता है | क्या जांचें |
|---|---|---|---|
| 1. इंस्टॉलेशन विवरण अपलोड | वेंडर (या आप) | इंस्टॉलेशन विवरण जमा | फोटो, DCR अंडरटेकिंग, मॉड्यूल और इन्वर्टर के सीरियल नंबर सही हैं |
| 2. नेट मीटर आवेदन और इंस्टॉलेशन | DISCOM | नेट मीटर पेंडिंग / लगा | मीटर फीस भरी, मीटर असल में लगा |
| 3. जांच | DISCOM इंजीनियर | जांच पेंडिंग / पूरी | साइट विजिट हुई, कोई आपत्ति दर्ज हुई |
| 4. कमीशनिंग सर्टिफिकेट | DISCOM | कमीशन हुआ, सर्टिफिकेट डाउनलोड हो सकता है | डाउनलोड करके संभालें |
| 5. सब्सिडी क्लेम | आप | बैंक विवरण जमा | नाम, खाता नंबर, IFSC, कैंसिल चेक या पासबुक कॉपी |
| 6. सब्सिडी जारी | पोर्टल के जरिए MNRE | सब्सिडी जारी / जमा | बैंक या लोन स्टेटमेंट |
वेंडर गाइड आमतौर पर बताते हैं कि अनुरोध के बाद जांच में करीब 5 कार्यदिवस, DISCOM के हिसाब से नेट मीटर में 7 से 30 दिन, और क्लेम के बाद सब्सिडी में करीब 30 दिन लगते हैं। झारखंड के एक DISCOM के प्रक्रिया दस्तावेज में लिखा है कि क्लेम जमा करने के 30 दिन के भीतर सब्सिडी जारी होती है। ये एक जैसी राष्ट्रीय समय-सीमाएं नहीं हैं, इसलिए इन्हें यह समझने के लिए इस्तेमाल करें कि फॉलो-अप कब शुरू करना है।
आपको कितनी मदद मिलनी चाहिए
अक्टूबर 2026 तक केंद्र की सब्सिडी 1 kW के लिए ₹30,000, 2 kW के लिए ₹60,000 और 3 kW या उससे बड़े सिस्टम के लिए ₹78,000 है (विशेष श्रेणी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ₹85,800 तक)। कुछ राज्य अलग से अतिरिक्त टॉप-अप देते हैं। जांचें कि जमा रकम आपके सिस्टम के आकार से मेल खाती है; हमारी रूफटॉप सोलर सब्सिडी vs सोलर लोन गाइड बताती है कि क्या लौटाना पड़ता है और क्या नहीं।
तैयार रखने वाले दस्तावेज
- आवेदन नंबर और बिजली उपभोक्ता नंबर
- साइन किया हुआ वेंडर एग्रीमेंट और टैक्स इनवॉइस
- DCR अंडरटेकिंग और मॉड्यूल के सीरियल नंबर
- नेट मीटर की रसीद और लगने की तारीख
- कमीशनिंग सर्टिफिकेट (पोर्टल से डाउनलोड करें)
- बिजली कनेक्शन वाले नाम से ही बैंक पासबुक या कैंसिल चेक
- लोन लिया है तो लोन खाता नंबर और सैंक्शन लेटर
कदम-दर-कदम: सब्सिडी पेंडिंग हो तो क्या जांचें
- लॉग इन करके मौजूदा चरण देखें। आखिरी बार कब बदला, वह तारीख नोट करें। स्क्रीनशॉट लें।
- अगर इंस्टॉलेशन विवरण जमा नहीं हुए: वेंडर से लिखित में अपलोड करने को कहें। यह वेंडर का काम है, और यहां देरी आम है।
- अगर नेट मीटर पेंडिंग है: पक्का करें कि आपने DISCOM के मीटर शुल्क भर दिए हैं, और स्थानीय सब-डिवीजन ऑफिस से लगाने की तारीख पूछें।
- अगर जांच या कमीशनिंग पेंडिंग है: आवेदन नंबर के साथ DISCOM के रूफटॉप सोलर सेल से संपर्क करें। पूछें कि क्या कोई आपत्ति लगी है (गलत सीरियल नंबर, अर्थिंग नहीं, मंजूर क्षमता से मेल नहीं)।
- अगर कमीशन हो गया पर सब्सिडी क्लेम नहीं हुई: बैंक विवरण खुद जमा करें। बहुत से लोग यह कदम भूल जाते हैं।
- अगर क्लेम किया पर करीब 30 दिन बाद भी पैसा नहीं आया: जांचें कि खाता चालू है, नाम बिजली बिल और आधार से मेल खाता है, और IFSC सही है। फिर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- अगर सोलर लोन लिया है: सेविंग खाता नहीं, लोन स्टेटमेंट देखें। SBI जैसे बैंक सब्सिडी लोन में ही जमा करवाते हैं।
उदाहरण: देरी की कीमत
सुनीता का 3 kW सिस्टम 6% के सोलर लोन से लगा है। उसकी ₹78,000 की सब्सिडी तीन महीने देर से लोन खाते में आती है। ₹78,000 पर तीन महीने का ब्याज 78,000 × 6% × 3 ÷ 12 = ₹1,170 है। सब्सिडी खत्म नहीं होती, लेकिन उसे करीब ₹1,170 ज्यादा ब्याज देना पड़ता है, और क्रेडिट लगने तक उसकी ईएमआई ज्यादा रहती है। पैसा आने पर बैंक से पूछें कि उसने ईएमआई घटाई या अवधि, और आंकड़े ईएमआई कैलकुलेटर में दोबारा जांचें।
आम समस्याएं और उनके हल
| समस्या | हल |
|---|---|
| वेंडर ने इंस्टॉलेशन विवरण अपलोड नहीं किए | समय-सीमा के साथ लिखित रिमाइंडर; वेंडर का नाम लेकर पोर्टल शिकायत |
| नेट मीटर नहीं लगा | बाकी हो तो मीटर शुल्क भरें; DISCOM सब-डिवीजन ऑफिस से फॉलो-अप |
| जांच में आपत्ति | वेंडर से ठीक करवाएं (यह उसकी जिम्मेदारी में आता है), फिर दोबारा जांच का अनुरोध |
| बिल, बैंक और आधार में नाम अलग | पहले बिजली कनेक्शन या बैंक में नाम ठीक करवाएं, फिर दोबारा जमा करें |
| बैंक खाता बंद पड़ा या IFSC गलत | खाता फिर चालू करें या विवरण अपडेट करें; देखें निष्क्रिय बैंक खाता फिर चालू करना |
| फिजिबिलिटी मंजूरी से पहले इंस्टॉलेशन, बिना रजिस्ट्रेशन वाला वेंडर, बिना DCR मॉड्यूल, या कनेक्शन पर पहले सोलर सब्सिडी ली हुई | ये आमतौर पर क्लेम को अपात्र बना देते हैं; रिजेक्शन की वजह लिखित में लें |
शिकायत कैसे करें
- पोर्टल शिकायत: pmsuryaghar.gov.in पर अपने लॉगिन से। शिकायत नंबर नोट करें।
- राष्ट्रीय हेल्पलाइन 15555।
- DISCOM: नेट मीटर और जांच में देरी के लिए रूफटॉप सोलर सेल या उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम।
- वेंडर: अपलोड में देरी और जांच की आपत्तियों के लिए, लिखित में।
- बैंक: अगर सब्सिडी बैंक तक पहुंची पर आपके लोन में जमा नहीं हुई, तो बैंक में शिकायत करें और 30 दिन बाद आरबीआई इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन के पास cms.rbi.org.in पर।
- CPGRAMS (pgportal.gov.in): ऊपर सब नाकाम हो जाए तो MNRE के नाम।
शिकायत का नमूना
आवेदन नंबर [नंबर], उपभोक्ता नंबर [नंबर], [kW] सिस्टम [तारीख] को [वेंडर] द्वारा लगाया गया। नेट मीटर [तारीख] को लगा और कमीशनिंग सर्टिफिकेट [तारीख] को जारी हुआ। बैंक विवरण [तारीख] को जमा किए गए। [तारीख] तक ₹[रकम] की सब्सिडी जमा नहीं हुई है। कृपया स्टेटस और देरी की वजह बताएं।
नकली एजेंट और वेबसाइट
सब्सिडी जारी करवाने की कोई फीस नहीं है। आपकी सब्सिडी "क्लियर" करवाने के लिए पैसे या ओटीपी मांगने वाले कॉलर और मिलती-जुलती वेबसाइटें धोखेबाज हैं। सिर्फ pmsuryaghar.gov.in का इस्तेमाल करें। पैसा गया हो तो cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या 1930 पर कॉल करें।
मुख्य बातें
- सब्सिडी इंस्टॉलेशन विवरण, नेट मीटर, DISCOM जांच और कमीशनिंग, और आपके बैंक-विवरण वाले क्लेम के बाद ही, इसी क्रम में, जारी होती है।
- पोर्टल का चरण बताता है कि किसके पीछे लगना है: वेंडर, DISCOM या बैंक।
- एक DISCOM प्रक्रिया क्लेम से जारी होने तक करीब 30 दिन बताती है; ज्यादातर देरी नेट मीटर और जांच में होती है।
- सोलर लोन लिया है तो सेविंग नहीं, लोन खाता देखें।
- पोर्टल, 15555, DISCOM और CPGRAMS से शिकायत करें; एजेंटों को कभी पैसे न दें। सभी विवरण अक्टूबर 2026 तक के हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इंस्टॉलेशन के बाद पीएम सूर्य घर सब्सिडी आने में कितना समय लगता है?
कोई एक राष्ट्रीय समय-सीमा नहीं है जिसे हर DISCOM मानता हो। एक DISCOM के प्रक्रिया दस्तावेज के मुताबिक बैंक विवरण के साथ सब्सिडी क्लेम जमा करने के 30 दिन के भीतर सब्सिडी जारी होती है, और ज्यादातर परिवार कमीशनिंग के कुछ हफ्तों बाद पैसा मिलने की बात कहते हैं। सबसे ज्यादा देरी नेट मीटर और जांच के चरण में होती है।
मेरी पीएम सूर्य घर सब्सिडी अब भी पेंडिंग क्यों है?
आम वजहें हैं: वेंडर ने इंस्टॉलेशन विवरण अपलोड नहीं किया, नेट मीटर नहीं लगा, DISCOM की जांच या कमीशनिंग सर्टिफिकेट बाकी है, बैंक विवरण जमा नहीं हुए या मेल नहीं खाते, या मॉड्यूल के DCR विवरण अधूरे हैं।
पीएम सूर्य घर हेल्पलाइन नंबर क्या है?
राष्ट्रीय हेल्पलाइन 15555 है। आप pmsuryaghar.gov.in पर अपने लॉगिन से शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं, और जांच या नेट मीटर में देरी के लिए अपने DISCOM के रूफटॉप सोलर सेल से संपर्क कर सकते हैं।
सोलर लोन लिया है तो सब्सिडी कहां जमा होती है?
अगर आपने SBI जैसे बैंक से सिस्टम के लिए लोन लिया है, तो सब्सिडी लोन खाते में ही जमा होनी चाहिए, इसलिए सेविंग खाते के बजाय लोन स्टेटमेंट देखें। क्लेम करते समय पोर्टल पर लोन खाते का विवरण दें।
क्या इंस्टॉलेशन के बाद सोलर सब्सिडी रिजेक्ट हो सकती है?
हां, अगर सिस्टम फिजिबिलिटी मंजूरी से पहले, बिना रजिस्ट्रेशन वाले वेंडर से, बिना DCR मॉड्यूल के, या ऐसे कनेक्शन पर लगा जिस पर पहले रूफटॉप सोलर सब्सिडी ली जा चुकी है। नाम की गड़बड़ी आमतौर पर ठीक हो जाती है, पर पात्रता की ये समस्याएं आमतौर पर नहीं।
क्या सब्सिडी जारी करवाने के लिए किसी को पैसे देने होते हैं?
नहीं। सब्सिडी सरकार सीधे आपके बैंक या लोन खाते में जारी करती है। सब्सिडी क्लियर करवाने के नाम पर फीस मांगने वाला योजना का हिस्सा नहीं है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।