धारा 87A रिबेट 2026-27: नई और पुरानी टैक्स व्यवस्था
2026-27 के लिए धारा 87A रिबेट (अब धारा 156): नई व्यवस्था में ₹60,000, पुरानी में ₹12,500, मार्जिनल रिलीफ, और कैपिटल गेन पर टैक्स क्यों लगता है।

इस लेख में
- रिबेट कैसे काम करता है
- नई बनाम पुरानी व्यवस्था में रिबेट (अक्टूबर 2026 की स्थिति)
- किसे यह नहीं मिलता
- ₹12 लाख से ऊपर मार्जिनल रिलीफ (सिर्फ नई व्यवस्था)
- स्पेशल रेट वाली आय: वह हिस्सा जो ज्यादातर लोग भूल जाते हैं
- उदाहरण से समझें (टैक्स वर्ष 2026-27, सिर्फ समझाने के लिए)
- रिबेट का सही फायदा उठाने के आसान तरीके
- मुख्य बातें
धारा 87A रिबेट एक टैक्स क्रेडिट है जो कम और मध्यम आय वालों का स्लैब टैक्स खत्म कर देता है। अक्टूबर 2026 की स्थिति में, नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की कुल आय वाले रेजिडेंट व्यक्ति को ₹60,000 तक का रिबेट मिलता है, और पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख तक की आय पर ₹12,500 तक। 1 अप्रैल 2026 से यह रिबेट इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 156 में है। पेच यह है कि नई व्यवस्था में यह सिर्फ स्लैब रेट वाली आय के टैक्स को कवर करता है, इसलिए स्पेशल रेट पर टैक्स होने वाले कैपिटल गेन पर ₹12 लाख से कम आय में भी टैक्स भरना पड़ सकता है।
वित्त वर्ष 2026-27 के इनकम टैक्स स्लैब वाले हमारे लेख में पूरी रेट टेबल है। यह लेख सिर्फ रिबेट के बारे में है: किसे मिलता है, यह क्या कवर करता है, और लोग कहां गलती करते हैं।
रिबेट कैसे काम करता है
रिबेट टैक्स कैलकुलेट होने के बाद लगाया जाता है, आय से कटौती के तौर पर नहीं। क्रम यह है:
- कुल आय निकालें, जिसमें कैपिटल गेन और स्पेशल रेट वाली दूसरी आय भी शामिल हो।
- जांचें कि कुल आय सीमा के अंदर है: ₹12 लाख (नई व्यवस्था) या ₹5 लाख (पुरानी व्यवस्था)।
- उस आय पर टैक्स कैलकुलेट करें।
- सीमा तक रिबेट घटाएं, लेकिन उस टैक्स से ज्यादा नहीं जिसे रिबेट कवर कर सकता है।
- जो बचे उस पर 4% हेल्थ और एजुकेशन सेस जोड़ें।
अगर नई व्यवस्था में स्लैब आय पर टैक्स ₹45,000 है, तो रिबेट ₹45,000 होगा, ₹60,000 नहीं। सीमा एक ऊपरी हद है, कोई तय रकम नहीं।
नई बनाम पुरानी व्यवस्था में रिबेट (अक्टूबर 2026 की स्थिति)
| फीचर | नई व्यवस्था (धारा 202, पुरानी 115BAC) | पुरानी व्यवस्था |
|---|---|---|
| आय सीमा | ₹12 लाख तक की कुल आय | ₹5 लाख तक की कुल आय |
| अधिकतम रिबेट | ₹60,000 | ₹12,500 |
| सैलरी के हिसाब से | करीब ₹12.75 लाख सैलरी (₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद) | दूसरी कटौतियों से पहले करीब ₹5.5 लाख सैलरी (₹50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद) |
| सीमा से थोड़ा ऊपर मार्जिनल रिलीफ | हां | नहीं |
| इक्विटी STCG के टैक्स को कवर करता है (पुरानी धारा 111A, अब धारा 196) | नहीं | हां |
| इक्विटी LTCG के टैक्स को कवर करता है (पुरानी धारा 112A, अब धारा 198) | नहीं | नहीं |
| कौन क्लेम कर सकता है | सिर्फ रेजिडेंट व्यक्ति | सिर्फ रेजिडेंट व्यक्ति |
₹60,000 का आंकड़ा ठीक ₹12 लाख पर बनने वाला स्लैब टैक्स है: ₹20,000 (₹4-8 लाख पर 5%) और ₹40,000 (₹8-12 लाख पर 10%)। इसीलिए ₹12 लाख की टैक्सेबल आय पर टैक्स शून्य आता है। पुरानी व्यवस्था में बड़ी कटौतियों के साथ ₹5 लाख की सीमा कटौतियों के बाद की आय पर जांची जाती है, इसलिए ₹5.5 लाख से काफी ज्यादा ग्रॉस सैलरी वाले भी इसके हकदार हो सकते हैं।
किसे यह नहीं मिलता
- नॉन-रेजिडेंट, चाहे उनकी आय कितनी भी हो
- एचयूएफ, फर्म और कंपनियां: रिबेट सिर्फ व्यक्तियों के लिए है
- जिसकी कुल आय सीमा से ज्यादा हो, चाहे ₹1 से ही, जब तक नई व्यवस्था में मार्जिनल रिलीफ लागू न हो
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₹12 लाख से ऊपर मार्जिनल रिलीफ (सिर्फ नई व्यवस्था)
राहत के बिना ₹12,10,000 की आय पर ₹61,500 टैक्स बनता, जो अतिरिक्त कमाए ₹10,000 से भी ज्यादा है। मार्जिनल रिलीफ टैक्स को उतनी रकम तक सीमित कर देता है जितनी आय ₹12 लाख से ज्यादा है।
यह राहत करीब ₹12,70,588 की टैक्सेबल आय पर खत्म हो जाती है, जहां सामान्य स्लैब टैक्स (₹60,000 + अतिरिक्त आय का 15%) अतिरिक्त आय के बराबर हो जाता है। सैलरी वालों के लिए यह करीब ₹13.46 लाख सैलरी है। पुरानी व्यवस्था में ऐसा कुछ नहीं है: ₹5,10,000 पर आपको पूरा स्लैब टैक्स ₹14,500 और सेस देना होगा।
स्पेशल रेट वाली आय: वह हिस्सा जो ज्यादातर लोग भूल जाते हैं
फाइनेंस एक्ट, 2025 ने वित्त वर्ष 2025-26 से नई व्यवस्था के रिबेट पर एक शर्त जोड़ी: यह स्लैब रेट पर कैलकुलेट किए गए टैक्स से ज्यादा नहीं हो सकता। इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 156 में यह शर्त जारी है। इससे पहले इस पर मुकदमे चले थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक पुराने साल के लिए शॉर्ट-टर्म इक्विटी गेन पर रिबेट की इजाजत दी थी, और 2026 के एक ट्रिब्यूनल फैसले ने इस पाबंदी को सिर्फ वित्त वर्ष 2025-26 से लागू माना। अक्टूबर 2026 की स्थिति में, टैक्स वर्ष 2026-27 के लिए यह पाबंदी कानून में है।
स्पेशल रेट पर टैक्स होने वाली आय में ये शामिल हैं:
- लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी फंड पर शॉर्ट-टर्म गेन (20%)
- लिस्टेड इक्विटी और इक्विटी फंड पर साल में ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन (12.5%)
- दूसरे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन, जैसे प्रॉपर्टी या सोने पर (12.5%)
- लॉटरी, गेम शो और ऑनलाइन गेमिंग की जीत (30%)
- क्रिप्टो और दूसरे वर्चुअल डिजिटल एसेट पर गेन (30%)
ये सभी ₹12 लाख की सीमा में गिने जाते हैं, लेकिन इन पर लगने वाला टैक्स रिबेट में कवर नहीं होता। रेट समझने के लिए म्यूचुअल फंड पर कैपिटल गेन टैक्स पर हमारी गाइड देखें।
उदाहरण से समझें (टैक्स वर्ष 2026-27, सिर्फ समझाने के लिए)
उदाहरण 1: सिर्फ सैलरी
नेहा की सैलरी ₹12,75,000 है। ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹12,00,000 है। स्लैब टैक्स ₹60,000 है, रिबेट ₹60,000 है, और टैक्स शून्य है।
उदाहरण 2: सैलरी और शॉर्ट-टर्म इक्विटी गेन
विक्रम की टैक्सेबल सैलरी ₹11,00,000 है और वह इक्विटी फंड पर ₹1,00,000 का शॉर्ट-टर्म गेन बुक करता है। कुल आय ₹12,00,000 है, यानी सीमा के अंदर।
| मद | टैक्स |
|---|---|
| ₹11 लाख सैलरी पर स्लैब टैक्स: ₹20,000 + ₹3 लाख का 10% | ₹50,000 |
| रिबेट (स्लैब टैक्स तक सीमित) | −₹50,000 |
| ₹1 लाख पर 20% STCG | ₹20,000 |
| 4% सेस | ₹800 |
| देय टैक्स | ₹20,800 |
उदाहरण 3: सैलरी और लॉन्ग-टर्म इक्विटी गेन
फराह की टैक्सेबल सैलरी ₹8,00,000 है और इक्विटी शेयरों पर उसका ₹2,00,000 का लॉन्ग-टर्म गेन है। कुल आय ₹10,00,000 है।
- ₹8 लाख पर स्लैब टैक्स ₹20,000 है, जो पूरा रिबेट में कवर हो जाता है
- LTCG: पहले ₹1.25 लाख टैक्स फ्री हैं, इसलिए 12.5% × ₹75,000 = ₹9,375
- ₹375 सेस जोड़ें: देय टैक्स ₹9,750
उदाहरण 4: सीमा से थोड़ा ऊपर
समीर की टैक्सेबल आय ₹12,20,000 है, पूरी सैलरी से। स्लैब टैक्स ₹63,000 है (₹60,000 + ₹20,000 का 15%)। मार्जिनल रिलीफ इसे ₹20,000 तक सीमित कर देता है, इसलिए सेस मिलाकर वह ₹20,800 देता है, ₹65,520 नहीं।
उदाहरण 5: पुरानी व्यवस्था
लता पुरानी व्यवस्था में एक पेंशनर हैं, और कटौतियों के बाद उनकी टैक्सेबल आय ₹5,00,000 है। टैक्स ₹12,500 है (₹2.5-5 लाख पर 5%), रिबेट ₹12,500 है, और टैक्स शून्य है। ₹5,10,000 पर उन्हें ₹14,500 और सेस, यानी ₹15,080 देना होता, क्योंकि पुरानी व्यवस्था में मार्जिनल रिलीफ नहीं है।
अपने आंकड़े हमारे इनकम टैक्स कैलकुलेटर में डालकर देखें कि आपका टैक्स कितना बनता है।
रिबेट का सही फायदा उठाने के आसान तरीके
- इक्विटी की बिक्री अलग-अलग सालों में करें। अगर आपकी स्लैब आय ₹12 लाख के करीब है, तो गेन उस साल बुक करें जब वे ₹1.25 लाख की LTCG छूट के अंदर रहें। इससे वह टैक्स बचता है जिसे रिबेट कवर नहीं कर सकता।
- यह न मानें कि "₹12 लाख से कम है तो रिटर्न नहीं भरना।" अगर कुल आय ₹4 लाख की बेसिक छूट से ज्यादा है, तो रिबेट के बाद टैक्स शून्य होने पर भी आम तौर पर आपको रिटर्न भरना होगा।
- अपने एम्प्लॉयर का टीडीएस जांचें। एम्प्लॉयर सैलरी पर टीडीएस कैलकुलेट करते समय रिबेट और मार्जिनल रिलीफ लगाते हैं। अगर आपके पास कैपिटल गेन या दूसरी आय है, तो उसकी जानकारी दें या रिटर्न भरते समय टैक्स के लिए पैसे अलग रखें।
- हर साल दोनों व्यवस्थाओं की तुलना करें। ₹60,000 के रिबेट की वजह से करीब ₹13.5 लाख तक की ज्यादातर सैलरी के लिए नई व्यवस्था सबसे फायदेमंद रहती है। नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था वाली गाइड में ब्रेकईवन आंकड़े हैं।
मुख्य बातें
- अक्टूबर 2026 की स्थिति में रिबेट इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 156 में है (पुरानी धारा 87A)।
- नई व्यवस्था: ₹12 लाख तक की कुल आय पर ₹60,000 तक, और करीब ₹12.71 लाख तक मार्जिनल रिलीफ। पुरानी व्यवस्था: ₹5 लाख तक की आय पर ₹12,500 तक, कोई मार्जिनल रिलीफ नहीं।
- सिर्फ रेजिडेंट व्यक्ति इसे क्लेम कर सकते हैं।
- नई व्यवस्था में रिबेट सिर्फ स्लैब रेट वाले टैक्स को कवर करता है। कैपिटल गेन, लॉटरी की जीत और क्रिप्टो पर टैक्स ₹12 लाख से कम आय में भी देना होगा।
- कैपिटल गेन आय सीमा में गिने जाते हैं, इसलिए बड़ा गेन आपको रिबेट से पूरी तरह बाहर कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
87A रिबेट क्या है?
धारा 87A रिबेट (जो इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 में भी जारी है) कम आय वाले रेजिडेंट व्यक्तियों को मिलने वाली टैक्स छूट है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई व्यवस्था में यह ₹60,000 तक है, जिससे ₹12 लाख तक की टैक्सेबल आय पर टैक्स शून्य हो जाता है, और पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख तक की टैक्सेबल आय पर ₹12,500 तक है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए धारा 87A रिबेट कितना है?
नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की कुल आय वाले रेजिडेंट व्यक्ति को ₹60,000 तक का रिबेट मिलता है, जिससे स्लैब टैक्स शून्य हो जाता है। पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख तक की कुल आय पर ₹12,500 तक का रिबेट मिलता है। 1 अप्रैल 2026 से यह रिबेट इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 156 में है।
क्या कैपिटल गेन पर 87A रिबेट मिलता है?
नई व्यवस्था में नहीं। वित्त वर्ष 2025-26 से रिबेट सिर्फ स्लैब रेट वाली आय पर लगने वाले टैक्स तक सीमित है, इसलिए इक्विटी के शॉर्ट-टर्म गेन, ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन और दूसरी स्पेशल रेट वाली आय पर टैक्स देना होगा, भले ही कुल आय ₹12 लाख से कम हो। पुरानी व्यवस्था में इक्विटी के लॉन्ग-टर्म गेन पर लगने वाले टैक्स के खिलाफ रिबेट नहीं मिलता।
क्या एनआरआई को 87A रिबेट मिलता है?
नहीं। रिबेट सिर्फ रेजिडेंट व्यक्तियों के लिए है। एनआरआई, एचयूएफ और फर्म इसे क्लेम नहीं कर सकते, चाहे उनकी आय कितनी भी हो।
अगर मेरी आय ₹12 लाख से थोड़ी ज्यादा हो तो क्या होगा?
नई व्यवस्था में मार्जिनल रिलीफ आपके टैक्स को उतनी रकम तक सीमित कर देता है जितनी आपकी आय ₹12 लाख से ज्यादा है। यह करीब ₹12.71 लाख की टैक्सेबल आय पर खत्म हो जाता है। पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख से ऊपर ऐसी कोई राहत नहीं है।
क्या रिबेट से मेरी टैक्सेबल आय कम होती है?
नहीं। रिबेट कैलकुलेट किए गए टैक्स से घटाया जाता है, आय से नहीं। आपकी कुल आय वही रहती है और उसी से ₹12 लाख या ₹5 लाख की सीमा जांची जाती है।
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है, निजी वित्तीय, टैक्स या कानूनी सलाह नहीं। कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक, लेंडर या योग्य सलाहकार से पुष्टि करें।