घर के डाउन पेमेंट में गिफ्ट का पैसा: कौन-से रिकॉर्ड रखें
होम लोन के डाउन पेमेंट में परिवार से मिला गिफ्ट लगा रहे हैं? जानें कौन-से गिफ्ट टैक्स-फ्री हैं, बैंक क्या मांगते हैं और गिफ्ट लेटर व बैंक रिकॉर्ड कैसे रखें।

इस लेख में
आप घर के डाउन पेमेंट के लिए माता-पिता या दूसरे करीबी रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं, और यह आपके लिए टैक्सेबल नहीं है, लेकिन आपको दिखाना होगा कि पैसा कहां से आया। साइन किया गिफ्ट लेटर, देने वाले के बैंक स्टेटमेंट में डेबिट और आपके स्टेटमेंट में क्रेडिट संभालकर रखें, और सारा लेन-देन बैंक खातों से करें। लेंडर, रजिस्ट्रार और आयकर विभाग, सभी पैसों के स्रोत के बारे में पूछ सकते हैं, और ये रिकॉर्ड एक साथ सबका जवाब दे देते हैं।
नीचे दिए सभी नियम अक्टूबर 2026 की स्थिति के अनुसार हैं।
पैसों का स्रोत क्यों मायने रखता है
डाउन पेमेंट संपत्ति की लागत का वह हिस्सा है जिसे लेंडर फंड नहीं करता। आरबीआई ने व्यक्तिगत होम लोन के लिए लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो की सीमा तय की है: ₹30 लाख तक के लोन पर 90%, ₹30 लाख से ज्यादा और ₹75 लाख तक पर 80%, और ₹75 लाख से ऊपर 75%। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन भी आमतौर पर फंड नहीं होते (लेंडर इन्हें सिर्फ कम कीमत वाले घरों में शामिल कर सकते हैं)। इसलिए आपको अपनी तरफ से बड़ा योगदान चाहिए, और लेंडर इसकी जांच करते हैं।
एक ही पैसे को तीन अलग पक्ष देख सकते हैं:
| कौन पूछता है | वे क्या जानना चाहते हैं | आम सबूत |
|---|---|---|
| होम लोन लेंडर | क्या अपना योगदान असली है और कोई छुपा लोन तो नहीं? | गिफ्ट लेटर, देने वाले का बैंक स्टेटमेंट, आपकी क्रेडिट एंट्री, बिल्डर या विक्रेता की रसीदें |
| आयकर विभाग | क्या गिफ्ट टैक्सेबल है, और क्या देने वाले के पैसे का हिसाब है? | रिश्ता, बैंक ट्रेल, AIS में दिखने वाली एंट्री |
| विक्रेता या बिल्डर | क्या भुगतान ट्रेस होने वाले खाते से आया? | रसीदों पर चेक या ट्रांसफर का ब्योरा |
बड़ी कीमत की संपत्ति खरीद की जानकारी स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के जरिए आयकर विभाग तक पहुंचती है, और यह एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में दिखती है। साफ कागजी ट्रेल होने पर आपको बाद में इसे दोबारा जोड़ना नहीं पड़ता।
क्या गिफ्ट टैक्सेबल है?
आयकर अधिनियम, 2025 के तहत, जो टैक्स वर्ष 2026-27 से लागू है, बिना किसी बदले (consideration) के मिला पैसा तभी आपकी आय माना जाता है जब वह गैर-रिश्तेदारों से आए और साल में उनसे मिली कुल रकम ₹50,000 से ज्यादा हो; तब पूरी रकम टैक्सेबल होती है। यह धारा 92(2)(m) (पुरानी धारा 56(2)(x)) में है। रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट किसी भी रकम पर टैक्स-फ्री है।
रिश्तेदारों में आपके पति या पत्नी, आपके भाई-बहन, आपके जीवनसाथी के भाई-बहन, माता या पिता के भाई-बहन, आपके और आपके जीवनसाथी के पूर्वज और वंशज (माता-पिता, दादा-दादी, बच्चे), और इन सबके पति या पत्नी आते हैं। कज़िन, भतीजे-भांजे, भतीजी-भांजी और दोस्त रिश्तेदार नहीं हैं। पूरी सूची और उदाहरण हमारी गाइड गिफ्ट पर टैक्स में हैं।
एक और बात: अगर पति या पत्नी आपको पैसा गिफ्ट करते हैं, तो घर आपका है, लेकिन उससे होने वाला किराया जीवनसाथी की आय में जोड़ा (क्लब) जा सकता है (2025 अधिनियम की धारा 99, पुरानी धारा 64)। इसका असर भविष्य की किराये की आय पर है, गिफ्ट पर नहीं।
कौन-से रिकॉर्ड रखें, स्टेप बाय स्टेप
1. गिफ्ट लेटर या गिफ्ट डीड
पैसों के लिए साइन किया लेटर या स्टांप पेपर पर डीड आम सबूत है। इसमें लिखा हो:
- देने वाले और लेने वाले के नाम, पते और पैन
- रिश्ता (जैसे "पिता")
- रकम, तारीख और तरीका (बैंक ट्रांसफर, चेक नंबर या UTR)
- कि यह गिफ्ट है, कोई वापसी अपेक्षित नहीं और कोई बदला नहीं
- मकसद, अगर लेंडर चाहे (जैसे किसी खास फ्लैट की खरीद के लिए)
- देने वाले और दो गवाहों के साइन
कई लेंडर्स का अपना गिफ्ट डिक्लेरेशन फॉर्मेट होता है; इसे जल्दी मांग लें और उन्हीं का इस्तेमाल करें। पैसों की गिफ्ट डीड पर स्टांप ड्यूटी आपके राज्य पर निर्भर है।
2. देने वाले का बैंक ट्रेल
ट्रांसफर वाले महीने का देने वाले का बैंक स्टेटमेंट रखें, जिसमें डेबिट दिखे। अगर देने वाले ने गिफ्ट के लिए एफडी, म्यूचुअल फंड या कोई और निवेश भुनाया, तो उसका रिडेम्प्शन स्टेटमेंट भी रखें। इससे पता चलता है कि पैसा देने वाले का अपना था, उधार का नहीं।
3. आपका बैंक ट्रेल
आपके स्टेटमेंट में देने वाले के खाते से क्रेडिट और फिर बिल्डर या विक्रेता को भुगतान दिखना चाहिए। पैसे को कई खातों से घुमाने से बचें; एक सीधा ट्रांसफर समझाना सबसे आसान है।
4. बिल्डर या विक्रेता की रसीदें
हर भुगतान की रसीद होनी चाहिए, जिसमें रकम, तारीख, चेक या UTR नंबर और भुगतान करने वाला खाता हो। लेंडर अक्सर डिस्बर्स करने से पहले अपने योगदान की रसीदें मांगते हैं।
5. रिश्ते का सबूत, अगर मांगा जाए
राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट या रिश्ता दिखाने वाला कोई और दस्तावेज मददगार हो सकता है, खासकर दादा-दादी, चाचा-मामा या ससुराल वालों से मिले गिफ्ट के लिए।
6. विदेश में रहने वाले रिश्तेदार से गिफ्ट
अगर देने वाला रिश्तेदार है, तो एनआरआई रिश्तेदार से मिले गिफ्ट पर आयकर के नियम वही रहते हैं। अपने बैंक से इनवर्ड रेमिटेंस एडवाइस रखें, और अगर पैसा भारत में NRE या NRO खाते से आया है, तो देने वाले का खाता स्टेटमेंट रखें।
उदाहरण (सांकेतिक)
आप ₹60 लाख की एग्रीमेंट वैल्यू वाला फ्लैट खरीद रहे हैं।
- 80% LTV पर अधिकतम लोन (₹30 लाख से ज्यादा और ₹75 लाख तक का लोन): ₹48,00,000
- कीमत में अपना योगदान: ₹60,00,000 − ₹48,00,000 = ₹12,00,000
- स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन, मान लें आपके राज्य में 7%: ₹4,20,000
- आपको कुल नकद चाहिए: ₹16,20,000
आप इसका इंतजाम कैसे करते हैं:
| स्रोत | रकम | टैक्स स्थिति | रिकॉर्ड |
|---|---|---|---|
| आपकी बचत | ₹7,00,000 | आय नहीं | आपके स्टेटमेंट |
| पिता से गिफ्ट | ₹6,00,000 | टैक्स-फ्री (रिश्तेदार) | गिफ्ट लेटर, पिता का स्टेटमेंट |
| पिता के भाई से गिफ्ट | ₹2,00,000 | टैक्स-फ्री (सगे चाचा रिश्तेदार हैं) | गिफ्ट लेटर, चाचा का स्टेटमेंट |
| करीबी दोस्त से | ₹1,20,000 | गिफ्ट माना गया तो पूरा टैक्सेबल, क्योंकि ₹50,000 से ज्यादा | लिखित लोन बेहतर |
| कुल | ₹16,20,000 |
अगर दोस्त के ₹1,20,000 गिफ्ट होते, तो वे आपकी आय में जुड़कर आपके स्लैब रेट पर टैक्स होते। लोन के रूप में लिखित होने पर यह आय नहीं है, लेकिन आपको इसे चुकाना होगा, और आपका लेंडर इसे आपकी मासिक देनदारियों में गिन सकता है। आप कितना लोन ले सकते हैं, यह लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर से और ₹48 लाख की ईएमआई हमारे ईएमआई कैलकुलेटर से जांचें।
आम गलतियां जो होम लोन में देरी कराती हैं
- नकद गिफ्ट। एक व्यक्ति से एक दिन में, या एक लेन-देन या मौके के लिए ₹2 लाख या ज्यादा नकद लेना कैश-रिसीट नियम (पुरानी धारा 269ST) के तहत मना है। बड़ी नकद जमा का हिसाब लेंडर को समझाना भी मुश्किल होता है।
- "गिफ्ट" जो असल में लोन है। अगर आपने लौटाने का वादा किया है, तो इसे गिफ्ट बताना लेंडर के सामने आपकी वित्तीय स्थिति को गलत दिखाता है। ईमानदार रहें; बताया गया पारिवारिक लोन विवादित गिफ्ट से बेहतर है।
- आखिरी समय के ट्रांसफर। डिस्बर्समेंट से एक दिन पहले आया पैसा सवाल खड़े करता है। इसे पहले ही ट्रांसफर करें और एक ही खाते में रखें।
- पैन की जानकारी न होना। गिफ्ट लेटर में पैन लिखें; इससे ट्रेल जुड़ती है।
- लेंडर को बताए बिना रिश्तेदार के खाते से सीधे बिल्डर को भुगतान। यह चल सकता है, लेकिन रसीद रिश्तेदार के नाम बनेगी। पहले लेंडर से पूछें कि वह भुगतान किस रास्ते से चाहता है।
बड़ी योजना में गिफ्ट की जगह
गिफ्ट से उधार की रकम घटती है, जिससे ईएमआई और ब्याज कम होते हैं। लेकिन खरीद की बाकी लागतों, जैसे मेंटेनेंस डिपॉजिट, इंटीरियर और शिफ्टिंग, के लिए भी योजना बनाएं; देखें फ्लैट खरीदने की छुपी लागतें। अगर देने वाला सह-मालिक या सह-कर्जदार भी बनना चाहता है, तो यह अलग व्यवस्था है जिसके अपने टैक्स और देनदारी के असर हैं; देखें जॉइंट होम लोन। अपना हिस्सा जमा करने के लिए देखें घर के डाउन पेमेंट का फंड।
मुख्य बातें
- आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 92(2)(m) (पुरानी धारा 56(2)(x)) के तहत रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट किसी भी रकम पर टैक्स-फ्री हैं; गैर-रिश्तेदारों से साल में कुल ₹50,000 से ज्यादा पूरी तरह टैक्सेबल है।
- पैन और रिश्ते वाला साइन किया गिफ्ट लेटर, देने वाले का बैंक डेबिट, आपका क्रेडिट और विक्रेता की रसीदें रखें।
- गिफ्ट बैंक खातों से भेजें; एक व्यक्ति से ₹2 लाख या ज्यादा नकद से बचें।
- अपने लेंडर का गिफ्ट डिक्लेरेशन फॉर्मेट इस्तेमाल करें और पैसा डिस्बर्समेंट से काफी पहले ट्रांसफर करें।
- दोस्तों की मदद को लोन के रूप में लिखित करना बेहतर है, जिसे लेंडर एलिजिबिलिटी में गिनेगा।
संबंधित गाइड: भारत में गिफ्ट पर टैक्स, घर के डाउन पेमेंट का फंड, होम लोन एलिजिबिलिटी और दस्तावेज।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या माता-पिता से गिफ्ट में मिला पैसा होम लोन के डाउन पेमेंट में लगा सकते हैं?
हां। ज्यादातर मामलों में लेंडर परिवार से मिले गिफ्ट को आपका अपना योगदान मान लेते हैं, बशर्ते पैसे का स्रोत ट्रेस हो सके। गिफ्ट लेटर या डिक्लेरेशन, देने वाले का बैंक स्टेटमेंट और आपके खाते या विक्रेता को हुआ ट्रांसफर दिखाना पड़ सकता है।
क्या माता-पिता से मिला गिफ्ट टैक्सेबल है?
नहीं। आयकर कानून में परिभाषित रिश्तेदारों, जैसे माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी और पति या पत्नी से मिला गिफ्ट किसी भी रकम पर टैक्स-फ्री है। अक्टूबर 2026 की स्थिति में यह नियम आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 92(2)(m) (पुरानी धारा 56(2)(x)) में है।
क्या पैसों के गिफ्ट के लिए रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड जरूरी है?
पैसों के लिए आमतौर पर रजिस्टर्ड डीड जरूरी नहीं, लेकिन साइन किया गिफ्ट लेटर या स्टांप पेपर पर गिफ्ट डीड अच्छा सबूत है। पैसों की गिफ्ट डीड पर स्टांप ड्यूटी आपके राज्य पर निर्भर है, इसलिए स्थानीय नियम जांचें। इसके उलट, अचल संपत्ति का गिफ्ट रजिस्टर्ड डीड से ही होना चाहिए।
क्या माता-पिता डाउन पेमेंट नकद में दे सकते हैं?
इससे बचें। एक व्यक्ति से एक दिन में, या एक लेन-देन या एक मौके के लिए ₹2 लाख या ज्यादा नकद लेना कैश-रिसीट नियम (पुरानी धारा 269ST) के तहत मना है, और उतनी ही रकम का जुर्माना लगता है। बैंक ट्रांसफर से पैसा आपके लेंडर के लिए भी ट्रेस करने लायक रहता है।
अगर कोई दोस्त डाउन पेमेंट के लिए पैसे दे तो?
दोस्त रिश्तेदार नहीं है, इसलिए एक टैक्स वर्ष में गैर-रिश्तेदारों से मिले गिफ्ट कुल ₹50,000 से ज्यादा हों तो पूरी रकम आपके हाथ में टैक्सेबल है। अगर दोस्त मदद कर रहा है, तो चुकाने की शर्तों के साथ लिखित लोन ज्यादा सही हो सकता है, और आपका लेंडर उसकी किस्तों को आपकी देनदारियों में गिनेगा।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।