होम लोन टैक्स बेनिफिट कैलकुलेशन: दोनों व्यवस्थाओं में
वित्त वर्ष 2026-27 में होम लोन टैक्स बेनिफिट कैसे गिनें: ₹2 लाख और ₹1.5 लाख की सीमा, स्लैब के हिसाब से टैक्स बचत, दोनों व्यवस्थाओं और जॉइंट लोन की तुलना।

इस लेख में
होम लोन टैक्स बेनिफिट निकालने के लिए ब्याज को ₹2 लाख पर सीमित करें (सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर, पुराना Section 24(b), अब Section 22), ईपीएफ और दूसरी मदों के बाद मूलधन को ₹1.5 लाख की सीमा (पुराना Section 80C, अब Section 123) में फिट करें, फिर इन डिडक्शन के साथ और बिना पुरानी व्यवस्था का टैक्स निकालें। आखिर में इसकी तुलना नई व्यवस्था के टैक्स से करें, जिसमें सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर पर दोनों में से कोई डिडक्शन नहीं मिलता। आंकड़े अक्टूबर 2026, वित्त वर्ष 2026-27 के अनुसार हैं।
स्टेप बाय स्टेप तरीका
- आंकड़े जुटाएं। लेंडर के फाइनल होम लोन इंटरेस्ट सर्टिफिकेट से 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का ब्याज और मूलधन लिखें। अगर पिछले पांच साल में पजेशन मिला है, तो निर्माण से पहले के ब्याज का पांचवां हिस्सा भी जोड़ें।
- ब्याज की सीमा लगाएं। सेल्फ-ऑक्यूपाइड: ₹2,00,000 तक (₹30,000 अगर लोन लेने वाले साल के अंत से पांच साल में घर पूरा नहीं हुआ, या लोन सिर्फ मरम्मत के लिए है)। किराए पर दिया घर: किराए के सामने पूरा ब्याज।
- मूलधन फिट करें। मूलधन, स्टांप ड्यूटी (जिस साल चुकाई), ईपीएफ, पीपीएफ, लाइफ इंश्योरेंस, ईएलएसएस और ट्यूशन फीस जोड़ें। कुल में से सिर्फ ₹1,50,000 गिने जाते हैं।
- पुरानी व्यवस्था का टैक्स दो बार निकालें: होम लोन डिडक्शन के साथ और उनके बिना। अंतर ही वह रकम है जो लोन आपको बचाता है।
- नई व्यवस्था का टैक्स निकालें (सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर पर कोई होम लोन डिडक्शन नहीं)।
- कम वाला चुनें: लोन के साथ पुरानी व्यवस्था या नई व्यवस्था।
इस्तेमाल किए गए टैक्स नियम
| पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था | |
|---|---|---|
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | ₹50,000 | ₹75,000 |
| स्लैब | 0-2.5 लाख शून्य; 2.5-5 लाख 5%; 5-10 लाख 20%; 10 लाख से ऊपर 30% | 0-4 लाख शून्य; 4-8 लाख 5%; 8-12 लाख 10%; 12-16 लाख 15%; 16-20 लाख 20%; 20-24 लाख 25%; 24 लाख से ऊपर 30% |
| रिबेट | ₹12,500 तक, टैक्सेबल आय ₹5 लाख तक | ₹60,000 तक, टैक्सेबल आय ₹12 लाख तक |
| सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर का ब्याज (Section 22) | ₹2 लाख तक | नहीं मिलता |
| मूलधन (Section 123) | ₹1.5 लाख के अंदर | नहीं मिलता |
| हेल्थ और एजुकेशन सेस | 4% | 4% |
स्लैब के हिसाब से जल्दी अनुमान
अगर पूरा डिडक्शन एक ही स्लैब के अंदर रहता है, तो बचत = डिडक्शन × स्लैब दर × 1.04।
| पुरानी व्यवस्था का स्लैब | हर ₹1 लाख डिडक्शन पर बचत | पूरे ₹3.5 लाख पर बचत |
|---|---|---|
| 5% | ₹5,200 | ₹18,200 |
| 20% | ₹20,800 | ₹72,800 |
| 30% | ₹31,200 | ₹1,09,200 |
ये अधिकतम आंकड़े हैं। ₹50 लाख से ज्यादा आय पर सरचार्ज से थोड़ा और फायदा होता है; दूसरी तरफ, पुरानी व्यवस्था की रिबेट ₹5 लाख तक की टैक्सेबल आय को पहले ही टैक्स-फ्री कर देती है, इसलिए उससे नीचे के डिडक्शन से कुछ नहीं बचता।
उदाहरण 1: ₹18 लाख सैलरी
अनिल की ग्रॉस सैलरी ₹18,00,000 है। उसका ईपीएफ योगदान ₹60,000 है। वित्त वर्ष 2026-27 में वह अपने सेल्फ-ऑक्यूपाइड फ्लैट पर ₹2,40,000 ब्याज और ₹1,10,000 मूलधन चुकाता है।
स्टेप 2-3: सीमाएं
- मान्य ब्याज: ₹2,00,000 (₹40,000 का नुकसान)
- Section 123: ₹60,000 + ₹1,10,000 = ₹1,70,000, सीमा ₹1,50,000। यानी मूलधन का सिर्फ ₹90,000 गिना जाता है।
स्टेप 4: लोन के साथ पुरानी व्यवस्था
टैक्सेबल आय: ₹18,00,000 − ₹50,000 − ₹2,00,000 − ₹1,50,000 = ₹14,00,000।
टैक्स: ₹12,500 + ₹1,00,000 + ₹4,00,000 का 30% (₹1,20,000) = ₹2,32,500। 4% सेस के साथ: ₹2,41,800।
लोन के बिना पुरानी व्यवस्था
टैक्सेबल आय: ₹18,00,000 − ₹50,000 − ₹60,000 = ₹16,90,000।
टैक्स: ₹12,500 + ₹1,00,000 + ₹6,90,000 का 30% (₹2,07,000) = ₹3,19,500। सेस के साथ: ₹3,32,280।
पुरानी व्यवस्था में होम लोन से बचत: ₹3,32,280 − ₹2,41,800 = ₹90,480। यह शॉर्टकट से मेल खाता है: ₹2,90,000 × 31.2%।
स्टेप 5: नई व्यवस्था
टैक्सेबल आय: ₹18,00,000 − ₹75,000 = ₹17,25,000।
टैक्स: ₹20,000 + ₹40,000 + ₹60,000 + ₹1,25,000 का 20% (₹25,000) = ₹1,45,000। सेस के साथ: ₹1,50,800।
स्टेप 6: चुनाव। होम लोन के साथ भी नई व्यवस्था पुरानी से ₹91,000 सस्ती है। लोन पुरानी व्यवस्था में असली टैक्स बचाता है, लेकिन इतना नहीं कि नए स्लैब को हरा सके। अनिल के लिए पुरानी व्यवस्था तभी जीतेगी जब एचआरए जैसे बड़े अतिरिक्त डिडक्शन हों। हमारी होम लोन और एचआरए एक साथ वाली गाइड ऐसा मामला दिखाती है जहां दोनों का मेल पलड़ा पलट देता है।
उदाहरण 2: जब डिडक्शन स्लैब पार कर जाए
पूजा ₹12,00,000 कमाती है, ₹60,000 ईपीएफ, ₹2,00,000 ब्याज और ₹90,000 मूलधन के साथ।
- लोन के बिना पुरानी व्यवस्था: ₹12,00,000 − ₹50,000 − ₹60,000 = ₹10,90,000। टैक्स: ₹12,500 + ₹1,00,000 + ₹27,000 = ₹1,39,500; सेस के साथ ₹1,45,080।
- लोन के साथ पुरानी व्यवस्था: ₹10,90,000 − ₹2,90,000 = ₹8,00,000। टैक्स: ₹12,500 + ₹3,00,000 का 20% (₹60,000) = ₹72,500; सेस के साथ ₹75,400।
बचत: ₹69,680, न कि ₹90,480 जो सीधे 31.2% से निकलता। डिडक्शन के सिर्फ ₹90,000 ने 30% पर टैक्स बचाया; बाकी ₹2,00,000 ने 20% पर।
नई व्यवस्था: ₹12,00,000 − ₹75,000 = ₹11,25,000, जो ₹12 लाख से कम है, इसलिए रिबेट से टैक्स शून्य हो जाता है। पूजा के लिए नई व्यवस्था साफ तौर पर बेहतर है।
उदाहरण 3: जॉइंट लोन
पति-पत्नी, दोनों ₹18,00,000 कमाते हैं और ₹60,000 ईपीएफ देते हैं, अपने फ्लैट के 50:50 सह-मालिक और को-बॉरोअर हैं। साल का ब्याज ₹4,80,000 और मूलधन ₹2,20,000 है।
| एक ही व्यक्ति सब क्लेम करे | दोनों 50:50 क्लेम करें | |
|---|---|---|
| क्लेम किया गया ब्याज | ₹2,00,000 (₹2,80,000 का नुकसान) | हर एक ₹2,00,000 (हर एक का ₹40,000 नुकसान) |
| Section 123 में फिट होने वाला मूलधन | ₹90,000 | हर एक ₹90,000 |
| पुरानी व्यवस्था में बचत | ₹90,480 | हर एक ₹90,480 = ₹1,80,960 |
बांटने से पुरानी व्यवस्था का फायदा दोगुना हो जाता है। फिर भी दोनों को अलग-अलग जांचना होगा कि उनके लिए नई व्यवस्था सस्ती है या नहीं; टैक्स व्यवस्था हर व्यक्ति अलग चुनता है। दोनों को सह-मालिक और को-बॉरोअर होना चाहिए, और हर एक को ईएमआई का अपना हिस्सा अपने खाते से देना चाहिए।
हिसाब की आम गलतियां
- पूरी ईएमआई गिनना। सिर्फ ब्याज और मूलधन वाले हिस्से गिने जाते हैं, और दोनों की अपनी सीमा है। ₹4 लाख की कुल ईएमआई का मतलब ₹4 लाख का डिडक्शन नहीं है।
- ईपीएफ को भूल जाना। कर्मचारी का ईपीएफ योगदान उसी ₹1.5 लाख की Section 123 सीमा में आता है, इसलिए मूलधन अक्सर उम्मीद से कम जुड़ता है। पूरे ₹1.5 लाख खाली मानने से पहले अपनी सैलरी स्लिप देखें।
- प्रोविजनल सर्टिफिकेट इस्तेमाल करना। साल के दौरान प्रीपेमेंट या दर बदलने से फाइनल ब्याज का आंकड़ा बदल जाता है। रिटर्न भरते समय फाइनल सर्टिफिकेट इस्तेमाल करें।
- पजेशन से पहले क्लेम करना। निर्माण के दौरान का ब्याज पांच किस्तों में टल जाता है, और पजेशन से पहले चुकाया गया मूलधन कभी नहीं गिना जाता।
- गलत आंकड़ों की तुलना। सवाल यह नहीं कि पुरानी व्यवस्था में होम लोन कितना बचाता है, बल्कि यह है कि सभी डिडक्शन के साथ पुरानी व्यवस्था का टैक्स नई व्यवस्था से कम है या नहीं। उदाहरण 1 में ₹90,480 की बचत के बावजूद नई व्यवस्था जीतती है।
नतीजा आपको क्या बताता है
- कम और मध्यम आय: नई व्यवस्था की ₹12 लाख वाली रिबेट और कम स्लैब पूरा होम लोन क्लेम करने पर भी अक्सर पुरानी व्यवस्था को हरा देते हैं।
- एचआरए और होम लोन वाली ऊंची आय: पुरानी व्यवस्था अब भी जीत सकती है, क्योंकि डिडक्शन मिलाकर कई लाख हो जाते हैं।
- ब्रेक-ईवन हर व्यक्ति का अलग है। उदाहरण के लिए, ₹25 लाख सैलरी पर नई व्यवस्था के बराबर आने के लिए पुरानी व्यवस्था में ₹50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के अलावा करीब ₹8 लाख के डिडक्शन चाहिए। अपना ब्रेक-ईवन निकालने का तरीका हमारी नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था वाली गाइड में है।
हमारे इनकम टैक्स कैलकुलेटर में अपने आंकड़े डालें, और सीमाओं के पीछे के हर नियम के लिए होम लोन टैक्स बेनिफिट वाली मुख्य गाइड देखें।
मुख्य बातें
- ब्याज को ₹2 लाख (सेल्फ-ऑक्यूपाइड) पर सीमित करें और मूलधन को Section 123 की ₹1.5 लाख की बची सीमा में फिट करें।
- लोन के साथ और बिना पुरानी व्यवस्था का टैक्स निकालें; अंतर ही आपकी असली बचत है।
- स्लैब वाला शॉर्टकट (डिडक्शन × दर × 1.04) तभी काम करता है जब आय एक ही स्लैब में रहे।
- उदाहरणों में लोन ने ₹18 लाख पर ₹90,480 और ₹12 लाख पर ₹69,680 बचाए, फिर भी दोनों बार नई व्यवस्था सस्ती रही।
- जॉइंट को-बॉरोअर को अलग-अलग सीमा मिलती है, जिससे पुरानी व्यवस्था की बचत दोगुनी हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अपने होम लोन पर टैक्स बेनिफिट कैसे कैलकुलेट करें?
लेंडर के सर्टिफिकेट से ब्याज और मूलधन लें, सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर के लिए ब्याज को ₹2 लाख पर सीमित करें और मूलधन को अपनी दूसरी मदों के साथ Section 123 की ₹1.5 लाख की सीमा में फिट करें। फिर इन डिडक्शन के साथ और इनके बिना पुरानी व्यवस्था का टैक्स निकालें; दोनों का अंतर ही आपकी बचत है।
30% स्लैब में होम लोन से कितना टैक्स बच सकता है?
अगर पूरे ₹2 लाख ब्याज और ₹1.5 लाख मूलधन की छूट मिलती है और आय 30% स्लैब में ही रहती है, तो 4% सेस मिलाकर बचत ₹3.5 लाख × 31.2% = ₹1,09,200 सालाना होती है। ज्यादातर लोगों की बचत इससे कम होती है, क्योंकि ईपीएफ पहले ही ₹1.5 लाख की सीमा का कुछ हिस्सा ले लेता है।
क्या डिडक्शन को सीधे अपनी टैक्स दर से गुणा कर सकते हैं?
सिर्फ तब, जब डिडक्शन के बाद भी आपकी टैक्सेबल आय उसी स्लैब में रहे। अगर डिडक्शन से आय नीचे के स्लैब में आ जाती है, तो उसका कुछ हिस्सा कम दर पर टैक्स बचाता है, इसलिए दोनों तरीकों से टैक्स निकालें।
क्या नई व्यवस्था में होम लोन से टैक्स बचता है?
सेल्फ-ऑक्यूपाइड घर पर नहीं। नई व्यवस्था में किराए पर दिए घर का ब्याज उस प्रॉपर्टी के किराए को शून्य तक घटा सकता है, लेकिन कोई लॉस सैलरी से सेट-ऑफ या आगे कैरी फॉरवर्ड नहीं हो सकता।
क्या जॉइंट लोन में होम लोन टैक्स बेनिफिट दोगुना हो जाता है?
हो सकता है। पुरानी व्यवस्था में हर सह-मालिक जो को-बॉरोअर भी है और ईएमआई देता है, उसे ₹2 लाख की अपनी ब्याज सीमा और ₹1.5 लाख की अपनी Section 123 सीमा मिलती है, इसलिए पति-पत्नी मिलकर ₹7 लाख तक क्लेम कर सकते हैं।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।